किर्गिस्तान में पाकिस्तानी छात्रों पर हमले: 'प्रदर्शनकारी दरवाज़े तोड़कर हमारे हॉस्टल के कमरों में घुस आए'

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- Author, मुनज़्ज़ा अनवार
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
किर्गिस्तान के शहर बिश्केक में रह रही पाकिस्तानी छात्रा हसीना नोमान ने 17 मई की रात देखा कि डंडों और लाठियां से लैस प्रदर्शनकारी उनके हॉस्टल की तरफ़ बढ़ रहे हैं.
उन प्रदर्शनकारियों ने "कमरे के दरवाज़े का ताला तोड़ा, साथी छात्राओं को बालों से पकड़ कर थप्पड़ मारे." इस दौरान ख़ुद उनके सिर पर चोट आई.
बिश्केक में 17 मई की रात की हिंसक घटनाओं में पाकिस्तानी समेत कई विदेशी छात्र घायल हुए हैं.
13 मई को बिश्केक में स्थानीय लोगों और विदेशी छात्रों के बीच हुए झगड़े के बाद 17 मई की रात उत्तेजित भीड़ ने विदेशी छात्रों के हॉस्टल्स और फ़्लैट्स पर धावा बोल दिया.
बिश्केक में पाकिस्तानी दूतावास के अनुसार किर्गिस्तान की सरकार ने पुष्टि की है कि इस हिंसक घटना के दौरान किसी पाकिस्तानी छात्र की मौत नहीं हुई है.
बिश्केक में पाकिस्तानी और भारतीय दूतावास ने छात्रों को हॉस्टल्स में रहने का निर्देश दिया है.
पाकिस्तान ने क्या कहा?

किर्गिस्तान में पाकिस्तानी राजदूत हसन ज़ैग़म ने इस स्थिति पर शनिवार के दिन अपना एक वीडियो बयान जारी किया है.
इस वीडियो बयान में उन्होंने बताया कि हिंसा में 14 पाकिस्तानी छात्र घायल हुए हैं जबकि एक पाकिस्तानी छात्र शाहज़ेब बिश्केक अस्पताल में इलाज करा रहे हैं.
उन्होंने अपने संदेश में कहा, "किर्गिस्तान के बारे में सोशल मीडिया पर आने वाली ख़बरें बेबुनियाद हैं. हमले में शामिल चार लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है."
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से 18 मई को जारी किए गए बयान में बताया गया है कि इस्लामाबाद में किर्गिस्तान के दूतावास के कर्ता-धर्ता मेलिस मोल्दालेफ़ को डिमार्श (कूटनीतिक कार्रवाई) के लिए विदेश मंत्रालय बुलाया है.
इस बयान में कहा गया है कि उन्हें 17 मई को किर्गिस्तान में पढ़ाई कर रहे पाकिस्तानी छात्रों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में पाकिस्तान सरकार की गहरी चिंता के बारे में बताया है. उनसे पाकिस्तानी छात्रों और देश में रह रहे दूसरे पाकिस्तानी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया गया है.
बड़ी संख्या में किर्गिस्तान जाते हैं भारतीय छात्र

घटना के बाद किर्गिस्तान में भारतीय दूतावास ने भी कहा कि वह भारतीय छात्रों के संपर्क में है.
दूतावास ने लिखा, "फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है लेकिन छात्रों को सलाह दी जाती है कि वो घरों में ही रहें. अगर कोई मुश्किल आए तो दूतावास से संपर्क करें."
दूतावास ने एक हेल्पलाइन नंबर 0555710041 भी जारी किया है और कहा है कि ये लाइन चौबीसों घंटे खुली रहेगी.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा कि "बिश्केक में भारतीय छात्रों की स्थिति पर हम नज़र बनाए हुए हैं. स्थिति अभी शांतिपूर्ण है लेकिन छात्रों को घरों से बाहर न निकलने और दूतावास के साथ संपर्क में रहने की सलाह दी जाती है."
किर्गिस्तान में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं. कोविड महामारी के दौरान वंदे भारत मिशन के तहत वहां से क़रीब 14 हज़ार भारतीय छात्रों को बाहर निकाला गया था, इनमें अधिकतर छात्र थे.
बिश्केक में मौजूद भारतीय दूतावास के अनुसार किर्गिस्तान में क़रीब 17,400 भारतीय छात्र पढ़ाई करते हैं.
दूसरी ओर किर्गिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस समेत क़ानून लागू करने वाली संस्थाओं के अधिकारियों को तैनात किया गया है.
ऐसी जानकारी मिली है कि बिश्केक के पुलिस अधिकारियों ने वार्ता के ज़रिए प्रदर्शनकारियों को समझाने बुझाने की कोशिश की है.
किर्गिस्तान के स्थानीय मीडिया के अनुसार 17 मई को चार विदेशी लोगों को हिरासत में लिया गया है. देश के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानियों समेत 29 विदेशी लोगों का इलाज कराया गया है.

