टैरिफ़ से जुड़ा ट्रंप का एक और बड़ा फ़ैसला, भारत की बढ़ सकती है चिंता

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार भारत को "टैरिफ़ किंग" बता चुके हैं.
    • Author, अंशुल सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"ड्रिल, बेबी, ड्रिल". अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब दूसरी बार सत्ता में आए तो उन्होंने यह नारा दिया.

इस नारे के पीछे डोनाल्ड ट्रंप का मक़सद था कि अमेरिकी तेल कंपनियां ज़्यादा से ज़्यादा तेल का उत्पादन करें और तेल की क़ीमतों में कमी आए.

लेकिन अब ट्रंप ने जो फ़ैसला लिया है वो इस नारे के उलट दिखाई पड़ता है. डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला से तेल ख़रीदने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने का फ़ैसला किया है.

संभव है कि अमेरिका को इस फ़ैसले से फ़ायदा हो लेकिन इससे वैश्विक बाज़ार में तेल की क़ीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

साथ ही ट्रंप का यह फ़ैसला भारत और चीन समेत एशियाई देशों को प्रभावित कर सकता है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता पैदा होने का ख़तरा भी है.

वेनेज़ुएला ने ट्रंप के 25 प्रतिशत टैरिफ़ वाले फ़ैसले अवैध और हताशापूर्ण बताते हुए सिरे से ख़ारिज किया है.

वहीं, भारत ने ट्रंप के इस फ़ैसले पर अब तक आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

वेनेज़ुएला के तेल भंडार दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक हैं और तेल का उत्पादन वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है.

लाल रेखा

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

लाल रेखा
डोनाल्ड ट्रंप का बयान

ट्रंप ने और क्या-क्या कहा?

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथसोशल पर इस फ़ैसले से जुड़ी जानकारी साझा की.

ट्रंप ने लिखा, "वेनेज़ुएला संयुक्त राज्य अमेरिका और हमारे समर्थन से दी गई स्वतंत्रता के प्रति बहुत शत्रुतापूर्ण रहा है. इसलिए, कोई भी देश जो वेनेज़ुएला से तेल या गैस खरीदता है, उसे हमारे देश के साथ किए जाने वाले किसी भी व्यापार पर अमेरिका को 25% का टैरिफ़ देना होगा. सभी दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और उन्हें रजिस्टर्ड किया जाएगा. टैरिफ़ 2 अप्रैल, 2025 को अमेरिका में मुक्ति दिवस पर लागू होगा."

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच अवैध प्रवासियों को लेकर तनाव चरम पर है. अपने पोस्ट में भी ट्रंप ने अवैध प्रवासियों का मुद्दा उठाया है.

ट्रंप ने दावा किया, "वेनेज़ुएला ने जानबूझकर और धोखे से कई दसियों हज़ार गंभीर किस्म के अपराधियों को भेजा है, जिनमें से कई हत्यारे और बहुत ही हिंसक स्वभाव के लोग हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका में भेजे गए गिरोहों में ट्रेन डी अरागुआ भी शामिल है, जिसे "विदेशी आतंकवादी संगठन" का नाम दिया गया है. हम उन्हें वेनेज़ुएला वापस भेजने की प्रक्रिया में हैं."

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला तेल संपदा से भरपूर है और इसे रूस का समर्थक माना जाता है. अमेरिका ने वेनेज़ुएला में निकोलस मादुरो की सरकार को मान्यता नहीं दी है.

ट्रंप के इस फ़ैसले पर वेनेज़ुएला का कहना है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का घोर उल्लंघन कर रहा है.

विदेश मंत्री ईवान खील ने एक बयान में कहा , "यह मनमाना, अवैध और हताशापूर्ण तरीक़ा हमारे संकल्प को प्रभावित करने के बजाय, हमारे देश के ख़िलाफ़ लगाए गए सभी प्रतिबंधों की ज़बरदस्त विफलता की पुष्टि करता है."

बयान में आगे कहा गया, "वेनेज़ुएला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषित आक्रामकता को दृढ़तापूर्वक और स्पष्ट रूप से अस्वीकार करता है, जो वेनेज़ुएला के साथ तेल और गैस में व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने का इरादा रखती है. सालों से, वेनेज़ुएला की जनता द्वारा अस्वीकार किए गए फासीवादी दक्षिणपंथ ने वेनेजुएला को अपने घुटनों पर लाने की उम्मीद के साथ आर्थिक प्रतिबंधों को बढ़ावा दिया है. वे (अमेरिका) असफल हो गए हैं."

वेनेज़ुएला का कहना है कि वह अपने अधिकारों का दावा करने और विश्व आर्थिक व्यवस्था के इस नए उल्लंघन की निंदा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों के समक्ष सभी उचित कार्रवाई करेगा.

ट्रंप प्रशासन के आदेश में कहा गया है कि टैरिफ़ तब तक लागू रहेगा जब तक कोई देश कम से कम एक साल के लिए वेनेज़ुएला के तेल आयात को बंद नहीं कर देता, हालांकि अमेरिका इसे समय से पहले रद्द करने का भी अधिकार रखता है.

भारत पर क्या असर होगा?

निकोल मादुरो की तस्वीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, वेनेज़ुएला में निकोलस मादुरो की सत्ता को अमेरिका मान्यता नहीं देता है.

भारत दुनिया में अमेरिका और चीन के बाद कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और वह अपनी ज़रूरत के लिए 80 प्रतिशत से ज़्यादा आयात पर निर्भर है.

