हमास युद्ध: 'ग़ज़ा जनसंहार' पर आईसीजे की सुनवाई, भारतीय जज ने इसराइल की कार्रवाई को लेकर क्या कहा

जस्टिस दलवीर भंडारी

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इंटरनेशल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) ने ग़ज़ा युद्ध को लेकर दायर आवेदन पर शुक्रवार को एक आदेश जारी किया है.

आईसीजे ने ग़ज़ा के हालात को 'विनाशकारी' माना और यह भी स्वीकार किया कि वहां हालात 'कहीं ज़्यादा ख़तरनाक़ रूप से बिगड़ सकते हैं.'

आईसीजे के सामने आवेदन दक्षिण अफ़्रीका ने दायर किया था और कोर्ट से गुहार लगाई थी कि वो ये तय करे कि इसराइल ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के साथ जो कर रहा है क्या वो जनसंहार है?

दक्षिण अफ़्रीका ने संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के कथित उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की मांग के लिए 29 दिसंबर 2023 को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस में ये आवेदन दिया था.

आईसीजे ने अपने आदेश में ये भी कहा कि (अक्टूबर में हमास के हमले के बाद) इसराइल को 'आत्मरक्षा का अधिकार' है. लेकिन कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा कि ग़ज़ा में मानवीय त्रासदी रोकने के लिए इसराइल को तुरंत प्रभावी क़दम उठाने चाहिए.

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस की ओर से जिन जजों ने इस मामले की सुनवाई की उनमें भारतीय जज जस्टिस दलवीर भंडारी भी शामिल थे.

आईसीजे ने जो आदेश दिया है जस्टिस भंडारी ने उसका समर्थन किया है. साथ ही अपने आदेश में उन्होंने 'क्रूरता के कार्य' और 'कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया.

उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को बंधक बनाए गए इसराइली नागिरकों को बिना शर्त तुरंत छोड़ा जाना चाहिए.

ग़ज़ा में जनसंहार के मामले में आईसीजे का आदेश
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जस्टिस भंडारी ने क्या कहा?

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जस्टिस भंडारी ने कहा कि वो आईसीजे के समर्थन में उसके तर्क से सहमत हैं. हालांकि उन्होंने अदालत के तर्क में कुछ अतिरिक्त चीज़ जोड़ने के लिए अपनी ओर से एक घोषणा की.

सबसे पहले तो उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को इसराइली नागरिकों पर हुए हमले को 'क्रूरता का कार्य' बताया और कहा कि उसकी 'कड़े शब्दों में निंदा' की जानी चाहिए.

जस्टिस दलवीर भंडारी ने कहा कि उस हमले में 1,200 इसराइलियों की जान चली गई और 5,500 लोग घायल और अपंग हो गए.

फिर उन्होंने इसराइल के हमले में ग़ज़ा में मारे गए लोगों की संख्या का ज़िक्र किया और बोले, "उन हमलों के जवाब में इसराइल ने जो सैन्य अभियान चलाया उससे ग़ज़ा में अब तक 25,000 से अधिक नागरिक के मारे जाने की रिपोर्ट है, जिसमें से कई महिलाएं और बच्चे हैं."

वे बोले, “कथित तौर पर वहां कई हज़ार लोग अब भी लापता हैं और हज़ारों अन्य लोग घायल है. घर, बिजनेस और पूजा स्थल नष्ट कर दिए गए. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने बताया कि 26 अस्पताल और 200 स्कूलों को नुकसान हुआ है. इस संघर्ष के कारण ग़ज़ा की क़रीब 85 फ़ीसद आबादी विस्थापित हो गई है.

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'ग़ज़ा में मानवीय आपदा'

जस्टिस भंडारी ने कहा, " ग़ज़ा की स्थिति अब मानवीय आपदा में बदल गई है. इस बाबत मैं यह नोट करता हूं कि ये अनुरोध केवल जनसंहार कन्वेंशन से जुड़ा है, लेकिन इस तरह के सशस्त्र संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय मानवता क़ानून समेत, अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अन्य तत्व भी लागू होते हैं."

