अदानी के क़रीबी बताए जाने वाले चीनी नागरिक चांग चुंग-लिंग कौन हैं जिन पर उठ रहे हैं सवा

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अदानी समूह को लेकर आई हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में एक चीनी नागरिक का नाम सामने आया है.

सोमवार को कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि अदानी समूह की गतिविधियों में चीनी नागरिक की 'संदिग्ध भूमिका' हैं और सरकार को बताना चाहिए क्या समूह ने किसी ज़रूरी रक्षा सौदे में इस शख़्स को शामिल किया है.

जयराम रमेश ने कहा, "चांग चुंग-लिंग से जुड़ी एक कंपनी ने कथित तौर पर उत्तर कोरिया को पेट्रोलियम भेजा जो कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से लगाए गए प्रतिबंध के ख़िलाफ़ हैं. साल 2005 में चांग चुंग-लिंग ने एक डिक्लरेशन में अपना सिंगापुर का पता वही दिया था जो गौतम अदानी के बड़े भाई विनोद अदानी का पता है."

उन्होंने कहा, "साल 2014 में गोदामी इंटरनेशनल का नाम अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हैलीकॉप्टर घोटाले में ईडी की पहली चार्जशीट में सामने आया था लेकिन साल 2018 में चार्जशीट से इस कंपनी का नाम गायब हो गया. क्या अदानी के क़रीबी को इम मामले में क्लीनचिट दे दी गई."

अदानी समूह को लेकर 24 जनवरी को अमेरिकी शॉर्ट सेलर फ़र्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आई उसमें भी चीनी नागरिक चांग चुंग-लिंग के नाम का ज़िक्र किया गया. जिसके बाद से ये चर्चा तेज़ हो गई कि आख़िर ये चीनी नागरिक कौन हैं जिनसे अदानी समूह के नज़दीकी संबंध हैं.

अपनी रिपोर्ट में हिंडनबर्ग ने अदानी समूह पर आरोप लगाया था कि ग्रुप ने अपने शेयर की क़ीमतें बढ़ा-चढ़ा कर बताईं और बाज़ार को मैनिपुलेट करने की कोशिश की. रिपोर्ट के सामने आने के बाद अदानी ग्रुप की कई सारी कंपनियों के शेयर तेज़ी से नीचे गिरे और गौतम अदानी एशिया के सबसे अमीर शख्स की जगह से हट कर इस फेहरिस्त में लुढ़कते गए.

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अदानी विवाद का चीन कनेक्शन

लेकिन आज बात उस चीनी शख़्स की जिसके नाम का ज़िक्र कांग्रेस कर रही है और इस पूरे विवाद का चीन कनेक्शन क्या है.

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कुल तीन बार चीनी नागरिक चांग चुंग-लिंग का ज़िक्र मिलता है. पहली बार चांग चुंग-लिंग का ज़िक्र करते हुए रिपोर्ट कहती है कि मॉरीशस में एक गोपनीय कंपनी है जिसका नाम है ग्रोमोर, रातोंरात इस कंपनी को 4.23 करोड़ डॉलर की क़ीमत में अदानी पावर ने खरीद लिया.

इस कंपनी को चलाने वाले हैं चांग चुंग-लिंग, चुंग-लिंग ने यहां अपना स्थानीय पता दिया जो सिंगापुर में गौतम अदानी के भाई विनोद अदानी का है.

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि चुंग-लिंग और अदानी समूह के संबंध काफ़ी वक्त से हैं और वे गौतम अदाणी के भाई विनोद अदानी के करीबी है.

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हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में जिस तीसरी जगह इस चीनी शख़्स के नाम का ज़िक्र है वो पीएमसी प्रोजेक्ट से जुड़ा है. रिपोर्ट कहती है कि अदानी इंटरप्राइज़ ने एक निजी कॉन्ट्रैक्टर कंपनी पीएमसी प्रोजेक्ट को बीते 12 सालों में 63 अरब रूपये दिए. इस कंपनी के मालिक चांग चुंग-लिंग के बेटे हैं. साल 2014 में डायरेक्ट्रेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलीजेंस ने इस कंपनी को एक 'डमी फ़र्म' बताया था.

हिंडनबर्ग को अदानी समूह से 413 पन्नों का जवाब दिया था लेकिन इस लंबे जवाब में चीनी नागरिक चांग चुंग-लिंग से समूह के रिश्तों को लेकर कोई जवाब नहीं दिया गया.

