इमरान ख़ान को क्या तोशा ख़ाना केस में राहत मिल सकती है और क्या वे घर जा पाएंगे

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    • Author, उमैर सलीमी
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम, इस्लामाबाद

पाकिस्तान की अटक जेल में क़ैद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की ओर से दायर तोशा ख़ाना केस में सज़ा स्थगित करने के आवेदन पर इस्लामाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है.

उनके वकीलों को पूरी उम्मीद है कि वह जल्द ही रिहाई पा सकते हैं.

यह संभावना उस समय पैदा हुई जब बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस उमर अता बंदियाल ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका पर सुनवाई के दौरान उसमें कमियां बताईं.

एक बात स्पष्ट है कि जेल में क़ैद इमरान ख़ान की क़ानूनी चुनौतियों पहले से अधिक बढ़ गई हैं.

उदाहरण के लिए, लाहौर की आतंकवाद निरोधक अदालत ने बीते बुधवार 9 मई को विरोध प्रदर्शन करने पर दर्ज मुक़दमे में सामूहिक जांच टीम को इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी और पूछताछ की अनुमति दी थी.

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ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट

इस महीने केंद्रीय जांच एजेंसी 'एफ़आईए' ने साइफ़र गुमशुदगी केस में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के चैयरमैन इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज किया है.

इस मामले में इस्लामाबाद की एक विशेष अदालत ने पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी को चार दिन के रिमांड पर एफ़आईए के हवाले किया था.

इस दौरान कई दूसरे मुक़दमों में इमरान की ज़मानत याचिका पैरवी के अभाव के आधार पर ख़ारिज की जा चुकी है.

जैसे इस्लामाबाद की अकाउंटेबिलिटी अदालत ने 190 मिलियन पाउंड के घोटाले में उनकी अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी ख़ारिज की थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या आपत्ति जताई?

पांच अगस्त को इस्लामाबाद की ज़िला अदालत ने पीटीआई के चेयरमैन इमरान ख़ान को तोशा ख़ाना केस में मुज़रिम घोषित करते हुए तीन साल क़ैद और एक लाख जुर्माने की सज़ा सुनाई थी.

एडिशनल सेशन जज हुमायूं दिलावर ने अपने फ़ैसले में लिखा था कि इमरान ख़ान ने अपनी संपत्ति में उपहार का ज़िक्र नहीं किया था जिससे उनकी बदनीयती का पता चलता है.

लेकिन पीटीआई के वकीलों का आरोप है कि जज हुमायूं दिलावर ने जल्दबाज़ी में यह फ़ैसला दिया और गवाहों को न सुनकर बचाव के अधिकार से उन्हें वंचित किया गया.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर आवेदन में ट्रायल कोर्ट की ओर से बचाव का अधिकार न दिए जाने और केस की कार्यवाई पर आपत्तियां दर्ज कराईं.

बुधवार की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों वाली बेंच के प्रमुख चीफ़ जस्टिस उमर अता बंदियाल ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले में ग़लतियां हैं.

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

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एडिशनल सेशन जज हुमायूं दिलावर के फ़ैसले पर चीफ़ जस्टिस ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने एक ही दिन में फ़ैसला दिया जो सही नहीं था, ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले में त्रुटियां हैं.

बेंच में शामिल जस्टिस जमाल मन्दोख़ैल ने टिप्पणी की कि अगर मुल्ज़िम कोई गवाह ख़ुद पेश नहीं करता तो अदालत गवाहों को बुला सकती है. उन्होंने कहा, "इस केस में गवाह पेश करने के लिए समय नहीं दिया गया."

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के वकील अमजद परवेज़ ने यह तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने फ़ैसले से पहले तीन बार मुल्ज़िम को मौक़ा दिया था. उन्होंने कहा, "मुलज़िम की अनुपस्थिति पर ट्रायल कोर्ट ने तोशा ख़ाना केस का फ़ैसला किया."

बेंच में शामिल जस्टिस मज़ाहिर अली अकबर नक़वी ने पूछा कि ट्रायल कोर्ट ने बचाव का अधिकार दिए बिना तोशा ख़ाना केस का फ़ैसला कैसे कर दिया?

उन्होंने कहा, "देश की किसी भी अदालत में क्रिमिनल केस में मुलज़िम को बचाव का अधिकार दिए बिना केस का फ़ैसला नहीं होता. तोशा ख़ाना केस के फ़ैसले की इतनी जल्दी क्या थी?"

लेकिन चीफ़ जस्टिस ने कहा कि हाईकोर्ट के फ़ैसले तक बेंच इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा.

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इमरान ख़ान को किस आधार पर राहत मिल सकती है?

अगर हाई कोर्ट गुरुवार को तोशा ख़ाना केस में इमरान ख़ान की सज़ा स्थगित करती है तो क्या वह रिहा हो सकते हैं?

इस सवाल पर पत्रकार व विश्लेषक नसीम ज़ोहरा ने बीबीसी को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस की टिप्पणियों को देखकर लगता है कि शायद इमरान ख़ान को इस केस में राहत मिल जाए.

