पाकिस्तान में बवाल पर उसके दोस्त चीन की चुप्पी, क्या हैं मायने- प्रेस रिव्यू

चीनी विदेश मंत्री

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इमेज कैप्शन, चीन के विदेश मंत्री ने इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के तीन दिन पहले ही पाकिस्तान का दौरा किया था

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के दो दिन बाद भी देश भर में हिंसक विरोध-विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

पाकिस्तान जिस नए सियासी संकट में समाता दिख रहा है, उस पर उसके सदाबहार दोस्त चीन ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने चीन की चुप्पी पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. आज की प्रेस रिव्यू में पहली ख़बर के रूप में यही रिपोर्ट पढ़िए.

चीन की चुप्पी यह बताती है कि वह पाकिस्तान को लेकर क्या नज़रिया रखता है. चीन की चुप्पी को इस रूप में भी देखा जा रहा है कि वह पाकिस्तान की सेना की लाइन से अलग नहीं होना चाहता है.

इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के दो हफ़्ते पहले ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख सैयद असीम मुनीर ने चीन का दौरा किया था.

शायद जनरल मुनीर एक मात्र विदेशी सेना प्रमुख हैं जो चीन के सैन्य अधिकारियों के बजाय वहां के शीर्ष के राजनयिकों से नियमतः मिलते हैं.

इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के महज़ तीन दिन पहले जनरल मुनीर ने चीनी विदेश मंत्री क़िन गांग से मुलाक़ात की थी.

चीन विदेश मंत्री इस्लामाबाद गए थे, जहां उन्होंने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के साथ अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री से मुलाक़ात की थी.

चीन दौरे पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य और शीर्ष के राजनयिक वांग यी से मुलाक़ात की थी.

बिलावल भुट्टो

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चीन-पाकिस्तान की मज़बूत दोस्ती

वांग यी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल कमीशन में विदेश मामलों के निदेशक हैं.

वांग यी ने कहा था कि पाकिस्तान की सेना देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता की असली रक्षक है.

वांग यी ने यह भी कहा था कि चीन और पाकिस्तान की इस्पाती दोस्ती का भी पाकिस्तानी सेना असली समर्थक है.

उन्होंने इस बात की तारीफ़ की थी कि पाकिस्तान की सभी सरकारें और सियासी पार्टियां चीन के साथ गहरे संबंधों का बचाव करती हैं और चीन के हितों से समझौता नहीं करती हैं.

वांग यी की यह टिप्पणी बताती है कि चीन पाकिस्तान की सेना को रणनीतिक रूप से अहम मानता है न कि वहां की चुनी हुई सरकार को.

चीन पाकिस्तान के साथ रिश्तों में स्थिरता के लिए वहां की सेना के साथ स्थायी और भरोसेमंद संबंध चाहता है.

चीन के लिए पाकिस्तान में उसके नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है.

चीन की सरकार पाकिस्तान में अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बहुत ही सतर्क रहती है क्योंकि अतीत में चीनी नागरिकों पर कई जानलेवा हमले हुए हैं.

हालांकि पाकिस्तान में चीनी विदेश मंत्री क़िन गांग ने कहा था कि विकास, सुरक्षा और संपन्नता के लिए राजनीतिक स्थिरता पहली ज़रूरत है.

चीनी विदेश मंत्री ने कहा था, ''चीन उम्मीद करता है कि पाकिस्तान की सभी सियासी पार्टियां घरेलू और बाहरी चुनौतियों से लड़ने के लिए सहमति से आगे बढ़ेंगी. पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति के लिए यह ज़रूरी है.''

बीजिंग में चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कॉन्टेंपररी इंटरनेशनल रिलेशन में दक्षिण एशिया के शीर्ष के स्कॉलर हु शिषेंग कहते हैं, ''यह आम धारणा है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी से राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति पैदा होगी और सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन की आग तेज़ी से बढ़ेगी. सेना, अदालत और वहाँ की सरकार को आने वाले दिनों में यह सियासी ड्रामा बंद करना होगा. इमरान ख़ान को एक राजनीतिक ताक़त के रूप में बने रहना चाहिए.''

इमरान ख़ान

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इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी का क्या असर होगा

शंघाई में इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशिया स्टडीज़ के निदेशक और प्रोफ़ेसर वांग देहुआ कहते हैं, ''पाकिस्तान जिस तरह के आर्थिक संकट से जूझ रहा है, उसमें वहाँ के उच्च वर्ग के लोगों को ईमानदारी दिखानी होगी.

