चीनी नागरिकों पर हमले को लेकर पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार में क्यों ठनी?

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पाकिस्तान में चीनी इंजीनियरों पर हुए आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान आमने-सामने हैं.
पाकिस्तानी सेना ने ये दावा किया था कि उनके देश में 'हालिया आतंकवादी गतिविधियों की जड़' अफ़ग़ानिस्तान से जुड़ी हुई है.
अब अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी सेना के इस दावे को 'ग़ैर-ज़िम्मेदाराना और हक़ीकत से दूर' बताया है.
तालिबान सरकार का कहना है, "पाकिस्तान में हमलों की घटनाओं के लिए अफ़ग़ानिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराना सच्चाई से ध्यान भटकाने की एक नाकाम कोशिश है."
इससे पहले पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अहमद शरीफ़ ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि पाकिस्तान में हमले की जड़ें अफ़ग़ानिस्तान में हैं और अफ़ग़ानिस्तान की अंतरिम सरकार (तालिबान सरकार) दोहा समझौते का खुले तौर पर उल्लंघन कर रही है.
अहमद शरीफ़ ने ये भी दावा किया था कि ख़ैबर पख़्तूनख्वाह में चीनी इंजीनियरों पर आत्मघाती हमले में शामिल लोगों का संबंध अफ़ग़ानिस्तान से है.
उन्होंने कहा, "आतंकवादियों और उनके मददगारों को अफ़ग़ानिस्तान से कंट्रोल किया गया था और आत्मघाती हमलावर भी अफ़ग़ानिस्तान का नागरिक था. इसकी साज़िश भी अफ़ग़ानिस्तान में रची गई थी."
ये हमला 26 मार्च को हुआ था, जिसमें पाँच चीनी इंजीनियरों की मौत हो गई थी.
वहीं तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया है.
तालिबान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मुफ़्ती इनायतुल्लाह ख़्वारज़मी ने कहा, "अफ़ग़ान इस तरह के मामलों में शामिल नहीं हैं."
उन्होंने कहा, "इस तरह की घटनाओं के लिए अफ़ग़ानिस्तान पर आरोप मढ़ना सच्चाई से ध्यान भटकाने की नाकाम कोशिश है और हम इसे ख़ारिज करते हैं."
अफ़ग़ानिस्तान ने ख़ारिज किए आरोप

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तालिबानी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह जैसे पाकिस्तान सेना के कड़े सुरक्षा घेरे वाले क्षेत्र में चीनी नागरिकों की हत्या होना पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की कमज़ोरी या हमलावरों के साथ उनकी सांठगांठ को दिखाता है. दोनों ही मामले में ज़िम्मेदारी पाकिस्तानी सरकार की है."
उन्होंने कहा, "तालिबान सरकार ने इस मुद्दे पर चीन के अधिकारियों को भी आश्वासन दिया है और वे (चीनी अधिकारी) भी इस सच को समझ गए हैं कि अफ़ग़ान ऐसे मामलों में शामिल नहीं हैं."
रक्षा मंत्रालय के बयान में दावा किया गया है कि इस्लामिक स्टेट ग्रुप के चरमपंथी पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान आ रहे हैं और उनकी (पाकिस्तान) ज़मीन का इस्तेमाल अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ किया जा रहा है.
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ़ ने कहा कि चरमपंथी पिछले कुछ महीनों से बलूचिस्तान और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में सुरक्षा व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं. इन दो प्रांतों में पाकिस्तानी तालिबान मूवमेंट और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी हमले कर रही है.
इस मामले में विस्तृत ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा, "इन चरमपंथी गतिविधियों की जड़ें अफ़ग़ानिस्तान से जुड़ी हैं और इसके जवाब में पाकिस्तान चरमपंथियों को निशाना बना रहा है. हमने सफलतापूर्वक इन सशस्त्र हमलावरों और सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाया है."
उन्होंने दावा किया कि अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का फ़ायदा उठाकर आतंकवादी गतिविधियां हो रही हैं और पाकिस्तान ने इससे जुड़े सबूत भी पेश किए हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई.
जनरल अहमद शरीफ़ ने कहा कि पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के साथ हर स्तर पर सहयोग किया है लेकिन दोहा में किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया.
क्या कह रहे हैं दोनों देश

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पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के संबंध हालिया समय में ख़राब होते दिखे हैं. पाकिस्तान का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान उन चरमपंथी गुटों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा जो पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं.
इसी साल मार्च में पाकिस्तान में एक बांध परियोजना के लिए काम कर रहे चीनी इंजीनियरों के काफ़िले पर आत्मघाती हमला हुआ था.
इसमें छह लोगों की मौत हुई थी. इसी हमले में पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान की भूमिका होने का दावा किया है.
इस हमले से पहले ही पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में हवाई हमले किए थे, जिससे दोनों देशों के संबंध तल्ख़ हो गए थे.
बीते साल पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर अवैध रूप से रह रहे अफ़ग़ानिस्तानी नागरिकों को वापस भेजा था.
पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा बलों के ख़िलाफ़ हो रहे अधिकांश आत्मघाती हमले अफ़ग़ान कर रहे हैं. हालांकि, अफ़ग़ानिस्तान ये दावे लगातार ख़ारिज करता रहा है.
तालिबान सरकार ने हमेशा ये कहा है कि वे अपनी ज़मीन का इस्तेमाल किसी भी देश के ख़िलाफ़ नहीं होने देंगे. तालिबान सरकार लगातार ये कहती आ रही है कि पाकिस्तान को अपनी समस्याओं का समाधान ख़ुद खोजना चाहिए और अफ़ग़ानिस्तान पर आरोप नहीं मढ़ने चाहिए.
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