अनवारुल हक काकड़: क़ानून की पढ़ाई से पाकिस्तान के कार्यवाहक पीएम तक का सफ़र

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बलूचिस्तान आवामी पार्टी के सीनेटर अनवारुल हक काकड़ को पाकिस्तान का कार्यवाहक प्रधानमंत्री चुना गया है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है.
वो देश के आठवें कार्यवाहक प्रधानमंत्री हैं और अब तक के इतिहास के सबसे युवा कार्यवाहक प्रधानमंत्री हैं.
वो चुनाव होने तक कामचलाऊ सरकार की अगुवाई करेंगे. पाकिस्तान की संसद भंग होने के तीन दिन बाद उनके नाम पर सहमति बनी.
पाकिस्तान के संविधान में ये शर्त है कि संसद (नेशनल असेंबली) और राज्य की विधानसभाओं के विघटन के 90 दिनों के भीतर चुनाव करा लिए जाने चाहिए.
अनवारुल हक काकड़ बलूचिस्तान के पश्तूनों की जानी मानी काकड़ जनजाति से हैं.
अनवारुल हक काकड़ कौन हैं?
बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में साल 1971 में जन्मे अनवारुल हक के पिता एहतशाम-उल हक काकड़ ने अपना करियर तहसीलदार के रूप में शुरू किया. बाद में उन्होंने विभिन्न सरकारी पदों पर काम किया.
पाकिस्तान के बनने से पहले अनवारुल हक के दादा कलात राज्य में कलात के ख़ान के लिए एक चिकित्सक के रूप में काम करते थे.
अनवारुल हक ने अपनी प्राथमिक शिक्षा क्वेटा से पूरी की, जिसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई कोहाट के कैडेट कॉलेज से पूरी की.
स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए वो बलूचिस्तान विश्वविद्यालय आ गए. इसके बाद लंदन में उन्होंने क़ानून की पढ़ाई पूरी की.
राजनीति में दिलचस्पी होने के कारण वो पाकिस्तान लौट आये और यहां अपनी राजनीति की शुरूआत उन्होंने मुस्लिम लीग से की.
अनवारुल हक को साहित्य का शौक है. उनकी गिनती बलूचिस्तान के पढ़े-लिखे लोगों में होती है.
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1999 में मुस्लिम लीग (नवाज़) की सरकार गिर गई, जिसके बाद वो मुस्लिम लीग (क्यू- क़ैदे आज़म) में शामिल हो गए. 2002 में मुस्लिम लीग (क्यू) के टिकट पर उन्होंने क्वेटा से नेशनल असेंबली सीट के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
2013 में जब आम चुनाव हुए तो बलूचिस्तान में मुस्लिम लीग (नवाज़) और राष्ट्रवादी पार्टियों की गठबंधन सरकार बनी. यहीं के मुख्यमंत्री सरदार सनाउल्लाह जहरी की सरकार में अनवारुल हक बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता थे.
साल 2018 में जब मुस्लिम लीग (नवाज़) चुनाव में हार गई तो बलूचिस्तान में बलूचिस्तान अवामी पार्टी नाम की एक नई पार्टी बनाई. अनवारुल हक काकड़ न केवल इसका हिस्सा बन गए, बल्कि वह बलूचिस्तान अवामी पार्टी के संस्थापकों में से एक बन गए.
अनवारुल हक 2018 में बलूचिस्तान अवामी पार्टी से सीनेटर चुने गए थे.
बलूचिस्तान में विद्रोह के बाद पैदा हुए हालात में अनवारुल ने स्टेट नैरेटिव की पुरज़ोर वकालत की और इस मामले में एक सशक्त आवाज़ बने रहे.
बलूचिस्तान से आने वाले वो देश के दूसरे कार्यवाहक प्रधानमंत्री हैं. इससे पहले, बलूचिस्तान उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मीर हज़ार ख़ान खोसा देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे.
अब तक पाकिस्तान के इतिहास में कुल आठ कार्यवाहक प्रधानमंत्री हुए हैं. जानते हैं कौन कितने समय तक पद पर रहे?

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ग़ुलाम मुस्तफ़ा जटोई
06 अगस्त 1990 से 6 नवम्बर 1990 तक
पाकिस्तान के पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री ग़ुलाम मुस्तफ़ा जटोई थे. उनकी देखरेख में 1990 में देश के इतिहास का पांचवां आम चुनाव हुआ और चुनाव के बाद नवाज़ शरीफ़ पहली बार प्रधानमंत्री बने.

