दक्षिण अफ़्रीका ने इंटरनेशनल कोर्ट में इसराइल के ख़िलाफ़ क्या-क्या दलीलें दीं?

नीदरलैंड्स के हेग में मौजूद इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस

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नीदरलैंड्स के हेग में मौजूद इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में बीते दो दिनों से इसराइल के ख़िलाफ़ मामले की सुनवाई हो रही है.

कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि वो ये तय करे कि इसराइल ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के साथ जो कर रहा है क्या वो जनसंहार है.

अंतरराष्ट्रीय अदालत में ये मामला दक्षिण अफ़्रीका लेकर गया है. इसराइल ने उसके लगाए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें "बेबुनियाद" कहा है.

पढ़िए दो दिन चली कार्ट की कार्रवाई में क्या कुछ हुआ, किसने क्या कहा.

क्या कहना है दक्षिण अफ़्रीका का?

अंतरराष्ट्रीय क़ानून के प्रोफ़ेसर जॉन डुगार्ड, वकील टेम्बेका एनजीकुकेतोबी और वकील आदिला हाशिम

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दक्षिण अफ़्रीका का दावा है कि ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ इसराइल जो कर रहा है वो जनसंहार है क्योंकि उसकी कार्रवाई "फ़लस्तीनी क्षेत्र में रहने वाले में एक नस्लीय समूह की बड़े पैमाने पर तबाही के उद्देश्य से है."

दक्षिण अफ़्रीका ने कोर्ट से गुज़ारिश की है कि वो इसराइल को अपना सैन्य अभियान बंद करने का आदेश दे.

दक्षिण अफ़्रीका ने कहा है कि इसराइल 1948 में हुए जीनोसाइड कन्वेन्शन (जनसंहार समझौते) का उल्लंघन कर रहा है. इसराइल और दक्षिण अफ़्रीका दोनों ने ही इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और ये समझौता जनसंहार होने से रोकने के लिए दोनों पक्षों को प्रतिबद्ध करता है.

11 जनवरी को अदालत की 17 जजों की बेंच ने दक्षिण अफ़्रीका के हाई कोर्ट के वकील टेम्बेका एनजीकुकेतोबी की दलील सुनी.

उन्होंने कहा कि इसराइल ने "जनसंहार के उद्देश्य से" सैन्य कार्रवाई की है और "जिस तरह सैन्य हमले किए गए उससे ये साबित हो जाता है."

उन्होंने कहा कि इसराइल की योजना ग़ज़ा को "तबाह" करने की योजना थी जिसके लिए "राष्ट्र के उच्चतम स्तर पर समर्थन मिला".

वहीं मामले में दक्षिण अफ़्रीका की तरफ से पैरवी कर रही आदिला हाशिम ने कोर्ट से कहा, "यहां हर रोज़ संपत्ति, सम्मान और मानवता के लिहाज़ से फ़लस्तीनी लोगों का नुक़सान बढ़ रहा है और इसकी कोई भरपाई नहीं का जा सकती."

"कोर्ट के आदेश के अलावा कोई भी और चीज़ नहीं जो इस कष्ट से निजात दिला सके."

इसराइल की क्या रही प्रतिक्रिया?

(बाएं से दाएं) 12 जनवरी कोर्ट में इंतज़ार करते इसराइली क़ानूनी सलाहकार ताल बेकर, बैरिस्टर मैलकॉम शॉ और गिलाद नोआम

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इसराइली क़ानूनी सलाहकार ताल बेकर ने कोर्ट में कहा कि दक्षिण अफ़्रीका सच को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है, वो इसराइल-फ़लस्तीन संघर्ष के बारे में "सच से परे व्यापक विवरण पेश कर रहा है."

12 जनवरी को कोर्ट में अपनी दलील शुरू करते हुए ताल बेकर ने ये स्वीकार किया कि ग़ज़ा में आम नागरिक जो कष्ट झेल रहे हैं वो "त्रासदी है", हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास "इसराइल और फ़लस्तीनियों को हो रहे नुक़सान को बढ़ाना" चाहता है जबकि "इसराइल इसे कम करना चाहता है."

