पीएम मोदी का ग्रीस दौरा: क्या है तुर्की, पाकिस्तान और अज़रबैजान का फैक्टर

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ग्रीस के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया है.
ग्रीस की राष्ट्रपति कैटरीना एन सकेलारोपोउलू ने पीएम मोदी को 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया.
पीएम मोदी ग्रीस की एक दिवसीय यात्रा पर ग्रीस पहुंचे हैं.
इस सम्मान में लिखा गया है, "नरेंद्र मोदी ने अपने देश की दुनिया भर में पहुंच बनाने की लिए पुरजोर कोशिश की है. उन्होंने भारत की आर्थिक समृद्धि और प्रगति के लिए बड़े सुधार किए हैं. वो एक ऐसे बड़े नेता हैं, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय एजेंडा बना दिया है."
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्रीस की एक दिवसीय यात्रा पर हैं. पिछले 40 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का ये पहला ग्रीस दौरा है. इससे पहले इंदिरा गांधी ने 1983 में ग्रीस का दौरा किया था.

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यूरोप का गेटवे
दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स सम्मलेन में शामिल होने के बाद पीएम मोदी शुक्रवार को ग्रीस के लिए रवाना हुए थे. ग्रीस में रह रहे भारतीय समुदाय ने उनका पूरे उत्साह के साथ स्वागत किया.
प्रधानमंत्री मोदी ने यूनान में अपने कार्यक्रमों की शुरुआत एथेंस में अज्ञात सैनिकों के मकबरे पर श्रद्धांजलि देकर की. इसके बाद उन्हें एक समारोह में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.
इससे पहले ग्रीस के नेता से नरेंद्र मोदी की पिछली मुलाकात सितंबर 2019 में यूएन जनरल असेंबली के फ्रेमवर्क में हुई थी. प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रीस रवाना होने से पहले एक अख़बार से कहा, "पिछले 40 साल के दौरान ग्रीस यात्रा का सम्मान पाने वाला मैं पहला भारतीय प्रधानमंत्री हूं."
ग्रीस के चार्ज डी अफेयर्स एलेक्जंडरस बोदोरिस ने टाइम्स ऑफ इंडिया अख़बार से से कहा, "ग्रीस यूरोप में भारत के गेटवे की तरह काम करना चाहता है. हम ऐसी योजनाएं ला रहे हैं जिसके तहत भारत बंदरगाहों, हवाई अड्डों और दूसरे लॉजिस्टिक्स हब में भारतीय निवेशक आ सकें."
भारत के प्रधानमंत्री की ग्रीस यात्रा से पहले एलेक्जेंडरस बोदोरिस ने कहा कि ग्रीस भारत के लिए अहम पार्टनर है.

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प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
ग्रीस पहुंचने के बाद आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा, "ग्रीस और भारत- ये एक स्वाभाविक मिलन है. विश्व की दो पुरातन सभ्यताओं के बीच. विश्व के दो पुरातन लोकतांत्रिक विचारधाराओं के बीच और विश्व के पुरातन व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों के बीच. आज हमारे बीच भू-राजनैतिक, अंतररष्ट्रीय और क्षेत्री विषयों पर बेहतरीन तालमेल है. चाहे वो इंडो-पैसिफ़िक में हो या भू-मध्यसागर."
उन्होंने कहा, "दो पुराने मित्रों की तरह हम एक दूसरे की भावनाओं को समझते हैं और उनका आदर करते हैं. 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री का ग्रीस आना हुआ है. फिर भी, ना तो हमारे संबंधों की गहराई कम हुई है, ना ही रिश्तों की गर्मजोशी में कोई कमी आई है."
पीएम मोदी ने कहा, "दोनों देशों के बीच स्किल्ड माइग्रेशन को सुगम बनाने के लिए, हमने जल्द ही एक माइग्रैशन एण्ड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट करने का निर्णय लिया.हमारा मानना है कि अपने प्राचीन पीपुल टु पीपुल संबंधों को नया रूप देने के लिए हमें सहयोग बढ़ाना चाहिए."
उन्होंने कहा, "ग्रीस ने भारत-ईयू व्यापार और निवेश समझौते को अपना समर्थन दिया है. यूक्रेन के मामले में, दोनों देश डिप्लोमेसी और डॉयलाग का समर्थन करते हैं."
ग्रीस सम्मान मिलने के बाद उन्होंने कहा, "मैं हेलेनिक रिपब्लिक के लोगों और राष्ट्रपति जी का हार्दिक धन्यवाद करता हूँ कि आज उन्होंने मुझे 'ग्रांड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑनर' से सम्मानित किया."

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भारत और ग्रीस के बीच सैनिक सहयोग
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एथेंस यात्रा के दौरान भारत और ग्रीस के बीच रक्षा, ऊर्जा, कृषि और अन्य क्षेत्रों से जुड़े समझौते हो सकते हैं.
भारतीय अख़बार फिनांशियल एक्सप्रेस ने पीएम मोदी के ग्रीस दौरे पर लिखा है कि आर्मीनिया से लेकर ग्रीस तक भारत की रणनीति तुर्की, अज़रबैजान और पाकिस्तान की तिकड़ी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है.
अख़बार ने लिखा है कि आर्मीनिया को हथियार बेचने और ग्रीस के साथ रणनीतिक साझीदारी मजबूत करने का भारत का फ़ैसला इन देशों के लिए सीधी चुनौती है.
अख़बार के मुताबिक, "आर्मीनिया रूस का पारंपरिक सहयोगी है और ग्रीस नेटो का सदस्य. इन देशों के साथ संबंध मजबूत कर भारत ने तुर्की के अगुआई वाली इस तिकड़ी को कड़ा संदेश दिया है."

