अवैध शराब इस तरह ज़हर बनकर हो जाती है जानलेवा

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भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में पिछले हफ़्ते ज़हरीली शराब पीने के बाद बीमार पड़े 219 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इन्हीं में सत्या और मुरुगन भी शामिल थे.
सत्या काफ़ी कम उम्र की हैं और अब वो ज़हरीली शराब के असर से धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं.
सत्या बताती हैं, “उस दिन जितने लोगों ने मेरे साथ शराब पी थी, उनमें से ज़्यादातर की मौत हो गई. मुझे लग रहा था कि मैं भी ज़िंदा नहीं बचूंगी.”
मुरुगन ने उसी खेप की शराब ली थी. इलाज के दौरान उनकी जान बच गई.
मुरुगन का कहना है, “मुझे डॉक्टरों ने मरने से बचा लिया. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं जीवित बचूंगा. शराब पीने के बाद मुझे बेहोशी जैसी हो गई थी और मौत नज़र आ रही थी.''
सत्या का कहना है, ''जिस अवैध शराब के पीने से कई लोगों की मौत हुई, उसे पीने के बावजूद उनकी जान बच पाई, किस्मत अच्छी है.''
इस हादसे में कम से कम 57 लोगों की मौत हुई है.


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ज़हरीली शराब पीने के बावजूद, जीवित बचे कई लोग अब भी तमिलनाडु के कल्लकुरुचि ज़िले के अस्पताल में भर्ती हैं.
ज़हरीली शराब पीने से इस तरह मौत की घटनाएं भारत के कई राज्यों में होती हैं.
बिहार में क़रीब आठ साल पहले पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी. उसके बाद राज्य में कई बार अवैध शराब पीने से लोगों की मौत हो चुकी है.
ऐसी घटनाएं दुनिया के अन्य देशों में भी होती हैं.
रूस के राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार संघ के मुताबिक़, देश में हर साल लगभग 900 लोगों की मौत ज़हरीली शराब पीने से होती है.
ईरान में भी साल 2020 में ज़हरीली शराब पीने से 44 लोगों की मौत की ख़बर सामने आई थी.
इसी तरह साल 2018 में इंडोनेशिया में घर में बनाई गई शराब को पीने से कम से कम 45 लोग मारे गए थे.
ज़हरीली शराब दुनियाभर की एक बड़ी समस्या है.

जानलेवा मेथेनॉल
ज़हरीली शराब से होने वाली मौतों के ज़्यादातर मामलों में मेथेनॉल या मिथाइल अल्कोहल का संबंध होता है. यह एक ज़हरीला रसायन होता है, जो अवैध शराब में पाया जाता है.
स्थानीय या घरेलू स्तर पर शराब बनाने के दौरान ही रसायनिक क्रिया से मेथेनॉल पैदा होता है. शराब बनाने की प्रक्रिया के दौरान मेथेनॉल की मात्रा और ज़्यादा बढ़ जाती है.
व्यवसायिक तौर पर शराब का उत्पादन करने वाले इसकी मात्रा को कम करके सुरक्षित स्तर पर ले आते हैं ताकि यह लोगों के लिए जानलेवा ना बने.
लेकिन शराब तस्कर अक्सर अवैध शराब में औद्योगिक मेथेनॉल को मिला देते हैं, जो पेंट और वॉर्निश जैसे पदार्थों में पाया जाता है. ऐसा सस्ती और घरेलू शराब को, ज़्यादा नशीला बनाने के लिए किया जाता है.
जबकि इस ज़हरीले रसायन की थोड़ी सी मात्रा भी लोगों को अंधा बना सकती है, इससे लीवर ख़राब हो सकता है और मौत भी हो सकती है.
एमपीआई यानी मेथेनॉल पॉयज़निंग इनिशिएटिव के मुताबिक़, साल 2023 में दुनिया भर में मेथेनॉल से जुड़े 60 हादसे हुए थे.
एमपीआई की स्थापना ओस्लो यूनिवर्सिटी और मेडिसिंस सेन्स फ्रंटियर्स यानी एमएसएफ ने की है. इसके मुताबिक़ मेथेनॉल ज़हर से जुड़ी ज़्यादातर घटनाएं एशियाई देशों में होती हैं.

