पुतिन और ट्रंप के बीच दो घंटे चली बातचीत क्यों नहीं रोक पाई यूक्रेन की जंग

पुतिन और ट्रंप

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    • Author, सारा रेंसफ़ोर्ड
    • पदनाम, पूर्वी यूरोप संवाददाता

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मंगलवार को फ़ोन पर हुई बातचीत के बाद, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऊर्जा केंद्रों पर हमले रोकने पर सहमति तो जताई लेकिन यूक्रेन में तत्काल और पूर्ण युद्ध विराम को ख़ारिज कर दिया.

हाल ही में सऊदी अरब में यूक्रेनी अधिकारियों के साथ ट्रंप की टीम ने जो महीने भर के पूर्ण संघर्ष विराम की योजना तैयार की थी, उस पर हस्ताक्षर करने से पुतिन ने मना कर दिया.

उन्होंने कहा कि एक समग्र युद्ध विराम तभी संभव हो सकता है जब यूक्रेन को विदेशी सहायता और ख़ुफ़िया जानकारियां मिलनी बंद हो.

यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों ने इस शर्त को पहले ही ख़ारिज़ कर दिया है.

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बीते तीन सालों के युद्ध के दौरान रूस ने हाल ही में कुर्स्क के अधिकांश इलाक़े पर फिर से कब्ज़ा कर लिया है जहां छह महीने पहले यूक्रेनी सेना का नियंत्रण था.

मंगलवार को हुई ट्रंप और पुतिन की वार्ता, एक सप्ताह पहले के अमेरिकी स्टैंड से पीछे हटने के समान है.

हालांकि दोनों नेता जल्द ही मध्य पूर्व में आगे की शांति वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए.

पिछले मंगलवार को जब अमेरिका प्रतिनिधिमंडल जेद्दा में यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल से मिला तो उन्होंने 30 दिन के तत्काल संघर्ष विराम के लिए कीएव को राज़ी कर लिया था. इसमें ज़मीन, हवा और समंदर में पूरी तरह युद्ध विराम शामिल था.

हालांकि मंगवालर को ट्रंप-पुतिन की बातचीत के कुछ देर बाद ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की एक आधिकारिक यात्रा पर फ़िनलैंड के हेलसिंकी पहुंचे. उन्होंने कहा कि ऊर्जा संयंत्रों पर हमले रोकने के विचार को लेकर यूक्रेन का नज़रिया खुला है लेकिन उन्होंने इस समझौते की अन्य बारीकियों के आने का इंतज़ार करने को कहा.

हालांकि उन्होंने बड़े पैमाने पर रूसी ड्रोन के हमले को लेकर पुतिन पर संघर्ष विराम ख़ारिज करने का आरोप लगाया.

पुतिन ने ट्रंप को बस इतनी रियायत दी...

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े ज़ोर शोर से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की, लेकिन ऐसा लगता है कि नतीजे में ऐसा कुछ नहीं निकला जिसके बारे में कोई बड़ा दावा किया जा सके.

रूसी राष्ट्रपति ट्रंप को बस इतना दावा करने का मौका दिया कि उन्होंने यूक्रेन में शांति समझौते की ओर प्रगति की है ताकि ऐसा न लगे कि क्रेमलिन ने इस मौके का फ़ायदा उठाया है.

पुतिन के उस वायदे को ट्रंप अपनी कामयाबी की तरह दिखा सकते हैं जिसमें कहा गया है कि 30 दिनों तक यूक्रेन के ऊर्जा केंद्रों पर हमले रोक दिए जाएंगे.

अगर ऊर्जा केंद्रों पर हमले रुकते हैं तो ये आम लोगों के लिए राहत की बात होगी. लेकिन रूस से अमेरिका जो चाहता था, यानी पूर्ण और बिना शर्त युद्ध विराम, उसके मुकाबले में ये कुछ भी नहीं है.

ट्रंप ने जिसे 'भयानक युद्ध' कहा था और कहा था कि वो इसे रोक सकते हैं. उनका वो वादा अब भी गूंज रहा है,

आईसीसी ने पुतिन को युद्ध अपराध में संलिप्त होने का दोषी ठहराया है, अब वह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में फिर से अग्रिम पंक्ति में लौट आए हैं.

