जेएनयू में मारपीट: हवन या चिकन, हंगामे का सच: ग्राउंड रिपोर्ट

कावेरी हॉस्टल में हवन
    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जेएनयू कैम्पस से

रामनवमी के दिन जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के कावेरी छात्रावास में हुई हिंसा की घटना को लेकर तरह-तरह की कहानियाँ सामने आ रही हैं. आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं. एफ़आईआर भी दर्ज हो चुकी है. जाँच जारी है लेकिन ऐसे कई सवाल हैं जो जिनके जवाब मिलने अभी बाकी हैं.

आखिर रामनवमी के दिन जेएनयू में ऐसा क्या हुआ कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और वामपंथी छात्र संगठनों के छात्रों में टकराव हुआ.

कावेरी हॉस्टल में क्या हुआ?

जेएनयू के कावेरी हॉस्टल में तकरीबन 320 छात्र रहते हैं. हॉस्टल में मुख्य दरवाजे से दाख़िल होते ही दाईं तरफ़ मेस है जहां छात्रों को खाना खिलाया जाता है.

इसी मेस के पीछे रविवार दोपहर 3.30 बजे रामनवमी के मौके पर हवन और पूजा का कार्यक्रम रखा गया था. इसका आयोजन कावेरी हॉस्टल में ही रहने वाले कुछ छात्रों ने किया था. इसमें शामिल होने के लिए जेएनयू के दूसरे छात्रावासों में रहने वाले कई छात्र भी आए थे.

दूसरी तरफ़, कावेरी हॉस्टल की मेस में शाम को इफ्तार का भी आयोजन किया गया था. रविवार दोपहर करीब चार बजे हवन शुरू हुआ और क़रीब 6.30 बजे तक चला. इसके बाद छात्रों के बीच प्रसाद बाँटा गया. मतलब एक तरफ़ कावेरी हॉस्टल में पूजा, हवन हुआ और दूसरी ओर मुस्लिम छात्रों ने इफ़्तार की दावत भी की, लेकिन थोड़ी ही देर बाद कावेरी हॉस्टल का मंजर बदल गया.

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कावेरी हॉस्टल में रहने वाले आदित्य उस समय वहां मौजूद थे, आदित्य किसी छात्र संगठन से जुड़े नहीं हैं. वो बताते हैं, ''हम जब खाने गए तो हंगामा चल रहा था. हमने देखा कि वो लोग पत्थर फेंक रहे थे. मेरे सामने कांच टूटा. सर पर ट्यूबलाइट मारी जा रही थी. हम लोग बीच में फंसे हुए थे''.

मारपीट कितनी हिंसक थी, ये जानने से पहले हम आपको बताते हैं कि तनाव शुरू कहाँ से हुआ?

पूजा, हवन और चिकन

कावेरी हॉस्टल

कावेरी हॉस्टल के प्रेसिडेंट नवीन के मुताबिक तनाव करीब दोपहर दो बजे ही शुरू हो गया था. इस तनाव की वजह बना चिकन.

हॉस्टल की मेस मेन्यू के मुताबिक़, हफ्ते में चार दिन खाने में नॉनवेज भी रहता है. तय मेन्यू के मुताबिक़ सोमवार को अंडा, बुधवार को चिकन बिरयानी, शुक्रवार-रविवार को चिकन करी छात्रों को दी जाती है. जो छात्र नॉनवेज नहीं खाते हैं उनके लिए शाकाहारी खाने का इंतज़ाम होता है.

कावेरी हॉस्टल की मेस को चलाने के लिए छह सचिवों का चयन किया जाता है. हर सचिव पर एक महीने तक मेस चलाने की ज़िम्मेदारी होती है. अप्रैल महीने की ज़िम्मेदारी कावेरी हॉस्टल के छात्र मुद्दसिर के पास है.

बीबीसी से बातचीत में मुदासिर ने बताया, ''मेस का मेन्यू मीटिंग में पहले ही तय हो जाता है जिसमें हॉस्टल में रहने वाले छात्र और तमाम प्रतिनिधि शामिल होते हैं. वे तय करते हैं कि किस दिन क्या खाना बनेगा. रविवार को खाने में छात्रों को चिकन दिया जाना है ये पहले से तय था. रामनवमी की कोई चर्चा नहीं हुई थी.''

