किर्गिस्तानः बाहरी छात्रों पर हमले के बाद डर में भारतीय, सरकार का दावा सब कुछ सामान्य

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- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली से
हाल के दिनों में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में स्थानीय लोगों और बाहरी छात्रों के बीच हुए संघर्ष के कारण छात्रों में डर का माहौल है.
इसी बीच किर्गिस्तान में सोमवार को भी दस लोगों को हिंसा के संबंध में गिरफ़्तार किया गया है. किर्गिस्तान की शिक्षा मंत्री ने बीबीसी से कहा है कि जिन छात्रों को हमले में नुक़सान हुआ है सरकार उनकी मदद करेगी. किर्गिस्तान सरकार ने दावा किया है कि हालात लगातार सामान्य हो रहे हैं.
किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय छात्र भी डरे हुए हैं और वापस भारत लौटने के बारे में सोच रहे हैं.
वहीं, किर्गिस्तान में भारत के दूतावास के मुताबिक़ बिश्केक में हालात सामान्य बने हुए हैं और सभी भारतीय छात्र सुरक्षित हैं.
बीबीसी से बात करते हुए भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत सरकार हालात पर नज़र रखे हुए है और लगातार किर्गिस्तान की सरकार के संपर्क में है.
रणधीर जायसवाल ने कहा, “वहां हालात अब बिल्कुल सामान्य हैं. हमने किर्गिस्तान की सरकार के शीर्ष अधिकारियों से बात की है और उन्होंने हमें सभी भारतीय छात्रों की सुरक्षा का भरोसा दिया है."
उन्होंने कहा, "किर्गिस्तान में भारतीय दूतावास लगातार भारतीय छात्रों के संपर्क में है. जिन छात्रों को खाने की चीज़ों या किसी और चीज़ की ज़रूरत महसूस हो रही है, वह उन्हें मुहैया कराई जा रही है.”
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रणधीर जायसवाल के मुताबिक़, “सोशल मीडिया के ज़रिए फैल रही अपुष्ट ख़बरों की वजह से छात्रों में डर का माहौल है जबकि ज़मीनी हक़ीक़त इसके बिल्कुल अलग है.”
वहीं बिश्केक से फ़ोन के ज़रिए बात करते हुए कई भारतीय छात्रों ने बीबीसी से कहा है कि वो डरे हुए हैं और वापस भारत लौटने के बारे में सोच रहे हैं.
इन छात्रों का कहना है कि हाल के दिनों में जो घटनाक्रम बिश्केक में हुआ है, उसका भारतीय छात्रों से कोई सीधा संबंध नहीं था, लेकिन माहौल के तनावपूर्ण होने के बाद भारतीय छात्रों को भी निशाना बनाया गया है.
बीबीसी ने बिश्केक में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे दर्जन भर छात्रों से बात की. जो छात्र यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर रह रहे हैं, उनमें डर का माहौल है.
वहीं यूनिवर्सिटी परिसर में रहने वाले छात्रों का कहना है कि कैंपस के बाहर सुरक्षा मुहैया कराई गई है और माहौल फिलहाल शांतिपूर्ण है.
किर्गिस्तान की सरकार ने बीबीसी को क्या बताया
किर्गिस्तान की शिक्षा मंत्री दोग्दुर्गुल केंदिरबायेवा ने बीबीसी से कहा है, “हमारे देश में हालात बिलकुल शांतिपूर्ण हैं. 18 मई की रात को हुई हिंसा एक अलग-थलग घटना थी. ये क़ानून व्यवस्था का घोर उल्लंघन थी और हमारे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करती है. हमारे देश में विदेशी छात्र हैं और वो हमेशा की तरह अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं. ये घटना छात्रों से संबंधित नहीं थी. ये फ़र्ज़ी ख़बरों की वजह से फैले आक्रोश के कारण हुई. ”
शिक्षा मंत्री के मुताबिक़ इस हिंसा में शामिल और फ़र्ज़ी ख़बरे फैलाने वाले दस लोगों को सोमवार को हिरासत में लिया गया है. उन्होंने कहा, “हम इन साज़िशकर्ताओं को सख़्त सज़ा देंगे.”
शिक्षा मंत्री के मुताबिक़ जो छात्र हिंसा का शिकार हुए हैं, उन्हें सरकार मुआवज़ा भी देगी. हम छात्रों की सुरक्षा के लिए हर संभव क़दम उठा रहे हैं.
क्या कहना है भारतीय छात्रों का?

