अदानी समूह फिर विवादों में, राहुल गांधी ने उठाए पीएम मोदी की भूमिका पर सवाल

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अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस समर्थित संस्था 'ऑर्गनाइज़्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी)' की ओर से अदानी समूह पर आरोप लगाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गौतम अदानी के भाई विनोद अदानी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.
राहुल गांधी ने गुरुवार को मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में ओसीसीआरपी रिपोर्ट को लेकर अदानी समूह पर निशाना साधा.
गांधी ने इस रिपोर्ट में किए गए दावे पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि गौतम अदानी के भाई विनोद अदानी के साथ दो विदेशी लोग जुड़े हुए हैं, ऐसे में यहां गंभीर सवाल उठते हैं कि आख़िर ये पैसा अदानी का है या किसी और का?
उन्होंने कहा कि आख़िर इन विदेशी लोगों को भारत के बुनियादी ढांचे में कैसे काम करने दिया जा रहा है?
गांधी ने कांग्रेस की उस पुरानी मांग को दोहराया है कि अदानी प्रकरण की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से विस्तृत जांच करवाई जाए. उन्होंने जेपीसी से जांच कराने की मांग को राष्ट्रीय महत्व का मामला क़रार देते हुए दावा किया है कि इस मसले पर विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' में कोई मतभेद नहीं है.

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राहुल गांधी ने अदानी समूह पर लगे आरोपों की स्वच्छ जांच कराने की केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के जिन अधिकारी ने गौतम अदानी को क्लीन चिट दी, अब वे अदानी समूह संचालित समाचार संस्था एनडीटीवी में निदेशक बना दिए गए हैं.
इस पर उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि कोई जांच नहीं हुई और प्रधानमंत्री इस मामले की कोई जांच नहीं चाहते. उन्होंने दावा किया है कि भारत की साख अब दांव पर लग गई है.
उनके अनुसार, "भारत में अब सबके लिए समान मौक़े नहीं रह गए हैं. सारे कॉन्ट्रैक्ट्स और परियोजनाएं एक शख़्स को दे दिए गए. केवल एक आदमी देश की सारी संपत्ति ख़रीद रहा है."
राहुल गांधी ने कहा, "सिर्फ़ एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री इस तरह से क्यों प्रोटेक्ट कर रह रहे हैं? क्यों एक शख़्स जो मोदी जी के बहुत क़रीब है, उसे अपने शेयर प्राइस बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करने दिया जा रहा है? ये शख़्स फिर इसी पैसे से देश में हवाई अड्डे और बंदरगाह आदि पर कब्ज़ा कर रहा है. आख़िर इस मामले की जांच क्यों नहीं हो रही है? इसकी जेपीसी से जांच कराई जानी चाहिए."
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? मामले की जांच के आदेश क्यों नहीं दे रहे हैं? उन्हें इस मामले में ख़ुद को बेदाग़ साबित करना होगा. भारत में जी-20 की बैठक हो रही है. ये भारत की छवि का सवाल है. इसलिए हम इस मुद्दे को उठा रहे हैं."