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बिश्केक में 17 मई की रात क्या हुआ?
गुलाब ख़ान किर्गिस्तान के शहर बिश्केक में मेडिकल कॉलेज के फ़ाइनल ईयर के छात्र हैं. उन्होंने पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर ख़ान को बताया कि उत्तेजित भीड़ ने कई विदेशी छात्रों से मारपीट की है. इनमें पाकिस्तानी छात्र शामिल हैं.
वह कहते हैं कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोग जमा हो गए और उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों के हॉस्टल्स को निशाना बनाना शुरू कर दिया.
मेडिकल कॉलेज के छात्र मुस्तफ़ा ख़ान ने बताया कि 17 मई की रात अचानक शोर शराबा शुरू हुआ और "हमारे कमरों में हथियार लिए दर्जनों लोग घुस आए और हमारे साथ मारपीट की."
"मैंने अपने रूममेट के साथ हॉस्टल के कमरे का दरवाज़ा लॉक करने की कोशिश की मगर वह दरवाज़ा तोड़कर अंदर घुस आए."
वह बताते हैं, "हम तीनों को बेरहमी से पीटा गया. जो उनके हाथ आता वह उनसे देश पूछे बिना उन्हें मार रहे थे."
मोहम्मद बिलाल कुछ दूसरे पाकिस्तानियों के साथ यूनिवर्सिटी के पास ही एक फ़्लैट किराए पर लेकर वहां रहते हैं.
बीबीसी से बात करते हुए वह बताते हैं कि विदेशी छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच लड़ाई का वीडियो वायरल होने के बाद सैंकड़ों लोगों की भीड़ ने हॉस्टल्स और फ़्लैट्स पर हमला कर दिया.
उन्होंने कहा, "उनके हाथ जो बच्चा आ रहा था, उसका देश पूछे बिना उसे मार रहे थे."
बिलाल बताते हैं कि उत्तेजित लोग न केवल तोड़-फोड़ और मारपीट कर रहे थे बल्कि लगातार अपने टिक टॉक और यूट्यूब पर लाइव भी थे.
उन हॉस्टलों में अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक रह रहे हैं लेकिन कम संख्या में बांग्लादेश और मिस्र के छात्र भी वहां हैं. कुछ भारतीय और पाकिस्तान छात्रों ने हॉस्टलों और फ़्लैटों के अलावा घर भी किराए पर लिए हुए हैं.
बिलाल का दावा है कि जहां-जहां उन्हें पाकिस्तानियों का पता लगा है उन हॉस्टलों, फ़्लैटों और घरों तक में घुसकर उन पर भी हमला किया गया और छात्रों को मारा-पीटा गया.
उनका दावा का है कि जो छात्राएं उन्हें बाहर घूमती या कहीं आती-जाती नज़र आईं उनके साथ भी बदसलूकी की गई.
'दो घंटे तक बाथरूम में छिपे रहे'

