भारत-कनाडा में बढ़ते तनाव से पश्चिम के देशों में घर कर रहा है यह डर

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- Author, जेम्स लैंडले
- पदनाम, बीबीसी के राजनयिक मामलों के संवाददाता, न्यूयार्क
इन दिनों भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव बढ़ता ही जा रहा है.
इसके बाद से पश्चिम के मंत्री और अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं कि भारत-कनाडा के ख़राब होते रिश्तों से अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभावित न हों.
अमेरिका और पश्चिम की अन्य शक्तियां यह नहीं चाहती हैं कि यह विवाद उन्हें भारत से दूर कर दे.
अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बिसात पर भारत एक प्रमुख खिलाड़ी है.
भारत की बढ़ती साख

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भारत न केवल एक बढ़ती हुई शक्ति है, बल्कि वह दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों में से है और दुनिया की पांचवीं नंबर की अर्थव्यवस्था है. भारत को पश्चिम के देश चीन के ख़िलाफ़ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में देखते हैं.
यह भारत में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में भी नज़र आया था. सम्मेलन के दौरान जारी संयुक्त बयान में यूक्रेन पर हमले की निंदा तो की गई थी, लेकिन रूस का नाम नहीं लिया गया था.
इससे यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगी देश भी सहमत थे. उन्होंने इस बयान पर विवाद की जगह भारत के साथ संबंधों को बचाने को प्राथमिकता दी. हालांकि इससे यूक्रेन में कुछ लोग नाराज़ हो गए थे.
पश्चिम के देशों में दूसरा डर इस बात का है कि कनाडा और भारत के विवाद में कुछ देश किसी का पक्ष लेना शुरू कर देंगे.
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया है कि पश्चिमी कनाडा में इस साल जून में हुई एक खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत का हाथ है. उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है.
विश्व राजनीति में क्या कर रहा है भारत

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पिछले कुछ महीनों से भारत ख़ुद को विकासशील देशों के नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. इन देशों को कई बार ग्लोबल साउथ के रूप में भी पेश किया जाता है.
अमेरिका और कुछ यूरोपीय देश इन देशों पर विजय हासिल करने के लिए सही मायने में कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं. वे उन्हें बता रहे हैं कि युद्ध उनके और उनकी अर्थव्यवस्था पर असर डालेगा.
राजनयिक नहीं चाहेंगे कि भारत और कनाडा के बिगड़ते रिश्ते उनके प्रयासों को प्रभावित करें.
कनाडा के विदेश मंत्री ने बताया कि जस्टिन ट्रूडो ने इस मामले को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनके के साथ उठाया है.
फ़िलहाल कनाडा के सहयोगी देश उसके साथ तो हैं, लेकिन सतर्क बने हुए हैं.
क्या कहना है पश्चिम के देशों का

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व्हाइट हाउस ने कहा है कि हत्या के आरोपों को लेकर अमेरिका बहुत चिंतित है. उसका कहना है कि महत्वपूर्ण यह है कि कनाडा की जांच आगे बढ़े और अपराधियों को न्याय के कठघरे में लाया जाए.
ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सिख समुदाय की आबादी अधिक है, इस तरह के राजनयिक विवाद में उनकी घरेलू राजनीतिक को प्रभावित करने की क्षमता है.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने कहा है कि उनका देश कनाडा की ओर से उठाई गई गंभीर चिंताओं को बहुत ध्यान से सुनेगा.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि मैंने कनाडा के विदेश मंत्री मेलानी जोली से इन आरोपों को लेकर सोमवार को बात की थी. उन्होंने कहा कि कनाडा जो कह रहा है, उसे ब्रिटेन बहुत गंभीरता से ले रहा है.
उन्होंने भारत के साथ व्यापार वार्ता को स्थगित किए जाने के सवाल पर कुछ कहने से इनकार कर दिया. लेकिन कहा कि ब्रिटेन कोई फ़ैसला लेने से पहले कनाडा की जांच पूरी होने का इंतज़ार करेगा.
उन्होंने कहा, ''कनाडा और भारत, दोनों ही ब्रिटेन के क़रीबी दोस्त हैं, वे राष्ट्रमंडल में भी सहयोगी हैं.''
वहीं ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि उनका देश इन आरोपों को लेकर बहुत चिंतित है और भारत को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है.
आगे क्या करेंगे पश्चिम के देश

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इसलिए अभी पश्चिम के देश इंतज़ार करेंगे और जांच की प्रगति पर नज़र रखेंगे.
कुछ सहयोगी देशों को कनाडा की ख़ुफ़िया जानकारी तक पहुँच दी जा सकती है. अगर कनाडा के आरोपों के पुख्ता सबूत मिल जाएं तो हालात में क्या बदलाव आएगा?
अगर ऐसा होता है तो पश्चिम के देशों को कनाडा और भारत में से किसी एक को चुनना होगा. यह क़ानून के शासन के सिद्धांत को समर्थन देने और राजनीतिक ज़रूरतों में से किसी एक को चुनने जैसा होगा.
इससे पहले भी पश्चिम के देशों ने रूस या ईरान या सऊदी अरब पर लगे दूसरे देशों में हत्या करवाने के आरोपों की निंदा की है. वे ये नहीं चाहते हैं कि भारत भी इस सूची में शामिल हो.
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