आईसीजे की वेबसाइट के मुताबिक जस्टिस भंडारी ने यह भी कहा कि ये अस्थायी उपाय देने के आदेश हैं. कोर्ट को ये लगता है कि किसी भी पक्ष से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए अगर कोई अस्थायी उपाय करने हैं तो उसे लेकर संकेत देने की शक्ति उसके पास मौजूद है.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट का ये आदेश दक्षिण अफ़्रीका के दावों पर फ़ैसला नहीं है.

उन्होंने यह भी कहा, "यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि इस मामले पर अब तक पूरी तरह बहस नहीं हुई है, न ही कोर्ट के पास तथ्यात्मक रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए कुछ भी मौजूद है. केवल इन वजहों से यह स्पष्ट है कि कोर्ट जेनोसाइड के अपराध की रोकथाम और सज़ा पर कन्वेंशन के तहत दक्षिण अफ़्रीका के वास्तविक दावों पर फ़ैसले नहीं कर रहा है न ही कर सकता है."

वीडियो कैप्शन, ग़ज़ा में जंग को लेकर आईसीजे ने इसराइल से क्या कहा?

'ग़ज़ा में युद्ध पर तुरंत लगे रोक'

जस्टिस भंडारी ने कहा, "कोर्ट केवल यह कर रहा है कि वो दक्षिण अफ़्रीका के अनुरोध पर एक तात्कालिक उपाय को लेकर अपना निर्णय दे रहा है, जो कि अदालत से एक अलग अनुरोध भी है. दक्षिण अफ़्रीका के इस अनुरोध जैसे मामले में निर्णय लेने के दौरान विभिन्न क़ानूनी कसौटियों और उनकी सीमाओं को ध्यान में रखा जाता है. ये अहम पॉइंट हैं. इस मामले में इसे दोहराया जाना उचित होगा. कोर्ट के आदेश को इसी आधार को ध्यान में रखते हुए पढ़ा जाना चाहिए.

जिस आधार पर अस्थायी उपाय दिए जा रहे हैं, जिन अधिकारों की सुरक्षा का दावा किया गया है कोर्ट को उनकी संभावना पर मौजूदा साक्ष्यों पर विचार करना चाहिए, भले ही ये अपने शुरुआती चरण में हों. ख़ास कर, इस मामले में, ग़ज़ा में हुई व्यापक तबाही और लोगों की मौतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए जिसे ग़ज़ा की आबादी ने अब तक झेला है.

जेनोसाइड कन्वेंशन के आर्टिकल II में बताया गया है, "किसी राष्ट्रीय, नस्लीय, सांस्कृतिक या धार्मिक समूह को आंशिक या पूरी तरह नष्ट करने का इरादा", जेनोसाइड का मूल तत्व है जैसा कि कन्वेंशन में परिभाषित भी किया गया है.

जस्टिस भंडारी ने कहा, "अभी कोर्ट केवल यह तय कर रहा है कि क्या जेनोसाइड कन्वेंशन के तहत अधिकार तर्कसंगत हैं."

उन्होंने कहा, "ग़ज़ा में सैन्य अभियान के साथ-साथ जान-माल का नुकसान, विनाश के अधिकांश सार्वजनिक रिकॉर्ड अक्टूबर 2023 से लगातार मिल रहे हैं- वो ख़ुद आर्टिकल II के तहत एक तर्कसंगत साक्ष्य का समर्थन करने में सक्षम हैं."

अंत में उन्होंने कहा, "इस संघर्ष से जुड़े सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि युद्ध की स्थिति पर तुरंत रोक लगे और 7 अक्टूबर 2023 को बंधक बनाए गए सभी (बचे हुए लोगों) को बिना शर्त तुरंत रिहा किए जाएं."

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