भारत-कनाडा संबंधों में तनाव से क्या चीन को फ़ायदा होगा?

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कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप का मुद्दा वहाँ का विपक्ष उठाता रहा है. चीन और रूस पर कनाडा के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के आरोप लगते रहे हैं.

चीन और रूस का इसीलिए कनाडा के साथ संबंधों में तनाव रहता है. अब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि खालिस्तान समर्थक सिख नेता और उसके नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंट का हाथ हो सकता है.

इस आरोप के बाद कनाडा के मीडिया में कहा जा रहा है कि पहले विदेशी हस्तक्षेप में चीन और रूस का नाम आता था लेकिन अब भारत का भी जुड़ गया है.

हालांकि भारत ने कनाडा के इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है और कहा है कि कनाडा खालिस्तानियों को अपनी ज़मीन पर पनाह देने के मुद्दे को भटकाने के लिए ऐसे मनगढ़ंत आरोप लगा रहा है.

ट्रूडो के आरोप के बाद कनाडा और भारत के रिश्ते पटरी से उतर गए हैं. ऐसे में कहा जा रहा है कि यह चीन के लिए मौक़ा है कि वह पश्चिम को घेर सके. कनाडा के मीडिया में कहा जा रहा है कि चीन पूरे विवाद से फ़ायदा उठा सकता है.

पूरे मामले में कनाडा अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में भी लगा है. अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने भारत से जांच में सहयोग करने की अपील की है.

चीन की एंट्री

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विवाद में चीन की एंट्री

लेकिन अब इस विवाद में चीन भी कूद गया है. चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक लेख में लिखा है कि जी20 सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और ट्रूडो के बीच मुलाक़ात में जो हाव-भाव थे, उसी से संकेत मिल गया था.

ग्लोबल टाइम्स लिखता है, “पश्चिम के देश मानवाधिकारों के रक्षक होने का दावा करते हैं और इसे लेकर हर नए दिन दूसरे देशों की आलोचना भी करते हैं, लेकिन यह देश तथाकथित भारतीय लोकतंत्र के लिए उनकी प्रशंसा करता है, जो मुख्य रूप से भू-राजनीतिक हितों और भारत को अपने चीन विरोधी एजेंडे में शामिल करने की इच्छा से प्रेरित है.”

अख़बार लिखता है कि पश्चिम के देश भारत और उसके बीच लोकतंत्र के अंतर को अच्छी तरह से समझते हैं लेकिन अपने फ़ायदे के लिए भारत में हो रहे मानवाधिकार हनन और घरेलु जातीय अल्पसंख्यकों पर अत्याचार को लेकर आंख मूंदने को भी तैयार हैं.

लेख में कहा गया है कि पश्चिमी की यह दोहरी नीति उसके पाखंड को उजागर करने का काम करती है.

जानकारों का मानना है कि भारत-कनाडा के बीच बढ़ते विवाद से चीन को फ़ायदा हो सकता है. अभी तक कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप को लेकर बयानबाजी काफ़ी हद तक चीन पर केंद्रित रही है. कनाडा चीन पर उसके लोकतंत्र को कमज़ोर करने के आरोप लगाता रहा है.

लेकिन हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने के आरोपों ने इस नैरेटिव को नया रुख़ दे दिया है.

भारत और कनाडा के पीएम

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चीन को फ़ायदा

कनाडा की न्यूज़ वेबसाइट टोरांटो स्टार पर छपे एक लेख में विलानोवा विश्वविद्यालय के चार्ल्स विगर स्कूल ऑफ लॉ में अंतरराष्ट्रीय क़ानून के सहायक प्रोफ़ेसर प्रेस्टन जॉर्डन लिम बताते हैं कि कैसे चीन इस पूरे विवाद को प्रभावित कर सकता है.

जॉर्डन लिम कहते हैं कि कनाडा और भारत के बीच विवाद बढ़ने से पश्चिम खेमे में हलचल है, क्योंकि चीन के ख़िलाफ़ एकजुटता में इससे कमी आएगी.

