ट्रंप और पुतिन की फोन पर हुई बातचीत को रूस अपनी 'जीत' क्यों मान रहा है?

    • Author, बीबीसी न्यूज़
पुतिन और ट्रंप के बीच बातचीत के बाद रूसी मीडिया में उत्साह

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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से बीते मंगलवार फ़ोन पर करीब दो घंटे लंबी बातचीत की

यह यूक्रेन में युद्ध की दिशा को लेकर एक अहम बातचीत थी.

मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच टेलीफोन पर दो घंटे बात हुई. अमेरिका का मकसद '30 दिन का तत्काल और पूर्ण युद्धविराम' था.

यूक्रेन को अमेरिका पहले ही अपनी शर्तों पर युद्धविराम के लिए मजबूर कर चुका है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के लिए इस पर राज़ी होना कठिन था, जो नए रूसी आक्रमण से अपने देश की रक्षा के लिए अमेरिका से सुरक्षा की गारंटी चाहते थे.

यूक्रेन की ओर से युद्धविराम के लिए हरी झंडी मिलने के बाद ट्रंप को पुतिन का समर्थन पाना था, जिससे रूस-यूक्रेन संघर्ष को रोकने का रास्ता साफ हो.

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लेकिन मंगलवार को टेलीफोन पर हुई बातचीत में ट्रंप पुतिन को पूर्ण युद्धविराम के लिए राज़ी करने में असफल रहे. सबसे बड़ी रियायत जो ट्रंप पुतिन से हासिल करने में सफल रहे, वह 30 दिनों तक यूक्रेन के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी ऊर्जा संयंत्रों पर हमला नहीं करने का वादा था.

इसके बावजूद ट्रंप ने कहा कि पुतिन के साथ बातचीत 'बहुत अच्छी और उपयोगी' रही.

रूस में इसे राष्ट्रपति पुतिन की सफलता के तौर पर सराहा गया है.

ट्रंप-पुतिन की बातचीत और रूस में इसे कैसे देखा जा रहा है, ये समझने के लिए बीबीसी के रूस संपादक स्टीव रोज़नबर्ग और बीबीसी की मध्य यूरोप संवाददाता सारा रेन्सफ़ोर्ड का विश्लेषण यहां पेश है.

'रूस को लगता है कि ट्रंप के साथ हुई पुतिन की बातचीत उनकी कामयाबी है'

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, रूस का मानना है कि ट्रंप-पुतिन के बीच हुई हालिया टेलीफोन वार्ता अच्छी रही
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बीबीसी रूस के संपादक स्टीव रोज़नबर्ग का विश्लेषण

कुछ रूसी प्रेस की सुर्खियों के मुताबिक़ मॉस्को का मानना है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हालिया टेलीफोन वार्ता अच्छी रही.

रूसी अख़बार इज़वेस्टिया का निष्कर्ष है, 'पुतिन और ट्रंप यूक्रेन संघर्ष पर मिलकर काम करने के लिए सहमत हुए'.

कोम्सोमोल्स्काया प्रावदा अख़बार ने लिखा, 'पुतिन-ट्रंप के बीच रिकॉर्ड लंबी बातचीत'. अख़बार की वेबसाइट पर आगे लिखा गया, "रूस ने यहां कूटनीतिक जीत हासिल की है."

पुतिन और ट्रंप के बीच दो घंटे की फोन कॉल के बाद रूस में कुछ लोग 'जीत' का दावा क्यों कर रहे हैं?

इसकी एक वजह ये हो सकती है कि व्लादिमीर पुतिन पर यूक्रेन या अमेरिका को कोई बड़ी रियायत देने का दबाव नहीं डाला गया. इसके विपरीत, पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के तत्काल बिना शर्त 30 दिनों के युद्धविराम वाले प्रस्ताव को ठुकरा दिया.

फिर भी रूस को और भी कड़े प्रतिबंधों और दंड की धमकी नहीं दी गई, बल्कि अमेरिकी प्रशासन ने पुतिन की तारीफ करते हुए प्रतिक्रिया दी.

डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया, "हमारी बातचीत बहुत अच्छी रही."

ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा, "अपने देश को अंतिम शांति समझौते के करीब ले जाने के लिए आज राष्ट्रपति पुतिन ने जो कुछ किया, उसकी मैं सराहना करता हूं."

रूस बिना शर्त युद्धविराम पर सहमत नहीं हुआ, इसके अलावा राष्ट्रपति पुतिन ने शांति के लिए अपनी पहले की शर्तें भी रख दीं.

इनमें यूक्रेन को पश्चिमी सैन्य सहायता बंद करना और यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा न करना, साथ ही यूक्रेन में लामबंदी को रोकना शामिल है. ऐसी शर्तों को व्यापक रूप से यूक्रेन के आत्मसमर्पण को सुनिश्चित करने के तरीके के रूप में देखा जाता है.

यूक्रेन का इन शर्तों पर सहमत होना कठिन लगता है.

लेकिन क्या रूस ट्रंप प्रशासन को ये समझा सकेगा कि ऐसी शर्तें स्वीकारी जा सकती हैं? और अगर ऐसा हुआ तो क्या अमेरिका यूक्रेन को ऐसी शर्तें स्वीकार करने के लिए मजबूर करेगा?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

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इमेज कैप्शन, पुतिन ने हाल ही में एल्युमीनियम उत्पादन और दुर्लभ खनिजों के खनन में अमेरिका-रूस सहयोग की संभावना जताई

बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि रूस अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को यह विश्वास दिला पाता है या नहीं कि यूक्रेन का पक्ष रखने की अपेक्षा रूस के साथ अच्छे संबंध विकसित करने से उन्हें अधिक फायदा होगा.

इस बात पर जोर देने के लिए, अमेरिकियों के साथ अपनी बातचीत में रूसी अधिकारी पहले से ही कई आर्थिक और वित्तीय फायदों की पेशकश कर रहे हैं. वे इस बारे में बात कर रहे हैं कि रूस-अमेरिका संबंध दोनों देशों के लिए कितने लाभकारी हो सकते हैं, अगर दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों में नई ऊर्जा ला सकें और संयुक्त परियोजनाओं पर काम कर सकें.

व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में एल्युमीनियम उत्पादन और दुर्लभ खनिजों के खनन में अमेरिका-रूस सहयोग की संभावना जताई.

ऐसा लगता है कि रूस का संदेश अमेरिका तक पहुंच रहा है.

डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, "हम रूस के साथ और अधिक व्यापार करना चाहेंगे."

"उनके पास हमारे लिए कुछ बहुत ही मूल्यवान संपत्ति हैं. उनके पास बहुत बड़ी मात्रा में अचल संपत्ति है, जो दुनिया में सबसे बड़ी है. उनके पास ऐसी चीज़ें हैं जिनका हम इस्तेमाल कर सकते हैं."

ऐसा लगता है कि रूस यह उम्मीद कर रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप युद्ध समाप्त करने के लिए यूक्रेन के हिसाब से समझौता हासिल करने की बजाय उस 'रूसी अचल संपत्ति' का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने को प्राथमिकता देंगे.

रूसी सरकार समर्थक इज़वेस्टिया अखबार ने भी यही बात दोहराई है.

 डोनाल्ड ट्रंप

"मॉस्को का तर्क है कि अमेरिका के साथ आर्थिक संबंध इतने फायदेमंद होंगे कि उन्हें तोड़ना अमेरिका के लिए बहुत महंगा होगा."

एक हफ्ते पहले यूक्रेन की ओर से बिना शर्त युद्धविराम पर सहमति जताए जाने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि 'गेंद अब रूस के पाले में है.'

अब जबकि व्लादिमीर पुतिन ने इस समझौते को अस्वीकार कर दिया है और अपनी शर्तें तय कर दी हैं, तो ये कहा जा सकता है कि रूसी नेता ने इसे (गेंद) अमेरिका के पाले में वापस भेज दिया है.

लेकिन रूस और अमेरिका अपनी चर्चा जारी रखेंगे - यूक्रेन और अमेरिका-रूस संबंधों दोनों पर.

और ये समझौते ही हैं जो संभवतः डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम को प्रभावित करेगा.

