वित्तीय संकट से घिरे अदानी ग्रुप को मिला अमेरिका की कंपनी से बड़ा निवेश

गौतम अदानी

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    • Author, एनाबेले लियांग
    • पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर

भारतीय अरबपति व्यवसायी गौतम अदानी के नेतृत्व वाले अदानी समूह ने बताया है कि अमेरिकी एसेट मैनेज़मेंट फ़र्म जीक्यूजी पार्टनर्स ने उसकी चार कंपनियों में 1.87 अरब डॉलर का निवेश किया है.

अदानी समूह पिछले चार-पाँच हफ़्तों से गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है.

अमेरिकी फ़ॉरेंसिक फ़ाइनेंशियल कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने बीती 24 जनवरी को अदानी समूह पर वित्तीय अनियमितताएँ बरतने का आरोप लगाया था.

अदानी समूह ने आरोपों का खंडन किया है.

हालाँकि इसके बाद भी अदानी समूह के शेयर की क़ीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

अब तक 135 अरब डॉलर का नुक़सान

इस समूह की बाज़ार पूँजी में 135 अरब डॉलर का नुक़सान दर्ज किया गया है.

ये पहला मौक़ा है, जब अदानी समूह ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद किसी निवेश की जानकारी सार्वजनिक की हो.

जीक्यूजी की ओर से किए गए निवेश को अदानी समूह की चार कंपनियों में बाँटा जाएगा, जिनमें अदानी समूह की मुख्य कंपनी अदानी इंटरप्राइज़ेज शामिल है.

अदानी समूह के सीएफ़ओ जुगेशिंदर सिंह ने कहा है, "ये निवेश इस बात को रेखांकित करता है कि वैश्विक निवेशक अभी भी अदानी समूह से जुड़ी कंपनियों की प्रगति, कामकाज और प्रबंधन पर यक़ीन बनाए हुए हैं."

इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि अदानी ग्रुप जीक्यूजी को एक रणनीतिक निवेशक के रूप में देखता है.

जीक्यूजी के अध्यक्ष और मुख्य निवेश अदिकारी राजीव जैन

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निवेशक ने की अदानी की तारीफ़

जीक्यूजी के अध्यक्ष और मुख्य निवेश अधिकारी राजीव जैन ने कहा है कि वे मानते हैं कि इन कंपनियों में लंबे समय तक विस्तार होने की पर्याप्त संभावनाएँ हैं.

गौतम अदानी की तारीफ़ करते हुए राजीव जैन ने कहा कि अदानी को 'उनकी पीढ़ी के सबसे बेहतरीन उद्यमियों में गिना जाता है.'

अदानी समूह ने नियामक संस्थाओं की दी जानकारी में उन मीडिया रिपोर्ट्स का भी खंडन किया है, जिनमें ये दावा किया गया था अदानी समूह को एक सोवेरन वेल्थ फ़ंड से तीन अरब डॉलर का निवेश मिला है.

अदानी समूह की ओर से कहा गया है, "हम ये स्पष्ट करना चाहते हैं कि ये ख़बर सिर्फ़ एक अफ़वाह है और इस पर टिप्पणी करना अनुचित होगा."

अदानी, नेट एंडरसन

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सुप्रीम कोर्ट ने बनाई समिति

इससे पहले मंगलवार को भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने अदानी समूह पर हिंडनबर्ग रिसर्च की ओर से लगाए आरोपों की जाँच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया है.

ये समिति पूर्व जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में अगले दो महीने में अपनी जाँच रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी.

इस समिति में जस्टिस जेपी देवधर, बैंकर केवी कामथ, इन्फोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी, एसबीआई के पूर्व चेयरमैन ओपी भट्ट और सिक्योरिटी लॉ के विशेषज्ञ सोमशेखर सुंदरेशन को शामिल किया गया है.

हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया है कि अदानी समूह की कंपनियाँ दशकों से शेयरों में हेराफेरी और अकाउंटिंग फ़्रॉड में शामिल है.

इस रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि इन कंपनियों पर कर्ज़ इतना ज़्यादा है, जिसकी वजह से पूरा समूह आर्थिक रूप से बेहद जोख़िमभरी स्थिति में है.

अदानी समूह ने इन आरोपों का खंडन करते हुए इन्हें भारत पर हमला करार दिया है.

इसके साथ ही अदानी समूह ने ये भी कहा था कि इस रिपोर्ट का मक़सद अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च को फायदा पहुँचाना था और इस रिपोर्ट ने जो आरोप लगाए हैं, उनके संदर्भ में सबूत नहीं दिए हैं.

अदानी समूह की सात पंजीकृत कंपनियाँ हैं, जो एयरपोर्ट्स, ऊर्जा, पोर्ट से लेकर रिटेल जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं.

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