रूसी सरकारी मीडिया में कहा गया है कि दोनों राष्ट्रपतियों के बीच फ़ोन पर दो घंटे से भी अधिक समय तक बात हुई.

क्रेमलिन ने इस बातचीत पर 500 शब्दों का बयान जारी किया है. उस बयान में दोनों के बीच बातचीत के कुछ हल्के पहलुओं का भी ज़िक्र किया है.

बयान में एक जगह लिखा है कि दोनों नेताओं ने आईस हॉकी के बारे में भी चर्चा की. ये एक ऐसा विषय है जो रूसी नागरिकों को ख़ूब भाएगा.

तीन सालों तक पश्चिमी जगत में अलग थलग पड़े रहने और उससे पहले एक लंबे अंतराल तक कड़वाहट वाले रिश्तों के बाद रूस अब सीधे अमेरिकी से बात कर रहा है.

निश्चित ही क्रेमिलन इस बदलाव को समझने की कोशिश कर रहा होगा.

इस बातचीत में दोनों ने मध्य पूर्व में शांति और "वैश्विक सुरक्षा" का मुद्दा भी उठाया.

अमेरिका को कितनी कामयाबी मिली?

ट्रंप

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फ़ोन पर बातचीत से पहले कुछ लोग क़यास लगा रहे थे कि डोनाल्ड ट्रंप रूस पर कितना दबाव बनाने में सफल होंगे. लेकिन ये बात तो एक हफ़्ते से साफ़ थी कि पुतिन युद्धविराम में अड़चन डालने वाले हैं.

लेकिन एक पखवाड़ा पहले जिस तरह ओवल ऑफ़िस में यूक्रेन के नेता वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ तीखी नोंक झोंक हुई थी, पुतिन के साथ ऐसा कुछ संकेत नहीं मिला.

दोनों देशों के बयानों से पता चलता है कि कुछ भी नहीं बदला. रूस ने दोहराया कि वह शांति चाहता है.

लेकिन ड्रोन और बमबारी रोकने की जगह वो इस बात पर बहस कर रहा है कि संभावित युद्धविराम की निगरानी कैसे होगी.

इसके अलावा रूस ऐसी शर्तें रख रहा है जिससे यूक्रेन के प्रतिरोध करने की क्षमता और कमज़ोर हो जाए. एक मांग तो यह है कि यूक्रेन को उसके सहयोगियों की ओर से मिलने वाले हथियार और ख़ुफ़िया जानकारियों को रोका जाए.

यूक्रेन के लोगों के लिए राहत की बात ये है कि अमेरिका फ़िलहाल ऐसी किसी शर्त को नहीं मान रहा है.

यूक्रेन बातचीत के दौरान पुतिन के रवैये को उनकी शांति न चाहते की इच्छा का संकेत करके पेश कर सकते हैं.

लेकिन इन सब बातों से उनका दर्द कम नहीं होगा. अमेरिका कूटनीति के लिए भी ये निराशाजनक है.

लेकिन रूस के लिए ये एक अच्छा दिन रहा. एक ऐसा दिन जिसकी ट्रंप के कार्यकाल से पहले कल्पना करना भी मुमकिन नहीं था.

वार्ता के बाद हुए हवाई हमले

जर्मनी

ट्रंप और पुतिन के बीच लंबे फ़ोन कॉल के बाद अगली ही रात को यूक्रेन और रूस के बीच हवाई हमले हुए हैं.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जे़लेंस्की ने कहा कि रूस ने रात किए हमले में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, जिसमें सुमी का एक अस्पताल भी शामिल है.

उधर यूक्रेन के हमले में दक्षिणी रूस के एक ऑयल डिपो में आग लग गई, जिसका दायरा 20 वर्ग किलोमीटर है. टैंकों के बीच पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई. आग बुझाने के लिए सैकड़ों दमकल कर्मियों को लगाया गया है.

रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसने यूक्रेन से छोड़े गए 57 ड्रोन को मार गिराया है.

अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ़ ने कहा कि सऊदी अरब में रविवार को यूक्रेन पर वार्ता जारी रहेगी.

फ़ोन पर बातचीत के दौरान पुतिन और ट्रंप इस बात पर भी सहमत हुए कि यूक्रेन और रूस आज 175-175 कैदियों की अदला-बदली करेंगे.

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