पैरों को लंबा करने की सर्जरी जो इलेन के लिए डरावनी कहानी बन गई

इलेन फ़ू

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    • Author, टॉम ब्रैडा
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

इलेन फ़ू के पैरों पर बैंगनी रंग के बड़े-बड़े निशान हैं जो पैर बड़ा कराने की मेडिकल प्रक्रिया के भयानक हादसे में बदल जाने की याद दिलाते हैं.

साल 2016 में 49 साल की इलेन की पांच सर्जरी और तीन बोन ग्राफ़्ट हुए थे. इसने उनकी जीवनभर की कमाई ख़त्म कर दी और उन्हें अपने सर्जन के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया.

हालांकि जुलाई में इस मामले का निपटारा बिना किसी जवाबदेही के हो गया.

इलाज के दौरान एक वक्त, एक नुकीला मेटल हड्डी में घुस गया था जबकि दूसरी बार, उन्हें अपने पैर में अंदर से "भारी जलन महसूस हुई" थी.

इलेन कहती हैं, "मेरी ज़िंदगी एक अग्नि परीक्षा जैसी रही लेकिन मैं ज़िंदा बच निकली."

उनका इलाज कर रहे डॉक्टर ने किसी भी तरह की लापरवाही होने की बात से लगातार इनकार किया और कहा कि कुछ जटिलताओं के बारे में इलेन को पहले से बता दिया गया था और कुछ परेशानियां इलेन की ही गतिविधि से पैदा हुईं.

(चेतावनीः इस कहानी में ऐसे मेडिकल डीटेल्स हैं जो पाठकों को विचलित कर सकते हैं.)

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इलेन ने क्यों कराई सर्जरी?

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इलेन कहती हैं कि उन्हें अपनी लंबाई से शिकायत थी.

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वो कहती हैं, "12 साल की उम्र तक मैें अपनी उम्र की अधिकांश लड़कियों से लंबी थी. लेकिन 14 साल की उम्र तक मैं अचानक सबसे छोटी दिखने लगी. समय के साथ मुझे लंबा होने का जुनून हो गया. मुझे लगता था कि लंबी होने के मतलब है बेहतर और अधिक ख़ूबसूरत होना. मुझे लगा कि लंबे लोगों के लिए अवसर भी अधिक थे."

वो बताती हैं कि वयस्क होने के बाद उनका यह जुनून और बढ़ गया.

इलेन मानती हैं कि उन्हें बॉडी डिस्मॉर्फ़िया था. यह एक ऐसी मानसिक स्थिति होती है जब एक व्यक्ति को खुद के दिखने को लेकर ग्रंथि बन जाती है, भले बाकी लोग उसे किसी तरह से देखते हों. इसका असर बहुत विनाशकारी हो सकता है.

25 साल की उम्र में इलेन ने पैरों को लंबा करने वाले एक चाइनीज़ क्लीनिक के बारे में एक लेख पढ़ा. इस लेख में मध्ययुगीन दिखने वाले पैरों के पिंजड़ों और बड़े पैमाने पर संक्रमण के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई थी.

इलेन को यह एक डरावने सपने जैसा लगा लेकिन वो इस ओर आकर्षित हो गईं.

वो कहती हैं, "मैं जानती हूं कि लोग इस पर सवाल करेंगे लेकिन जब आप बॉडी डिस्मॉर्फ़िया से पीड़ित हैं तो आपको इतना बुरा क्यों लगता है, इसका कोई तार्किक उत्तर नहीं मिलता है."

3 इंच लंबी होने की ख़्वाहिश

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इमेज कैप्शन, इलेन फ़ू कहती हैं कि पहली बार ऑपरेशन होने के बाद उन्हें दर्द महसूस नहीं हुआ

इस घटना के 16 साल बाद इलेन को लंदन में एक निजी क्लीनिक का पता चला जहां इस तरह की सर्जरी होती थी.

यहां ऑर्थोपेडिक सर्जन थे जीन-मार्क गुइशेट, जो हड्डी लंबा करने के विशेषज्ञ थे. उन्होंने अपना एक उपकरण- गुइशेट नेल भी इजाद किया था.

वो कहती हैं, "यह बहुत खुशी का पल था क्योंकि लंदन में ही सर्जरी हो सकती थी और मैं घर पर ही रिकवर बी कर सकती थी."

"डॉ. गुइशेट ने इसकी जटिलताओं के बारे में खुलकर बताया था, जैसे, नसों को नुकसान, खून के थक्के जमना, हड्डियों के दोबारा न जुड़ने आदि के बारे में."