बिश्केक में मेडिकल की पढ़ाई कर रही छात्रा हसीना नोमान बताती हैं कि प्रदर्शनकारी लाठियों और डंडों से लैस थे.
वो कहती हैं, "उन्होंने हमारे कमरे का दरवाज़ा तोड़ा. मुझे और मेरी रूममेट को बालों से पकड़ कर थप्पड़ मारे. मेरे सर पर, वहीं मेरी रूममेट के पैर पर चोट लगी है."
उनके अनुसार इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने मारपीट करने वालों को रोकने की भी कोशिश की. मेडिकल की एक और छात्रा वर्षा गुज्जर बताती हैं कि वह दूसरी छात्राओं के साथ एक कमरे में छप गई थीं.
वर्षा गुज्जर कहती हैं, "उन्होंने कमरे का दरवाज़ा तोड़ने की कोशिश की. हमने बाथरूम में ख़ुद को बंद कर लिया था और हम दो घंटे तक वहीं बंद रहे. हमारे अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम बाहर निकलते क्योंकि बाहर लगातार शोर शराबा हो रहा था और दरवाज़े पर लातें मारी जा रही थीं."
वर्षा कहती हैं कि इस समय पाकिस्तान छात्र सदमे में हैं. वो कहती हैं, "हमारे मां-बाप, बहन-भाई परेशान हैं. इस वक़्त किसी का कुछ पता नहीं चल रहा."
हिंसा का निशाना बनने वाली छात्रा कायनात मलिक कहती हैं कि वह इस घटना को पूरी ज़िंदगी नहीं भूल सकेंगी.
वो कहती हैं, "मुझे मेरी मां कहती हैं कि बस अब और नहीं पढ़ना और तुरंत वापस आ जाओ. मेरी मां ने सब कुछ मेरी शिक्षा पर लगा दिया. अब क्या होगा, यह सोचकर मैं परेशान हूं."

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किर्गिस्तान सरकार क्या कर रही है?
किर्गिस्तान के सरकारी मीडिया 'काबार' ने बताया है कि देश के मंत्रियों की कैबिनेट ने सोशल मीडिया नेटवर्क पर ग़लत जानकारी फैलने के कारण नस्लीय आधार पर हिंसा और अशांति को हवा देने की कोशिशों की निंदा की है.
कैबिनेट ने विदेशी छात्रों की कथित हत्या और उनके ख़िलाफ़ हिंसा के बारे में अंतरराष्ट्रीय प्रेस में झूठी ख़बरों का भी खंडन किया है.
कैबिनेट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि क़ानून लागू करने वाली संस्थाएं उन अपराधों की पूरी छानबीन कर रही हैं और सभी अपराधियों को क़ानून के कटघरे में लाया जाएगा.
'काबार' ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बिश्केक की बूदयनोगो स्ट्रीट पर एक हॉस्टल के पास होने वाली लड़ाई के बाद पुलिस ने चार विदेशियों को हिरासत में लिया है.
उन लोगों पर हंगामा करने के आरोप के तहत धाराएं लगाई गई हैं.
लेकिन दूसरी ओर बिश्केक में पाकिस्तानी राजदूत हसन ज़ैग़म और किर्गिस्तान के उप विदेश मंत्री अलमाज़ अमनग़ाज़ेफ़ के बीच होने वाली मुलाक़ात में पाकिस्तानी पक्ष को 17 मई की घटना में विदेशियों के शामिल होने और किर्गिस्तान की क़ानून लागू करने वाली संस्थाओं की ओर से उठाए गए क़दमों के बारे में बताया गया है.
उन्होंने पाकिस्तानी राजदूत से अपील की कि इस घटना के बारे में पाकिस्तानी मीडिया में फैलाई जाने वाली ग़लत ख़बरों की रोकथाम के लिए उपाय करें.
उप विदेश मंत्री ने राजदूत को विश्वास दिलाया कि स्थिति अब अधिकारियों के नियंत्रण में है.
पाकिस्तान के पीएम ने क्या कहा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का कहना है कि उन्हें बिश्केक, किर्गिस्तान में पाकिस्तानी छात्रों की स्थिति पर गहरी चिंता है.
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान के राजदूत को निर्देश दिया है कि वह छात्रों को सभी ज़रूरी मदद उपलब्ध कराएं.
उनका कहना है कि उनका कार्यालय भी दूतावास के साथ संपर्क में है और लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए है.
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने कहा कि सरकार ने बिश्केक में पाकिस्तानी छात्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए किर्गिस्तान के अधिकारियों से संपर्क किया है.
इसहाक़ डार ने छात्रों पर भीड़ के हमले की ख़बरों को बेहद चिंताजनक बताते हुए किर्गिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत को निर्देश दिया कि वह उन्हें पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएं.
इससे पहले विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज़ ज़ोहरा बलोच ने किर्गिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत का संदेश साझा करते हुए कहा कि दूतावास पाकिस्तानी छात्रों की मदद के लिए किर्गिज़ अधिकारियों के साथ संपर्क में है.
उनका कहना है कि राजदूत और उनकी टीम के लिए पाकिस्तानियों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है.
सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर किर्गिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत हसन ज़ैग़म ने लिखा कि बिश्केक में छात्रों के हॉस्टलों के आसपास भीड़ और हिंसा के मद्देनज़र दूतावास ने बिश्केक में सभी पाकिस्तानी छात्रों को निर्देश दिया है की स्थिति सामान्य होने से पहले बाहर न निकलें और अंदर ही रहे.
उन्होंने बताया, "हम अपने छात्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय क़ानून लागू करने वाली संस्थाओं के साथ संपर्क में हैं."
इस घटना की पृष्ठभूमि क्या है?