वे कहते हैं कि अमेरिका के नेतृत्व में जिस क्षेत्रीय सुरक्षा की बात हो रही है, उसमें भारत की कमज़ोर स्थिति से चीन को फ़ायदा मिलेगा.

उनका कहना है कि अगर भारत के ख़िलाफ़ कनाडा कोई ठोस सबूत दे पाता है, तो इससे विदेशी हस्तक्षेप बिल्कुल नए स्तर पर पहुँच जाएगा.

वे कहते हैं कि चीन भी इतने खुले तरीके से कार्रवाई नहीं करता है. हालांकि यह सच है कि चीन के एजेंट वीगर मुसलमानों को शिनजियांग में वापस लाने के लिए अपहरण में शामिल रहे हैं. अगर भारत की भूमिका इस मामले में आती है तो यह उलट-पुलट करने वाला होगा.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो

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इंडो-पैसिफिक में चीन को फ़ायदा

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चीन और कनाडा के संबंधों में लंबे समय से तनाव है. कनाडा, चीन पर उसके आंतरिक मामलों में दख़ल देने का आरोप लगाता है.

दोनों देशों के बीच तनाव का असर इंडोनेशिया के बाली शहर में आयोजित जी-20 समिट में भी दिखा था.

जस्टिन ट्रूडो पर उस वक़्त शी जिनपिंग झल्ला गए थे. वे इस बात से नाराज़ थे कि जो बात उन्होंने ट्रूडो से की है वह अख़बार में लीक हो गई थी.

जस्टिन ट्रूडो पर शी जिनपिंग के झल्लाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. वीडियो में जस्टिन ट्रूडो को शी जिनपिंग कह रहे थे, ''आप पहले की बातचीत को मीडिया में साझा नहीं कर सकते हैं. यह बिल्कुल सही नहीं है. डिप्लोमैसी ऐसे काम नहीं करती है.''

जस्टिन ट्रूडो से शी जिनपिंग कह रहे हैं, ''जो भी हमने बात की थी, वो अख़बार में लीक हो गई. यह बिल्कुल सही नहीं है. यह बातचीत का कोई तरीक़ा नहीं है.''

सार्वजनिक स्थानों पर काफ़ी सतर्क रहने वाले शी जिनपिंग इंडोनेशिया में बिल्कुल अलग रूप में दिखे थे.

इंडो पैसिफिक को लेकर भी चीन और कनाडा आमने-सामने रहते हैं.

यूरोप और अमेरिका की तरह ही कनाडा भी भारत को इंडो-पैसिफ़िक में एक प्रमुख खिलाड़ी के तौर पर देखता है.

चूँकि ये लोकतांत्रिक देश हैं और इनके साझा मूल्य भी हैं, इसलिए कनाडा के लिए भारत की अहमियत है.

कनाडा ने अपनी इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटिजी में कहा है कि चीन एक अस्थिरता पैदा करने वाला ग्लोबल पावर है. इसलिए कनाडा की रणनीति होगी कि अपने सहयोगी देशों के साथ मिल कर काम करे ताकि चीन का सामना किया जा सके.

कनाडा ने अपनी इस स्ट्रैटिजी में कहा है- चीन का उदय जिन अंतरराष्ट्रीय नियम-क़ानूनों से हुआ है वो उन्हीं को ठुकराने में लगा है. चीन जिस तरह से उसका सैन्यीकरण कर रहा है और यहाँ समुद्री और वायु मार्गों को नियंत्रित करना चाहता है, उससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक बड़ा ख़तरा पैदा हो सकता है.

चीन यहाँ अपने आर्थिक, राजनयिक और आक्रामक सैन्य और टेक्नोलॉजी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बड़ा निवेश कर रहा है.

इस स्ट्रैटिजी में कनाडा ने भारत को अपना स्वाभाविक सहयोगी माना है, लेकिन निज्जर की हत्या विवाद के बाद से दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरी कनाडा की इस रणनीति को कमज़ोर करेगी और चीन को काउंटर करने के लिए जो एकजुटता बनी है, उसे नुक़सान पहुँचेगा.

