अभिषेक और ट्रेविस हेड के चौकों-छक्कों की बारिश में बह गई लखनऊ सुपर जायंट्स

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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
ट्रेविस हेड और अभिषेक शर्मा ने चौकों और छक्कों की बारिश करके सबसे तेज़ लक्ष्य पाकर, सनराइज़र्स हैदराबाद को मात्र 9.4 ओवरों में लखनऊ सुपर जायंट्स पर 10 विकेट की जीत दिला दी.
इस जोड़ी ने 166 रन के लक्ष्य को जिस अंदाज़ में हासिल किया है, वह आईपीएल की अन्य टीमों के लिए चेतावनी है.
इस जोड़ी ने लक्ष्य पाने के दौरान 14 छक्के और 16 चौके लगाए यानी 148 रन इस तरह जोड़े. दोनों खिलाड़ियों ने हर दूसरी गेंद पर चौका और छक्का लगाया. इस जीत से सनराइज़र्स 14 अंकों के साथ अंक तालिका में तीसरी स्थान पर आ गई है और वह प्लेऑफ़ में स्थान बनाने के और करीब पहुंच गई है.
कमाल की है हेड और अभिषेक की जोड़ी
ट्रेविस हेड ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने खिलाड़ी हैं पर अभिषेक ने जिस तरह से उनका साथ दिया है, उसने गेंदबाज़ों पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाई है.
लखनऊ के गेंदबाजों ने इस जोड़ी की लगाम कसने के लिए हर संभव प्रयास किया पर इस जोड़ी ने अपने आक्रामक अंदाज़ से गेंदबाज़ों को दबाव से निकलने ही नहीं दिया. कई बार तो लगा कि गेंदबाज़ समझ ही नहीं पा रहे हैं कि गेंद डालें तो कहां.
ट्रेविस हेड ने इस सीज़न में दूसरी बार 16 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया. उन्होंने 312 से ऊपर की स्ट्राइक रेट से खेलकर पांच चौके और पांच छक्के लगाए. वह 89 रन बनाकर नाबाद रहे, इसमें आठ चौके और आठ छक्के शामिल रहे.
अभिषेक भी धुनाई करने के मामले में हेड से पीछे नहीं रहे और उन्होंने 18 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया. इसमें उन्होंने छह चौके और चार छक्के लगाए. उन्होंने आठ चौकों और छह छक्कों से नाबाद 75 रन बनाए.
अभिषेक बने सिक्सर किंग

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अभिषेक शर्मा इस सीज़न में छक्के लगाने के मामले में केकेआर के सुनील नारायण को पीछे छोड़कर टॉप पर पहुंच गए हैं. अभिषेक ने अब तक सबसे ज्यादा 35 छक्के लगाए हैं. सुनील 32 छक्कों से दूसरे और हेड 31 छक्कों से तीसरे स्थान पर हैं.
ट्रेविस हेड ने कहा कि कोच डेनियल विटोरी और कप्तान कमिंस ने हम दोनों से आक्रामक अंदाज में खेलकर पॉवरप्ले का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने की सलाह दी थी, जो काम कर गई है. सही मायनों में अब यह टीम का अंदाज बन गया है.
अभिषेक ने मैच के बाद कहा कि ट्रेविस हेड के शुरुआत में ही छक्के लगाने से ही मुझे भी इस तरह ही खेलने की प्रेरणा मिली.
पॉवरप्ले बना दोनों में प्रमुख अंतर