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यूक्रेन युद्ध के दौरान वहां रहकर पढ़ाई कर रहे दसियों हज़ार भारतीय छात्रों को वापस भारत लौटना पड़ा था.
भारतीय छात्रों ने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए वापस मध्य एशिया के देशों में जाकर कोर्स पूरा करने की गुहार सरकार से लगाई थी. सरकार की मंज़ूरी के बाद कई हज़ार छात्र किर्गिस्तान, तज़ाकिस्तान समेत मध्य एशियाई देशों में गए थे और वहां के मेडिकल कॉलेजों में दाख़िला लिया था.
दिल्ली के रहने वाले आलमगीर ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक की इंटरनेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में दाख़िला लिया.
बीबीसी से बात करते हुए आलमगीर ने बताया कि 18 मई की रात उनकी डॉरमेट्री पर बाहरी लोगों ने हमला करने की कोशिश की लेकिन स्थानीय लोगों के दख़ल के बाद वो भाग गए.
आलमगीर बताते हैं, “मैं इंटरनेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से क़रीब डेढ़ किलोमीटर दूर रहता हूं. पहली रात की हिंसा के बाद हमें सुरक्षा का भरोसा दिया गया था. हमसे कहा गया था कि हम अपनी लाइट बंद करके रखें. बीती रात हमारी डॉरमेट्री पर बाहरी लोगों ने हमला करने की कोशिश की.”
आलमगीर दावा करते हैं, “पहले उन्होंने हमारी खिड़कियों पर लाइट मारी, खिड़कियां तोड़ने की कोशिश की. इस दौरान हम बिलकुल ख़ामोश रहे. उन्होंने पत्थर भी मारे."
वे दावा करते हैं, "इसी बीच यहां के स्थानीय लोग, जिनसे यहां रहते हुए हमारे संपर्क बन गए हों, वो लोग आए और फिर हमलावरों को भगाया. इस हमले के दौरान मदद करने के लिए बनाये गए ग्रुप में हमने मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई मदद नहीं पहुंची.”

इंटरनेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहीं एमबीबीएस की छात्रा अवनी ने बीबीसी को बताया, “यूनिवर्सिटी कैंपस के आसपास माहौल शांत है. बाहर सुरक्षा भी दी गई है और पुलिस की कई गाड़ियां खड़ी हैं."
वे कहती हैं, "यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी हमें सुरक्षा का भरोसा दिया है और शांत रहने के लिए कहा है. हमसे कमरों की लाइटें बंद रखने के लिए कहा गया है.”
अवनी के कैंपस के आसपास तो सुरक्षा है लेकिन बाहर रह रहे अपने दोस्तों को लेकर वे चिंतित हैं.
अवनी कहती हैं, “मेरे जो दोस्त बाहर रह रहे हैं वो बहुत डरे हुए हैं. यहां के स्थानीय लोग बाहरी छात्रों के ख़िलाफ़ हो गए हैं.”
बिश्केक में हालात ख़राब होने पर अवनी के परिवार ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया था.
अवनी कहती हैं, "दूतावास के अधिकारियों ने मुझसे संपर्क किया और हालचाल पूछा. हमें दूतावास ने मदद का भरोसा दिया है, लेकिन भारत में मेरा परिवार डरा हुआ है. मैंने दस जून को वापस लौटने का टिकट कराया है. मेरा परिवार ये चाहता है कि मैं और पहले यहां से लौट जाऊं."

