हिंडनबर्ग मामला: सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर अदानी बोले- सत्यमेव जयते, कांग्रेस ने फिर उठाए ये सवाल

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अदानी समूह की कंपनियों से जुड़ी हिंडनबर्ग रिपोर्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने ये भरोसा जताया है कि सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (सेबी) सुप्रीम कोर्ट की दी गई मोहलत के भीतर इस मामले की जांच पूरी कर लेगा.
हालांकि कांग्रेस पार्टी ने ये भी कहा है कि अतीत में सेबी के कामकाज का रिकॉर्ड उन्हें इस पर भरोसा नहीं पैदा करता है.
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मनीष तिवारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "मैंने सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला विस्तार से नहीं पढ़ा है लेकिन उन्होंने सेबी को अपनी जांच दो महीनों के भीतर पूरी करने के लिए कहा है."
उन्होंने कहा, "सच तो ये है कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जो आरोप लगाए गए थे, वे साल भर पहले सार्वजनिक हुए थे और अगर सेबी चौकस रहती या वे जल्द कार्रवाई करते तो ये जांच काफी पहले पूरी हो गई होती."
मनीष तिवारी ने कहा, "वित्तीय मामलों की संसदीय समिति में भी हमने बार-बारे ये आग्रह किया था कि सेबी को बुलाया जाए और उनसे इस पर सफ़ाई मांगी जाए कि अदानी समूह की कंपनियों को लेकर उनकी निगरानी चौकस क्यों नहीं थी और ये नाकाम क्यों हुई लेकिन दुर्भाग्य से स्टैंडिंग कमेटी में हम अल्पमत में थे और सत्तारूढ़ पार्टी के लोग बहुमत में थे.
"इसलिए इन परिस्थितियों में हम ये उम्मीद करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जो मोहलत दी है कि उसमें सेबी अपनी जिम्मेदारी पूरी करेगी. हालांकि अतीत में उनके कामकाज का रिकॉर्ड भरोसा नहीं जताता है."
अदानी समूह के शेयरों में जबर्दस्त उछाल

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सुप्रीम कोर्ट ने हिंडनबर्ग मामले में बुधवार को कहा कि अदानी समूह को बाज़ार नियामक सेबी के अलावा अब और किसी की जांच का सामना करने की ज़रूरत नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला अदानी समूह के लिए एक बहुत बड़ी राहत की ख़बर माना जा रहा है.
अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के सामने आने के बाद कंपनी के शेयरों में बड़ी और तेज़ गिरावट दर्ज की गई थी.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अदानी समूह की कंपनियों की मार्केट वैल्यू में 150 अरब डॉलर की गिरावट देखी गई. हालांकि हाल के महीनों में निवेशकों का भरोसा लौटता हुआ दिखा.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद बुधवार को शेयर बाज़ार में अदानी समूह की कंपनियों की शेयर क़ीमतों में उछाल आया. अदानी एनर्जी में 9.1 फीसदी, अदानी टोटल में 7.1 फीसदी, अदानी ग्रीन में 5.5 फ़ीसदी और अदानी एंटरप्राइजे़ज में 2.6 फ़ीसदी की वृद्धि देखी गई.
गौतम अदानी की प्रतिक्रिया

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हालांकि गौतम अदानी ने हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कहा है कि आख़िरकार सच की जीत हुई है.
उन्होंने ये भी कहा कि उनका समूह भारत के विकास की यात्रा में अपना योगदान करता रहेगा.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गौतम अदानी ने कहा, "आदरणीय सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला ये दिखलाता है कि सच की जीत हुई है. सत्यमेव जयते. मैं उन लोगों का आभारी हूं जो हमारे साथ खड़े रहे हैं. भारत की विकास यात्रा में हमारा छोटा सा योगदान जारी रहेगा. जय हिंद."
अदानी समूह के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा, "चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने ये विचार व्यक्त किया है कि सेबी की रिपोर्ट में 22 ट्रांजैक्शंस में से 20 को ठीक पाया गया है, इसलिए मेरे विचार में ये निश्चित रूप से अदानी के लिए क्लीन चिट है और इसे लेकर अब कोई शक नहीं है."
वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने बताया, "अदालत ने सेबी की जांच पर भरोसा किया है. अदालत ने कहा है कि कोर्ट को सेबी पर भरोसा है और वह किसी भी सीबीआई या पुलिस जांच की मंजूरी नहीं देता, जैसा कि चार याचिकाओं में मांग की गई थी. किसी अन्य जांच को शुरू करने की आवश्यकता के कोई तथ्य नहीं मिले हैं."
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग ग्रुप की ओर से प्रकाशित एक रिपोर्ट में अडानी समूह पर लगाए गए आरोपों के आधार पर जांच सेबी से लेकर एसआईटी को देने की याचिका ख़ारिज कर दी है.
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा करने के लिए कोई ठोस वजह प्रस्तुत नहीं कर पाए.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि सेबी ने अडानी ग्रुप से जुड़े 22 मामलों में से 20 की जांच पूरी कर ली है.
सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को बाक़ी बचे दो मामलों की जांच तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को यह निर्देश भी दिया है कि अगर हिडनबर्ग ने किसी क़ानून का उल्लंघन किया है, जिससे भारतीय निवेशकों को नुक़सान हुआ है तो उसकी भी जांच करे.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने फ़ैसला पढ़ते हुए कहा, ''बिना ठोस सबूतों के मीडिया में थर्ड पार्टी की रिपोर्ट या किसी संस्था पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. इनके पास कोई ठोस सबूत नहीं है.''
कोर्ट ने कहा कि सेबी को नियंत्रित करने के मामले में कोर्ट के पास सीमित ताक़त हैं. अडानी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को झूठा बताया था.
कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि हिंडनबर्ग या इस तरह की दूसरी रिपोर्ट के आधार पर अलग जाँच का आदेश नहीं दिया जा सकता है.
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में क्या आरोप लगाए गए थे?

