अदानी पर मोदी की ख़ामोशी के क्या हैं मायने?

इमेज स्रोत, SANSAD TV
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संसद में दिए अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जानेमाने कारोबारी गौतम अदानी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्ते को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे.
राहुल गांधी का कहना था कि गौतम अदानी की कामयाबी का मुख्य कारण पीएम मोदी से उनकी निकटता है. बाद में स्पीकर ने राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को संसदीय कार्यवाही को रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दे दिया. इस कारण राहुल गांधी के भाषण का पूरा विवरण यहां नहीं दिया जा सकता है.
नरेंद्र मोदी जब बुधवार को धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए खड़े हुए तो सदन समेत सभी लोगों की निगाहें इसी पर टिकी थीं कि राहुल गांधी के आरोप पर मोदी क्या जवाब देते हैं.
मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में क़रीब डेढ़ घंटे तक भाषण दिया लेकिन उन्होंने पूरे भाषण में ना तो गौतम अदानी का नाम लिया और ना ही उनके बारे में इशारों में ही कोई चर्चा की.
प्रधानमंत्री की अदानी के मामले में ख़ामोशी पर नेताओं से लेकर आम लोग अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
ख़ुद राहुल गांधी ने कहा, "मैं संतुष्ट नहीं हूं. पीएम के बयान से सच्चाई का पता चलता है. अगर (अदानी) मित्र नहीं हैं, तो (पीएम) कहते कि ठीक है, इन्क्वायरी करवा देता हूं, लेकिन इन्क्वायरी की बात तक नहीं हुई. इससे क्लियर है कि प्रधानमंत्री उनकी रक्षा कर रहे हैं. उन्हें प्रमोट कर रहे हैं."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी ट्वीट किया, "'विचारक' ने चार सवाल पूछे थे, 'प्रचारक' एक का भी जवाब नहीं दे सके."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
शिव सेना की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, "अदानी ग्रुप के प्रवक्ता और सेल्समैन ऑफ़ द ईयर अवार्ड जाता है माननीय प्रधानमंत्री जी को."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 3
मोदी के राजनीतिक विरोधी कहते हैं कि इससे ज़ाहिर है कि वो इस मामले को इसी तरह से पेश करेंगे, लेकिन आम लोगों के मन में यह सवाल तो उठ ही रहा है कि आख़िर मोदी ने सदन में उन आरोपों का जवाब क्यों नहीं दिया और अदानी पर पूरी तरह चुप्पी क्यों साध ली.
बीजेपी की राजनीति पर बारीक नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी इसके दो कारण बताते हैं.

इमेज स्रोत, ANI
विजय त्रिवेदी इसे तकनीकी और रणनीतिक कारणों के मद्देनज़र देखते हैं. वो कहते हैं कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर सरकार आम तौर पर अपने कामकाज को विस्तार से बताती है.
उनके अनुसार मोदी ने यही किया है. तकनीकी कारण का ज़िक्र करते हुए विजय त्रिवेदी कहते हैं कि लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण के अधिकतर हिस्सों को लोकसभा अध्यक्ष के आदेश पर हटा दिया गया था तो प्रधानमंत्री उस बात का जवाब क्या देते जो सदन की कार्यवाही का हिस्सा ही ना हो.
लेकिन यह सिर्फ़ तकनीकी मामला नहीं है. रणनीति का ज़िक्र करते हुए विजय त्रिवेदी कहते हैं कि प्रधानमंत्री राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देकर उनको (राहुल गांधी) उतनी अहमियत नहीं देना चाहते हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
लोकसभा में जब राहुल गांधी बोल रहे थे तो उस समय प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री कोई भी सदन में मौजूद नहीं था.
विजय त्रिवेदी के अनुसार यह बीजेपी की रणनीति का हिस्सा था या नहीं यह कहना तो मुश्किल है लेकिन इसका संदेश बिल्कुल साफ़ है कि बीजेपी राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लेती है.
वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी लोकसभा में बहस के दौरान वहीं मौजूद थीं.
बीबीसी के पॉडकास्ट दिनभर में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि सब लोग इंतज़ार कर रहे थे कि प्रधानमंत्री ज़रूर इस बारे में कुछ बोलेंगे लेकिन ऐसा लगता है कि बीजेपी और प्रधानमंत्री दोनों ने एक रणनीति के तहत अदानी मामले से पूरी तरह अपना पल्ला झाड़ लिया है.
बीजेपी पर लंबे समय से नज़र रखने वाली वरिष्ठ पत्रकार राधिका रामासेशन भी मानती हैं कि बीजेपी और मोदी सरकार अदानी मामले पर कुछ भी बोलने से कतरा रही है.
उनके अनुसार पार्टी की यही लाइन है कि इस मामले में सेबी या आरबीआई को जो करना है वो करेंगे लेकिन पार्टी या सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है और यही कारण है कि मोदी ने सदन में अपने भाषण के दौरान अदानी का ज़िक्र तक नहीं किया.

