कनाडा में भारतीय दूतावास की वीज़ा सर्विस बंद होने से क्या होगा असर, आठ सवालों के जवाब

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- Author, मुरलीधरन काशी विश्वनाथन
- पदनाम, बीबीसी तमिल संवाददाता
कनाडा और भारत के बिगड़ते रिश्तों के बीच कनाडा में भारतीय दूतावास ने फिलहाल वीज़ा सेवाओं पर रोक लगा दी है.
कहा गया है कि ऑपरेशनल वजहों से फिलहाल ये सेवाएं स्थगित कर दी गई हैं.
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की ओर से खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंसियों पर शक जताने के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं.
दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनयिकों को निकाल दिया है.
हालांकि ये बात अभी साफ़ नहीं हुई है कि दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों की वजह से ही वीज़ा सर्विस रोकी गई है. इसे लेकर कनाडा में रह रहे भारतीय नागरिकों और यहां रह रहे उनके रिश्तेदारों में चिंता दिख रही है. भारत सरकार के इस फैसले का क्या असर होगा, आइए जानते हैं.
कनाडा में भारत की वीज़ा पॉलिसी पर सरकार ने क्या कहा है
कनाडा में भारतीय दूतावास बीएलएस इंटरनेशनल के साथ मिल कर भारत से जुड़ी सर्विस मुहैया कराता है.
शुक्रवार को बीएलएस की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए संदेश में कहा गया है, "ऑपरेशनल वजहों से 21 सितंबर, 2023 से अगले नोटिस तक भारत से जुड़ी वीज़ा सेवाएं स्थगित कर दी गई हैं."
कनाडा के लिए इंडिया वीज़ा एप्लीकेशन सेंटर ने कहा है, "अगली नई जानकारी के लिए बीएलएस की वेबसाइट चेक करते रहें."
कनाडा में रहने वाले भारतीय छात्रों के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "हमने सावधानी बरतने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. हमारा वाणिज्य दूतावास वहां काम कर रहा है. हमने कहा है कि अगर उन्हें कोई समस्या आती है, तो वे हमारे वाणिज्य दूतावास से संपर्क करें. हमारी वीज़ा पॉलिसी से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए क्योंकि वे भारत के नागरिक हैं."
भारतीय दूतावास कितने प्रकार के वीज़ा देता है
कनाडा में मौजूद भारतीय दूतावास कई तरह के वीज़ा जारी करता है.
एंट्री वीज़ा: एंट्री वीज़ा भारतीय मूल के लोगों को दिया जाता है. भारतीय मूल के लोग इस वीज़ा पर एक बार कनाडा से भारत के बीच यात्रा कर सकते हैं.
बिज़नेस वीज़ा: बिज़नेस वीज़ा कनाडा और दूसरे देशों के उन नागरिकों को दिया जाता है, जिन्हें कनाडा में लंबे समय तक रहने की अनुमति मिली हुई है और वो कारोबार और इससे जुड़े काम से भारत की यात्रा करना चाहते हैं.
टूरिस्ट वीज़ा: टूरिस्ट वीज़ा उन कनाडाई लोगों को दिया जाता है जो भारत की यात्रा करना चाहते है. ऐसे लोगों को कई साल के लिए ये वीज़ा मिल सकता है.
रोज़गार वीज़ा: ये वीज़ा उन लोगों को मिलता है जो भारत में काम करना चाहते हैं. ये वीज़ा कनाडा और दूसरे देशों के उन नागरिकों को मिलता है, जिन्हें कनाडा में लंबे समय तक रहने की अनुमति मिली हुई है.
मेडिकल वीज़ा: मेडिकल वीज़ा उन लोगों को जारी किया जाता है जो इलाज के लिए भारत जाना चाहते हैं. ये मरीजों और उनके साथ उनकी देखभाल के लिए भारत जाने वाले लोगों को दिया जाता है. इस वीज़ा का इस्तेमाल कर तीन महीने तक भारत में रहा जा सकता है.
फ़िल्म वीज़ा: फ़िल्म वीज़ा उन लोगों को दिया जाता है जो भारत में रिसर्च वर्क करना चाहते हैं.
