हमास के हमले के बाद से इसराइल में लापता है ये तंज़ानियाई छात्र, सामने आई पहचान

जोशुआ मोलेल

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    • Author, अलफ्रेड लैसटेक, नताशा बूटी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दर-ए-सलाम और लंदन से

इसराइल पर फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास के हमले के बाद से यहां के किबुत्ज़ ओज़ में रहने आए 21 साल के तंज़ानिया के छात्र लापता हैं.

इस छात्र के परिवार ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर उनके लापता होने की जानकारी दी है.

उनके पिता ने बीबीसी से बात करते हुए अपनी नाराज़गी जताई है.

छात्र जोशुआ मोलेल के पिता लोइतु मोलेल ने बीबीसी को बताया, "आख़िरी बार जब मैंने जोशुआ से बात की थी तो वो 5 अक्तूबर की तारीख़ थी और गुरुवार का दिन था. मैंने उससे कहा कि तुम किसी नई जगह पर जा रहे हो इसलिए अपनी इंटर्नशिप के दौरान जितना हो सके उतना सीखना."

इसके दो दिन बाद 7 अक्तूबर को इसराइल में जोशुआ मोलेल के नए ठिकाने किबुत्ज़ नहाल ओज़ पर हमास के लड़ाकों का हमला हुआ.

जोशुआ महीने भर पहले ही उत्तरी तंज़ानिया में अपने परिवार को छोड़कर इसराइल के लिए रवाना हुए थे.

विमान पर बैठते वक़्त जोशुआ बेहद उत्साहित थे.

ये उनके लिए दोहरी ख़ुशी का मौक़ा था. वो पहली बार विदेश जाने के लिए प्लेन में बैठे थे, और ऐसा करते हुए वो अपने सपनों को हकीकत में बदलने की तरफ एक कदम बढ़ा रहे थे.

जोशुआ के पिता लोइतु कहते हैं, "मेरा बेटा एग्रीबिज़नेस के क्षेत्र में काम करना चाहता था और तंज़ानिया के सबसे सफल किसानों में से एक बनना चाहता था."

लोइतु और उनकी पत्नी को उम्मीद थी कि उनका बेटा इसराइल में अच्छी पढ़ाई करेगा. इसके बाद वह बच्चों को पढ़ाकर और किसानी से होने वाली उनकी पारिवारिक आय में इज़ाफा होगा.

जोशुआ अपने माता-पिता की सबसे बड़ी संतान हैं, ऐसे में उनके छोटे भाई-बहन उनकी तरफ देखते हैं, वो उन्हें अपना रोल मॉडल मानते हैं.

उन्होंने कई हफ़्तों से जोशुआ से बात नहीं की है जो उनके लिए दुख की बात है.

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जोशुआ के पिता क्या कहते हैं?

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हमास के लड़ाकों ने बीती सात अक्तूबर को किबुत्ज़ नहाल ओज़ में घुसकर यहां रहने वालों पर हमला किया था.

इस हमले में कई लोगों की मौत हुई है. वहीं, हमास के चरमपंथी कुछ लोगों को अग़वा करके भी ले गए हैं.

गज़ा से सटी इसराइली सीमा किबुत्ज़ नहाल ओज़ से केवल 800 मीटर की दूरी पर है.

इस घटना के बाद से जोशुआ के परिवार को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि जोशुआ कहां है, उनके परिवार का कहना है कि उनकी चिंता बढ़ती जा रही है.

जोशुआ के पिता लोइतु कहते हैं, "न तो हम खा पा रहे हैं और न ही हमें नींद आ रही है. जब कभी मैं बाज़ार जाता हूं तो लोग मुझसे पूछते हैं कि मेरा वज़न तेज़ी से क्यों घट रहा है."

वो कहते हैं, "जब ये ख़बर आई कि हमास के लड़ाकों ने इसराइल पर हमला कर दिया है, मैंने ये पता लगाने की कोशिश की कि क्या तंज़ानिया में इसराइल का कोई दूतावास है. मुझे पता चला कि यहां के लिए दूतावास कीनिया से काम करता है."