पीएम मोदी के साथ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन

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पश्चिम के लिए मुश्किल

अमेरिका ने निज्जर की हत्या के आरोपों को लेकर चिंता जाहिर की है और कहा कि कनाडा की जांच आगे बढ़े और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए.

कनाडा के साथ बढ़ता विवाद ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के साथ भी भारत के रिश्तों पर प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि इन देशों में सिखों की बड़ी आबादी रहती है.

ब्रिटेन का भी कहना है कि वह कनाडा की ओर से उठाई गई गंभीर चिंताओं को बहुत ध्यान से सुन रहा है और उसे जांच पूरी होने का इंतज़ार है.

फ़िलहाल पश्चिम के देश जांच के नतीजों का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन सवाल है कि अगर भारत की संलिप्तता पाई जाती है तो पश्चिम के देश क्या करेंगे?

जानकारों का मानना है कि यह क़ानून के शासन के सिद्धांत को समर्थन देने और राजनीतिक ज़रूरतों में से किसी एक को चुनने जैसा होगा.

कनाडा में खालिस्तानियों का प्रदर्शन

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‘खालिस्तान’ और भारत-कनाडा रिश्तों में तनाव

भारत में सिख अलगाववादियों की ओर से अलग देश की मांग के आंदोलन ने अस्सी के दशक में जोर पकड़ना शुरू हुआ था.

1984 में सिख अलगाववादियों ने भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी थी. इसके बाद सिख अलगाववादियों के खिलाफ भारत की सख्ती काफी बढ़ गई थी.

1984 में इंदिरा गांधी ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सैनिकों को भेजा था. स्वर्ण मंदिर सिखों के लिए पवित्र स्थल है. स्वर्ण मंदिर में हथियारबंद सिख चरमपंथी जमा थे.

ऑपरेशन ब्लू स्टार के नाम से चर्चित इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय सेना के 83 सैनिक मारे गए और 248 अन्य सैनिक घायल हुए. इसके अलावा 492 अन्य लोगों की मौत की पुष्टि हुई और 1,592 लोगों को हिरासत में लिया गया था.

इसके एक साल बाद 1985 में कनाडा में रहने वाले कुछ ‘खालिस्तानी’ अलगाववादी समूह ने 1985 में एयर इंडिया विमान में बम विस्फोट किया गया.

टोरंटो से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट में एक धमाका हुआ था और इसमें सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी. यह कनाडा में सबसे ख़तरनाक और जानलेवा आतंकवादी हमला और नरसंहार के रूप में देखा जाता है.

लंबी जांच के बाद 2005 में ब्रिटिश कोलंबिया के दो सिख अलगाववादियों को रिहा कर दिया गया था. इस मामले के कई गवाहों की मौत हो गई या उनकी हत्या कर दी गई थी या उन्हें गवाही देने से डराया गया.

इस साल (‘खालिस्तानी’ अलगाववादियों को लेकर भारत और कनाडा के रिश्ते हाल में तब और खराब हुए जब कुछ महीनों पहले ब्रैम्पटन में एक परेड में एक झांकी दिखाई गई, जिसमें पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को खून से सनी साड़ी में दिखाया गया, पगड़ी पहने लोग उन पर बंदूकें ताने हुए थे. झांकी में एक तख्ती पर लिखा था: “श्री दरबार साहिब पर हमले का बदला.’’

पिछले कुछ महीनों के दौरान कनाडा और लंदन में भारत विरोधी प्रदर्शन देखने को मिले थे. कनाडा में भारतीय राजनयिकों के पोस्टर लगा कर उन्हें निशाना बनाने की अपील की गई थी. तब भारत ने कनाडा से इस तरह की घटना को रोकने की मांग की थी. उसने कनाडा सरकार के सामने इस तरह की घटनाओं पर आपत्ति जताई थी.

भारत सरकार का मानना था कि ट्रूडो सरकार सिख अलगाववादियों के प्रति नरम है.

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