लंबे समय से यहाँ का कुलीन वर्ग जनता की उपेक्षा करता रहा और ख़ुद को अमीर बनाता रहा है. पाकिस्तान के कुलीन वर्ग की इसी अक्षमता का परिणाम सड़कों पर दिख रहा है.

वहाँ के सोशल मीडिया पर लोगों के ग़ुस्से से इस चीज़ को समझा जा सकता है. पाकिस्तान की सेना का इतिहास रहा है कि वह राजनीति में हस्तक्षेप करती रही है, लेकिन जनरल मुनीर के हालिया चीन दौरे का पाकिस्तान के वर्तमान सियासी संकट से कोई संबंध नहीं है. यह पाकिस्तान का आंतरिक मामला है.''

प्रोफ़ेसर वांग ने कहा, ''कई हलकों में ऐसी चिंता जताई जा रही है कि इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी से चीन और पाकिस्तान के संबंध प्रभावित होंगे, लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता हूँ.

जब तक भारत का अस्तित्व है और उसके पास जो कुछ ताक़त है, उसी तरह से चीन और पाकिस्तान का संबंध बना रहेगा. पाकिस्तान के आंतरिक मामलों से इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा.''

ऋषि सुनक

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इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी पर ऋषि सुनक की यह टिप्पणी

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी पर कहा है कि ब्रिटेन की नज़र पाकिस्तान पर बनी हुई है.

बुधवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा, ''पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ़्तारी उनका आंतरिक मामला है. हम शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन करते हैं और चाहते हैं कि क़ानून का राज कायम रहे. पाकिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है, उस पर हमारी नज़र बनी हुई है.''

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ब्रिटिश पीएम के इस बयान को प्रमुखता से जगह दी है.

वहीं लेबर पार्टी के जाने-माने नेता जेरेमी कोर्बिन ने इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी का खुलकर विरोध किया है. लेबर पार्टी ब्रिटेन की अहम सियासी ताक़त है.

जेरेमी कोर्बिन ने ट्वीट कर कहा है, ''पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ़्तारी लोकतंत्र के लिए के लिए काला दिन है. पाकिस्तान में इस गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ जो विरोध कर रहे हैं, मैं उनके साथ खड़ा हूँ. इमरान ख़ान को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए.''

पाकिस्तान

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पाकिस्तान मीडिया में इमरान की गिरफ़्तारी की कवरेज

पाकिस्तानी मीडिया में इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के नेतृत्व के नाम से एक ऑडियो चल रहा है, जिसमें वहाँ की सेना के ठिकानों पर हमले की बात की जा रही है.

पाकिस्तान के अंग्रेज़ी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की ख़बर के अनुसार, ऑडियो में पीटीआई के नेता अपने कार्यकर्ताओं से जिन्ना हाउस जुटने के लिए कह रहे हैं. इस ऑडियो में कहा जा रहा है, ''हमने लाहौर में पूरा कोर कमांडर हाउस नष्ट कर दिया है.''

पाकिस्तानी न्यूज़ वेबसाइट द न्यूज़ के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशन यानी आईएसपीआर ने कहा है कि नौ मई का दिन पाकिस्तान के इतिहास का काला दिन है. आईएसपीआर ने कहा है कि इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी के बाद सेना की संपत्तियों पर हमला शर्मनाक है.

सेना ने कहा है कि किसी को भी क़ानून अपने हाथ में लेने की इजाज़त नहीं होगी. इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी को इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने वैध ठहराया है. इमरान ख़ान के समर्थकों ने सेना विरोधी नारे भी लगाए हैं और सेना के ठिकानों पर हमले भी किए हैं.

आईएसपीआर ने प्रदर्शनकारियों की आलोचना करते हुए कहा है कि अपना स्वार्थ साधने के लिए देश की भावना का दुरुपयोग किया जा रहा है.

आईएसपीआर ने कहा, ''यह पाखंड की मिसाल है. सत्ता के भूखे लोग अपने मुल्क के दुश्मन बन गए हैं. पिछले 75 सालों में हमारे स्थायी दुश्मन ऐसा नहीं कर पाए जो सत्ता के भूखे लोग आज कर रहे हैं. हमें पता है कि इसके पीछे कौन है, लेकिन हमें इन हालात से निपटना भी आता है.''

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