"इसलिए मैंने दूतावास की जगह तंज़ानिया के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया और मैंने तेल अवीव में तंज़ानिया के दूत से भी बात की. लेकिन अब तक मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है कि मेरा बेटा कहां है और किस हाल में है."

गज़ा से 800 मीटर दूर रह रहे थे जोशुआ

जोशुआ के पिता लोइतु मोलेल

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तंजानिया और इसराइल ने अब तक हमास के हमले के बाद लापता हुए दो तंजानियाई छात्रों की पहचान की पुष्टि नहीं की है.

बीबीसी ने इन छात्रों के परिवारों से बात कर उनकी पहचान की पुष्टि करने की कोशिश की है.

बीबीसी के पास ये जानकारी है कि लापता हुए एक तंज़ानियाई छात्र का नाम जोशुआ मोलेल है.

बीबीसी के पास दूसरे छात्र की पहचान के बारे में भी जानकारी है लेकिन इस छात्र के परिवार ने उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का फ़ैसला किया है.

लापता छात्रों की खोज की कोशिश

जोशुआ मोलेल

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तेल अवीव में तंज़ानिया के दूत एलेक्स कलुआ कहते हैं, "दो लापता छात्रों की तलाश के लिए हम इसराइल के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. अभी हम ये कह नहीं सकते कि उन्हें बंधक बनाया गया है या वो अभी जीवित हैं भी या नहीं क्योंकि अभी हम पुख्ता जानकारी की तलाश में लगे हैं."

बीबीसी ने इसराइल के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है और उनसे इस मामले में प्रतिक्रिया मांगी है.

तंज़ानिया के अधिकारियों के अनुसार इसराइल में तंज़ानिया के क़रीब 350 नागरिक रहते हैं. इनमें से 70 फ़ीसदी छात्र हैं जो खेती-किसानी से जुड़ी पढ़ाई कर रहे हैं.

तंज़ानिया के दूत एलेक्स कलुआ कहते हैं कि बीते एक सप्ताह में तंज़ानिया के नौ नागरिक वापिस लौटे हैं और दूतावास "ये कोशिश कर रहा है कि वो इसराइल में तंज़ानिया के अन्य नागरिकों के साथ संपर्क कर सके और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके."

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पिता के लिए मुश्किल स्थिति

जोशुआ के परिवार का कहना है कि वो इसराइल के नहाल ओज़ के एक डेरी फार्म में इंटर्नशिप करने के लिए गए थे.

ये इंटर्नशिप उन्हें सेंट्रल तंज़ानिया में उनके कॉलेज मिनिस्ट्री ऑफ़ एग्रीकल्चर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट- कैटरिन की तरफ से मिली थी.

बीबीसी ने इस कॉलेज से संपर्क किया है. लेकिन ये रिपोर्ट लिखे जाने तक कॉलेज की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

जोशुआ के दादा एफ़ाटा नान्यारो कहते हैं, "लापता हुए बच्चों को तलाश करने की गति धीमी होने के लिए हम इसराइल के अधिकारियों को दोष नहीं दे सकते. क्योंकि हम जानते हैं कि इसराइल के कुछ हिस्सों पर हमास का हमला हुआ है."

लेकिन इस बात से परिवार का दुख कम होता हो ऐसा नहीं है.

जोशुआ के पिता कहते हैं, "आख़िरी बार जोशुआ को 7 अक्तूबर को स्थानीय समयानुसार सवेरे 10 बजे के आसपास (13.00 जीएमटी) व्हाट्सऐप पर ऑनलाइन देखा गया था."

वो कहते है, "मैं तनाव में हूं... ये वाकई मुश्किल है. मेरी बेटियां रोज़ सवेरे मुझसे पूछती हैं, 'पिताजी हमें अपने भाई से बात करनी है.' उनके सवालों का मेरे पास अब तक कोई जवाब नहीं है."

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