उन्होंने कहा कि "ये दुख की बात है कि दक्षिण अफ़्रीका ने कोर्ट के सामने बेहद तोड़-मरोड़ कर तथ्यात्मक और क़ानूनी तस्वीर को पेश किया है. ये पूरा मामला मौजूदा संघर्ष की हकीकत के संदर्भ से हटकर और जोड़-तोड़ वाले विवरण के आधार पर जानबूझकर बनाया गया है."

गुरुवार को इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में मौजूद नहीं थे. हालांकि दक्षिण अफ़्रीका की तरफ से दलील पेश किए जाने के बाद उन्होंने कहा कि "दक्षिण अफ़्रीका चिल्लाने का ढोंग कर रहा है."

उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका की आलोचना की और कहा कि जब सीरिया और यमन में "हमास के सहयोगी संगठन" लोगों पर अत्याचार कर रहे थे, वो खामोश रहा था.

उन्होंने कहा, "हम आतंकवाद से लड़ रहे हैं, हम झूठ से लड़ रहे हैं. आज हमने एक उलटी दुनिया देखी. इसराइल पर जनसंहार का आरोप लगाया जा रहा है जबकि वो जनसंहार के ख़िलाफ़ लड़ रहा है."

इसराइली सेना ने कहा है कि उसके हमलों में आम नागरिकों को कम से कम नुक़सान हो इसके लिए वो हर तरह के कदम उठा रहा है.

सेना ने कहा इन कदमों में हमलों के बारे में जानकरी देने वाले पर्चे गिराने, किसी इमारत को निशाना बनाने से पहले आम नागरिकों को फ़ोन कर उन्हें इमारत खाली करने को कहने और रास्ते में आम लोगों के होने पर हमला रोकने जैसे कदम शामिल हैं.

इसके साथ इसराइली सरकार भी बार-बार कहती रही है कि उसके हमलों का निशाना हमास के ठिकाने हैं और वो आम फ़लस्तीनी नागरिकों को अपना निशाना नहीं बनाना चाहता.

आरोन बराक कौन हैं?

इसराइल ने अपनी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व अध्यक्ष आरोन बराक को आईसीजे में बतौर जज नामित किया है

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इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के 17 जजों की बेंच में आरोन बराक भी शामिल हैं. इसराइल ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व अध्यक्ष आरोन बराक को आईसीजे में बतौर जज नामित किया है.

आईसीजे के नियमों के अनुसार जजों की बेंच में अगर पहले से ही किसी मुल्क की राष्ट्रीयता के कोई जज नहीं हैं, तो वो अपने मामले की सुनवाई में शामिल होने के लिए एक एड-हॉक जज चुन सकते हैं जो बेंच का हिस्सा होंगे.

इसराइल में दक्षिणपंथी झुकाव पाली पार्टियां आरोन बराक की निंदा करती रही हैं. उन्हें नामित करने का इसराइल का फ़ैसला यहां के सत्ताधारी गठबंधन के लिए भी चौंकाने वाला था.

आरोन बराक इसराइली सुप्रीम कोर्ट के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं. वो बीते साल न्यायिक सुधारों के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के विवादित प्रस्ताव का विरोध करने के लिए जाने जाते हैं.

मामले की सुनवाई से पहले दक्षिण अफ़्रीका ने भी पूर्व डिप्टी चीफ़ जस्टिस दिक्गांग मोसेनेक को अपनी तरफ से एड-हॉक जज नामित किया है.

विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?

12 जनवरी 2024 को हेग में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के सामने फ़लस्तीनी समर्थक प्रदर्शन करते हुए

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एक तरफ कोर्ट के भीतर दोनों पक्ष एक-दूसरे के आमने सामने हैं तो दूसरी तरफ कोर्ट के बाहर भी हलचल कम नहीं थी. यहां पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की है ताकि फ़लस्तीनी समर्थक और इसराइली समर्थक एक-दूसरे के आमने-सामने न आने पाएं.

