दक्षिण अफ़्रीका के राजदूत पर अमेरिका की सख़्ती, दोनों देशों के बीच क्यों गहरा रहा तनाव?

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अमेरिका ने दक्षिण अफ़्रीका के राजदूत इब्राहिम रसूल को देश से निकालने का फ़ैसला किया है. यह जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक्स पर एक पोस्ट में दी है.
उन्होंने दक्षिण अफ़्रीकी राजदूत पर अमेरिका और ट्रंप से 'नफ़रत' करने का आरोप लगाया है.
रुबियो ने एक्स पर लिखा, "दक्षिण अफ़्रीका के राजदूत का अब हमारे महान देश अमेरिका में स्वागत नहीं है. इब्राहिम रसूल एक जातिवादी राजनेता हैं, जो अमेरिका और अमेरिका के राष्ट्रपति से नफ़रत करते हैं."
"हमारे पास उनसे बात करने के लिए कुछ भी नहीं है, इसलिए उन्हें अस्वीकार्य व्यक्ति माना जाता है."
दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को कहा कि ये फ़ैसला 'खेदजनक' है. साथ ही कार्यालय ने कहा है कि वो अमेरिका के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.
अमेरिका ने ये क़दम तब उठाया है जब हाल ही में दोनों देशों के बीच तनाव काफ़ी बढ़ा है.

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इब्राहिम रसूल ने क्या बोला था?

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शुक्रवार रात को अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक्स पर एक लेख पोस्ट किया था.
इस लेख में दक्षिण अफ़्रीका के राजदूत इब्राहिम रसूल द्वारा ट्रंप प्रशासन पर दिया गया बयान शामिल था, जो उन्होंने ऑनलाइन लेक्चर में दिया था.
रसूल ने कहा था, "डोनाल्ड ट्रंप जो कर रहे हैं, वो पद पर बैठे लोगों पर किया गया हमला है. वह घर में और विदेश में पदों पर बैठे लोगों के ख़िलाफ़ भीड़ को एकजुट कर रहे हैं."
उन्होंने कहा था कि डेटा बताता है कि अमेरिका में बड़ा डेमोग्राफ़िक शिफ़्ट हुआ है, जो यह दर्शाता है कि अब वोट करने वालों में 48 फ़ीसदी सफ़ेद लोग हैं.
इसकी प्रतिक्रिया में रुबियो ने रसूल को 'अस्वागतयोग्य व्यक्ति' कहा था. दरअसल, ट्रंप के सत्ता में आने के बाद अमेरिका और दक्षिण अफ़्रीका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है.
इस बीच, बीबीसी ने वॉशिंगटन डीसी स्थित दक्षिण अफ़्रीकी दूतावास से इस मामले पर टिप्पणी के लिए संपर्क किया था.
क्या कहते हैं जानकार?

