गिल और सुदर्शन की बल्लेबाज़ी ने गुजरात टाइटंस की कैसी उम्मीदें जगा दी हैं?

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    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

पिछले दो सीज़न लगातार आईपीएल के फ़ाइनल में पहुंचने वाली और एक बार चैंपियन बनने वाली गुजरात टाइटंस के लिए मौजूदा सीज़न संघर्ष से भरा रहा है.

एक ओर उनके पुराने कप्तान (हार्दिक पांड्या) अपनी नयी टीम मुंबई इंडियंस को दिशा देने में जूझ रहे हैं. तो वहीं अचानक मिली कप्तानी ने गुजरात के नये कप्तान और उनके सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ शुभमन गिल पर दबाव बढ़ा दिया है.

शुक्रवार को चेन्नई सुपर किंग्स के ख़िलाफ़ मैच की शुरुआत से पहले अंक-तालिका में आख़िरी पायदान पर रहने वाली गिल की टीम ने टॉस हारने के बाद जब बल्लेबाज़ी का न्योता स्वीकार किया तो ऐसा लगा कि अचानक से ही कोई दूसरी ही टीम और दूसरे बल्लेबाज़ मैदान में उतरे हों.

टीम के सबसे अहम बल्लेबाज़ गिल इस मैच से पहले 11 मैचों में सिर्फ 32 की औसत और 137 के स्ट्राइक रेट के चलते आलोचनाओं से घिरे हुए थे.

इसके अलावा एक हफ्ते पहले वो टी-20 वर्ल्ड कप के लिए अंतिम 15 में अपनी जगह बनाने में नाकाम भी हुए थे.

दूसरे छोर पर भी उनका साथ देने वाले बल्लेबाज़ लगातार बदलते हुए दिख रहे थे और ओपनिंग जोड़ी के तौर पर उनकी टीम 27 की औसत और 131 की स्ट्राइक रेट से ही रन जोड़ पा रही थी.

सलामी जोड़ी ने बनाया रिकॉर्ड

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चेन्नई के ख़िलाफ़ साई सुदर्शन और गिल की जोड़ी ने दोहरे शतक की साझेदारी करते हुए कई रिकॉर्ड बना डाले.

इन दोनों के बीच 210 रनों की ये साझेदारी आईपीएल के इतिहास में पहले विकेट के लिए सिर्फ़ दूसरी बार दोहरे शतक वाली साझेदारी रही.

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केएल राहुल और क्विंटन डि कॉक ने साल 2022 में इतने ही रनों की साझेदारी ओपनर्स के तौर पर की थी लेकिन उन्होंने गिल-सुदर्शन के मुक़ाबले 17 गेंदें ज़्यादा खेली थीं.

गिल का शतक (55 गेंदों पर 6 छक्के और 9 चौकों की मदद से 104 रन) आईपीएल के इसिहास का 100वां शतक रहा तो उनके साथी सुदर्शन का शतक (51 गेंदों पर 103 रन जिसमें 7 छक्के और 5 चौके शामिल रहे) 101वां शतक रहा.

पहले 4 ओवर में इस जोड़ी ने सिर्फ 43 रन बनाये लेकिन इसके बाद से मिडिल ओवर्स में अचानक से इनके तेवर बदल गये.

7 से लेकर 15वें ओवर तक इस जोड़ी ने 132 रन ठोक डाले जो अब तक इस सीज़न में किसी भी टीम ने इतने रन, इतनी तेज़ी से नहीं बनाये थे.

हक़ीक़त तो ये है कि 9वें ओवर से लेकर 14वें ओवर तक इस जोड़ी ने सौ रन जोड़े जिलके चलते चेन्नई का आक्रमण पूरी तरह से भौचक्का दिखा.

रविंद्र जडेजा और मिचेल सैंटनर जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाज़ अपने कोटे के 4-4 ओवर की बजाए मिलकर ही सिर्फ़ 4 ओवर डाल पाये और उन्हें कोई भी कामयाबी तक नहीं मिली.

