इसराइल पर हमास का हमला: भारतीय समुदाय के लोगों की आंखों देखी, क्या कह रहे हैं छात्र और दूसरे लोग

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- Author, हरेंद्र मिश्रा
- पदनाम, बीबीसी के लिए, तेल अवीव से
फ़लस्तीनी चरमपंथी समूह हमास ने शनिवार तड़के ग़ज़ा से इसराइल पर रॉकेटों से भीषण हमला किया. हमले में इसराइल का दक्षिणी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है जहां बड़े पैमाने पर भारतीय और भारतीय मूल के लोग रहते हैं.
कुछ स्थानीय रिपोर्टों में कुछ भारतीय मूल के लोगों के अपहरण और मौत की ख़बरें आ रही हैं. इसराइल में इमरजेंसी की हालत है और भारतीय समुदाय खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है.
इन हालात में भी भारतीय समुदाय के लोगों में 'पैनिक' यानी घबराहट की स्थिति नहीं है. दूतावास से लोग लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और हालात का जायजा ले रहे हैं.
इसराइल में भारतीय मूल के तकरीबन 95,000 हज़ार यहूदी और 18,000 भारतीय नागरिक रहते हैं. इनमें ज़्यादातर लोग उन इलाकों में रहते हैं जहां मौजूदा समय में चल रही लड़ाई का गहरा असर पड़ा है.
हमास के हमले में इसराइल में 600 से अधिक लोग मारे गए हैं और 2000 लोगों का इलाज़ चल रहा है. अबतक इसराइल और हमास के बीच संघर्ष में दोनों ओर के 970 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है.
इसराइली सेना का कहना है कि दक्षिणी शहर के कुछ हिस्सों में बंधकों को छुड़ाने के लिए हमास के चरमपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष चल रहा है. सेना ने ग़ज़ा पर जवाबी हवाई हमले किए हैं जिनमें 300 फ़लस्तीनी मारे गए हैं.
भारत ने इसराइल में रह रहे भारतीय नागरिकों को एडवाइज़री जारी कर सतर्क रहने और सुरक्षा प्रोटोकॉल मानने को कहा है.
रविवार सुबह कुछ स्थानीय मीडिया में रिपोर्टों में भारतीय मूल की इसराइली महिलाओं के अगवा किये जाने और मरने की खबरें छपी थीं जिससे समुदाय में शोक का माहौल है.

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इसराइल में भारतीय समुदाय
भारतीय मूल के यहूदी चार समुदायों से ताल्लुक रखते हैं. बेने इसराइल महाराष्ट्र के इर्द गिर्द के इलाक़ों से आये हुए यहूदी हैं.
कोचिनी केरल से आए जबकि बग़दादी कोलकाता और उसके निकट इलाकों से यहां आये थे.
चौथा समुदाय बेने मेनाशे है जो मणिपुर और मिजोरम यहां आए थे.
इनके अलावा इसराइल में तकरीबन 18,000 भारतीय नागरिक हैं जो यहां काम करते हैं या पढाई कर रहे हैं.
कामकाजी लोगों में बड़ी संख्या केयरगिवर्स की है जो बुजुर्ग आबादी की देखभाल के लिए लाए गए हैं. इसराइल में भारत से आये हुए छात्रों की संख्या भी बहुत है और इनमे ज़्यादातर शोध से जुड़े हुए हैं.
विदेशी मूल के छात्रों में भारतीय छात्रों की संख्या सबसे ज़्यादा है. चीन दूसरे नंबर पर आता है. ये विद्यार्थी लगभग इसराइल के सभी विश्वविद्यालयों के कैंपस में हैं.
टेक्नोलॉजी का हब होने की वजह से इसराइल में, भारत से बहुत सारे आईटी एक्सपर्ट्स भी काम कर रहे हैं. भारत की कुछ बड़ी कम्पनियाँ जैसे टीसीएस की यहाँ बहुत बड़ी उपस्थिति है.

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रॉकेट हमलों से प्रभावित इलाके में भारतीय
बेने इसराइल समुदाय से ताल्लुक रखने वाले भारतीय बड़ी संख्या में इसराइल के दक्षिणी इलाकों में रहते हैं जहां शनिवार के हमास के हमले में ज़्यादा प्रभावित रहे.
अशदोद, अश्केलों, ओफ़कीम, बीरशेबा, दिमोना, किर्यात गात आदि इलाकों में इनकी बड़ी मौजूदगी है और यहीं सबसे ज़्यादा रॉकेट गिरे.
इस समुदाय से ताल्लुक रखने वाली रिक्की शाइ अश्केलों की स्थानीय नगरपालिका में प्रतिनिधि हैं.
रिक्की शाइ ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार के साथ लगभग पूरा दिन सुरक्षित कमरे में बिताया.
उनके अनुसार, उनके शहर में मृतकों की संख्या काफी ज़्यादा है और कुछ लोग अगवा भी किये गए हैं.
यह शहर हमेशा से ग़ज़ा के रॉकेट हमलों के निशाने पर रहा है और शनिवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ.
रिक्की ने कहा कि, वो शहर की तबाही से बेहद व्यथित हैं, “अब बहुत हुआ, ये लड़ाई कब बंद होगी?”
भारतीय मूल की गायिका लिओरा इतसखाक ने बॉलीवुड फ़िल्मों में गाने भी गए हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसराइल दौरे के दौरान उन्होंने भारत और इसराइल, दोनों ही राष्ट्रों का राष्ट्रीय गान गाया था.
उन्होंने कहा, “जिस तरीके से आम नागरिकों, सैनिकों और समाज के हर तरह के लोगों को निशाना बनाया गया उससे हिंसा करने वालों का असली चेहरा सामने आया है. हिंसा में अंततः सारी परेशानी आम जनता को ही सहनी पड़ती है.”