"लेकिन मैंने खूब रिसर्च कर लिया था और एक बहुत महंगे डॉक्टर को दिखाने जा रही थी इसलिए मुझे उनसे बहुत उम्मीद थी. मेरा सपना था कि मैं 5 फ़ुट 2 इंच से 5 फ़ुट 5 इंच लंबी हो जाऊं."

उन्होंने 50,000 पाउंड (क़रीब 53.5 लाख रुपये) खर्च पर 25 जुलाई को सर्जरी कराई. उनके लिए ये लंबा होने की उनकी इच्छा को पूरा करने की प्रक्रिया की शुरूआत थी.

पैर लंबा करने वाली मेडिकल सुविधा अपेक्षाकृत बहुत आम नहीं है, लेकिन ये मेडकल प्रक्रिया दुनिया के कई निजी अस्पतालों में उपलब्ध है और इसका खर्च 16 लाख रुपये से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक हो सकता है.

इलेन कहती हैं, "सर्जरी के बाद जब मेरी आंख खुली तो मैं बहुत उत्साहित थी, मुझे कोई दर्द नहीं था और ऐसा लगा जैसा कुछ हुआ ही न हो. लेकिन 90 मिनट के बाद मेरे पैरों में असहनीय दर्द शुरू हो गया. लगा कि कोई मैरे पैरों को अंदर से जला रहा है. मैं सुबह छह बजे तक चीखती रही और चीखते-चीखते सो गई."

इस प्रक्रिया में थोड़ा दर्द होता ही है क्योंकि पैर की हड्डी को दो हिस्सों में तोड़कर उनके बीच मेटल की रॉड लगाई जाती है.

धीरे-धीरे दोनों हिस्सों के बीच लगे मेटल के इस रॉड की लंबाई बढ़ाई जाती है, जिससे मरीज़ की लंबाई बढ़े.

आम तौर पर हड्डियों के ये दोनों हिस्से फिर से जुड़ते हैं और इनके बीच खाली जगह को भरते हैं. यह सिर्फ शुरुआत होती है, लेकिन इसका ऑपरेशन बहुत जटिल होता है.

इलेन के बाएं पैर में लगा नेल (कील) हड्डी को चीरता हुआ बाहर निकल आया

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इमेज कैप्शन, इलेन के बाएं पैर में लगा नेल (कील) हड्डी को चीरता हुआ बाहर निकल आया

लंबी और जटिल प्रक्रिया

ब्रिटिश आर्थोपेडिक एसोसिएसन के पूर्व प्रमुख प्रोफ़ेसर हामिश सिम्पसन आगाह करते हैं कि "इस प्रक्रिया में दो से तीन महीने लगते हैं और इससे दोगुना समय पूरी तरह ठीक होने में लगता है. अधिकांश लोगों में इसके लिए एक साल का समय लगता है."

सर्जरी ख़त्म होने के बाद इलेन ने पैर लंबे करने के लिए कष्टप्रद व्यायाम किए, ताकि रॉड पूरी तरह फिट हो जाए. लेकिन इसके बाद उनके साथ जो हुआ वो बहुत पीड़ादायक था.

वो कहती हैं, "मुझे पैर में बेतहाशा दर्द हो रहा था. एक रात मैं बिस्तर पर करवट बदल रही थी तभी कुछ चटकने की आवाज़ आई, और इसके बाद असहनीय दर्द शुरू हो गया."

दूसरे दिन जब स्कैन हुआ तो इलेन का डर सही साबित हुआ. उनके बाएं पैर में लगा नेल (कील) हड्डी को चीरता हुआ बाहर निकल आया था. ये फीमर (पैर के ऊपरी हिस्से की हड्डी) को तोड़कर बाहर आ गया था. फीमर शरीर की सबसे मज़बूत हड्डी होती है.

इलेन परेशान हो गईं. लेकिन डॉ. गुइशेट ने उन्हें भरोसा दिलाया.

इलेन के मुताबिक़, "उन्होंने कहा घबराने की ज़रूरत नहीं, घाव भरने का इंतज़ार करना चाहिए जिसके बाद एक बार फिर प्रक्रिया शुरू होगी."

लेकिन इस दौरान इलेन के दाहिने पैर की प्रक्रिया जारी रही और बाएं पैर की सर्जरी की तारीख़ तय कर दी गई.

उन्हें पता था कि इसके लिए ऑपरेशन में अतिरिक्त पैसे खर्च होंगे, लेकिन वो खुश थीं कि यह प्रक्रिया पूरी होगी.

रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो गई

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सितम्बर तक उनका दाहिना पैर सात सेंटीमीटर तक बढ़ गया. लेकिन चीजें सामान्य तरीक़े से नहीं चल रही थीं. उनके दोनों पैर छोटे-बड़े थे, जिससे उनकी रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो गई और उन्हें लगातार दर्द की शिकायत रहने लगी.