भारत रूस, ईराक़, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और नाइजीरिया आदि से कच्चा तेल ख़रीदता है.

अमेरिका ने निकोलस मादुरो के 2018 के चुनावों में दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उनकी सरकार को दंडित करने के मक़सद से 2019 में वेनेज़ुएला पर सख़्त प्रतिबंध लगाए थे

अमेरिकी प्रतिबंधों के वजह से वेनेज़ुएला की सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए को तेल निर्यात करने से रोक दिया गया था.

भारत के आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के मुताबिक़, वेनेज़ुएला 2019 में भारत का पांचवां सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश था, जिसने भारतीय रिफ़ाइनरियों को 16 मिलियन टन कच्चा तेल उपलब्ध कराया था. इसमें निजी क्षेत्र की रिफ़ाइनरियों की हिस्सेदारी ज़्यादा थी.

हालांकि, वर्तमान में भारत के कुल तेल आयात में वेनेज़ुएला की हिस्सेदारी 4.5 मिलियन बीपीडी से ज़्यादा है जो पहले की तुलना में बहुत कम है.

कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फ़र्म केपलर के मुताबिक़, भारत ने इस साल जनवरी में वेनेज़ुएला के कच्चे तेल का लगभग 65,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) और फरवरी में 93,000 बीपीडी आयात किया. एक बैरल में लगभग 159 लीटर कच्चा तेल होता है.

भारत को तेल आपूर्ति करने वाले देशों से संबंधित ग्राफ़िक्स
इमेज कैप्शन, ताज़ा आंकड़ों में रूस-यूक्रेन जंग के बाद रूस भारत को तेल आपूर्ति करने के मामले में शीर्ष पर पहुंच गया है.

नरेंद्र तनेजा ऊर्जा नीति और भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों के जानकार हैं. उनके मुताब़िक यह फ़ैसला बहुत अजीब है क्योंकि इससे दूसरे देशों पर पाबंदियां लग रही हैं.

नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "भारत आजकल बहुत ज़्यादा तेल वेनेज़ुएला से लेता नहीं है. भारत कुल आयात का सिर्फ़ 1.7 फ़ीसद तेल वेनेज़ुएला से आयात करता है. वो भी एक प्राइवेट रिफ़ाइनरी कंपनी आयात करती है. परेशानी का विषय यह है कि अमेरिका अपने हितों के लिए भारत जैसे मित्र देशों को संकट में डाल रहा है. आप दूसरे देशों पर इस तरह के टैरिफ़ क्यों लगा रहे हैं जबकि आप ख़ुद वेनेज़ुएला से लगातार तेल ख़रीद रहे हैं."

ट्रंप के फ़ैसले के बाद वैश्विक बाज़ार में तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, ट्रंप की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों में एक फ़ीसद की बढ़ोतरी हुई है.

ब्रेंट क्रूड ऑयल 1.2% बढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल हो गया और डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल 1.2% बढ़कर 69.11 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.

तेल की क़ीमतों में आए उछाल पर नरेंद्र तनेजा कहते हैं, "अगर यह टैरिफ़ वॉर जारी रहेगा तो तेल की क़ीमतें लगातार बढ़ेंगी. भारत की चिंता का विषय यह है. कच्चे तेल में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है. ऐसे में अगर तेल की क़ीमत एक डॉलर भी बढ़ती है तो भारत को हज़ारों करोड़ रुपए का नुक़सान हो जाता है."

'वेनेज़ुएला से संबंध रखना भारत के हित में'

नरेंद्र तनेजा का बयान

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कई बार इस बात को दोहरा चुके हैं कि अगर आर्थिक स्थिति अनुकूल रही तो भारत वेनेज़ुएला से तेल ख़रीदने को तैयार है.

भारत सरकार का मानना है कि वैश्विक तेल बाज़ार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए भारत मौजूदा आपूर्तिकर्ताओं से सस्ता तेल ख़रीदेगा.

पिछले महीने फ़रवरी में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वेनेज़ुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज़ के साथ मुलाक़ात की थी. इस दौरान पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर जानकारी दी थी कि भारतीय कंपनियों ने वेनेज़ुएला में करीब 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है.

इस मुलाक़ात में दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को बनाए रखने, आपसी लाभ और मौजूदा मुद्दों को सुलझाने संबंधित बातचीत हुए थी.

डेल्सी रोड्रिग्ज़ ने पिछले साल अक्तूबर में भारत का दौरा किया था और उन्होंने भारत के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंध बढ़ाने की बात कही थी.

नरेंद्र तनेजा का मानना है कि वेनेज़ुएला से दीर्घकालिक संबंध रखना भारत के हित में हैं.

इसके पीछे की वजह बताते हुए तनेजा कहते हैं, "वेनेज़ुएला से लंबे समय के लिए संबंध रखना हमारे हित में हैं क्योंकि उनके पास तेल के भारी भंडार हैं. वेनेज़ुएला का ऑयल हैवी होता है. इसे रिफ़ाइन करने में भारत की रिफाइनरियां अग्रणी हैं. दूसरी तरफ़ भारत आने वाले कई दशकों तक तेल पर निर्भर रहेगा इसलिए हमें अपने लिए ज़्यादा से ज़्यादा विकल्प खुले रखने होंगे."

इस बीच दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच भारत के पांच-दिवसीय दौरे पर हैं. यह दौरा ट्रंप के टैरिफ़ लागू होने से कुछ दिन पहले हो रहा है. ऐसा माना जा रहा है कि इस दौरान वह व्यापार और टैरिफ़ के मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)