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अमेरिकी फॉरेंसिक फ़ाइनेंशियल कंपनी हिंडनबर्ग ने अदानी समूह को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे. अदानी ग्रुप ने रिपोर्ट को निराधार बताते हुए कुछ सवालों के जवाब भी दिए थे, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों में घबराहट का माहौल था.
'अदानी ग्रुपः हाउ द वर्ल्ड्स थर्ड रिचेस्ट मैन इज़ पुलिंग द लार्जेस्ट कॉन इन कॉर्पोरेट हिस्ट्री' नाम की यह रिपोर्ट पिछले साल 24 जनवरी को प्रकाशित हुई थी.
ये तारीख़ इसलिए अहम है कि इसके दो दिन बाद ही 27 जनवरी को गौतम अदानी की कंपनी शेयर बाज़ार में सेकेंड्री शेयर जारी करने वाली थी.
ये कोई छोटा-मोटा इश्यू नहीं था बल्कि अब तक का सबसे बड़ा 20 हज़ार करोड़ रुपये का एफ़पीओ था. इस रिपोर्ट के बाद अडानी ने एफपीओ की तारीख़ टाल दी थी.
रिपोर्ट में शामिल वो 88 सवाल, जो उसने अरबपति कारोबारी गौतम अदानी के नेतृत्व वाले अदानी ग्रुप से पूछे थे. इसमें कई सवाल बेहद गंभीर थे और सीधे-सीधे अदानी ग्रुप की कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर निशाना साधते थे.
रिपोर्ट में कहा गया था कि टैक्स हेवन देशों (मॉरीशस और कई कैरेबियाई देश- इन देशों में पैसा जमा करने या व्यापार के लिए लगाई गई रकम का स्रोत बताना ज़रूरी नहीं है. साथ ही इन देशों में टैक्स भी काफी कम या नहीं देना पड़ता है) में कई ऐसी फर्जी कंपनियां हैं जिनके पास अदानी समूह की कंपनियों की हिस्सेदारी है.
अदानी समूह ने इस सवाल का सीधे-सीधे कोई जवाब नहीं दिया था. लेकिन कहा था, "जहाँ तक कॉर्पोरेट गवर्नेंस का सवाल है तो समूह की चार बड़ी कंपनियां उभरते बाज़ारों ही नहीं बल्कि दुनिया की उस सेगमेंट या सेक्टर की चोटी की सात कंपनियों में शामिल हैं."
रिपोर्ट में पूछा गया था कि गौतम अदानी के छोटे भाई राजेश अदानी को ग्रुप का एमडी क्यों बनाया गया है, जबकि उनके ख़िलाफ़ कस्टम टैक्स चोरी, आयात से जुड़े फ़र्ज़ी काग़ज़ात तैयार करने और अवैध कोयले का इंपोर्ट करने का आरोप लगाया गया था.
रिपोर्ट में ये भी पूछा गया था कि गौतम अदानी के बहनोई समीर वोरा अहम पद पर क्यों? समीर का नाम बेनामी कंपनियों के ज़रिये डायमंड ट्रेडिंग में आने के बाद भी उन्हें अदानी ऑस्ट्रेलिया डिवीजन का एक्जीक्यूटिव डायेरक्टर क्यों बनाया गया है.
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