मामले की सुनवाई की प्रक्रिया दिखाने के लिए कोर्टरूम से लाइव फीड की व्यवस्था की गई है और इसके लिए कोर्ट के बाहर बड़ी-सी स्क्रीन लगाई गई है. इस स्क्रीन के नीचे कई लोग फ़लस्तीनी झंडे लिए खड़े हैं.

वहीं कई लोग अपने हाथों में नेल्सन मंडेला की तस्वीरें लिए हैं और ग़ज़ा में मानवीय स्थिति के बारे में दलील पेश कर रही दक्षिण अफ्ऱीका की क़ानूनी टीम के सामने इसकी तुलना और मंडेला के दौर में दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद नीति के दौर करने की कोशिश कर रहे हैं.

इस जगह से क़रीब 100 मीटर की दूरी पर एक सांकेतिक सबात टेबल (कुछ धर्म को मानने वालों के लिए आराम करने का दिन) लगाया गया है.

इसके साथ लगी कुर्सियों को खाली छोड़ दिया गया है, लेकिन उन पर उन 130 से अधिक लोगों की तस्वीरें रखी हैं, जो हमास के हमले में या तो मारे गए हैं या फिर जिन्हें हमास के लड़ाके अपने साथ अगवा कर ले गए हैं.

आगे क्या होगा?

आईसीजे के बाहर इसराइल के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने एक डिनर टेबल

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इमेज कैप्शन, आईसीजे के बाहर इसराइल के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने एक डिनर टेबल पर उन लोगों की तस्वीरें रखी हैं, जो हमास के हमले में मारे गए हैं या फिर जिन्हें हमास के लड़ाके अपने साथ अगवा कर ले गए हैं.

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च कोर्ट है. इसका फ़ैसला सैद्धांतिक और क़ानूनी रूप से उन देशों पर बाध्यकारी है जो आईसीजे के सदस्य हैं. इसराइल और दक्षिण अफ़्रीका दोनों ही इसके सदस्य हैं, लेकिन कोर्ट के पास फ़ैसले को लागू कराने की अपनी कोई शक्ति नहीं है.

ऐसे में जनसंहार के आरोप से जुड़ा जो भी फ़ैसला आईसीजे देगी उसे केवल उसकी राय माना जाएगा. हालांकि इस पर पूरी दुनिया की नज़र ज़रूर रहेगी.

इस मामले में आख़िरी फ़ैसला आने में सालों का वक्त लग सकता है, लेकिन दक्षिण अफ़्रीका की गुज़ारिश पर कोर्ट जल्द इस मामले में अपना फ़ैसला दे सकती है और इसराइल से अपना सैन्य अभियान रोकने के लिए कह सकती है.

बीते साल सात अक्तूबर को हमास ने ग़ज़ा सीमा की तरफ से इसराइल पर हमला किया था. हमास के हमले में 1,300 लोग मारे गए और 240 लोगों को अगवा कर अपने साथ बंधक बनाकर ले गए.

इस हमले की जवाबी कार्रवाई में इसराइल ने पूरे ग़ज़ा के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ दिया.

आईसीजे

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हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इसराइल के हमलों में ग़ज़ा में अब तक 23,350 लोगों की मौत हुई है, हज़ारों घायल हुए हैं जबकि लाखों विस्थापित हैं. यहां मरने वालों में बड़ी संख्या महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.

दक्षिण अफ़्रीका चाहता है आईसीजे "इसराइल को जल्द से जल्द ग़ज़ा में अपना सैन्य अभियान रोकने" का आदेश दे. लेकिन ये भी एक तरह से तय है कि इसराइल इस तरह के आदेश को नज़रअंदाज़ करेगा और इसे लागू करने को लेकर उस पर दबाव नहीं बनाया जा सकेगा.

साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध का मामला भी आईसीजे पहुंचा था. आईसीजे ने रूस को आदेश दिया था कि वो यूक्रेन में "जल्द से जल्द अपना सैन्य अभियान रोके". लेकिन रूस ने इस आदेश को नज़रअंदाज़ कर दिया.

रूस-यूक्रेन युद्ध अगर कुछ और सप्ताह जारी रहा तो इसे दो साल पूरे हो जाएंगे.

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