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ग्रीस की न्यूज़ वेबसाइट ग्रीक सिटी टाइम्स ने लिखा है कि ग्रीस-तुर्की विवाद और जम्मू और कश्मीर जैसे अहम मुद्दों पर दोनों देशों का एक दूसरे के लिए समर्थन, एथेंस के साथ नई दिल्ली की रणनीतिक साझीदारी तुर्की के लिए स्पष्ट संदेश है.
ग्रीक वेबसाइट पेंटापोस्टाग्मा ने भारत-तुर्की सैन्य संबंधों पर अपने विश्लेषण में लिखा है, "ग्रीस नेटो का सदस्य देश है. वो भारतीय वायु सेना को रणनीतिक सपोर्ट मुहैया करा सकता है. ग्रीक एयर फोर्स न केवल राफेल लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करती है बल्कि उसके बेड़े में एफ-16 विमान भी हैं. राफेल विमान भारत ने फ्रांस से हासिल किए हैं तो एफ-16 का इस्तेमाल पाकिस्तान करता है."
ग्रीक न्यूज़ ऑनअलर्ट भारत और ग्रीस के बीच हुए संयुक्त मिलिट्री ऑपरेशंस का उदाहरण दिया है.

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भारत-ग्रीस संबंध
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्रीस यात्रा के दौरान कारोबार और निवेश पर समझौते कर दोनों देशों के बीच संबंधों को डाइवर्सिफाई करने की कोशिश करेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास जताया है कि ग्रीस भारत के साथ अपने संबंधों का एक नया अध्याय खोलेगा.
ग्रीस ने कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का साथ दिया है. इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन भी शामिल है.
भारत और ग्रीस के रिश्ते प्राचीनकाल से रहे हैं. लेकिन भारत के आजाद होने के बाद 1950 में ग्रीस से उसके राजनयिक रिश्ते कायम हुए.
ग्रीस ने भारत ने 1950 में दिल्ली में अपना दूतावास खोला था वहीं भारत ने 1980 में अपना दूतावास खोला. ग्रीस ने 1985 में परमाणु निरस्त्रीकरण पर छह देशों की दिल्ली घोषणा में भागीदारी की थी.

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क्या कहते हैं विश्लेषक
भारत और ग्रीस संबंधों पर बात करते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में यूरोपीय अध्ययन केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर जे जगन्नाथन ने बीबीसी संवाददाता मोहनलाल शर्मा से कहा, "भारत और ग्रीस का संबंध प्राचीन काल से रहा है. इतिहास में इस बात का जिक्र है कि ग्रीस के शासक सिकंदर भारत आए थे और यहां भारत में पंजाब के पास राजा पोरस के साथ उनका युद्ध हुआ था."
"ग्रीस आधुनिक लोकतंत्र का उद्गम स्थल है. इसी तरह भारत में पुराने समय में लोकतंत्र रहा है और आज भी ये लोकतांत्रिक देश है. इस तरह देखा जाए तो दोनों लोकतांत्रिक देश स्वाभाविक दोस्त हैं."
जगन्नाथन से बीबीसी ने पूछा कि 1983 में इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री के तौर पर ग्रीस का दौरा किया था और अब 40 साल बाद मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां गए हैं. इतने लंबे समय बाद किसी प्रधानमंत्री के ग्रीस दौरे की वजह क्या है?

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मौजूदा दौर में ग्रीस के साथ भारत के संबंधों का जिक्र करते हुए जगन्नाथन ने कहा, "इसकी वजह भू-मध्यसागर के भू-राजनैतिक हालात रहे हैं. साइप्रस को लेकर ग्रीस और तुर्की के बीच लंबा विवाद रहा है. वो दौर शीतयुद्ध का था और भारत उस समय किसी एक का पक्ष नहीं ले सकता था."
"लेकिन भारत और ग्रीस के सबंध काफी अच्छे रहे हैं. 1998 में जब भारत ने परमाणु विस्फोट किए थे तो पश्चिमी दुनिया के कई देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे. उस समय ग्रीस ने भारत का साथ दिया था."
जगन्नाथन कहते हैं कि अब पूरा माहौल बदल चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्रीस पहुंचने से दोनों देशों के रिश्तों को एक नया आयाम मिल सकता है. भारत और ग्रीस दोनों अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अहम भूमिका अदा कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "ग्रीस के साथ भारत के साथ रिश्ते कूटनीति के स्तर से आगे बढ़ कर रणनीतिक दौर में पहुंच रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदा ग्रीस यात्रा दोनों देशों के बीच के रिश्तों को सामरिक मजबूती देगी. दोनों देशों के बीच रक्षा और सामरिक संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है."
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