शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों के चैट ग्रुप से लीक हुई जानकारी से पता चलीं ये पाँच बड़ी बातें

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इमेज कैप्शन, चैट के लीक होने के बाद डेमोक्रेट जांच की मांग कर रहे हैं.
    • Author, पॉलिन कोला
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

अमेरिकी प्रशासन अब तक ट्रंप प्रशासन के भीतर सुरक्षा में गंभीर उल्लंघन को नहीं पचा पा रहा है.

यह कहानी है कि कैसे अटलांटिक मैग्ज़ीन के पत्रकार जेफ़्रे गोल्डबर्ग को एक मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म सिग्नल पर एक ग्रुप में जोड़ दिया गया. इस ग्रुप में उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और रक्षा मंत्री पीट हेगसेट के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्टज़ भी थे.

और वहां बात हो रही थी, यमन में ईरान समर्थित हूती ग्रुप पर हमले की. अमेरिका ने ये हमला 17 मार्च किया था. इस हमले में क़रीब 53 लोग मारे गए थे और 98 लोग घायल हुए.

हूती स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार मरने वालों में पांच बच्चे थे.

गोल्डबर्ग ने कहा कि बमबारी से दो घंटे पहले उन्हें हमले की गोपनीय योजना दिख गई, जिसमें हथियारों के पैकेज, टार्गेट और समय का ज़िक्र किया गया था. इस लीक हुई बातचीत में कुछ प्रमुख बातें पता चली हैं.

गोल्डबर्ग ने जो चैट सार्वजनिक की है उससे ये पाँच बड़ी बातें पता चली हैं -

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1. वेंस ने ट्रंप की सोच पर सवाल खड़ा किया

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सार्वजनिक हुई चैट में जेडी वेंस नाम के अकाउंट से लिखा गया: "मुझे लगता है कि हम ग़लती कर रहे हैं."

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उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वेज़ नहर में पोतों पर हमला करने वाले हूती बलों को निशाना बनाना, अमेरिका से अधिक यूरोप के हितों को फ़ायदा करेगा, क्योंकि उस नहर से यूरोप अधिक व्यापार करता है.

वेंस ने जोड़ा कि उनके बॉस को शायद इस बात का पता नहीं है कि अमेरिका कार्रवाई, यूरोप को मदद कर सकती है.

वेंस ने कहा, "मुझे नहीं पता कि राष्ट्रपति जानते हैं या नहीं कि यूरोप को उनके संदेश के साथ अभी ये कितना मेल खाता है. इसके अलावा ये भी ख़तरा है कि तेल के दामों में ठीक-ठाक या बहुत अधिक वृद्धि हो सकती है."

गोल्डबर्ग के अनुसार, उप राष्ट्रपति ने यहां तक कहा कि वो बहुमत का समर्थन करेंगे लेकिन इसे एक महीने तक टालना पसंद करेंगे.

गोल्डबर्ग ने अपने लेख में रिपोर्ट किया कि बाद में जेडी वेंस के प्रवक्ता ने उन्हें एक बयान भेजा जिसमें लिखा गया था कि इस मुद्दे पर "बाद में ट्रंप और वेंस के बीच पूर्ण सहमति बन गई है."

सत्ता में आने के बाद से ही ट्रंप ने यूरोपीय नेटो सहयोगियों की आलोचना की और रक्षा ख़र्च बढ़ाने की उनसे अपील करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि यूरोप को अपने हितों की रक्षा के लिए ख़ुद ज़िम्मेदारी लेने की ज़रूरत है.

2. यूरोप पर 'मुफ़्तखोरी' का आरोप

ट्रंप प्रशासन लीक
इमेज कैप्शन, इस चैट ग्रुप में उप राष्ट्रपति, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा मंत्री भी शामिल हैं.

हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अमेरिका सैन्य हमला कर सकता है और करना चाहिए, इस बात पर हुई बहस से वेंस प्रभावित नहीं हुए.

उन्होंने रक्षा मंत्री से कहा, "अगर आप सोचते हैं कि हमें ये करना चाहिए तो आगे बढ़ते हैं. यूरोप को फिर से मदद करने से मुझे बस नफ़रत है."

हेगसेट ने जवाब दिया, "यूरोप की मुफ़्तखोरी के प्रति आपकी नफ़रत से मैं सहमत हूं. यह बहुत दयनीय है."

