भारत में फँसे कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने क्या एयर इंडिया वन का विमान लेने से मना कर दिया?- प्रेस रिव्यू

जस्टिन ट्रूडो

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इमेज कैप्शन, जस्टिन ट्रूडो जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे थे. विमान में ख़राबी के कारण उन्हें दो दिन अतिरिक्त भारत में रुकना पड़ा.

नई दिल्ली में जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने आए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपने विमान में तकनीकी ख़राबी के कारण दो दिन तक फँसे रहे और आख़िरकार मंगलवार दोपहर उन्होंने उड़ान भरी.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस दौरान भारत ने उन्हें ‘एयर इंडिया वन’ की सेवायें देने की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने अपने विमान के ठीक होने का इंतज़ार करना बेहतर समझा.

समाचार एजेंसी एएनआई में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि कनाडा ने भारत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कनाडा के प्रधानमंत्री ने इंतज़ार करने का विकल्प चुना.

ट्रूडो और उनकी टीम को रविवार शाम को भारत से वापस लौटना था. लेकिन विमान में आई तकनीकी ख़राबी मंगलवार तक ही ठीक हो सकी.

भारत और कनाडा के बीच इस समय खालिस्तान के मुद्दे को लेकर कड़वाहट है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जस्टिन ट्रूडो के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में भी खालिस्तान का मुद्दा उठाया था और कहा कि द्विपक्षीय रिश्तों में प्रगति के लिए परस्पर सम्मान और भरोसा ज़रूरी है.

दस सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी और ट्रूडो की मुलाक़ात के दिन ही सिख संगठनों ने ब्रिटिश कोलंबिया के एक गुरुद्वारे में खालिस्तान के मुद्दे पर जनमत संग्रह किया था.

जस्टिन ट्रूडो एयरबस ए310 विमान के ज़रिये भारत पहुँचे थे. इसमें तकनीकी ख़राबी आ गई थी और ये विमान मंगलवार को ही उड़ान भर सका.

कनाडा में भी इस मुद्दे पर ट्रूडो को आलोचना का सामना करना पड़ा है.

ट्रूडो को अतिरिक्त दो दिनों तक भारत में रुकना पड़ा और वो इस दौरान अपने होटल के कमरे में ही रहे. भारत के साथ उनका कोई अधिकारिक कार्यक्रम इस दौरान नहीं था.

ट्रूडो

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ट्रूडो ने कनाडा के दिल्ली स्थित हाई कमिशन में भी इस दौरान किसी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया.

ट्रूडो और उनके बेटे ज़ेवियर अपनी यात्रा में हुए इस बिलंब के दौरान दिल्ली के ललित होटल के अपने कमरों में ही रुके रहे.

ज़ेवियर ट्रूडो अपने पिता के साथ जकार्ता भी गए थे, जहाँ जस्टिन ट्रूडो ने एसियान सम्मेलन में हिस्सा लिया था.

कनाडा के मीडिया में भी ट्रूडो की यात्रा में हुई देरी सुर्ख़ियों में बनीं रही.

द टोरंटो सन ने लिखा है, “विमान में आई दिक्क़त से हुई देरी के बाद आख़िरकार प्रधानमंत्री ट्रूडो भारत से घर वापस लौट रहे हैं.”

कनाडा की मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ प्रोटोकॉल के तहत फ्लाइट से पहले विमान की गहन जांच के दौरान तकनीकी खामी का पता चला था.

टोरंटो सन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सीसी-150 पोलारिस विमान (जिसे नागरिक इस्तेमाल के लिए एयरबस ए310 भी कहा जाता है), उस फ्लीट का हिस्सा है जो 1990 के दशक में सेवा में शामिल हुआ था. कनाडा के ये विमान पुराने हो चुके हैं और इससे पहले भी कई बार तकनीकी खामी का शिकार हो चुके हैं. इस साल इनकी जगह नए विमान लाये जा सकते हैं.

विमान में तकनीकी खामी का पता चलने के बाद रॉयल कनेडियन एयरफ़ोर्स ने एक टेक्नीशियन को रिप्लेसमेंट पार्ट के साथ भारत भेजा था.

इसके अलावा ज़रूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री को वापस लाने के लिए एक बैकअप विमान भी भेजा गया था. लेकिन मिस्त्री तकनीकी खामी को ठीक करने में कामयाब रहा और आख़िरकार ट्रूडो अपने देश वापस लौट सके.

प्रधानमंत्री सुरक्षा कारणों से नागरिक उड़ाने में यात्रा नहीं करते हैं.

लंदन में भारतीय हाई कमिशन पर हमले के मामले में एनआईए ने 15 लोगों की पहचान की

खालिस्तानी समर्थक

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इमेज कैप्शन, हाल के महीनों में दुनिया के कई देशों में खालिस्तानी समर्थकों ने भारत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए हैं

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने लंदन में भारतीय हाई कमीशन पर हुए हमले के मामले में पंद्रह लोगों की पहचान की है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ अब भारत को ब्रितानी सरकार को इन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए मनाना होगा.

