आईपीएल 2024: वो पांच कारण जिनकी वजह से गुजरात टाइटंस ट्रॉफ़ी की रेस से हुई बाहर

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- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
पिछले सीज़न के फ़ाइनल में खेलने वाली गुजरात टाइटंस की टीम आईपीएल 2024 की दौड़ से बाहर हो गई है.
सोमवार रात अहमदाबाद में बारिश की वजह से कोलकाता के खिलाफ़ उनका मैच रद्द कर दिया गया और इसके साथ ही जो थोड़ी बहुत भी उम्मीद गुजरात के पास प्लेऑफ़ में पंहुचने की थी वो खत्म हो गई.
इस तरह मुंबई और पंजाब के बाद गुजरात तीसरी टीम है जो टाइटल की रेस से बाहर हो गई है.
हालांकि गुजरात के पास एक मैच और बचा है लेकिन 11 अंकों पर खड़ी ये टीम जीत कर भी 13 पर ही पंहुचेगी जो टूर्नामेंट में आगे बढ़ने के लिए नाकाफ़ी होगा.
पिछले दो सीज़न में शानदार प्रदर्शन करने वाली गुजरात टाइटंस इस साल के निराशाजनक खेल से टीम के फ़ैस भी हताश हैं.
साल 2022 में डेब्यू करने वाली गुजरात टाइटंस ने पहली ही बाज़ी में खिताब जीत लिया था.
वहीं, पिछले साल वो चेन्नई से फाइनल में डीएलएस मेथड से हारे थे और फिर भी दूसरे स्थान पर आकर सम्मानजनक पोज़ीशन बनाई थी.
आख़िर क्या वजह रही की इस साल गुजरात के प्रदर्शन में ऐसी गिरावट देखने को मिली?

1. शुभमन गिल का बैटिंग फॉर्म

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पिछले सीज़न गुजरात के नंबर दो पर रहने की सबसे बड़ी वजह थी शुभमन गिल का फॉर्म.
उस साल गिल ने 17 पारियों में लगभग 60 की औसत से 890 रन बनाए. उन्होंने इस दौरान 3 शतक और 4 अर्धशतक लगाए.
गिल के बल्ले से पिछले साल 33 छक्के निकले जिसने उन्हें इस लिस्ट में तीसरा स्थान दिया.
60 का औसत और 158 की स्ट्राइक रेट ने निश्चित किया की गुजरात को लगभग हर मैच में अच्छी शुरुआत मिली और टीम के पास रनों की कई कमी नहीं रही.
लेकिन इस साल गिल की बैटिंग में वो धार नहीं दिखी. अब तक 12 पारियों में उन्होंने 426 रन बनाए हैं.
उनका औसत 60 से गिरकर 38 पर आ गया है और स्ट्राइक रेट में भी कमी देखने को मिली है.
गिल ने 10 मई को चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ शतक लगाया जिसकी वजह से उनका औसत थोड़ा सुधर गया नहीं तो पहले 10 मैचों में जब गुजरात को जीत की ज़रूरत थी, गिल का बल्ला खामोश ही रहा.
हालांकि साई सुदर्शन ने 500 से उपर रन बनाकर कुछ भरपाई ज़रूर की लेकिन गुजरात की बैटिंग औसत रही.
2. मोहम्मद शमी का ना होना

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गुजरात की दूसरी सबसे बड़ी कमज़ोरी रही मोहम्मद शमी की गैर-मौजूदगी.
इसी साल फ़रवरी में ख़बर आई की स्विंग और सीम बॉलिंग के मास्टर मोहम्मद शमी बाएं टखने में चोट की वजह से आईपीएल में हिस्सा नहीं ले पाएंगे.
गुजरात के लिए ये बेहद बुरी ख़बर थी क्योंकि पिछले साल उनकी गेंदबाज़ी की बागडोर शमी के हाथों में ही थी.
2023 में 17 पारियों में शमी ने 18.64 की औसत से 28 विकेट लिए थे. उनकी इकॉमनी 8.03 की रही जो मॉडर्न टी-20 में अच्छा माना जाता है.
पिछले सीज़न औसतन हर 14वीं गेंद पर उन्हें विकेट मिल रहे थे और दो बार उन्होंने एक ही पारी में 4 विकेट निकाले.
जिस तरह गिल बैटिंग में शानदार शुरुआत दिलवा रहे थे उसी तरह शमी भी गेंदबाज़ी में गुजरात को जल्दी बढ़त दिला दे रहे थे.
लेकिन इस साल ऐसा संभव नहीं हो पाया क्योंकि शमी नहीं थे और दूसरे गेंदबाज़ों नें उनकी कमी पूरी नहीं की.
3. गेंदबाज़ी में धार नहीं