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मेथेनॉल के ज़हरीले असर का क्या संकेत होता है?
ब्रिटेन के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक़, इंजेक्शन या सांस के ज़रिए मेथेनॉल की भाप लेने से सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है.
इससे इंसान कोमा में जा सकता है, उसका नर्वस सिस्टम बिगड़ सकता है, शरीर में ऐंठन और बेहोशी हो सकती है. इससे आँखों की रोशनी जा सकती है और पीड़ित व्यक्ति की मौत भी हो सकती है.
तमिलनाडु में पुदुकोट्टई के सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के डॉक्टर ए मुथु कहते हैं, “इससे किडनी में एसिड बनने लगता है और यह पेशाब के प्रवाह को रोक देता है. इससे किडनी में नमक की मात्रा बढ़ जाती है और किडनी ख़राब हो सकती है.”
ब्रिटिश पत्रिका 'ओप्थैमोलॉजी' में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक़, मेथेनॉल की थोड़ी मात्रा भी नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है, इससे आँखों की रोशनी ख़त्म हो सकती है और इसे वापस हासिल करना भी संभव नहीं होता है.
इसमें कहा गया है कि अगर कोई इंसान अवैध शराब की वजह से अपनी आंखों की रोशनी खो दे, तो चिकित्सा की सबसे आधुनिक तकनीक भी आंखों को दोबारा ठीक करने में विफल हो सकती है.

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लिंकन काउंटी हॉस्पिटल में आँखों के डॉक्टर विकास सोडीवाला ने बीबीसी को बताया कि साल 2012 में चक्कर, उल्टी, पेट दर्द और धुंधली नज़र की शिकायत के साथ कई मरीज अस्पताल आए थे.
उन्होंने बताया कि लोगों ने दुकानों और कार में बिक रही शराब ख़रीदकर पी ली थी.
विकास सोडीवाला कहते हैं, “मेथेनॉल, इंसान की आँखों की तंत्रिकाओं को प्रभावित कर सकता है और कुछ मामलों में वो अंधे भी हो सकते हैं.”
एमपीआई के मुताबिक़, मेथेनॉल का ज़हरीला असर दुनिया भर में कमज़ोर तबकों पर होता है, लेकिन इसकी रिपोर्ट अक्सर कम ही होती है.
अच्छे ब्रांड वाली महंगी शराब की ऊंची कीमत की वजह से, सस्ती और स्थानीय स्तर पर बनी शराब, कम आय वाले ग़रीब लोगों की पहुँच में होती है.
साल 2009 में गुजरात में सौ से अधिक और साल 2011 में पश्चिम बंगाल में लगभग 170 ज़हरीली शराब की वजह से मारे गए थे. साल 2015 में मुंबई में भी सौ से अधिक लोग इसी वजह से मारे गए थे.
वहीं साल 2022 में जाँच के दौरान पाया गया था कि दक्षिण अफ़्रीका में एक नाइट क्लब में मारे गए 21 किशोरों के शरीर में मेथेनॉल के अंश मौजूद थे.