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क्या है ओसीसीआरपी की रिपोर्ट में
इससे पहले गुरुवार को प्रकाशित ओसीसीआरपी की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अदानी परिवार के क़रीबियों ने भारतीय शेयर मार्केट में लाखों डॉलर निवेश करके अदानी समूह की कंपनी के शेयर खरीदे.
अदानी ग्रुप पर आरोप लगाने वाली इस रिपोर्ट को ब्रिटेन के दो अख़बारों फ़ाइनेंशियल टाइम्स और गार्डियन ने छापा है. ओसीसीआरपी दुनिया के खोजी पत्रकारों का एक वैश्विक नेटवर्क है, जिसके दस्तावेज़ों को आधार बनाते हुए इन दोनों अख़बारों में रिपोर्टें छापी गई हैं.
इस रिपोर्ट के अनुसार, समूह की कंपनियों के शेयरों की क़ीमत में हेर-फेर करने के लिए इसने 'अस्पष्ट कोष' का इस्तेमाल किया.
हालांकि इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं है कि उन लोगों ने जिस कोष का इस्तेमाल किया, वो अदानी परिवार के हैं.
इस रिपोर्ट के अनुसार, "अदानी परिवार से जुड़े लोग सालों तक छुप-छुप कर अदानी ग्रुप के शेयर ख़रीदते रहे. ये वो समय था जब अदानी की कंपनी तेज़ी से आगे बढ़ रही थी और वो देश के सबसे अमीर शख़्स बन गए थे."
रिपोर्ट में दो निवेशकों का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि उन्होंने कथित तौर पर समूह की ओर से शेयर ख़रीदे और उसे बेच दिया. इन दोनों के अदानी समूह से नजदीकी संबंध होने का दावा किया गया है.
इन दोनों शख़्स के बारे में दावा किया गया है कि ये समूह से जुड़ी कंपनियों में निदेशक और शेयरधारक रहे हैं.
वैसे बीबीसी स्वतंत्र तौर पर इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता.
'ये हिंडनबर्ग रिपोर्ट को ज़िंदा करने की है कोशिश'
हालांकि अदानी समूह ने रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, अदानी समूह ने कहा, "हम इस रिपोर्ट को पूरी तरह ख़ारिज करते हैं. ये रिपोर्ट आधारहीन हिंडनबर्ग रिपोर्ट को फिर से ज़िंदा करने के लिए जॉर्ज सोरोस की संस्था और विदेशी मीडिया के एक वर्ग की कोशिश है. एक स्वतंत्र निर्णायक प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकरण दोनों ने पुष्टि की थी कि सारे लेन-देन क़ानून के अनुसार थे."
इससे पहले जनवरी 2023 में न्यूयॉर्क की फाइनेंशियल फ़र्म हिंडनबर्ग की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि शेयर बाजार में लिस्टेड अदानी समूह की 7 प्रमुख कंपनियां ओवरवैल्यूड हैं.
इसके बाद कंपनी के शेयर तेज़ी से गिरने लगे और इससे गौतम अदानी देश के सबसे अमीरों की लिस्ट में पीछे खिसक गए. फ़िलहाल वो दुनिया के 24वें नंबर के अमीर हैं.
अदानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद क़रीबी माना जाता है. इसे लेकर विपक्षी दल लंबे समय से उन्हें निशाना बनाते रहे हैं. उनका सरकार पर आरोप रहा है कि अदानी समूह को आगे बढ़ाने के लिए ग़लत तरीक़े से फ़ैसले लिए गए हैं.
अदानी समूह के शेयर
अदानी समूह पर लगे ताज़ा आरोपों के बाद इनकी कंपनियों के शेयरों की क़ीमत में गुरुवार को गिरावट देखी गई. समूह की मुख्य कंपनी अदानी एंटरप्राइज़ेज़ के भाव 3.7 प्रतिशत गिरकर बंद हुए.
वहीं, छह अन्य कंपनियों जैसे अदानी पोर्ट्स, अदानी पावर, अदानी ग्रीन, अदानी टोटल गैस, अदानी इनर्जी सॉल्यूशंस और अदानी विल्मर के मूल्य में 2 से 4.3 प्रतिशत के बीच की गिरावट दर्ज हुई.
वित्तीय मामलों पर सलाह देने वाली संस्था क्रेडिटसाइट्स के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट आर लक्ष्मणन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "यदि ये सच है, तो इसका मतलब ये हो सकता है कि सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध शेयरों के लिए भारतीय वित्त बाज़ार की नियामक संस्था सेबी के बनाए गए क़ानूनों का उल्लंघन हुआ है. इससे समूह के ख़िलाफ़ हो रही जांच के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं या सेबी मजबूर हो सकता है कि इस मामले में उसके ख़िलाफ़ गहराई से खोज़बीन की जाए."
रॉयटर्स ने यह भी बताया है कि सेबी ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया है. हालांकि रॉयटर्स का कहना है कि अदानी समूह के ख़िलाफ़ हुई जांच के दौरान मॉरीशस के दो और बरमूडा के एक फंड की भूमिका की जांच की थी, जिसके नामों का ज़िक्र ओसीसीआरपी की रिपोर्ट में हुआ है.अदानी समूह के ख़िलाफ़ नियमों के उल्लंघन की जांच अभी चल रही है और नए तथ्यों के सामने आने पर उस पर विचार किया जाएगा.
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