लंबे समय तक बैठे रहने का शरीर पर क्या असर पड़ता है?

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- Author, राजवीर कौर गिल
- पदनाम, बीबीसी पंजाबी
बैंक के कैश काउंटर पर बैठीं अर्चना पाठक चाय पीने के लिए उठने ही वाली थीं कि तभी एक बुज़ुर्ग महिला पैसे जमा करने आ गईं.
यह सिलसिला लगातार चलता रहा, एक के बाद एक ग्राहक काउंटर पर आते रहे. अगर वे उठ जातीं तो लाइन लंबी हो जाती. यही सोचकर वो लंच ब्रेक तक बैठी रहीं.
अर्चना पाठक को बैंक में काम करते हुए 10 साल से ज़्यादा समय हो चुका है और उनका काम ज़्यादातर बैठकर करने का ही होता है.
शाम को अपनी कार चलाकर वो घर पहुंचीं तो शुक्रगुज़ार थीं कि घर के कामकाज में मदद करने के लिए कोई था.

बच्चों के पास जाकर उनका होमवर्क करवाया, तो देखा कि रात के साढ़े आठ बज रहे थे. ऐसे ही बैठे-बैठे दिन बीत गया.
लेकिन एक दिन यह दिनचर्या थम सी गई.
अर्चना कहती हैं, ''मेरे पैरों में सूजन थी और पीठ दर्द के कारण मैं बैठ या चल नहीं पा रही थी.''
अर्चना को दर्द इतना हो रहा था कि उन्हें पीठ पर बेल्ट लगानी पड़ी और वो बिना कुशन की मदद के बैठ ही नहीं पा रही थीं. वो ये दर्द अब लगातार महसूस कर रही थीं.
एक बार में कितने घंटे बैठा जा सकता है?

आख़िर में उन्होंने डॉक्टर के पास जाने का फ़ैसला लिया. डॉक्टर ने उन्हें नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर जांचने की सलाह दी है.
विशेषज्ञों के मुताबिक़, यह स्थिति हममें से किसी के साथ भी हो सकती है. ख़ासकर उन पेशों से जुड़े लोगों के साथ जिनमें लंबे समय तक बैठने की ज़रूरत होती है.
चाहे वे कार्यालय कर्मचारी हों, दुकानदार हों, ड्राइवर हों या ऐसे किसी अन्य व्यवसाय से जुड़े लोग हों.
डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक बैठे रहने से आपकी कमर के साथ साथ स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है.
मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में डीकिन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर फिज़िकल एक्टिविटी एंड न्यूट्रिशन में एक फिज़ियोलॉजिस्ट डेविड डंस्टन ने इसके कारण शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों पर व्यापक शोध किया है.
शोधकर्ताओं का सुझाव है कि अधिकतकम एक बार में 120-180 मिनट तक ही लगातार बैठा जा सकता है.
उन्होंने ये शोध 21 सेहतमंद कामकाजी नौजवानों पर किया. उन्होंने इन युवाओं की जीवनशैली का अध्ययन किया और पाया कि दो घंटे बैठने के बाद उनकी टांगों की पिंडलियां या कॉल्फ मसल लगभग एक से.मी (0.04 इंच) बढ़ गईं और उनके पैरों में रक्त का प्रवाह कम हो गया था.
डंस्टन कहते हैं, "बैठने से मांसपेशियों की गतिविधि कम हो जाती है."
"मांसपेशियों की गतिविधि कम होने से कई अन्य जटिलताएं पैदा होती हैं, जैसे पाचनशक्ति कम होना, पैरों में रक्त का प्रवाह कम होना, जिससे पैरों की मांसपेशिओं में रक्त जमा हो सकता है."
बीबीसी संवाददाता एनाबेल बॉर्नी की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगातार बैठे रहना एक प्रकार का सेडेंटरी बिहेवियर होता है जैसे लगातार टीवी देखना, वीडियो गेम खेलना, ड्राइव करना या बैठ कर काम करना इसमें शामिल होता है और इससे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आने लगती है.
स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं

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2020 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सेडेंटरी जीवन शैली को कम करने के लिए कुछ सिफ़ारिशें की थीं.
2010 से, शोधकर्ता यह दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर आप दिन में कुछ समय के लिए एक्टिविटी करते हैं मसलन कसरत लेकिन फिर भी सेडेंटरी बिहेवियर रखते हैं तो परेशानी आ सकती है.
हालाँकि, उन लोगों में जो गतिहीन हैं और बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करते हैं उनकी तुलना में स्वास्थ्य जोख़िम उन लोगों में कम होता है जो थोड़ी करसरत या एक्टिविटी करते रहते हैं.