ये आंकड़े अपने आप में चेन्नई की मायूसी को बयान करने के लिए शायद काफ़ी हो. गिल-सुदर्शन की जोड़ी पहली पारी के 17वें ओवर में अलग हुई जब उनकी टीम के बाकी बल्लेबाज़ों को सिर्फ़ 3 ओवर की बल्लेबाज़ी करनी थी.

लड़खड़ाती रही चेन्नई

दुबे

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चेन्नई की टीम को पहले तीन ओवर की बल्लेबाज़ी में ही गुजरात के गेंदबाज़ों ने तारे दिखा दिये.

तीसरा ओवर ख़त्म होने से पहले ही चेन्नई ने तीन विकेट खो दिए. जीत के लिए 232 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए अंजिक्या रहाणे, रचिन रविंद्र और कप्तान रितुराज गायकवाड़ वापस पवेलियन लौट चुके थे.

इसके बाद से चेन्नई के लिए मैच में वापसी करना बेहद मुश्किल था लेकिन उनके अनुभवी विदेशी बल्लेबाज़ों ने कोशिश ज़रूर की.

डेरेल मिचेल ने धुआंधार अर्धशतक (34 गेंदों में 63 रनों की पारी) बनाया तो मोईन अली ने भी 36 गेंदों पर 56 रन बनाये. लेकिन, गुजरात के लिए मीडिम पेसर मोहित शर्मा ने अपने 4 ओवर के इस स्पैल में ना सिर्फ़ इन दोनों को चलता किया बल्कि सीज़न की शुरुआत सनसनीखेज़ तरीके से करने वाले शिवम दुबे को भी लंबी पारी खेलने से रोका.

वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया में चयन होने के बाद से दुबे सीज़न के शुरुआत वाली लयबद्ध आक्रामकता को तलाशने की कोशिश ही करते दिख रहे हैं. दुबे ने 13 गेंदों पर 21 रन बनाये. ‘

हमेशा की तरह धोनी वाली पारी

धोनी

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जैसा कि अमूमन हर मैच में होता आया है इस मैच में भी वही हुआ. महेंद्र सिंह धोनी आखिरी लम्हों में आते हैं, चमत्कारिक तरीके से बल्ला घुमाते हैं, छक्के लपेटते हैं, दर्शकों का भरपूर मनोरंजन भी होता है लेकिन अक्सर ये पारियां मैच का नतीजा बदलने में नाकाम ही दिखती हैं.

सिर्फ 11 गेंदों पर धोनी ने 3 छक्के और 1 चौके की मदद से 26 रन तो ज़रूर बनाये लेकिन किसी भी समय में ऐसा नहीं लगा की गुजरात की जीत ख़तरे में हो.

दबाव वाले लम्हे में लेग स्पिनर राशिद ख़ान ने अपने अनुभव का परिचय देते हुए 4 ओवर में ना सिर्फ केवल 38 रन ही दिये बल्कि दो विकेट भी झटके.

गुजरात ने अचानक से ही इस जीत के बाद जहां अपने प्ले-ऑफ की उम्मीदों में एक नई जान फूंकी है. वहीं डिफेंडिंग चैंपियन चेन्नई के लिए अंतिम चार में पहुंचने के आसार पर संदेह पैदा कर दिया है.

रविवार को अब चेन्नई का मुकाबला जहां घर में राजस्थान रॉयल्स से होगा वहीं बेंगलुरु के ख़िलाफ़ आख़िरी लीग मैच रॉयल चैलेंजर्स के घर में उनके लिए ‘करो या मरो’ वाला मैच साबित हो सकता है.

मामला अब पूरी तरह से चेन्नई के लिए आख़िर में नेट रनरेट पर जाकर फंस सकता है जो इस मैच में करारी हार के बाद और प्रभावित हुआ है.

चेन्नई का नेट रनरेट अब भी दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ से बेहतर ही है जो उन्हीं की तरह दर्जन मैच खेलने के बाद 12 अंकों पर टिका हुआ है.

कुल मिलाकर देखा जाय तो मैन ऑफ़ द मैच गिल के शतक और उनके साथी सुदर्शन के शतक ने ना सिर्फ़ इस मैच का नतीजा बदला बल्कि आख़िरी हफ्ते में प्वाइंट्स टेबल में भी ज़बरदस्त हलचल मचा दी है.

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