स्टूडेंट वीज़ा: स्टूडेंट वीज़ा उन लोगों को दिया जाता है, जो भारत में किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई करना चाहते हैं. ये मल्टीपल एंट्री वीज़ा होता है. पढ़ाई पूरी करने तक वो भारत में कई बार आ सकते हैं.
कॉन्फ्रेंस वीज़ा: कॉन्फ्रेंस वीज़ा उन लोगों को दिया जाता है जो भारत में किसी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए जाना चाहते हैं. कॉन्फ्रेंस की अवधि के दौरान दिया जाना वाला ये सिंगल विजिट वीज़ा होता है.
भारतीय मूल के कनाडाई नागरिकों को क्या दिक्कतें आ रही हैं?
कनाडा में वीज़ा सर्विस स्थगित होने से नौकरी, बिज़नेस या ट्रेड के लिए भारत आने के ख्वाहिशमंद लोगों को वीज़ा नहीं मिल पा रहा है.
दरअसल, भारत से कनाडा जाकर बस गए वैसे लोग जिन्होंने वहां की नागरिकता ले ली है, को भारत आने के लिए वीज़ा की ज़रूरत पड़ती है.
भारत अपने यहां बार-बार आने के इच्छुक लोगों को ओवरसीज़ सिटिजन ऑफ इंडिया यानी ओसीआई कार्ड जारी करता है.
जिन भारतीयों के पास विदेशी नागरिकता होती है उन्हें इस कार्ड के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत पड़ती है. जिन लोगो को ये मिला होता है वो जितनी बार चाहें भारत की यात्रा कर सकते हैं.
लेकिन जिन लोगों के पास ये कार्ड नहीं होता है उन्हें भारत की यात्रा करने के लिए अन्य विदेशी नागरिकों की तरह ही भारतीय वीज़ा की जरूरत होती है.
यही वजह है कि वीज़ा सर्विस स्थगित होने से ऐसे लोगों को दिक्कतें आ रही हैं.
ओसीआई कार्ड क्या है, इसे कैसे हासिल किया जाता है
कनाडा में भारत की वीज़ा सेवाओं पर रोक लगाने के फ़ैसले से भारतीय मूल के उन कनाडाई नागरिकों पर असर पड़ेगा जो कारोबार, पर्यटन या फिर अपने क़रीबी रिश्तेदारों से मिलने के लिए भारत आना चाहते हैं.
जिनके पास ओसीआई कार्ड नहीं है, उन्हें भी भारत आने-जाने में दिक्कत होगी. इसलिए दिक्कत केवल कनाडाई लोगों के लिए नहीं है बल्कि भारतीय मूल के कनाडाई नागरिकों के लिए भी है.
भारतीय मूल के जो कनाडाई नागरिक ओसीआई कार्ड हासिल करना चाहते हैं, उन्हें ये सेवा तत्काल नहीं मिलती है.
नियम के अनुसार, कनाडा की नागरिकता हासिल करने के तीन महीनों के भीतर किसी भारतीय नागरिक को अपना पिछला पासपोर्ट भारतीय दूतावास के समक्ष सरेंडर करना होता है जिसके बाद वो पासपोर्ट रद्द कर दिया जाता है. इसके बाद ही वो ओसीआई कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं.
आवेदन जमा करने के पांच से सात महीने के भीतर आवेदक को ओसीआई कार्ड जारी किया जाता है. इस बीच अगर वो व्यक्ति भारत आना चाहे तो उसे भी अन्य विदेशी नागरिकों की तरह एंट्री वीज़ा के लिए आवेदन करना होगा.
जिन्हें पहले वीज़ा मिल चुका है, उनका क्या होगा?
चेन्नई के लोयोला कॉलेज के प्रोफ़ेसर ग्लैडसन ज़ेवियर कहते हैं कि जब दो देशों के बीच किसी बात पर विवाद चल रहा हो तो दोनों देश कई तरह से एक दूसरे के प्रति अपना असंतोष जतलाते हैं.
"शुरू में वे राजदूतों को वापस भेजते हैं. उसके बाद वे वीज़ा जारी करने पर रोक लगा देते हैं. बात एक दूसरे के यहां हवाई जहाज़ भेजने पर रोक लगाने तक जा सकती है लेकिन ऐसा तभी होता है जब बात बहुत बिगड़ जाती है."