इमेज स्रोत, ANI
सदन में मोदी का चुनावी भाषण?
मोदी ने दोनों सदनों में क़रीब डेढ़ घंटे तक चले अपने भाषण में किसान, मुफ़्त राशन, पक्के घर, रसोई गैस, टीकाकरण, स्टार्टअप, हाइवे, रेलवे लाइन, एयरपोर्ट से लेकर जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत तक का ज़िक्र किया.
इसके अलावा उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए उन्हें भ्रष्टाचार, महंगाई से लेकर चरमपंथी हमलों तक के लिए ज़िम्मेदार क़रार दिया.
ऐसे में बहुत से लोग कह रहे हैं कि मोदी ने एक तरह से 2024 का चुनावी बिगुल बजा दिया है. लेकिन विजय त्रिवेदी ऐसे किसी आकलन से सहमत नहीं हैं.
वो कहते हैं कि मोदी जब भी बोलते हैं, हर बार उनका भाषण चुनावी भाषण ही लगता है. उनके अनुसार मोदी से पहले के प्रधानमंत्री जब भी सदन में बोलते थे वो बहुत ही शांत होकर बोलते थे लेकिन मोदी बिल्कुल अलग तरह से बोलते हैं.
विजय त्रिवेदी कहते हैं, "मोदी ओरेटरी (भाषण कला) के साथ बोलते हैं और हमें इस तरह के भाषण सुनने की आदत नहीं है. यह शब्दों का नहीं मोदी के ओरेटरी का कमाल है."
विजय त्रिवेदी कहते हैं कि मोदी ने दोनों ही दिन न तो कोई नई बात कही और ना ही कोई नई घोषणा की, इसलिए इसे चुनावी भाषण कहना बिल्कुल ग़लत है.
लेकिन यह भी सच है कि कोई भी नेता जब कुछ बोलता है तो चुनाव तो उसके दिमाग़ में हमेशा ही चलता रहता है.
विजय त्रिवेदी के अनुसार मोदी और बीजेपी को लगता है कि 2024 का चुनाव तो वह जीत ही जाएंगे, इसलिए अब वो 2047 की बात कर रहे हैं. नीरजा चौधरी का भी मानना है कि मोदी और बीजेपी इसी तरह का इशारा दे रहे हैं कि 2024 का चुनाव बीजेपी ही जीत रही है.

इमेज स्रोत, Getty Images
राहुल बनाम मोदी छवि की जंग
राहुल गांधी ने हाल ही में कन्याकुमारी से लेकर श्रीनगर तक क़रीब 3500 किलोमीटर की 'भारत जोड़ो यात्रा' पूरी की है. उसके बाद उन्होंने संसद में प्रधानमंत्री पर आक्रामक तरीक़े से हमले किए.
ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के बीच वॉर ऑफ़ परसेप्शन (धारणा की लड़ाई) चल रहा है और अगर ऐसा है तो इसमें कौन किस पर भारी पड़ रहा है.
विजय त्रिवेदी के अनुसार 'भारत जोड़ो यात्रा' और सदन में ज़ोरदार भाषण के बाद राहुल गांधी के समर्थकों के बीच उनकी रेटिंग में ज़रूर इज़ाफ़ा हुआ है लेकिन इससे बीजेपी और ख़ासकर नरेंद्र मोदी के समर्थकों पर कोई असर नहीं पड़ा है.
विजय त्रिवेदी कहते हैं, "रफ़ाल सौदा, पेगासस और अब अदानी तीन ऐसे मुद्दे थे जिसको लेकर विपक्ष और ख़ासकर राहुल गांधी ने मोदी पर ख़ूब हमला किया था. लेकिन इन तीनों से अभी तक मोदी की छवि पर कोई असर नहीं हुआ है."
वो कहते हैं कि अगर राहुल गांधी और विपक्ष इसे संसद से निकालकर सड़क तक ले जाएं और फिर लगातार लड़ते रहें तब हो सकता है कि कुछ असर हो.
'मोदी सरकार घिरी हुई है'
लेकिन नीरजा चौधरी कहती हैं कि सरकार इस मामले में घिरी हुई दिख रही है.
वो कहती हैं, "अदानी का मामला मेरे ख़याल में नौ साल में मोदी के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है और इसका डैमेज कंट्रोल वो अपने आप को इससे डिस्टेंस (दूर) करके करेंगे."
राधिका रामासेशन के अनुसार भले ही लोकसभा अध्यक्ष ने राहुल गांधी के भाषण को हटाने का आदेश दे दिया हो लेकिन जनता में एक संदेश तो चला ही गया है.
वो कहती हैं कि मोदी सरकार और बीजेपी को कभी ना कभी अदानी को लेकर लगाए गए आरोपों का जवाब देना ही पड़ेगा.
वो कहती हैं, "सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय मीडिया ही इसको नहीं उठा रही हैं. बाहरी देशों के बैंक जिनका अदानी से बिज़नेस है वो भी अपने समझौतों को या ता बदल रहे हैं या रद्दकर रहे हैं. पहली दफ़ा भारत के किसी एक स्कैम का वैश्विक प्रभाव देखने को मिल रहा है."
राधिका रामासेशन कहती हैं कि सदन में मोदी ने अपनी सरकार के कामकाज का इसलिए इतना ज़्यादा ज़िक्र किया क्योंकि वो दबाव में हैं और अपने और अपनी सरकार के बचाव में ही उन्होंने इतना कुछ कहा.
उनके अनुसार आने वाले दिनों में बीजेपी जनता के बीच यही प्रचार करेगी कि मोदी सरकार भारत की जनता के लिए इतना कुछ कर रही है लेकिन विपक्ष उनपर कीचड़ उछाल रहा है और इतने लोकप्रिय प्रधानमंत्री को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है.
राधिका रामासेशन के अनुसार, "राहुल गांधी ने अपनी बात ज़ोरदार तरीक़े से रख दी है और लोग उसकी चर्चा कर रहे हैं. लेकिन बीजेपी की जवाबी रणनीति बहुत प्रभावी नहीं दिख रही है."
लेकिन शायद सबसे बेहतर तरीक़े से इसकी व्याख्या करते हुए नीरजा चौधरी कहती हैं, "लोग कह रहे हैं कि बहुत दिनों के बाद संसद में जान आ गई."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