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ऐसा नहीं है कि गेंदबाज़ी में गुजरात को सिर्फ शमी की कमी खली, टीम के बाकी गेंदबाज़ों ने भी पिछले साल से काफ़ी खराब प्रदर्शन किया.
पिछले सीज़न सबसे अधिक विकेट लेने की लिस्ट में पहले तीन खिलाड़ी गुजरात के थे.
मोहम्मद शमी ने तो 28 विकेट लिए ही थे, उनसे सिर्फ एक विकेट कम, यानी 27 विकेट, दो गेंदबाज़ों को हासिल थे.
मोहित शर्मा ने चौंका देने वाली 13 की औसत से 27 विकेट लिए जबकि राशिद ख़ान ने 20 की औसत से 27 विकेट गिराए.
इन दोनों की इकॉनमी भी 8 के दायरे में ही रही यानी ये विकेट भी ले रहे थे और किफ़ायती भी साबित हो रहे थे. इनके अलावा नूर अहमद ने भी 16 अहम विकेट लिए थे.
अब ज़रा इन गेंदबाज़ों के इस साल के प्रदर्शन पर नज़र डालते हैं. मोहित शर्मा 13 विकेटों के साथ सबसे ज्यादा विकेट लेने वालों की सूची में 20वें नंबर पर हैं. उनका औसत भी लगभग दोगुना हो गया है.
राशिद खान ने 12 पारियों में सिर्फ 10 विकेट लिए हैं और नूर अहमद ने 8. ये आंकड़े साफ़ बताते हैं कि गुजरात की बॉलिंग का असर पिछले साल से लगभग आधा रह गया है.
4. गुजरात के विदेशी खिलाड़ियों का ना चल पाना

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चाहे बल्लेबाज़ी में डेविड मिलर हों या राशिद खान- दोनों के बल्ले पिछले साल के मुक़ाबले इस साल कम गरजे.
इनके अलावा केन विलियम्सन और हज़रत ओमरज़ाई की बैटिंग ने भी निराश किया.
बल्लेबाज़ी में पिछले साल विजय शंकर और साहा जैसे भारतीय खिलाड़ियों नें भी अच्छा योगदान दिया था जो इस साल नदारद दिखा और वो प्लेइंग इलेवन से भी निकाले गए.
वहीं, गेंदबाज़ी में भी राशिद खान, नूर मोहमम्द, जोशुआ लिटिल और जॉनसन जैसे गेंदबाज़ों ने कुछ खास नहीं किया.
आईपीएल की टीमों पर नज़र डालें तो वो टीमें बढ़िया प्रदर्शन करती हैं जिनमें भारतीय और विदेशी खिलाड़ी दोनों अहम योगदान देते हैं.
लेकिन गुजरात के लिए इस साल ना तो भारतीय खिलाड़ी चले और ना ही विदेशी खिलाड़ियों ने उनकी भरपाई की
5. हार्दिक पंड्या की कमी

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गुजरात टाइटंस की पहले दो साल की सफलता में उनकी टीम का रिलैक्स माहौल और खिलाड़ियों का खुश दिखना एक बड़ी वजह मानी गई थी.
टीम में इस माहौल को बनाने में कोच आशीष नेहरा के साथ साथ तब के कप्तान हार्दिक पंड्या का भी बड़ा रोल था.
लेकिन इस साल हार्दिक पंड्या ट्रांसफ़र में मुंबई इंडियंस चले गए.
उन्हें वहां वैसी सफलता नहीं मिल पाई है जैसा उन्होंने गुजरात के साथ हासिल किया था लेकिन नुक़सान गुजरात का भी हुआ है.
शुभमन गिल में वो करिश्माई कप्तानी नहीं दिखी है जो हार्दिक पंड्या की कप्तानी में झलकती थी.
बतौर खिलाड़ी भी पंड्या ने पिछले साल अच्छा योदगान दिया था.
बल्लेबाज़ी में वो आमतौर पर तीसरे नंबर पर आते थे और उन्होंने गुजरात के लिए 346 बहुमूल्य रन बनाए.
इस साल गुजरात ने कप्तान और बल्लेबाज़ हार्दिक पंड्या को बुरी तरह से मिस किया.
गुजरात के पास अब इस साल बस एक मैच बचा है.
गुरुवार को वो अपना आख़िरी मैच हैदराबाद के साथ खेलेंगे जिन्हें क्वॉलिफ़ाई करने के लिए शायद जीत की ज़रूरत होगी.
टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी गुजरात की टीम अपने गर्व के लिए खेलेगी और हैदराबाद को हराकर उनके रंग में भंग डालना चाहेगी.
देखना होगा कि क्या गुजरात टाइटंस के पास इतनी ताक़त बची हुई है या नहीं.
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