कावेरी हॉस्टल के मेस सेक्रेटरी मुदासिर बताते हैं, ''रविवार दोपहर करीब एक बजे चिकन सप्लायर 25 किलो चिकन लेकर कावेरी हॉस्टल पहुँचा. उस समय पूजा-हवन कर रहे छात्रों ने चिकन सप्लायर को ये कहकर वापस भेज दिया कि आज मेस में नॉनवेज नहीं बनेगा. चिकन सप्लायर कावेरी हॉस्टल को छोड़कर दूसरे छात्रावासों में चिकन देने चला गया. रविवार को जेएनयू के ज्यादातर छात्रावासों में चिकन बनता है. क़रीब 3.30 बजे चिकन सप्लायर एक बार फिर कावेरी हॉस्टल आया लेकिन तब भी उसे डरा-धमका कर भगा दिया गया.''

कावेरी हॉस्टल का मेन्यू

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्य विकास पालीवाल कहते हैं कि "वामपंथी संगठन से जुड़े छात्रों ने हवन में हड्डियाँ फेंकने के लिए चिकन मँगाया था."

इस बीच कुछ छात्रों ने शाम करीब चार बजे कावेरी हॉस्टल के परिसर में पूजा-हवन का कार्यक्रम शुरू कर दिया. कावेरी हॉस्टल के प्रेसिडेंट नवीन के मुताबिक़, ''मैंने खुद कार्यक्रम में हिस्सा लिया और प्रसाद ग्रहण किया. शाम करीब 6.30 बजे पूजा हवन खत्म हो गया था. इस वक्त तक सब कुछ शांत था. पूजा-हवन करने वाले छात्र वापस लौट गए थे.''

एबीवीपी से जुड़े कुछ छात्रों ने ट्वीट किया था और कुछ ने टीवी चैनलों को बताया था कि "हवन और पूजा में बाधा डाली जा रही थी इसलिए हंगामा हुआ" लेकिन मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूजा में किसी बाधा की कोई बात नहीं कही.

हिंसक हमला शाम करीब 7.30 बजे शुरू हुआ, जब रात के खाने का समय हुआ. मौके पर मौजूद छात्रों ने बताया कि कुछ लोग पहले से तय मेन्यू के हिसाब से खाने के लिए चिकन माँग रहे थे जबकि चिकन बना ही नहीं था.

कावेरी हॉस्टल

इमेज स्रोत, Getty Images

मेस सेक्रेटरी मुदासिर बताते हैं, ''चिकन नहीं बनने से नाराज छात्र शिकायत लेकर हॉस्टल वॉर्डन के पास पहुंचे. मेस में शाकाहारी खाना क़रीब 300 में से सिर्फ 150 छात्रों के लिए ही बना था. वार्डन से बातचीत में ये तय किया जा रहा था कि चिकन बनाया जा सकता है. इसी बीच एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उन्होंने दूसरे हॉस्टल के छात्रों को कावेरी हॉस्टल में बुला लिया.''

एबीवीपी के छात्रों के जमावड़े के बाद लेफ्ट संगठनों से जुड़े छात्रों ने भी मैसेज भेजकर दूसरे छात्रों को कावेरी हॉस्टल पहुंचने की अपील की. देखते ही देखते कुछ ही देर में लेफ्ट और एबीवीपी के छात्रों का हुजूम कावेरी हॉस्टल में उमड़ पड़ा.

कावेरी छात्रावास में रहने वाले आदित्य उस वक्त मेस में मौजूद थे. ''हॉस्टल के अंदर लेफ्ट के लोग ये सवाल पूछ रहे थे कि आप कैसे नॉनवेज बंद कर सकते हैं. नॉनवेज क्यों नहीं बनेगा. 'राइट-टू-फूड' की बातें हो रही थी. आठ बजे तक सिर्फ दाल-चावल बना था''.

