झारखंड: प्रिंसिपल पर छात्राओं की शर्ट उतरवाने का आरोप, जानिए क्या है पूरा मामला

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- Author, आनंद दत्त
- पदनाम, रांची से बीबीसी हिन्दी के लिए
झारखंड के धनबाद ज़िले के एक निजी स्कूल में प्रिंसिपल के आदेश के बाद कथित तौर पर कई छात्राओं की शर्ट उतरवाने का मामला सामने आया है.
लेकिन प्रिंसिपल ने कहा है कि उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था.
छात्राओं की ओर से धनबाद जिलाधिकारी को की गई लिखित शिकायत के मुताबिक ये घटना स्कूल में प्री-बोर्ड परीक्षा के आखिरी दिन हुई.
स्कूल की प्रिंसिपल पर आरोप है कि छात्राएं जब अपनी शर्ट पर एक-दूसरे के लिए शुभकामनाएं लिख रही थीं, उसी दौरान प्रिंसिपल ने कहा कि ऐसा करने से स्कूल की प्रतिष्ठा ख़राब होगी, इसलिए सभी छात्राएं अपना शर्ट स्कूल में ही छोड़कर जाएं.
आरोप है कि इसके बाद, कुछ बच्चियों ने खुद शर्ट उतारी और कुछ के शर्ट सीनियर्स ने उतरवाए. पूरे मामले पर ज़िला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं.

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क्या है पूरा मामला?

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छात्राएं इस मसले पर मीडिया के सामने बात करने को राजी नहीं हैं. हालांकि उनके परिजनों ने इस मसले पर बात की है.
महेश कुमार (बदला हुआ नाम) पेशे से व्यवसायी हैं. उनकी बेटी इसी स्कूल की छात्रा है.
उन्होंने बीबीसी हिन्दी से कहा, ''बीते 9 जनवरी को उनकी बेटी का दोपहर को फोन आया. मैं उस वक्त कोलकाता में था.''
''मेरी बेटी ने बताया कि दसवीं प्री-बोर्ड का एग्ज़ाम ख़त्म होने के बाद वो अपने दोस्तों के साथ 'पेन डे' सेलिब्रेट कर रही थी. अचानक, प्रिंसिपल स्कूल ग्राउंड में आईं और डांटने लग गईं.''
वो आगे कहते हैं, ''प्रिंसिपल ने कहा जिस शर्ट पर लिखा है, उसे डिपॉजिट करो. कुछ छात्राएं 'पेन डे' के लिए अलग से शर्ट लेकर स्कूल गईं थीं.''
''कुछ ने स्कूल ड्रेस पर ही मैसेज लिखवा रखे थे. ऐसे में उन छात्राओं का शर्ट स्कूल में उतरवा ली गई और उन्हें ब्लेज़र में घर जाने पर मजबूर होना पड़ा.''
एक अन्य अभिभावक ने बीबीसी को बताया, ''एक महिला द्वारा बच्चियों के साथ ऐसा व्यवहार बहुत दुखी करता है.''
दसवीं के दोनों सेक्शन मिलाकर स्कूल में कुल 120 छात्राएं हैं. एग्ज़ाम ख़त्म होने के बाद लगभग 20 छात्राएं घर चली गईं थीं. बाकी छात्राएं 'पेन डे' सेलिब्रेट कर रही थीं. कुछ छात्राओं को ब्लेज़र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट से घर जाना पड़ा.''

उन्होंने आगे कहा, ''मेरी बेटी का भी रो-रो कर बुरा हाल है. लेकिन, हमने उसे समझाया है कि सभी बच्चियों की लड़ाई पेरेंट्स लड़ रहे हैं. वो अपने बोर्ड के एग्ज़ाम पर ध्यान दे.''
एक अन्य अभिभावक का कहना है कि उन्हें डर है इस घटना का असर छात्राओं के रिजल्ट में भी देखने को मिल सकता है.
उनका कहना है कि वे इस मामले की लीपापोती नहीं होने देंगे.
अभिभावक प्रिंसिपल पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने बीते शनिवार प्रिंसिपल का पुतला जला कर अपना विरोध जताया.
यह स्कूल सन 1955 से चल रहा है. लड़कियों के इस स्कूल में लगभग 1,300 छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं.
डीसी माधवी मिश्रा ने दिए जांच के आदेश