अदानी समूह पर विस्तृत रिपोर्ट करने वाले परंजॉय गुहा ठाकुरता कहते हैं, "जब हिंडनबर्ग की ख़बर आई तो अदानी समूह के प्रवक्ता ने तिरंगे के सामने खड़े हो कर बयान जारी किया. कहा गया कि ये भारत पर हमला है एक बिजनेस ग्रुप को पूरे देश की तरह पेश किया गया. ऐसा नरेटिव गढ़ दिया गया है कि अगर आप अदानी या उनके समूह के बारे में कुछ कहें तो आपको दक्षिणपंथी लोग देशद्रोही घोषित कर देंगे."

ठाकुरता कहते हैं, "पूंजीवाद के अलग-अलग तरीके होते हैं, क्रोनी कैपिटलिज़्म कोई नयी बात नहीं है, दशकों पहले दोस्ती में सरकारें कुछ बिजनेस घरानों की सहूलियत से नियम बनाते रहे हैं, लेकिन अब जो देश में हो रहा है वो ऑलिगार्की है. ऑलिगार्की वो व्यवस्था है जिसमें एक बिजनेस घराने और सरकार के बीच की रेखा ख़त्म हो जाए. "

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पीएम मोदी पर अदानी को फ़ायदा पहुंचाने के आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गौतम अदानी के बीच की नज़दीकी लंबे समय से चर्चा में रही है. आदानी समूह के विस्तार को मोदी सरकार से जोड़ कर देखा जाता है.

बीते कुछ सालों में अदानी समूह ने छह बड़े एयरपोर्ट बनाने की बिड हासिल की और इसके साथ ही वो देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटर बने.

इस डील के समय मोदी सरकार पर अदानी समूह को वरीयता देने के आरोप लगे क्योंकि इससे पहले अदानी ग्रुप के पास एयपोर्ट के संचालन और प्रबंधन का कोई अनुभव नहीं था. विपक्षी नेताओं ने मोदी सरकार पर क्रोनी कैपिटलिज़्म के आरोप लगाए.

बीते महीने छपी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया कि मुद्रा में एक हवाई पट्टी चलाने से लेकर देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट बनाने वाले निजी डेवलपर बनने का सफ़र अदानी समूह ने सिर्फ़ 24 महीने में तय किया.

साल 2019 में गौतम अदानी की कंपनी को अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, मंगलूरु, गुवाहाटी और त्रिरुवेंद्रम के एयरपोर्ट का कॉन्ट्रैक्ट मिला.

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साल 2021 की एक रिपोर्ट कहती है कि डिपार्टमेंट ऑफ़ इकॉनमिक अफ़ेयर (वित्त मंत्रालय का विभाग) और नीति आयोग ने उस वक्त सभी छह एयरपोर्ट के कॉन्ट्रैक्ट अदानी समूह को दिए जाने पर ऐतराज़ जताया था.

नीति आयोग ने कहा था, "कंपनी के पास इस क्षेत्र में अनुभव के अभाव के कारण नुकसान हो सकता है. ये प्रोजेक्ट को तो प्रभावित कर ही सकता है साथ ही एयरपोर्ट पर दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर डाल सकता है."

राहुल गांधी ने लंदन में अदानी पर क्या कहा?

लंदन में इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने अदानी ग्रुप को लेकर भारत में सत्ताधारी नरेंद्र मोदी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए.

राहुल गांधी ने कहा कि गौतम अदानी तीन सालों में 609वें अमीर आदमी से दूसरे सबसे अमीर आदमी बन गए थे और उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अच्छे संबंध हैं.

जब उनसे कश्मीर में मिले 50 लाख टन लिथियम के भंडार और उसकी नीलामी की घोषणा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अदानी ग्रुप की तरफ इशारा किया.

राहुल गांधी ने कहा, "मैं आपको कह सकता हूं कि अदानी हर उस नीलामी में जीतते दिखते हैं जिसमें वे हिस्सा लेते हैं. उन्हें किसी बिजनेस में एंट्री लेने के लिए उसके अनुभव की जरूरत नहीं है. इसलिए मैं भविष्यवाणी कर सकता हूं कि अदानी को वह लिथियम का भंडार मिल सकता है."

केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर बोलते हुए कहा, ''विदेशी धरती पर फिर एक बार राहुल गांधी रोने-धोने का काम कर रहे हैं. नतीजे क्या आएंगे उनको पता था और पेगासस का मुद्दा उनके दिलो-दिमाग पर बैठा हुआ है.''

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