लेकिन वह कहती हैं कि इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ दूसरे मुक़दमे भी हैं. "कल 9 मई के केस में एटीसी ने उनकी गिरफ़्तारी मंज़ूर की. इसी तरह साइफ़र का मामला भी मौजूद है."

एडवोकेट शाह ख़ावर ने बीबीसी को बताया कि अगर किसी सज़ा की अवधि कम होती है तो ज़मानत मिलना कुछ आसान होता है.

वह कहते हैं, "उनका केस यह बनता है कि उन्हें सुना नहीं गया. अदालत में सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और गवाह पेश नहीं हुए. इस आधार पर यह राहत मांगी जाएगी कि सज़ा कम है, इसलिए इसे स्थगित कर दिया जाए और उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया जाए."

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अटक जेल से बाहर निकल सकते हैं इमरान ख़ान?

लेकिन उनकी राय में सज़ा स्थगित करने के बावजूद इमरान ख़ान का जेल से बाहर आना मुश्किल है क्योंकि एफ़आईए ने अटक जेल में उनकी गिरफ़्तारी के साथ उन्हें जांच में शामिल कर रखा है.

ध्यान रहे कि 9 मई को विरोध प्रदर्शनों और साइफ़र गुमशुदगी के दोनों केसों में क़ानून लागू करने वाली संस्थाओं ने इमरान ख़ान को जांच में शामिल कर लिया है जबकि दूसरे कई केसों में उनकी अग्रिम ज़मानत पैरवी के अभाव में रद्द हो चुकी है.

शाह ख़ावर कहते हैं अगर तोशा ख़ाना केस में उनकी रिहाई हो भी जाती है तो उसके बावजूद वह दूसरे मुक़दमों में गिरफ़्तार रहेंगे.

नसीम ज़ोहरा की भी यही राय है कि इस केस में तो राहत मिल सकती है मगर अटक जेल से रिहाई संभव नहीं.

ऐसे में यह सवाल भी पैदा होता है कि क्या इमरान ख़ान अटक जेल में ही क़ैद रहेंगे या उन्हें दूसरे ट्रायल्स के दौरान किसी और जेल में भेजा जाएगा.

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फ़ैसला गृह मंत्रालय करेगा...

इस सवाल पर क़ानूनी विशेषज्ञ शाह ख़ावर ने बताया कि इसका फ़ैसला गृह मंत्रालय करेगा कि इमरान ख़ान को सुरक्षा कारणों से अटक जेल में ही क़ैद रखा जाएगा या किसी दूसरी जेल में भेजा जाएगा.

उन्होंने कहा कि एक सज़ायाफ़्ता व्यक्ति को किसी भी जेल में रखा जा सकता है.

उन्होंने कहा, "सज़ा स्थगित होने की स्थिति में चूंकि एफ़आईए का केस इस्लामाबाद में दर्ज है, इसलिए उन्हें रावलपिंडी के अडयाला जेल लाया जा सकता है या दूसरी स्थिति में उनका जेल ट्रायल किया जा सकता है."

शाह ख़ावर ने बताया कि इसकी भी संभावना है कि साइफ़र केस में सुरक्षा कारणों के आधार पर इमरान ख़ान का जेल ट्रायल अटक जेल में ही किया जाए.

लेकिन इस्लामाबाद हाई कोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष और पीटीआई की कोर कमेटी के सदस्य शोएब शाहीन की राय में सज़ा स्थगित होने की स्थिति में इमरान ख़ान को रिहा होना चाहिए.

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तोशा ख़ाना केस

उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान कहा कि इमरान ख़ान तोशा ख़ाना केस की वजह से जेल गए और बाक़ी केसों में पैरवी के अभाव के आधार पर उनकी ज़मानत ख़ारिज हुई है.

"नीतिगत रूप से जब इस केस में रिहाई मिलती है तो उन्हें इसका समय दिया जाएगा कि दूसरे केसों में भी अपनी ज़मानत करवा लें. मगर इस देश में सरकार क्या करती है, हमें अगले पल का नहीं पता होता."

दूसरी और पूर्व क़ानूनी मामलों के पूर्व विशेष सहायक अताउल्लाह तारड़ ने कहा कि इमरान ख़ान तोशा ख़ाना केस में सज़ा स्थगित होने के बावजूद रिहा होते नज़र नहीं आ रहे.

उन्होंने कहा कि साइफ़र केस में एफ़आईआर बाद में हुई जबकि इमरान ख़ान के वकीलों ने उनके निर्देश पर उन्हीं दिनों में ज़मानत की अर्जी दी है.

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वह कहते हैं कि इमरान ख़ान इस केस में 30 अगस्त तक ज्यूडिशियल रिमांड पर हैं.

इधर इमरान ख़ान की वकीलों की टीम में शामिल बैरिस्टर गौहर ख़ान को उम्मीद है कि हाई कोर्ट पूर्व प्रधानमंत्री इमरान के विरुद्ध फ़ैसला स्थगित करेगी और उन्हें रहा करेगी.

वह कहते हैं कि विभिन्न केसों में उन्हें गिरफ़्तार करना राजनीतिक प्रतिशोध से अधिक कुछ नहीं.

अदालत के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए गौहर ख़ान ने कहा कि दूसरे केसों में ज़मानत एक-एक दिन की बात होगी.

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