प्रोफ़ेसर ग्लैडसन ज़ेवियर का कहना है, "जहां तक कनाडा की बात है, भारत ने वहां अपनी वीज़ा सर्विस बंद कर दी है. इससे अलग-अलग वजहों से भारत जाने को इच्छुक उन भारतीयों को बड़ी असुविधा होगी जिन्होंने कनाडा की नागरिकता ले ली है. इनमें से कई लोगों के वीज़ा आवेदन की प्रक्रिया पर काम चल रहा होगा लेकिन अब ये अचानक रुक जाएगा. ये उनके लिए बड़ा झटका होगा."
हालांकि प्रोफ़ेसर ज़ेवियर ये भी कहते हैं कि उन लोगों को कोई दिक्कत नहीं होगी जिन्हें पहले वीज़ा जारी किया जा चुका है. इसे भारत की नाराज़गी जतलाने के तरीके के रूप में देखा जाना चाहिए. उम्मीद है कि टकराव की स्थिति ज़्यादा दिनों तक नहीं बनी रहेगी.
ओसीआई कार्ड धारकों को भी क्या कोई दिक्कत होगी?
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने ये मांग करनी शुरू कर दी है कि कनाडा से भारत आने वाले ओसीआई कार्ड धारकों को भी वीज़ा जारी करने पर रोक लगा दी चाहिए.
प्रोफ़ेसर ग्लैडसन कहते हैं, "कुछ लोग ये कह रहे हैं कि ओसीआई कार्ड धारकों के भी भारत आने पर रोक लगानी चाहिए. भारत और कनाडा के बीच फिलहाल जो समस्या है, उसका इन लोगों से कोई लेनादेना नहीं है. इसलिए इस मांग को वाजिब नहीं ठहराया जा सकता है. सरकार को इस तरह की बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए."
कनाडा में भारतीय समुदाय के लोग लंबे समय से रहते आ रहे हैं. अगर हम कनाडा जाकर बस गए लोगों के वंशजों को शामिल कर लें तो साल 2021 की जनगणना के अनुसार, कनाडा में भारतीय मूल के 18 लाख लोग रहते हैं. ये कनाडा की कुल आबादी का 5.11 फीसदी है.
भारत का वीज़ा हासिल करने का क्या कोई और रास्ता है?
कनाडा में रह रहे सीनियर मीडिया एनालिस्ट रमणन चंद्रशेखर मूर्ति से बीबीसी तमिल ने वहां के मौजूदा हालात और भारत सरकार के फ़ैसले के असर के बारे में पूछा.
चंद्रशेखर मूर्ति कहते हैं, "बहुत से देश वीज़ा सर्विस जारी के लिए किसी कंपनी की सर्विस लेते हैं. अब भारत ने कनाडा पर दबाव बनाने के लिए वहां अपनी वीज़ा सेवाओं पर रोक लगा दी है."
"लेकिन भारत से टीसीएस जैसी कई कंपनियां कनाडा में बिज़नेस कर रही हैं. कनाडा से कई लोग भारत कारोबार या फिर घूमने-फिरने के लिए आते हैं."
"भारत आने के बारे में सोच रहे कनाडाई नागरिकों को इस फ़ैसले से फर्क पड़ेगा. कनाडा में बसे भारतीय मूल के लोगों और कनाडाई लोगों के पास फिलहाल वीज़ा हासिल करने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है."
कनाडा में भारतीयों की सुरक्षा की क्या स्थिति है?

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खालिस्तानी अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के राजनयिक संकट के बीच वहां मौजूद भारतीय लोगों की सुरक्षा का सवाल उठा है.
पत्रकार चंद्रशेखर मूर्ति कहते हैं, "कनाडा की सरकार में सिख समुदाय की मजबूत स्थिति है. उनके पास रक्षा मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी है. कनाडा की राजनीति पर उनका ख़ासा असर है."
"इस मामले ने दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद खड़ा कर दिया है लेकिन आम लोगों पर इसका कोई असर नहीं होने वाला है. कनाडा के सिख लोग भारत सरकार से ज़रूर नाराज़ हैं लेकिन यहां रह रहे भारतीय लोगों के प्रति किसी किस्म की नाराज़गी नहीं है. यहां रहने वाले सभी भारतीय सुरक्षित हैं."
(एस प्रशांत से इनपुट पर आधारित)
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