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लखनऊ जब बल्लेबाज़ी कर रही थी, उस समय लग रहा था कि विकेट बहुत ही धीमा है और इस पर स्ट्रोक खेलना थोड़ा मुश्किल है. शुरुआत में ही क्विंटन डिकॉक और स्टॉयनिस के विकेट निकल जाने से बल्लेबाज़ दवाब में खेलते रहे. इससे गेंदबाज़ों को नपी-तुली गेंदबाज़ी करने में मदद मिली.
इस दबाव का ही परिणाम था कि लखनऊ पॉवरप्ले में अपना इस सीज़न का सबसे घटिया प्रदर्शन करके दो विकेट पर 27 रन ही बना सकी. इससे पहले उनका सबसे कमज़ोर प्रदर्शन 45 रन था.
इसके विपरीत सनराइज़र्स की पारी शुरू करने जब ट्रेविस हेड और अभिषेक शर्मा उतरे तो लगा कि वह किसी अन्य विकेट पर खेल रहे हैं. उन्होंने पॉवर प्ले में बिना किसी नुकसान के 107 रन बनाकर मैच का परिणाम को किसी हद तक तय कर दिया.
जीत में भुवी की भी रही अहम भूमिका
केएल राहुल के टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फैसला करने के बाद उनके ऊपर दबाव बनाने में भुवनेश्वर की कसी हुई गेंदबाजी की भी भूमिका अहम रही. भुवनेश्वर कुमार ने लखनऊ को डिकॉक और स्टॉयनिस के रूप में झटके ही नहीं दिए बल्कि किसी भी बल्लेबाज़ को अपनी गेंदों पर खुलकर खेलने की छूट नहीं दी.
भुवनेश्वर कुमार ने चार ओवरों में दो विकेट तो निकाले ही और महज़ 12 रन दिए. उनकी इकॉनमी रेट मात्र तीन रही. पर भुवनेश्वर कुमार को दोनों विकेट दिलाने में दो शानदार कैचों की प्रमुख भूमिका रही. डिकॉक के छक्का लगाने का प्रयास करने पर बाउंड्री लाइन पर खड़े नितीश रेड्डी बाउंड्री लाइन से थोड़ा बाहर छलांग लगाई और गेंद को अंदर उछालकर और फिर अंदर आकर कैच पकड़ा. वहीं स्टॉयनिस का कैच सनवीर सिंह ने ऊपर से नीचे की तरह डाइव लगाकर पकड़ा.
इसके उलट लखनऊ ने कुछ आसान कैचों को छोड़कर अपनी मुश्किलें ही नहीं बढ़ाई बल्कि उनकी फील्डिंग में भी धार की कमी दिखी. कई बार चौकों को रोका जा सकता था.
कप्तान पैट कमिंस भी योगदान देने में पीछे नहीं रहे. जब लखनऊ रनों को रफ़्तार देने का प्रयास कर रही थी, तब उन्होंने केएल राहुल को कैच कराया और फिर क्रुणाल पांड्या को डायरेक्ट थ्रो पर रन आउट करके लखनऊ की कमर तोड़ दी.
बडोनी और पूरन के प्रयासों पर फिरा पानी

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लखनऊ सुपर जायंट्स ने बहुत ही ख़राब शुरुआत करके टीम की स्थिति को बहुत कमज़ोर कर लिया था. उन्होंने 66 रन तक स्कोर पहुंचते चार विकेट ही नहीं खोए बल्कि 11.2 ओवर भी ज़ाया कर दिए थे. यह मौका था, जब उनके 125 तक पहुंचने की ही उम्मीद की जा रही थी.
इस स्थिति में बडोनी और निकोलस पूरन ने रनों को रफ़्तार देने का प्रयास किया और वह 52 गेंदों में 99 रन की अटूट साझेदारी बनाकर स्कोर को किसी तरह 165 रन तक पहुंचाने में सफल रहे.
आयुष बडोनी ने तो इस सीज़न में दूसरी बार मुश्किल हालात में अपने खेल को ऊंचाइयां देकर अर्धशतक बनाया. उन्होंने 30 गेंदों में 183 से ऊपर के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाज़ी करके नौ चौकों से 55 न बनाए.
आयुष की तरह ही निकलस पूरन ने 48 रनों की पारी खेली, जिसमें छह चौके और एक छक्का शामिल था. पूरन द्वारा आखिरी गेंद पर लगाया शॉट पर चौका थोड़ा विवादास्पद रहा. असल में इस मौके पर बाउंड्री लाइन के बाहर जाती गेंद को फील्डर ने पकड़कर अंदर फेंकने का प्रयास किया पर गेंद लाइन पर गिर गई, जिसे छक्का दिया जाना चाहिए था. यदि ऐसा किया जाता तो साझेदारी शतकीय होती और साथ ही पूरन का अर्धशतकी पूरा हो जाता.
यह दो रन बल्लेबाज के व्यक्तिगत रिकॉर्ड को तो सुधार सकते थे. लेकिन हेड और अभिषेक के खेलने के अंदाज के सामने इसके भी कोई मायने नहीं थे. इस जोड़ी के खेलने के अंदाज से तो अब लगने लगा है कि अब 300 रन बनना बहुत दूर नहीं है.
सनराइज़र्स हैदराबाद इस सीजन में 287 रन पहले ही बना चुकी है. इस मैच में हेड और अभिषेक इसी अंदाज में पहले बल्लेबाजी करते तो वह 300 के पार भी जा सकते थे. अब देखने वाली बात यह होगी कि इस सीजन में 300 का बैरियर पार होता है या नहीं.
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