ऐसा ही आरोप जेएनयू में कांग्रेस पार्टी से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई के जनरल सेक्रेटरी मसूद रजा खान भी लगाते हैं. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया, '' छात्रों ने मेस वार्डन से चिकन दिए जाने की माँग की. उसी समय एबीवीपी और लेफ्ट संगठनों के छात्रों के बीच कहासुनी और मारपीट शुरू हो गई.''

झड़प के दौरान क्या हुआ?

जेएनयू में हिंसा

इमेज स्रोत, @AISA_tweets

कावेरी हॉस्टल में करीब एक घंटे तक एबीवीपी और लेफ्ट छात्र संगठनों के बीच झड़प चलती रही. वहाँ मौजूद छात्रों के मुताबिक हमले के लिए ट्यूबलाइट, पत्थर, डंडे और काँच की बोतलों का इस्तेमाल किया गया.

इस हमले में लेफ्ट और एबीवीपी के कुछ छात्र-छात्राओं को चोटें आईं. इस मारपीट में एबीवीपी से जुड़ी छात्रा दिव्या को भी चोट आई. दिव्या ने बीबीसी को अपना घायल अंगूठा दिखाया जिस पर पट्टी बंधी हुई थी. दिव्या साबरमती हॉस्टल में रहती हैं जो हवन में हिस्सा लेने के लिए कावेरी हॉस्टल आईं थी.

दिव्या ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "वामपंथी छात्र पत्थर, डंडों के साथ आए थे. एक लड़की ने काँच की बोतल से मुझ पर हमला किया जिससे मेरे अंगूठे पर काफी गंभीर चोट आई है. हम लोगों के पास हमला करने के लिए कुछ नहीं था. मेस के अंदर लेफ्ट संगठनों से जुड़े छात्र हम पर हमला कर रहे थे.''

वहीं दूसरी तरफ लेफ्ट संगठन के छात्रों का आरोप है कि एबीवीपी के छात्रों ने हॉस्टल को घेर लिया था. वे बाहर से पत्थरबाजी कर रहे थे. इस हमले में लेफ्ट संगठन आइसा से जुड़ी अख्तरिस्ता को माथे पर चोट आई, उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं जिनमें उनके सिर से रिसता ख़ून दिख रहा है.

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अख्तरिस्ता ने बीबीसी से बातचीत में बताया, ''करीब आठ बजे मैं भी कावेरी हॉस्टल पहुँची थी. वहां एबीवीपी के छात्र बेरहमी से छात्रों के साथ मारपीट कर रहे थे. हॉस्टल के बाहर से पत्थर, फूलदान फेंके जा रहे थे. बाहर से एक पत्थर मेरे सर पर आकर लगा. काफी खून निकल रहा था. मुझे हॉस्पिटल जाना था. एबीवीपी वाले एंबुलेंस को नहीं आने दे रहे थे. मैंने हॉस्टल के पीछे से बाउंड्री क्रॉस करके बाहर गई.''

वामपंथी छात्र संगठन एसएफ़आई के जेएनयू प्रेसिडेंट हरेंद्र भी इस हमले में घायल हुए.

उन्होंने बीबीसी को कमर पर चोट के निशान दिखाए. हरेंद्र ने बताया, ''मारपीट के समय में हॉस्टल में था. मुझे पीछे से डंडे से मारा गया. एबीवीपी के छात्र जबरदस्ती शाकाहारी खाना थोपने की कोशिश कर रहे थे जबकि हमारा कहना था कि अगर चिकन से दिक्कत है तो पहले दौर में शाकाहारी खाना परोस देते हैं, नॉन वेज वाले बाद में खा लेंगे.''

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कावेरी हॉस्टल के छात्र आदित्य के मुताबिक जिस वक्त छात्रों के बीच मारपीट चल रही थी उस दौरान हॉस्टल के बाहर पुलिस मौजूद थी. मारपीट करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी.

दोनों ओर के छात्र संगठनों ने दिल्ली पुलिस में एफआईआर करवाई है. रविवार हुई घटना के बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

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