वहीं आलमगीर कहते हैं कि प्रशासन ने कैंपस में रह रहे छात्रों को तो सुरक्षा दी है लेकिन जो छात्र कैंपस के बाहर हैं उनकी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया है.
आलमगीर कहते हैं, “जो छात्र कैंपस से बाहर रह रहे हैं, ख़तरा उन पर अधिक है. भारतीय दूतावास को ऐसे छात्रों की मदद करने की कोशिश करनी चाहिए."
एक और भारतीय छात्र ने अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए कहा कि उसने लौटने के लिए टिकट करा लिया है और वह छह जून को कजाकिस्तान से भारत की उड़ान लेगा.
बीबीसी से बात करते हुए कई छात्रों ने अपना नाम न ज़ाहिर करते हुए कहा कि भारत सरकार को किर्गिस्तान की सरकार पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए और अधिक दबाव बनाना चाहिए.
इन छात्रों का कहना था कि दूतावास की मदद यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर रह रहे छात्रों तक नहीं पहुंच पा रही है.
क्या कहना है छात्रों के साथ रह रहे कांट्रेक्टर का?

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बीबीसी ने भारतीय छात्रों को किर्गिस्तान भेजने में मदद करने वाले और यहां रहकर छात्रों को सुविधाएं मुहैया कराने वाले एक कांट्रेक्टर से भी बात की.
बीबीसी से बात करते हुए संदीप नाम के इस कांट्रेक्टर ने कहा, “यहां पर अब हालात सामान्य हो रहे हैं. स्थानीय सरकार हर तरीके से विदेशी छात्रों की मदद कर रही है."
वे कहते हैं, "सोशल मीडिया के जरिए कई वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जिनसे छात्रों में डर फैल रहा है. हालांकि ये वीडियो फेक भी हो सकते हैं.”
संदीप के मुताबिक़, “हमने भारतीय दूतावास के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के साथ बैठक भी की है. हमें पूरी सुरक्षा का भरोसा दिया गया है. कई वीडियो और मैसेज फेक हैं जिनसे छात्रों में असमंजस और डर फैल रहा है."
वे कहते हैं, "हमने सरकार से अपील की है कि सोशल मीडिया के जरिए ऐसे भ्रामक कंटेंट के प्रसार पर भी रोक लगाई जाए. हमें ये भी पता चला है कि यहां रह रहे बाहरी छात्रों के पास भी डराने वाले मैसेज भेजे गए हैं.”

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संदीप दावा करते हैं कि बिश्केक में पुलिस स्थानीय किर्गिस्तानी लोगों की मदद से हालात को सामान्य करने की कोशिश कर रही है.
वे यह भी दावा भी करते हैं कि कैंपस के बाहर रह रहे छात्रों को कैंपस में लाया जा रहा है.
वो कहते हैं कि अगले दो-तीन दिन में हालात सामान्य होने पर बच्चों को कैंपस से बाहर निकलने की अनुमति भी दी जाएगी.
क्या कहना है भारत सरकार का