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सीनियर रिसर्चर स्कॉट फिर्सिंग कहते हैं, "दक्षिण अफ़्रीका के राजदूत रसूल एक कमज़ोर पसंद थे. हाल ही में दिया गया उनका बयान और उनका ट्रैक रिकॉर्ड भी यही इशारा करता है."
"हाल ही के वर्षों में दक्षिण अफ़्रीका ने अमेरिका को लगातार नाराज़ किया है."
"इनमें दक्षिण अफ़्रीका का हमास को समर्थन देना और इसराइल को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में ले जाने के अलावा ईरान, चीन और रूस के साथ रिश्तों को बढ़ाने जैसे क़दम शामिल हैं."
"दो राष्ट्रों के बीच जब मज़बूत राजनयिक रिश्ते नहीं हों, और इस तरह के तनाव बढ़ाने वाले क़दम उठाए जाएं, तो इस तरह की कार्रवाई होना स्वाभाविक है.
"आप समझ सकते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिकी अधिकारी दक्षिण अफ़्रीका से नाराज़ क्यों हैं."
वहीं, ब्रिटिश-अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन ने बीते महीने अपने शो मेहदी अनफ़िल्टर्ड की एक क्लिप एक्स पर शेयर की थी.
उन्होंने इसमें अमेरिका में दक्षिण अफ़्रीका के राजदूत इब्राहिम रसूल से हुई बातचीत का ज़िक्र किया गया था.
उन्होंने लिखा कि इब्राहिम रसूल ने मुझसे कहा, "दक्षिण अफ़्रीका में रहते हुए हमने जो कुछ भी (रंगभेद) अनुभव किया है, वह फ़लस्तीन में भी जारी है. रंगभेद की अवधारणा को पूरी तरह से बढ़ा दिया गया है."
सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक लीडरशिप के प्रमुख कंसल्टेंट सेंडिल स्वाना ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "अगले छह सप्ताहों में कई एएनसी और ईएफ़एफ़ नेताओं को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा. अमेरिका अब जवाबी कार्रवाई कर रहा है, जो दक्षिण अफ़्रीका के पहले उठाए गए कदमों पर आधारित है."
"अमेरिका का प्रमुख सहयोगी है इसराइल. दक्षिण अफ़्रीका ने इसराइल पर नरसंहार का आरोप लगाया है. इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को युद्ध अपराध का दोषी बताते हुए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस पर दस्तक दी थी."
उन्होंने कहा, "इसके बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू और योव गैलेंट के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट भी जारी हुआ था."
दक्षिण अफ़्रीका ने क्या फ़ैसला लिया था?

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दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफ़ोसा ने जनवरी 2025 में एक विधेयक पर हस्ताक्षर करके एक क़ानून बनाया था. इसके तहत राज्य को बिना मुआवज़ा दिए भूमि अधिग्रहण की अनुमति होगी. हालांकि, उनके इस कदम से उनकी सरकार के कुछ सदस्य सहमत नहीं थे.
दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद की अवधारणा को समाप्त हुए 30 वर्षों से ज़्यादा का समय बीत चुका है. बावजूद इसके काले लोगों के पास खेती करने वाली भूमि का बहुत छोटा सा हिस्सा मौजूद है. जबकि अधिकांश भूमि श्वेत लोगों के पास है.
इसमें सुधार की गति बेहद धीमी रही है इसलिए, लोगों में इसे लेकर खीझ और गुस्सा है.
राष्ट्रपति रामाफ़ोसा की पार्टी एएनसी ने इस क़ानून को देश में बदलाव का 'मील का पत्थर' बताया था. वहीं, गठबंधन सरकार के कुछ सदस्यों का कहना था कि वो इस मामले में अदालत के सामने जा सकते हैं.
ट्रंप ने क्या कहा था?

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इस फ़ैसले को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण अफ़्रीका पर मानव अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया था.
उन्होंने कहा था कि इससे श्वेत किसानों की ज़मीन 'ज़ब्त' की जा सकती है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस क़दम को श्वेत किसानों के ख़िलाफ़ उठाया गया क़दम बताया था. इसके बाद उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका को दी जा रही मदद पर रोक लगा दी थी.
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा था, "दक्षिण अफ़्रीका भूमि ज़ब्त कर रहा है, और कुछ वर्ग के लोगों के साथ बहुत बुरा बर्ताव कर रहा है."
दरअसल, फ़रवरी में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण अफ़्रीका को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता पर रोक लगा दी थी.
पिछले हफ़्ते ट्रंप ने यह कहते हुए तनाव और बढ़ा दिया था कि दक्षिण अफ़्रीका के किसानों का अमेरिका में बसने का स्वागत किया जाएगा.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा, "दक्षिण अफ़्रीका का कोई भी किसान (परिवार सहित), जो सुरक्षा कारणों से देश छोड़ना चाहता है, उसे नागरिकता के साथ अमेरिका में आमंत्रित किया जाएगा."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