ग्रुप में मौजूद 'एसएम' नामके एक सदस्य ने सुझाव दिया कि हमले के बाद, "अमेरिका को मिस्र और यूरोप को बता देना चाहिए कि हम उनसे बदले में क्या चाहते हैं."

उन्होंने पूछा, "अगर यूरोप भरपाई नहीं करता तब क्या होगा?"

उस सदस्य ने कहा, "अगर बड़ी क़ीमत देकर अमेरिका सफलतापूर्वक समुद्री परिवहन की आज़ादी को बहाल कर लेता है तो इसके बदले कुछ आर्थिक लाभ भी पाने की ज़रूरत है."

3. हमले के बादः इमोजीज़ और प्रार्थनाएं

चैट लीक में शामिल लोग

गोल्डबर्ग के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख ने हमले के बाद तीन इमोजी पोस्ट किएः "एक मुठ्ठी, एक अमेरिकी झंडा और आग."

गोल्डबर्ग ने कहा कि मध्य पूर्व के लिए विशेष दूर स्टीव विटकॉफ़ ने जवाब में पांच इमोजी बनाएः हाथ जोड़ते हुए, "बाइसेप्स दिखाते हुए और दो अमेरिकी झंडे."

उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो और व्हाइट हाउस के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ सूसी वाइल्स ने भी समर्थन किया.

जब हमले का अपडेट दिया गया तो वेंस ने कहा, "मैं जीत के लिए प्रार्थना करूंगा."

गोल्डबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रुप के दो अन्य सदस्यों ने प्रार्थना वाले इमोजी जोड़े.

4. ईरान को काबू करने में बाइडन नाकाम

बाइडन

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वेंस की इस चिंता पर कि यह कार्रवाई यूरोप पर ट्रंप के संदेश के ख़िलाफ़ देखी जा सकती है, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने लिखाः "वीपी (उप राष्ट्रपति) : मैं आपकी चिंता समझता हूं और POTUS (ट्रंप) के साथ इस मुद्दे को उठाने के लिए आपका समर्थन करता हूं. कुछ अहम बाते हैं, इनमें से अधिकांश के बारे में जानना मुश्किल है कि उनके क्या नतीजे होंगे (आर्थिक, यूक्रेन शांति, ग़जा आदि)."

"मुझे लगता है कि संदेश बहुत कड़े होने वाले हैं, इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि ये क्या होगा- कोई नहीं जानता हूती कौन हैं- इसीलिए हमें इन पर फ़ोकस होने की ज़रूरत हैः 1) बाइडन असफल हुए और 2) ईरान इन्हें फ़ंड करता है."

ट्रंप प्रशासन ईरान के प्रति नरमी के लिए जो बाइडन पर आरोप लगाता रहा है.

5. वाल्ट्ज़ निशाने पर

माइक वॉल्ट्ज़

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इमेज कैप्शन, इस विवाद से माइक वॉल्ट्ज़ पर दबाव बढ़ गया है.

गोल्डबर्ग ने कहा कि उन्हें 11 मार्च को सिग्नल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर माइकल वाल्ट्ज नामक अकाउंट से एक अनचाहा निमंत्रण मिला, और फिर दो दिन बाद उन्हें यमन के बारे में ग्रुप चैट में जोड़ दिया गया.

राष्ट्रपति इस ग्रुप का हिस्सा नहीं थे लेकिन ट्रंप के क़रीबी सहयोगी इसमें थे.

शुरू में तो गोल्डबर्ग ने सोचा कि यह कोई धोखाधड़ी है, लेकिन उन्हें जल्द ही लगा कि यह असली है.

यह पूरा मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पर दबाव बढ़ा रहा है क्योंकि हाउस और सीनेट में डेमोक्रेट इसकी पूरी जांच की मांग कर रहे हैं.

जब सोमवार को उनसे इस पूरे मामले के बारे में पूछा गया तो ट्रंप ने कहा कि उन्हें किसी बात की जानकारी नहीं है लेकिन वह वाल्ट्ज़ के साथ खड़े हैं.

रक्षा मंत्री ने भी कहा कि कोई भी सीक्रेट लीक नहीं हुआ है.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "कोई भी युद्ध विमानों के बारे में बातें नहीं कर रहा था."

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