भारत में यूएपीए क़ानून है जिसके तहत एआईए ने एफ़आईआर दर्ज की है लेकिन ब्रिटेन में ऐसा कोई क़ानून नहीं है जिसके तहत प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है.

लंदन में भारत के हाई कमीशन के सामने 19 मार्च को प्रदर्शन हुए थे. इस दौरान तोड़फोड़ भी की गई थी.

दो महीने पहले इस प्रदर्शन में शामिल 45 लोगों की तस्वीरें जारी की गईं थीं. एनआईए ने इनमें से 15 की पहचान कर ली है और अब वह इनके ख़िलाफ़ लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी कराने की तैयारी कर रही है.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ एनआईए ने 2 जुलाई को सैन फ़्रांसिस्को में भारत के हाई कमीशन पर हमला करने वाले चार खालिस्तान समर्थकों की पहचान भी कर ली है.

एनआईए की एक टीम अगले महीने जांच के लिए कनाडा भी जा सकती है. कनाडा में भी भारतीय हाई कमीशन पर खालिस्तानी समर्थकों ने हमला किया था.

महाराष्ट्र के सतारा में सांप्रदायिक हिंसा, एक की मौत, कई घायल

भीड़ ने आग लगाई

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इमेज कैप्शन, घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं

द हिंदू में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़ महाराष्ट्र के सतारा में सांप्रदायिक हिंसा की एक घटना में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई है और दस घायल हैं. रविवार को हुई इस घटना के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में हैं. इलाक़े में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं और पुलिस बल तैनात किए गए हैं.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़, ‘इंस्टाग्राम पर एक ख़ास समुदाय के युवकों ने आपत्तीजनक टिप्पणी की थी जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव हो गया.’

ये घटना सतारा ज़िले की खटाओ तहसील के पुसेसावाली गांव की है. ये जगह पुणे से क़रीब 150 किलोमीटर दूर है.

पुलिस ने विवादित पोस्ट करने वाले युवक को हिरासत में ले लिया था. उससे पूछताछ चल रही थी. रविवार रात क़रीब 9.30 बजे दूसरे समुदाय के लोगों ने थाने को घेर लिया. उत्तेजित भीड़ ने कुछ वाहनों में आग लगा दी और वाणिज्यिक संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाया.

सतारा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अख़बार को बताया है कि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है और कई घरों को आग लगा दी गई है.

सतारा के पुलिस अधीक्षक समीर शेख ने इस जानकारी की द हिंदू से पुष्टि भी की है.

सतारा में इंटरनेट सेवायें भी बंद कर दी गई हैं. पुलिस ने 23 लोगों पर मुक़दमा भी दर्ज किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक़

पांच सितारा होटल में चीन के रहस्यमयी बैग को लेकर क्यो रहा सस्पेंस

सुरक्षा कर्मी

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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने दिल्ली में बीते सप्ताहांत संपन्न हुए जी-20 शिखर सम्मेलन से जुड़ी एक ख़बर प्रकाशित की है.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ गुरुवार को एक पांच सितारा होटल में चीन की टीम के साथ आए कुछ बैगों की वजह से माहौल नाटकीय हो गया था.

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कुछ बैग का आकार ऐसा था कि होटल ताज में तैनात सुरक्षा कर्मियों का ध्यान उन पर चला गया.

हालांकि सुरक्षा में तैनात टीमों को राजनयिकों के सामान को जाने देने के लिए कहा गया था लेकिन ये बैग इतने बड़े थे कि प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों का इन पर ध्यान जाना लाज़मी था. हालांकि राजनयिक प्रोटोकॉल की वजह से बैग को आगे जाने दिया गया.

जब ये बैग होटल के कमरे में पहुंचे तो एक कर्मचारी ने सुरक्षा कर्मियों को बताया कि इनमें कुछ संदिग्ध उपकरण हैं, जिसके बाद ये संदेश ख़ुफ़िया एजेंसियों के उच्च अधिकारियों तक चला गया.

अधिकारियों के बीच विमर्श के बाद तय हुआ कि इन बैग को स्कैन किया जाए. लेकिन चीन के अधिकारी इसके लिए तैयार नहीं थो और स्थिति टकराव की बन गई थी.

यही नहीं चीन की टीम ने होटल से सुरक्षित और प्राइवेट इंटरनेट की मांग भी की थी जिसके लिए होटल ने इनकार कर दिया.

होटल के सूत्रों ने अख़बार को बताया है कि 12 घंटे के नाटकीय घटनाक्रम का समापन तब हुआ जब चीन के अधिकारी संदिग्ध बैग को होटल से चीन के दूतावास में भेजने के लिए तैयार हो गए.

ब्राज़ील जी-20 सम्मेलन का अगला मेज़बान है और ब्राज़ील के राष्ट्रपति इसी होटल में रुके हुए थे.

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