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भारतीय पर्यटकों को बाहर निकालने की अपील
तेल अवीव में भारतीय दूतावास और फ़लिस्तीन में भारत के प्रतिनिधि कार्यालय ने शनिवार को एडवाइज़री जारी कर भारतीय नागरिकों से ‘सतर्क रहने’ और आपातकाल के मामले में ‘सीधे कार्यालय से संपर्क करने’ को कहा है.
भारतीय दूतावास के सूत्रों के मुताबिक, “अभी तक कुछ भारतीय पर्यटकों की ओर से उन्हें बाहर निकालने का इंतज़ाम करने के सम्बन्ध में अनुरोध प्राप्त हुए हैं.”
एयर इंडिया ने अनिश्चित काल के लिए तेल अवीव के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं. एयर इंडिया सप्ताह में पांच दिन दिल्ली से तेल अवीव की उड़ान संचालित करती है.
इसका असर उन भारतियों पर असर पड़ सकता है जो इसराइल से निकलना चाहते हैं.
हालांकि अधिकांश भारतीय लोगों में घबराहट नहीं है. उनका मानना है की अगर सुरक्षा संबंधित निर्देशों का पालन किया जाए तो ज़्यादा परेशानी नहीं है.
इसराइल के दक्षिणी इलाकों को छोड़ दिया जाए तो बाकी जगहें किसी हद तक बड़े हमलों से बची हुई हैं. रॉकेट हमले होने पर चेतावनी मिलती है और अगर लोग सुरक्षित घरों में पहुँच जाएँ तो ख़तरा कम है.
हिब्रू विश्वविद्यालय में शोध करने वाली छात्रा बिंदु ने कहा कि उन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल को फॉलो किया और खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि सभी भारतीय विद्यार्थी एकदूसरे से संपर्क में हैं और निरंतर स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं.

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इसराइल छोड़कर जाने के प्रश्न पर कई भारतीय विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें स्थिति नियंत्रण में आती दिख रही है और "बेवजह पैनिक नहीं फैलाना चाहिए."
भारत से आए बड़ी संख्या में केयर गिवर्स चिंतित हैं लेकिन उन्होंने अभी इसराइल से निकलने का फैसला नहीं किया है.
उनका कहना है कि वो लगातार भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं और इसराइली सेना के निर्देशों का पालन कर रहे हैं.
अश्केलों शहर में सबसे ज़्यादा रॉकेट दागे गए. यहां रहने वाले तेलंगाना निवासी एले प्रसाद कहते हैं कि उन्हें बहुत सजग रहना पड़ता है और सायरन बजने पर जल्द से जल्द शेल्टर में पहुंचना पड़ता है.
एक अन्य केयर गिवर विवेक ने कहा कि वो लोग बहुत डरे हुए हैं और कहीं निकल नहीं पा रहे, लेकिन वो भी यहीं बने रहेंगे और उनका लौटने का कोई इरादा नहीं है.
रविवार सुबह इसराइली नागरिक अभी भी बीते रोज़ के सदमे से उबरने की कोशिश में दिखे.
शैक्षणिक संस्थान यहां आज बंद इमरजेंसी सेवा के अलावा बाकी दफ्तरों में भी घर से काम करने की इजाज़त दे दी गई है.

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इसराइल में फँसी भारतीय अभिनेत्री नुसरत भरूचा घर लौटीं
इसराइल के हैफी फिल्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने पहुचीं फिल्म अभिनेत्री नुसरत भरूचा सुरक्षित हैं.
रविवार सुबह मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा कहा गया था कि नुसरत इसराइल में जारी संघर्ष के बीच फँस गई हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.
लेकिन मुंबई से बीबीसी की सहयोगी पत्रकार सुप्रिया सोगले के अनुसार वो शाम तक अपने घर पहुंच गईं थीं.
इससे पहले नुसरत भरूचा की पब्लिशिस्ट संचिता त्रिवेदी ने बताया, ''भारतीय दूतावास की मदद से नुसरत से संपर्क हो गया. उन्हें सुरक्षित भारत लाया जा रहा है. ''
नुसरत कई फ़िल्मों में अहम भूमिका निभा चुकी हैं.
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