पाकिस्तानः इमरान ख़ान की पार्टी अब फिर संसद में क्यों लौटना चाहती है?

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- Author, आज़म ख़ान
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
पाकिस्तान में लाहौर हाईकोर्ट के पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ़ (पीटीआई) के नेशनल असेंबली के 72 सदस्यों के इस्तीफ़ों के नोटिफ़िकेशन को रद्द करने के बाद पीटीआई ने संसद में वापस जाने का एलान किया है.
चुनाव आयोग और स्पीकर नेशनल असेंबली का नोटिफ़िकेशन रद्द करने के हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद पीटीआई नेताओं ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.
पीटीआई के नेता अली जफ़र ने इस फ़ैसले के बाद कहा, "इसका मतलब ये है कि पीटीआई पूरी ताक़त के साथ विपक्ष के रूप में असेंबली में वापस जा सकती है."
उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि, "मेरे ख्याल में ये ऐतिहासिक फ़ैसला मौजूदा राजनीतिक अफ़रा-तफ़री का समाधान हो सकता है."
वहीं तहरीक-ए-इंसाफ के नेता फारुख हबीब ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'इस फ़ैसले के बाद राजा रियाज़ को नेता प्रतिपक्ष के पद से मुक्त कर दिया जाएगा.'
एक साल पहले जब इमरान खान की सरकार को अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए हटाया गया था, तब तहरीक-ए-इंसाफ़ ने नेशनल असेंबली से सामूहिक इस्तीफ़े की घोषणा कर सत्र का बहिष्कार किया था.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में पीटीआई फिर से असेंबली में जाकर क्या हासिल करना चाहती है?

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'आवाज़ उठाना हमारा मक़सद'
इस सवाल का जवाब ख़ुद तहरीक-ए-इंसाफ़ के अध्यक्ष इमरान ख़ान ने शुक्रवार शाम मीडिया के सामने दिया, "संसद जाने का हमारा मक़सद सिर्फ मौलिक अधिकारों और संविधान के उल्लंघन पर आवाज़ उठाना होगा."
इमरान ख़ान ने कहा है कि वो संसद वापस नहीं जा रहे हैं बल्कि उनकी पार्टी जा रही है.
ग़ौरतलब है कि चुनाव आयोग ने तोशा खाना मामले में इमरान ख़ान को मियांवाली सीट से अयोग्य घोषित कर दिया था.
इसके बाद इमरान ख़ान ने दोबारा चुनाव में हिस्सा लिया. इमरान ख़ान ने नेशनल असेंबली की आठ में से छह सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन उन्होंने पद की शपथ नहीं ली.
अब भले ही इमरान ख़ान नेशनल असेंबली में लौटते हैं, लेकिन उन्हें सबसे पहले स्पीकर राजा परवेज़ अशरफ़ की अध्यक्षता में शपथ लेनी होगी.

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कोर्ट का फ़ैसला मानेंगे स्पीकर?
लाहौर हाईकोर्ट ने तहरीक-ए-इंसाफ़ के इन 72 सदस्यों को अपना इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए स्पीकर के सामने पेश होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि नेशनल असेंबली के स्पीकर सभी सदस्यों को फिर से सुनें और फैसला लें.
तहरीक-ए-इंसाफ़ के शफक़त महमूद ने बीबीसी को बताया कि उन्हें नहीं लगता कि नेशनल असेंबली के स्पीकर लाहौर हाई कोर्ट के फ़ैसले का पालन करेंगे.
उनके मुताबिक़, जिस सरकार ने पंजाब में 14 मई को आम चुनाव कराने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को नहीं माना, वह अब इस अदालत के आदेशों का पालन कैसे करेगी?
उन्हें डर है कि 'पहले स्पीकर उन्हें मिलने का समय नहीं देंगे और फिर अगर मिल भी लिए तो वे कोई और बहाना बनाकर तहरीक-ए-इंसाफ़ के सदस्यों को प्रक्रिया से बाहर रखने की कोशिश करेंगे.'
राजनीतिक विश्लेषक और चुनाव मामलों के विशेषज्ञ अहमद बिलाल महबूब के अनुसार संबंधित नियम अध्यक्ष को ख़ुद को संतुष्ट करने का अधिकार देते हैं कि इस्तीफ़ै वैध हैं और फिर संतुष्ट होने के बाद वे चुनाव आयोग को एक रेफ्रेंस भेज दें और आयोग डी-नोटिफ़ाई कर दे. फिर उन इस्तीफ़ों को वापस करने की अनुमति देने के लिए कोई नियम नहीं हैं.'
उनके मुताबिक़ अदालत स्पीकर को सलाह नहीं दे सकती है, वह सिर्फ़ मामला स्पीकर को फिर से समीक्षा करने के लिए भेज सकती है.
उनका कहना है कि इस सूरत में भी आख़िरी फ़ैसला स्पीकर का ही होगा.
बीबीसी से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में शफ़क़त महबूब ने कहा कि उनकी पार्टी बातचीत करने के लिए तैयार है.
उनके मुताबिक़, अगर पीटीआई को नेशनल असेंबली में बैठने दिया जाता है तो फिर ऐसी हालत में पीटीआई जनसरोकार के फ़ैसले लेने के लिए और सदन में अपना किरदार निभाने के लिए सरकार पर पर्याप्त दबाव बनाएगी.

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बजट पहला लक्ष्य है
शफ़क़त महमूद के मुताबिक़, नेता प्रतिपक्ष का पद संभालने के बाद तहरीक-ए-इंसाफ़ का पहला मक़सद सरकार को जनहितैषी बजट देने के लिए मजबूर करना है.
उन्होंने कहा कि अगर वह सदन में जाते हैं तो उनके पास बहुमत होगा और नेता प्रतिपक्ष उनका होगा.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि विपक्ष का नेता किसे बनाया जाएगा क्योंकि पार्टी के ज्यादातर नेता जेल में हैं.
समय पर हों चुनाव
शफ़क़त महमूद के मुताबिक़, तहरीक-ए-इंसाफ़ नेशनल असेंबली में जाएगी और समय पर चुनाव कराने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ाएगी.
उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि पाकिस्तान के आर्थिक संकट सहित सभी चुनौतियों का समाधान स्वच्छ, पारदर्शी और समय पर चुनाव कराना है."
इसी बीच गुरुवार को पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि व्यापक स्तर पर नैब (नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो) में सुधारों और चुनाव सुधारों के बिना चुनाव में नहीं जाएगी.

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फ्री एंड फेयर इलेक्शन नेटवर्क के सलाहुद्दीन के मुताबिक़, आसिफ़ ज़रदारी के बयान से संकेत मिलता है कि इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श होगा.
तहरीक ए इंसाफ़ भी अगर नेशनल असेंबली में लौट पाई तो वह भी चुनाव सुधारों पर बहस में हिस्सा ले सकेगी.
उनके मुताबिक़, "हालांकि सीनेट में तहरीक-ए-इंसाफ़ का प्रतिनिधित्व है, लेकिन वो नेशनल असेंबली में जाकर इस बहस को और सार्थक बना सकती है."
उनका कहना है कि असेंबली में अपना विपक्ष का नेता नियुक्त करने का मतलब ही ये होगा की पीटीआई सदन में विपक्ष सरकार के कामकाज पर नज़र रख सकेगी और विपक्ष की अपनी भूमिका प्रभावी रूप से निभा सकेगी.
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