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भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक़ भारत सरकार ने किर्गिस्तान सरकार से शीर्ष स्तर पर संपर्क किया है और भारत सरकार हालात पर नज़र रखे हुए है.
रणधीर जायसवाल कहते हैं कि अब हालात सामान्य हो रहे हैं और छात्रों के लिए सुरक्षा बढ़ाई गई है.
बिश्केक में कई पाकिस्तानी छात्रों को भी निशाना बनाया गया है जिसके बाद पाकिस्तान सरकार ने अपने छात्रों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है.
पाकिस्तान सरकार विशेष फ्लाइटों के ज़रिए छात्रों को वापस बुला रही है और क़रीब 500 छात्रों को वापस लाने के लिए इंतजाम किया गया है.
रणधीर जायसवाल कहते हैं कि अभी भारत सरकार इस दिशा में काम नहीं कर रही है.
रणधीर कहते हैं, “हमारा फोकस अभी ये है कि वहां हालात और बेहतर हों और भारतीय छात्र अपनी परीक्षाएं दे पाएं. हमारा दूतावास चौबीस घंटे काम कर रहा है और हर ज़रूरतमंद छात्र तक मदद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.”
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किर्गिस्तान की सरकार का कहना है कि हालात नियंत्रण में है और हिंसा में शामिल स्थानीय और बाहरी लोगों को हिरासत में लिया गया है.
एक बयान में किर्गिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 18 मई की रात को हुई घटनाओं के बारे में जानकारी मिलने के बाद से ही किर्गिस्तान के बल सक्रिय हैं और हालात पूरी तरह सुरक्षा बलों के नियंत्रण में हैं.
बयान के मुताबिक़, हिंसा की घटनाओं में कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है, क़रीब पंद्रह लोगों का इलाज किया गया है.
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दावा किया है कि मंत्रालय को किसी भी विदेशी नागरिक के घायल होने के बारे में जानकारी नहीं मिली है.
मंत्रालय ने मीडिया और विदेशी दूतावासों से भ्रामक जानकारियां ना साझा करने की अपील भी की है.
कैसे शुरू हुई हिंसा?

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बीबीसी से बात करने वाले छात्रों के मुताबिक़ 13 मई को स्थानीय लोगों और मिस्र के छात्रों के बीच हिंसा हुई थी.
छात्रों के मुताबिक़, एक स्थानीय व्यक्ति मिस्र के छात्रों के हॉस्टल से चोरी करते हुए पकड़ा गया था जिसे छात्रों के समूह ने पीट दिया था.
उनके मुताबिक इस पिटाई का वीडियो अगले तीन दिनों तक सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा और बाहरी छात्रों के प्रति स्थानीय लोगों का ग़ुस्सा बढ़ता गया.
किर्गिस्तान में कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने भी बाहरी छात्रों के ख़िलाफ़ पोस्ट किए जिससे ग़ुस्सा और बढ़ गया.
आलमगीर के मुताबिक़, “यहां के स्थानीय लोगों ने तीन दिन तक बाहरी छात्रों पर नज़र रखी, ये देखा कि वो कहां-कहां रहते हैं और फिर 16 मई की रात को भारी भीड़ ने सुनियोजित तरीके से बाहरी छात्रों के हॉस्टल और किराये के अपार्टमेंट पर एक साथ हमला किया."
वे दावा करते हैं, "बाहरी छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया. हमने उस आपात स्थिति में भारतीय दूतावास से कॉल करके संपर्क किया था, लेकिन हमसे कहा गया कि दिन निकलने पर मदद दी जाएगी.”
किर्गिस्तान में नस्लवाद

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किर्गिस्तान में यूक्रेन युद्ध के बाद बड़ी तादाद में भारतीय और कई अन्य देशों के छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने पहुंचे हैं. यहां पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र और कई अन्य देशों के छात्र पढ़ाई कर रहे हैं.
वहीं देश के आर्थिक हालात की वजह से किर्गिस्तान के युवाओं को रूस में जाकर काम करना पड़ा है. स्थानीय आर्थिक हालात की वजह से भी लोगों में बाहरी छात्रों और प्रवासियों के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा भड़का है.
एक भारतीय छात्र ने रविवार को रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो बीबीसी को भेजा है जिसमें उनके अपार्टमेंट के बाहर कुछ स्थानीय बच्चे बाहरी छात्रों को अपशब्द कहते सुनाई दे रहे हैं.
इस छात्र ने बीबीसी से कहा, "यहां नस्लवाद पहले भी था, लेकिन 13 मई की घटनाओं के बाद यह बहुत ज़्यादा बढ़ गया है. सोशल मीडिया के ज़रिए बाहरी छात्रों को धमकियां दी जा रही हैं."
भारतीय छात्रों ने सरकार से मांग की है कि छात्रों के वापस लौटने के इंतज़ाम किए जाएं और बिश्केक में अधिक सुरक्षा के लिए यहां की स्थानीय सरकार पर दबाव बनाया जाए.
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