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बलख़ शेर मज़ारी
18 अप्रैल 1993 से 26 मई 1993 तक
बलख़ शेर मज़ारी देश के दूसरे कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने थे, उनका कार्यकाल एक महीने आठ दिन का रहा.
उनकी देखरेख में चुनाव नहीं हो सका. मामला यह था कि 19 अप्रैल 1993 को राष्ट्रपति ग़ुलाम इशाक ख़ान ने आठवें संशोधन के ज़रिए नवाज़ शरीफ़ की सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया और बलख़ शेर मज़ारी को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ शरीफ़ की सरकार को बहाल कर दिया और इस तरह कार्यवाहक सरकार ख़त्म हो गई. शेर मज़ारी केवल 39 दिनों के लिए प्रधानमंत्री रहे.

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मोइनुद्दीन अहमद क़ुरैशी
18 जुलाई 1993 से 19 अक्टूबर 1993 तक
पाकिस्तान में 1990 में बनी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी जिसके बाद 1993 में नए चुनाव हुए.
इस बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री का नाम मोइनुद्दीन अहमद क़ुरैशी था. उन्हें देश के बाहर से लाकर कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया, जिस कारण उन्हें आयातित पीएम भी कहा जाता है. चुनाव के बाद बेनज़ीर भुट्टो दूसरी बार देश की प्रधानमंत्री बनीं.
मलिक मेराज खालिद
5 नवंबर 1996 से 17 फरवरी 1997 तक
1993 में बनी बेनज़ीर भुट्टो सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई और 1997 में देश में फिर आम चुनाव हुए.
इस बार मलिक मेराज खालिद को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया. मेराज खालिद की छवि एक विनम्र और सुशिक्षित राजनेता की थी. कहा जाता है कि वो एक आम आदमी थे, जो इस पद तक पहुंचे थे.
चुनाव के बाद एक बार फिर नवाज़ शरीफ़ प्रधानमंत्री बने, लेकिन ये सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी.
इसके बाद के सालों में देश में कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त करने की व्यवस्था कुछ वक्त के लिए रुकी रही. 1999 में तख्तापलट के बाद जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश में मार्शल लॉ लगा दिया. बाद में वो राष्ट्रपति बने और पिर से कार्यवाहक प्रधानमंत्री की परंपरा शुरू हुई.

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मोहम्मद मियां सूमरो
16 नवंबर 2007 से 25 मार्च 2008 तक
2007 में मुशर्रफ़ ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस को बर्ख़ास्त कर दिया और देश में आपातकाल लगा दिया. इसके बाद देश में उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए.
इन्ही हालातों के बीच मोहम्मद मियां सूमरो कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे. उनकी निगरानी में 2008 के आम चुनावों हुए.
चुनावों में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की जीत हुई और यूसुफ रज़ा गिलानी को प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया.
दिसंबर में एक चुनावी रैली के बाद उनकी हत्या हो गई जिस कारण चुनाव कराने में देरी हुई. इस वजह से मिंया सुमरो सबसे लंबी अवधि यानी चार महीने और आठ दिन तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे.

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मीर हज़ार ख़ान खोसो
25 मार्च 2013 से 5 जून 2013 तक
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया (चार साल तीन महीने के लिए यूसुफ़ रज़ा गिलानी प्रधानमंत्री बने, जिसके बाद क़रीब 9 महीने के लिए रज़ा परवेज़ अशरफ़ प्रधानमंत्री बने).
2013 में आम चुनाव हुए और पाकिस्तान चुनाव आयोग ने बलूचिस्तान के मीर हज़ार ख़ान खुसरो को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया.
इन चुनावों में नवाज़ शरीफ़ तीसरी बार प्रधानमंत्री चुने गए.
नासिर मुल्क
1 जून 2018 से 18 अगस्त 2018 तक
2013 में बनी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया जिसके बाद 2018 में देश में ग्यारहवें आम चुनाव हुए.
इन चुनावों की निगरानी के लिए प्रधानमंत्री शाहिद ख़कान अब्बासी और विपक्षी नेता सैय्यद खुर्शीद अहमद शाह की सहमति से चुनाव आयोग ने पूर्व चीफ़ जस्टिस नासिर मुल्क को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया था.
इन चुनावों में पाकिस्तान तहरीक़े इंसाफ की जीत हुई और इमरान ख़ान प्रधानमंत्री बने. लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के कारण उनकी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई और शहबाज़ शरीफ़ को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया.
अब देश में एक बार फिर चुनाव होने हैं और इसकी निगरानी के लिए अनवारुल हक काकड़ को कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया है.
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