छह सप्ताह बाद हुए स्कैन में पता चला कि उनके दाहिने पैर में हड्डियों का बढ़ना रुक गया था. इस पैर में फीमर के दो टुकड़े रॉड से जुड़े हुए थे.

इलेन जब डॉक्टर से मिलीं तो उन्होंने एक और ऑपरेशन मिलान के क्लीनिक में तय किया. अप्रैल 2017 में उन्होंने इलेन के बाएं पैर को बड़ा करने की प्रक्रिया शुरू की. इस दौरान दाहिने पैर में बोन मैरो डाला गया ताकि हड्डी के विकास को प्रेरित किया जा सके.

ऑपरेशन के बाद जब इलेन जागीं तो उन्हें और बुरी ख़बर मिली.

वो कहती हैं, "डॉ. गुइशेट ने मुझे बताया कि जब वो नेल निकाल रहे थे, वो टूट गया. उनके पास किसी और मरीज़ का नेल था जिसे वो मेरे पैर में लगाने वाले थे. लेकिन इसमें और पैसा खर्च होने वाला था."

तीन दिन बाद भी इलेन हिल-डुल नहीं पा रही थीं, लेकिन जल्दी घर जाना चाहती थीं और लंदन लौट आईं.

वो कहती हैं कि डॉ. गुइशेट से बातचीत बहुत तल्ख़ हो गई और ऐसा लगा कि गर्मियों तक उनके बीच डॉक्टर मरीज़ का रिश्ता टूट गया था.

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इमेज कैप्शन, इलेन के दांए पैर की हड्डी बढ़ नहीं रह थी जिसकी वजह से उन्हें और इलाज की ज़रूरत थी

डॉक्टर पर मुक़दमा और समझौता

इलेन को नहीं पता था कि वो किसके पास मदद मांगने जाएं. जुलाई 2017 में उन्होंने एनएचएस में एक स्पेशलिस्ट आर्थोपेडिक सर्जन से संपर्क किया.

सर्जन ने उन्हें बताया कि उन्हें पूरी तरह ठीक होने के लिए कम से कम पांच साल लगेंगे.

आज की तारीख में इलेक की पहली सर्जरी को आठ साल हो चुके हैं. इलेन कहती हैं कि वो अभी भी इस मेडिकल प्रक्रिया से हुए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से उबरने की कोशिश कर रही हैं.

वो कहती हैं कि उन्हें शारीरिक गतविधियों में कई तरह की समस्याएं है और वो पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) से पीड़ित हैं.

वो कहती हैं, "2017 से 2020 तक मैं दुनिया से छिपती रही थी. मैं अकेली थी, बेरोज़गार थी, मैं एक-एक पैसे को मोहताज हो गई थी और अपंग थी."

लेकिन पिछली जुलाई में चार सालों की उनकी क़ानूनी लड़ाई उस वक्त ख़त्म हुई जब डॉ. गुइशेट बिना ज़िम्मेदारी लिए उन्हें अच्छा ख़ासा पैसा देकर मामला निपटाने के लिए राज़ी हो गए.

सर्जन के वकील ने अपने मुवक्किल की ओर से किसी भी लापरवाही का खंडन किया और कोर्ट से कहा कि फ़्रैक्चर और देर से हड्डी बढ़ना बदक़िस्मती थी. उन्होंने इलेन पर नेल को बढ़ाने के प्रयास करने और बिना बताए एंटी डिप्रेसैंट दवा लेने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सर्जरी से पहले मरीज़ को इससे जुड़ी सभी जलिटताओं के बारे में बता दिया गया था.

इसके अलावा ये भी कहा कि फ़िज़ियोथैरेपी और अन्य व्यायाम की डॉ. गुइशेट के सुझावों को एलेन ने मानने से लगातार इनकार किया था.

एलेन ने इन सारे दावों का खंडन किया. उनका कहना है कि एंटी डिप्रैसेंट दवाओं का इस बीमारी से कोई लेना-देना नहीं था.

इलेन को लगा था कि मोटा खर्च करने पर वो सुरक्षित होंगी लेकिन उन्हें आर्थिक दिक्कतों के अलावा और भी पीड़ा झेलनी पड़ी.

वो कहती हैं, "मैंने अपनी ज़िंदगी के बढ़िया साल गंवा दिए. मैं जानती हूं कि लोग मुझसे अफ़सोस सुनना चाहेंगे. लेकिन अगर कोई आज मुझसे पूछे कि क्या ये सब जानते हुए मैंने जो किया वो किया होता, तो मैं कहूंगी- नहीं, बिल्कुल नहीं."

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