'बात सिर्फ इतनी बनी कि ट्रंप कुछ प्रगति की घोषणा कर सकें'

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फ़ोटो)

सारा रेन्सफ़ोर्ड, बीबीसी पूर्वी यूरोप संवाददाता का विश्लेषण

मंगलवार की कॉल से पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपनी बातचीत को बेहद अहम बताया था.

लेकिन नतीजे बहुत अच्छे नहीं दिखते.

रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिकी राष्ट्रपति को सिर्फ इतनी रियायत दी है, जिससे वो रूस की यूक्रेन के साथ शांति पर कुछ प्रगति होने का दावा कर सकें, बिना ये दिखाए कि वो रूस के दबाव में हैं.

ट्रंप रूस के उस वादे को अपनी कामयाबी बता सकते हैं, जिसमें रूस ने 30 दिनों तक यूक्रेन के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला रोकने की बात कही है. अगर वाकई ऐसा हुआ तो इससे नागरिकों को कुछ राहत मिलेगी.

हालांकि, यह उस पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम से बहुत दूर है, जो अमेरिका रूस से चाहता था.

'बहुत भयानक युद्ध' जिसे रोकने पर ट्रंप ज़ोर देते हैं, वो जारी है.

और पुतिन, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) ने युद्ध अपराधों के संदेह में दोषी ठहराया है, उन्हें वैश्विक राजनीति के उच्चतम स्तर पर लौटने में मदद दी गई है.

रूसी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों राष्ट्रपतियों के बीच फोन पर बातचीत दो घंटे से अधिक समय तक चली. क्रेमलिन का बयान भी काफी लंबा है, 500 शब्दों का.

रूस, जिसका तीन सालों तक पश्चिमी दुनिया ने बहिष्कार किया, वो एक बार फिर अमेरिकी सरकार के साथ सीधे बातचीत कर रहा है, जो उसके साथ बातचीत करना चाहती है.

दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व और 'वैश्विक सुरक्षा' पर भी चर्चा की.

रूस को इस परिवर्तन पर विश्वास करने में कठिनाई हो रही होगी.

इस कॉल से पहले कुछ लोग सोच रहे थे कि क्या डोनाल्ड ट्रंप रूस पर कोई दबाव डालेंगे. आखिरकार, यह स्पष्ट है कि रूस एक हफ्ते से युद्धविराम को स्थगित कर रहा था.

लेकिन इस बात का कोई संकेत नहीं है कि ट्रंप ने पुतिन पर कोई सख्ती दिखाई हो, जैसा कि दो हफ्ते पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की को ओवल ऑफिस में झेलना पड़ा था.

दोनों देशों के बयानों से पता चलता है कि कुछ भी नहीं बदला है.

रूस की मांग है कि जंग के लिए यूक्रेन को दी जाने वाली सहायता रोकी जाए

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रूस ने दोहराया है कि वह शांति चाहता है, लेकिन हमले रोकने की बजाए वह इस पर बहस कर रहा है कि युद्धविराम (जो अभी लागू ही नहीं हुआ है) उसकी निगरानी कैसे की जा सकती है.

इस बीच, वह यूक्रेन के प्रतिरोध को कमज़ोर करने के उद्देश्य से और अधिक शर्तें जोड़ रहे हैं.

उनकी मांगों में से एक मांग यह है कि यूक्रेन को उसके सहयोगियों से हथियारों और खुफिया जानकारी देना बंद किया जाए.

यूक्रेनियों के लिए एकमात्र अच्छी बात यह है कि अमेरिका ने अभी तक इनमें से किसी भी बात पर सहमति नहीं जताई है.

यूक्रेन ने इस बात पर भी जोर दिया कि ट्रंप-पुतिन की बातचीत से साबित होता है कि रूस युद्धविराम नहीं चाहता है.

इन सब बातों से यूक्रेन को थोड़ी ही राहत मिलेगी.

अमेरिकी कूटनीति के लिए भी यह निराशाजनक रहा है.

लेकिन रूस इसे बहुत अच्छे दिन के तौर पर देखेगा, जिसकी डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में लौटने से पहले रूस ने कल्पना भी नहीं की थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित

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