भारत-कनाडा के राजनयिक संकट पर क्या कह रहा है पाकिस्तान और चीन का मीडिया

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- खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा के कूटनीतिक संबंधों में तनाव पैदा हो गया है.
- भारत और कनाडा के बीच चल रहे मौजूदा खींचतान पर पाकिस्तान और चीन के मीडिया ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.
- पाकिस्तान के मीडिया ने 'देश के भीतर हालात ठीक से नहीं संभालने' को लेकर भारत की आलोचना की है.
- चीन के मीडिया इस घटनाक्रम का इस्तेमाल अमेरिका और पश्चिमी देशों की आलोचना के लिए किया है.

खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की मौत के मामले में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बयान के बाद कनाडा और भारत के संबंधों में दूरियां बढ़ गई हैं.
18 सितंबर को जस्टिन ट्रूडो ने देश की संसद में आशंका जताई कि हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों का हाथ हो सकता है.
बात यहीं नहीं रुकी. इसके बाद कनाडा ने अपने यहां से एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक को बर्खास्त कर दिया.
जवाबी कार्रवाई में भारत ने भी कनाडा के एक वरिष्ठ डिप्लोमैट को पांच दिनों के भीतर देश छोड़ने के लिए कहा.
खालिस्तानी आंदोलन के समर्थक निज्जर की ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर इसी साल 18 जून को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.
भारत सरकार ने भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक निज्जर को 'आतंकवादी' घोषित कर रखा था.
पाकिस्तानी मीडिया ने की कश्मीर से तुलना
भारत कनाडा के राजनयिक संकट पर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा कि भारत एक ऐसा 'शरारती' देश बन गया है जो 'नेटो के एक सदस्य देश की संप्रभुता के उल्लंघन करते हुए पकड़ा' गया है.
पाकिस्तानी मीडिया ने भी 20 सितंबर के अपने संस्करण के संपादकीय में कुछ इसी तरह की भावनाएं जाहिर की हैं.
अंग्रेज़ी में छपने वाले अख़बार 'डॉन' ने लिखा है कि जैसा कि भारत सरकार को एहसास हो रहा होगा कि अगर हालात बिगड़े तो इसका परिणाम शर्मसार करने वाला हो सकता है.
'डॉन' के संपादकीय में इस राजनयिक संकट के लिए भारत और इसराइल के 'क़रीबी रिश्ते' को जिम्मेदार ठहराया है.
अख़बार का कहना है कि "भारत जिसे आतंकवादी समझता है, उस पर हमला करने का तरीका इसराइली खुफिया एजेंसी मोसाद की हैंडबुक से लिया है."
एक और अख़बार 'डेली टाइम्स' ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से अपील की है कि अभी हालात हमलावर रुख अपनाने के लिए अनुकूल है.
अख़बार ने निज्जर की हत्या और भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा के पास पकड़े गए कथित जासूसों के बीच तुलना करने की कोशिश की है.
एक्सप्रेस ट्रिब्यून का कहना है कि हाल में हुई मणिपुर हिंसा के बीच भारत सिखों के हक और अपनी नीतियों के बीच 'मुश्किल दौर' से गुजर रहा है.
उर्दू अख़बार दुनिया ने भी इस ओर ध्यान दिलाया है कि पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों में कई सिखों और कश्मीरियों ने 'ऐसी संदिग्ध घटनाओं' की जांच की मांग सुरक्षा एजेंसियों से की है.
अख़बार लिखता है, "कनाडा की सरकार जिन हालात से दो-चार हो रही है, सच तो ये है कि पाकिस्तान लंबे अरसे से दुनिया का ध्यान इस ओर खींचने की कोशिश कर रहा है."
एक और उर्दू अख़बार औसफ़ ने "कश्मीरियों और सिख संगठनों से सोशल मीडिया के जरिए दुनिया भर में भारत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने की अपील की है."
चीन के मीडिया ने कहा- 'ये अमेरिकी सिरदर्द है...'
भारत और कनाडा के राजनयिक संकट पर चीन की सरकार ने अभी तक आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन उसके मीडिया ने इस घटनाक्रम का इस्तेमाल अमेरिका और पश्चिमी देशों की आलोचना के लिए किया है.
सरकारी समाचार एजेंसी 'शिनहुआ', 'द पेपर' और 'चाइनान्यूज़ डॉटकॉम' जैसे प्रमुख सरकारी मीडिया आउटलेट्स खालिस्तानी अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले को लेकर भारत और कनाडा द्वारा एक दूसरे के राजनयिकों को बर्खास्त करने की घटना की रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से प्रकाशित की है.
लेकिन 19 सितंबर को सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि "भारत-कनाडा का राजनयिक तनाव अमेरिकी मूल्यों पर आधारित गठबंधनों का पाखंड दिखलाता है."
ग्लोबल टाइम्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाठकों तक पहुंच रखने वाला चीन का राष्ट्रवादी अख़बार माना जाता है.
अख़बार ने टीसिंघुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रैटेजी इंस्टीट्यूट के शोध विभाग के निदेशक क़ियान फेंग के हवाले से लिखा है कि पश्चिमी देश ख़ासकर अमेरिका हाल के सालों में लोकतंत्र और आज़ादी के साझा मूल्यों के झंडाबरदार रहे हैं. वे चीन को काउंटर करने के लिए भारत के साथ सहयोग स्थापित करने की कोशिश करते रहे हैं.
"भारत के मानवाधिकार हनन के ट्रैक रिकॉर्ड को लेकर वे क्या सोचते हैं, इसे लेकर उन्होंने आंखें बंद कर रखी हैं. ये भारत को लेकर पश्चिमी गठबंधन के पाखंड को जाहिर करता है."
ग्लोबल टाइम्स के मुखर कहे जाने वाले एडिटर इन चीफ़ हु शिजिन ने 19 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर समाचार एजेंसी एएनआई का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें कनाडा के उच्चायुक्त कैमरन मैक्के एक मीटिंग के बाद भारत के संसद भवन से जल्दबाज़ी में निकलते हुए दिख रहे हैं. इसके बाद ही भारत से कनाडा के एक शीर्ष राजनयिक के निष्कासन की रिपोर्ट सामने आई.
हु शिजिन ने लिखा है, "मर्डर की घटना (निज्जर का मामला) मुमकिन है कि अमेरिका के लिए परेशानी का सबब बन जाए. क्या उसे अपने छोटे भाई कनाडा का समर्थन करना चाहिए या फिर भारत का...? जो चीन को काउंटर करने के लिए उसका प्यादा है."
चीन की सरकार से जुड़े जानेमाने ब्लॉगर नियुतानक़िन (बुल पियानो) ने 20 सितंबर को एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा है कि इस घटना ने अमेरिका और ब्रिटेन के लिए मुश्किल पैदा कर दी है.
"जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अमेरिका हाल के समय में भारत को अपने पाले में लाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है. ऐसे वक्त में जब तुर्की रूसी हथियार खरीदता है तो अमेरिका पाबंदियां लगा देता है. लेकिन जब भारत रूस से हथियार खरीदता है तो अमेरिका अपनी आंखें बंद कर लेता है."
हालांकि इस ब्लॉग ने ये भी लिखा है कि चीन का इस घटना से कोई लेनादेना नहीं है.
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