अदानी मामला: जांच पर अड़ा विपक्ष, लगातार दो दिन से संसद में गतिरोध जारी- प्रेस रिव्यू

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अदानी समूह पर लगे आरोपों की जांच कराने की मांग को लेकर संसद में अड़े विपक्षी दल अब इस मामले में सरकार पर दवाब डालने के नए रास्ते तलाश रहे हैं. इसे लेकर बुधवार को 16 विपक्षी दलों की अहम बैठक बुलाई गई है.
द टेलीग्राफ़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि वरिष्ठ नेताओं ने आश्चर्य जताया है कि इस मामले में सरकार ने संसद में बना गतिरोध ख़त्म करने का रास्ता अपनाने की बजाय उल्टे राहुल गांधी पर निशाना साधा है.
मंगलवार को बीजेपी ने एक बार फिर राहुल गांधी से 'भारत का गणतंत्र ख़तरे में है' वाले उनके बयान के लिए उनसे माफ़ी की मांग की है.
राहुल गांधी ने हाल में लंदन में एक कार्यक्रम के दौरान ये बयान दिया था. वहीं विपक्ष लगातार अदानी समूह को लेकर उठे विवाद पर संयुक्त संसदीय समिति की मांग को लेकर हमलावर रहा. इस कारण सदन की कार्यवाही लगातार दूसरे दिन भी नहीं हो पाई.
जहां लोकसभा में मंगलवार को कोई कामकाज नहीं किया जा सका, वहीं राज्यसभा में भी मात्र एक ही घंटे काम सुचारू रूप से चल सका. इस एक घंटे के दौरान ऑस्कर अवॉर्ड जीतने वाले भारतीयों को बधाई दी गई.
अख़बार लिखता है कि विपक्ष का मानना है कि अगर इस वक्त उन्होंने अपने क़दम पीछे हटाए तो धांधली के गंभीर आरोपों के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी अदानी समूह के मालिक 'अपने मित्र गौतम अदानी' के ख़िलाफ़ क़दम नहीं उठाएंगे.
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अख़बार के अनुसार देश की 16 बड़ी विपक्षी पार्टियां इस मामले को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देना चाहतीं.
इस मामले में सभी विपक्षी दल विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षरों के साथ एक पब्लिक अपील पेश कर सकते हैं जिसमें मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति की ज़रूरत पर बात की गई हो.
विपक्षी दल जांच की मांग को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक मार्च कर सकते हैं या फिर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं. कई विपक्षी दलों का मानना है कि ये संदेश दिया जाना ज़रूरी है कि ईडी के ज़रिए केंद्र सरकार कुछ राजनेताओं को निशाना बना रही है.
अख़बार लिखता है कि विपक्ष की रणनीति पर चर्चा करने के लिए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुल खड़गे ने बुधवार को 16 पार्टियों की एक बैठक बुलाई है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, मंगलवार को बीजेपी नेता पीयूष गोयल ने राज्यसभा में राहुल गांधी से माफ़ी की मांग की, तो वहीं कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने इसका जवाब दिया और कहा कि विदेशों में पीएम मोदी जो बयान देते हैं उसके लिए उन्हें पहले माफ़ी मांगनी चाहिए.
लोकसभा में भी स्थिति कुछ ऐसी ही दिखी जहां बीजेपी ने राहुल गांधी से माफ़ी की मांग की तो कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने प्रधानमंत्री के विदेशों में दिए बयानों के प्लेकार्ड दिखाए.

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गांवों में एक चौथाई घरों तक नहीं पहुंचा पीने का पानी -एनएसएसओ
देश के गांवों में एक चौथाई से भी कम घरों और शहरी इलाक़ों में दो तिहाई घरों या फिर घरों के बाहर तक ही नल से पीने का पानी पहुंच सका है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की जारी की गई ताज़ा रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है. ये मल्टिपल इंडिकेटर सर्वे (एमआईएस) रिपोर्ट है जो नेशनल सैम्पल सर्वे ऑर्गेनाइज़ेशन (एनएसएसओ) के 78वें संस्करण का हिस्सा है.
इस सर्वे के दौरान ग्रामीण इलाक़ों के 1.6 लाख और शहरी इलाक़ों के एक लाख घरों से जानकारी जुटाई गई थी.
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण इलाक़ों में 70 फ़ीसदी घरों को शौचालय की सुविधा है जबकि 21.3 फ़ीसदी घरों में इसकी सुविधा नहीं है.
अख़बार लिखता है कि रिपोर्ट के अनुसार कई राज्यों में नल से पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन 95.7 फ़ीसदी परिवारों ने बताया कि 'पानी के बेहतर स्रोत' तक उनकी पहुंच बढ़ी है. रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर स्रोत का मतलब बोतलबंद पानी, घर, अहाते या पड़ोसी क घर तक पहुंचा नल का पानी, सार्वजनिक जगह पर लगा नल, हैंड पम्प, ट्यूब वेल, ढका हुआ कुंआ या फिर टैंकर से मिल रहे पानी से है.
रिपोर्ट के अनुसार, असम, झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों के ग्रामीण और शहरी इलाक़ों में नल के रास्ते पीने के पानी की पहुंच सबसे कम है.
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, गांवों में लगभग आधे परिवार अभी भी खाना बनाने के लिए प्राथमिक ईंधन के स्रोत के रूप में लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं.
इस सर्वे को साल 2020 में पूरा किया जाना था, लेकिन कोविड महामारी के कारण इसकी समयसीमा बढ़ाकर 15 अगस्त 2021 तक कर दी गई थी.
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे के दौरान जुटाए आंकड़ों के मुताबिक़ 15 से 24 साल की उम्र के पुरुषों में 16.1 फ़ीसदी और महिलाओं में 43.8 फ़ीसदी न तो पढ़ाई कर रहे थे, न किसी तरह का काम कर रहे थे और न ही उन्होंने कौशल की कोई तालीम ली थी.

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दो साल में छह गुना बढ़े भूस्खलन के मामले
हिमाचल प्रदेश में जहां साल 2020 में भूस्खलन के केवल 16 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2022 में भूस्खलन के छह गुना अधिक 117 मामले दर्ज किए गए हैं.
जनसत्ता में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा है कि राज्य में 17,120 भूस्खलन संभावित क्षेत्र हैं जिनमें से 675 जगहें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों और रिहाइशी बस्तियों के पास हैं.
अख़बार लिखता है कि बीते साल भूस्खलन के सबसे अधिक मामले कुल्लू में देखे गए. यहां भूस्खलन के 21 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि मंडी में भूस्खलन के 20, लाहौल स्पीति में 18, शिमला में 15, सिरमौर में नौ, बिलासपुर में आठ, कांगड़ा में पांच, किन्नौर और सोलन में तीन-तीन और ऊना में एक मामला दर्ज किया गया है.
अख़बार लिखता है कि पहाड़ी ढलानों या तलहटी में चट्टानों की व्यापक कटाई, सुरंगों और अन्य परियोजनाओं और खनन के लिए विस्फोटक के इस्तेमाल के साथ तेज़ बारिश भूस्खलन के मुख्य कारण रहे हैं.
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