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बीबीसी ने किर्गिस्तान के स्थानीय मीडिया की ख़बरों का जायज़ा लिया है ताकि यह मालूम हो सके की 17 मई की रात बिश्केक में स्थानीय लोगों की ओर से प्रदर्शन क्यों किया गया. इनसे मिली जानकारी के अनुसार इस प्रदर्शन का संबंध 13 मई की एक घटना से है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 13 मई को बिश्केक के मुस्तफ़ा कैफ़े के पास हॉस्टलों में से एक में विदेशियों की ओर से कई स्थानीय लोगों से मारपीट का दावा किया गया है. पुलिस को जानकारी दी गई कि हॉस्टल में रहने वालों और मेहमानों के बीच लड़ाई हुई है.
इस संबंध में टेलीग्राम पर पुलिस ने बताया कि वह हॉस्टल में होने वाली लड़ाई के बारे में जानती है. सभी लोगों को पुलिस सेंटर ले जाया गया जहां उन्होंने अपने-अपने बयान दिए.
टेलीग्राम पोस्ट में यह भी कहा गया कि विवाद की वजह नहीं बताई गई है लेकिन मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस की पड़ताल जारी है.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 13 मई की घटना के बाद बिश्केक में सोशल मीडिया पर घटना को लेकर कई ख़बरें फैलीं जिनसे स्थानीय लोगों में विदेशियों के प्रति ग़ुस्सा फैल गया.
फिर 17 मई की शाम सैंकड़ों लोग, छात्रों के हॉस्टल के पास प्रदर्शन करने के लिए जमा हुए.
बिश्केक में मेडिकल यूनिवर्सिटिज़ के कुछ हॉस्टल्स और पाकिस्तानियों समेत दूसरे देशों के छात्रों के निजी आवासों पर हमले किए गए. उन हॉस्टलों में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के छात्र रह रहे हैं.
मारपीट का निशाना बनने वाले छात्रों में पाकिस्तानियों और भारतीयों सहित दूसरे एशियाई, मिस्री और अन्य विदेशी शामिल थे.
सोशल मीडिया पर अफवाहें

किर्गिस्तान के स्थानीय मीडिया के अनुसार इस हंगामे के बाद पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ़्तार करके उन पर मुक़दमा दर्ज किया. अधिकारियों ने इस झगड़े में शामिल लोगों को हिरासत में भी लिया है.
इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई और लगभग 300 लोग हॉस्टलों के बाहर जमा हो गए. इसके बाद पूरी पुलिस फ़ोर्स को बुलाया गया और लगभग 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया.
बिश्केक में प्रदर्शनकारियों की वजह से कुछ सड़क ब्लॉक कर दी गई थीं.
स्थानीय मीडिया के अनुसार दोपहर दो बजे तक प्रदर्शनकारी वहां से नहीं हटे थे बल्कि उनकी संख्या बढ़कर 500 हो गई.
उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसी अफ़वाहें फैलाना शुरू कीं जिनमें कहा गया कि विदेशियों के साथ लड़ाई में एक स्थानीय व्यक्ति की मौत हो गई है. पुलिस के अनुसार यह झूठी ख़बर थी.
17 मई की रात तीन बजे स्थानीय मीडिया ने प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी में बताया कि प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग एक हज़ार हो चुकी थी जो मारपीट और लूटपाट कर रहे थे.
इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की. आंतरिक मामलों के निदेशालय के प्रमुख अज़मत टोक्टोनालेफ़ में वादा किया कि घटना के सभी ज़िम्मेदार लोगों को क़ानून के कटघरे में लाया जाएगा इसके बाद प्रदर्शनकारी लौट गए.
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