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धनबाद की उपायुक्त (डीसी) माधवी मिश्रा ने बीबीसी को बताया कि क़रीब 80 छात्राओं की शर्ट उतरवाने की शिकायत मिली है.
माधवी मिश्रा ने कहा, "कल (शनिवार) कुछ लड़कियां और उनके परिजन मेरे ऑफ़िस आए थे. उन्होंने बताया कि वो सब 9 जनवरी (गुरुवार) को क्लास में 'पेन डे' मना रही थीं. उन्होंने एक-दूसरे की शर्ट पर कुछ लिखा था. ये सभी बच्चियां कक्षा 10 की हैं."
डीसी ने कहा, "हम लोगों ने ज़िला स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है. कल कमेटी जांच के लिए स्कूल गई थी और सीसीटीवी रूम को सील किया है."
उन्होंने कहा, "कमेटी जांच में जुटी है. जैसे ही जांच पूरी होगी और जो भी रिपोर्ट आएगी, उसके हिसाब से हम आगे की कार्रवाई करेंगे."
माधवी मिश्रा के अनुसार, प्रिंसिपल ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है. प्रिंसिपल का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई भी आदेश नहीं दिया है.
प्रिंसिपल ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन किया है.
उन्होंने पत्रकारों को बताया, "मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया था, न हीं मैंने उनसे शर्ट उतारने और जाने को कहा था. मैंने उनसे केवल प्रॉपर यूनिफॉर्म में जाने को कहा था बस."
फिर पत्रकारों ने पूछा कि यानी आप पर जो आरोप लगा है वो ग़लत है?
इस पर प्रिंसिपल ने कहा, "ग़लत है."
बीजेपी ने जताया विरोध, सीएम से कार्रवाई की मांग

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बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी इस घटना पर रोष जताया है.
एक्स पर उन्होंने लिखा है, ''मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जांच के नाम पर मामले की लीपापोती करने के बजाय सभी दोषियों के विरुद्ध कठोर कारवाई करें.''
अभिभावकों का दल जब जिलाधिकारी के पास शिकायत लेकर पहुंचा, तो उनके साथ झरिया की विधायक रागिनी सिंह भी मौजूद थीं.
बीबीसी से उन्होंने कहा, ''एक महिला होकर महिलाओं का सम्मान न करना बहुत निंदनीय है. प्रिंसिपल को अगर लगा कि बच्चियां गलती कर रही हैं, तो इसकी शिकायत उन्हें पैरेंट्स से करनी थी. न कि उनके कपड़े उतरवाने थे.''
वो आगे कहती हैं, ''बोर्ड परीक्षा उसी स्कूल में होनी है. बच्चियां डरी हुई हैं. स्कूल के ऊपर उनका विश्वास नहीं रहा. हमने उनके लिए सुरक्षा की मांग की है. अगर प्रशासन की निगरानी में परीक्षा नहीं हुई, तो हम आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे.''
वहीं इलाक़े की पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने कहा, ''विद्यालय प्रबंधन की ओछी हरकत से हतप्रभ हूं. स्कूल के आख़िरी दिन 'पेन डे' का हमारी सबसे अच्छी यादों में स्थान होता है और यह परंपरा अब पीढ़ियों से चली आ रही है. प्रशासन द्वारा की गई मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना इन बच्चों के लिए आजीवन एक भयावह स्वप्न से कम नहीं है.''
इस मामले की शिकायत डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पास भी पहुंची है.
कमेटी के अध्यक्ष उत्तम मुखर्जी कहते हैं, ''समाजसेवी अंकित राजगढ़िया, धनबाद पैरेंट्स एसोसिएशन से जुड़े मनोज मिश्रा और मधुरेंद्र सिंह ने उनके सामने इसकी शिकायत की है. हम जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं.''
वो आगे कहते हैं, ''जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति के सदस्य सोमवार को घटनास्थल पर जाएंगे. फिलहाल बच्चियों को काउंसलिंग की आवश्यकता है. हम इसके लिए पहल कर रहे हैं.''
सामाजिक कार्यकर्ता अंकित राजगढ़िया ने कहा है कि झारखंड हाईकोर्ट को स्वतः संज्ञान लेकर जिला प्रशासन को सख्त कार्रवाई का आदेश देना चाहिए. साथ ही पॉक्सो के तहत मामला दर्ज होना चाहिए.
अपूर्वा विवेक वकील हैं. उनकी संस्था 'हासियाः सोसियो लीगल सेंटर फॉर विमेन' महिलाओं के कानूनी अधिकार के लिए काम करती है.
वो बीबीसी से कहती हैं, ''पहली नजर में ये मामला साफ़ तौर पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का है. पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 9 में लिखा है, अगर कोई किसी बच्चे पर यौन हमला करता है और बच्चे को सार्वजनिक रूप से निर्वस्त्र करने या नग्न परेड करने के लिए मजबूर करता है, तो मामला दर्ज किया जाएगा. हालांकि, इस मामले में अदालत मंशा देखेगी कि ऐसा करने के पीछे इरादतन यौन शोषण तो नहीं किया गया है.''
इस मामले में परिजन फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से कार्रवाई का इंतज़ार कर रहे हैं. ठोस कार्रवाई न होने की स्थिति में वो कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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