सेहत पर उल्टा असर

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शोधकर्ता आमतौर पर इस बात से सहमत हैं कि 120-180 मिनट तक लगातार बैठने से संभावित रूप से बीमारियां हो सकती हैं.
लगातार बैठे रहने से शरीर पर कई प्रभाव पड़ते हैं. रक्त प्रवाह में कमी और उससे भी कई तरह की शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं.
इसकी वजह से शरीर में रक्तचाप या बीपी बढ़ने लगता है और ये दिल की बीमारी होने का एक बड़ा कारण बनता है.
इन सभी संभावित परिणामों को देखते हुए, ऐसा क्यों है कि हम इतनी देर तक बैठे रहते हैं - और क्या हम इस आदत को छोड़ सकते हैं?
यूनिवर्सिटी ऑफ़ सरी में हैबिचुअल बेहवियर में विशेषज्ञता रखने वाले एक सामाजिक मनोवैज्ञानिक, बेंजामिन गार्डनर कहते हैं, "मुझे लगता है कि लोग अधिक गतिहीन होते जा रहे हैं क्योंकि समाज में इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है.''
बेंजामिन गार्डनर इस बात पर शोध कर रहे हैं कि लोग इतनी देर तक क्यों बैठे रहते हैं.
"ऐसा नहीं है कि कोई जानबूझकर इसे आगे बढ़ा रहा है. जैसे-जैसे सहूलियत बढ़ती जाती है, हमें इतना इधर-उधर घूमना नहीं पड़ता है."
2018 में, गार्डनर और उनके सहयोगियों ने पाया कि बैठकों में खड़े होने को प्रोत्साहित करने से अभूतपूर्व सामाजिक बाधाएँ उत्पन्न हुईं.
गार्डनर कहते हैं, "हमने तीन अलग-अलग बैठकों में लोगों को खड़े होने को आज़माने के लिए प्रोत्साहित किया, और इसके बाद उनका साक्षात्कार लिया और निष्कर्ष दिलचस्प थे."
"एक औपचारिक बैठक में, यह महसूस किया गया कि खड़ा रहना उचित नहीं था."

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लेकिन लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली समस्याओं से उबरने के लिए कुछ चीज़ें लाभदायक हो सकती हैं.
जैसे, ट्रेडमिल पर वर्कआउट और पैरों को हिलाना रक्त प्रवाह को बढ़ाता है.
बस बीच-बीच में उठना और हल्की-फुल्की सैर पर जाना कुछ सीढ़ियाँ चढ़ना भी फायदेमंद पाया गया है.
रोज़मर्रा के जीवन में बदलाव लाने के बारे में नेशनल नी एंड हिप रिप्लेसमेंट फ़ाउंडेशन के प्रमुख, प्रोफ़ेसर सीएस यादव ने कहा, “मौजूदा दौर में लोग रोज़ी-रोटी के लिए आठ घंटे बैठने को मजबूर हैं, नौकरी कोई भी हो, बैठना आम बात है.”
वो इससे होने वाले नकारात्मक प्रभावों की पुष्टि करते हैं.
प्रोफेसर यादव कहते हैं, ''लंबे समय तक बैठे रहने से जुड़ी समस्याओं में पीठ दर्द, ब्लड प्रेशर या घुटने की समस्या आम है.''
“महिलाओं में शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण होने वाली बीमारियों से पीड़ित अधिक हैं क्योंकि उन्हें ऑफिस और घरेलू काम के दौरान अपने लिए समय को तरज़ीह देना मुश्किल लगता है.”
वे कहते हैं, ''सभी परिस्थितियों के बावजूद, गतिहीन जीवनशैली के नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है.''
जटिलताओं से कैसे बचें

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प्रोफेसर यादव कहते हैं, एरोबिक्स और कुछ अन्य व्यायाम सहायक हो सकते हैं.
उन्होंने कहा कि साइकिल चलाने से लगातार बैठने से मांसपेशियों पर पड़ने वाले असर को रोकने में मदद मिल सकती है.
जब उनसे पूछा गया कि आप किस उम्र में साइकिल चलाना शुरू कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि चाहे चार साल का बच्चा हो या 70 से 80 साल का बुज़ुर्ग, वह साइकिल चलाना शुरू कर सकते हैं.
बस रफ़्तार और कितनी देर तक साइकिल चलानी है, इस पर ध्यान देने की ज़रूरत है.
प्रोफ़ेसर यादव सलाह देते हुए कहते हैं, "अक्सर मरीज़ बेल्ट या अन्य ऐसी सुविधाएं लगवाना पसंद करते हैं जो बाहरी उपचार से जुड़ी होती हैं. लेकिन इन बीमारियों से वास्तविक बचाव जीवनशैली में बदलाव से ही संभव है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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