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शराबबंदी
दुनिया के कुछ मुस्लिम देशों में शराबबंदी लागू है. इस्लाम में शराब पीने की मनाही है.
जानकारों के मुताबिक़, ईरान और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम देशों में शराब पीना, धर्म के ख़िलाफ़ माना जाता है और वहाँ अवैध शराब से होने वाली मौतों पर रोक लगाना एक बड़ी चुनौती है.
ज़हरीली शराब पीने के बाद बीमार पड़ने पर लोग शर्म और अपराध-बोध के वजह से किसी की मदद भी नहीं ले पाते हैं. इन देशों में जो पर्यटक, विदेशी बार और छुट्टियाँ गुज़ारने वाली जगहों पर जाते हैं, वहाँ भी मेथेनॉल वाली शराब एक बड़ा ख़तरा होती है.
अवैध शराब की बिक्री के केंद्र
आप चाहे दुनिया के किसी भी देश में हों, अवैध शराब के शिकंजे में फंसने का ख़तरा बना रहता है.
अंतरराष्ट्रीय पुलिस एजेंसी यानी ‘इंटरपोल’ की सलाह के मुताबिक़, “अगर शराब सामान्य कीमत से कम पर मिल रही हो या शराब पर टैक्स नहीं लगा हो तो इसका मतलब है कि वह नकली शराब हो सकती है.”
नाइजीरिया
नाइजीरिया में खाद्य पदार्थों के जानकार ओपेयेमी फ़ैमकिन ने बीबीसी को बताया कि पोर्ट हर्कोर्ट में एक नाइट क्लब में ब्रांडेड शराब पीने के बाद वो बीमार पड़ गए, बाद में पता चला कि वो नकली शराब के शिकार बने हैं.
उन्होंने बताया, “इसका स्वाद अजीब था, लेकिन जब आप पार्टी कर रहे हैं तो इसकी परवाह नहीं करते हैं. फिर मैं पांच दिन के लिए बुरी तरह बीमार पड़ गया.”
उन्होंने जब अपने अनुभव को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तो कई लोगों ने अपने ऐसे ही अनुभव को साझा किया. नाइजीरिया के कई शहरों में नकली शराब का कारोबार फैला हुआ है. लेकिन अमीर देशों में यह काम अपराधियों के हाथों में होता है.

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ग्रीस
साल 2016 में ग्रीस की हेना पॉवेल एक रात अपने दोस्तों के साथ शराब पीने के बाद बेचैन और थका हुआ महसूस कर रही थीं. यह शराब का नशा नहीं था, जिसकी वजह से उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था.
23 साल की हेना ने वोदका (एक तरह की शराब) पी थी, लेकिन उनके लिए यह नया था. वोदका में ज़हरीला मेथेनॉल मिलाया गया था. इससे उनकी किडनी ने काम करना बंद कर दिया और वो अंधी हो गईं.
दरअसल जंगलों में यह शराब चोरी छिपे माफ़िया गिरोहों ने बनाई थी और उसे बार में सस्ते दाम पर बेच रहे थे.
साल 2009 में ज़हरीली शराब पीने की वजह से इंडोनेशिया के बाली में भी 25 लोगों की मौत हो गई थी, इनमें 4 विदेशी नागरिक भी शामिल थे.
रूस
रूस में किराने की दुकानों में नकली वोदका बहुत आसानी से मिल सकती है. 2000 के दशक के मध्य तक तो रूस के सुपर मार्केट में मिलने वाली क़रीब आधी वोदका नकली ही होती थी.
साल 2023 में रूस के अलग अलग इलाक़ों में ‘मिस्टर साइडर’ नाम की शराब पीने से क़रीब 23 लोगों की मौत हो गई थी. यह शराब सुपरमार्केट में अवैध रूप से बेची जा रही थी.
इसी साल की शुरुआत में रूस की सरकार ने शराब उत्पादकों के लिए लाइसेंस के नियम काफ़ी कठिन कर दिए, ताकि केवल बड़े और स्थापित उत्पादक ही यह काम कर कर सके.

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केवल इंसानों पर ख़तरा नहीं
ऐसा नहीं है कि अवैध शराब की वजह से केवल इंसान प्रभावित हो रहे हैं, श्रीलंका जैसे कई देशों में तो अवैध शराब का असर जंगली जीवों और पर्यावरण पर भी महसूस किया जा रहा है.
साल 2022 में श्रीलंका के अधिकारियों ने एक ऐसे हाथी को बचाया था जिसकी सूंड शराब बनाने वाली हांडी में फंस गई थी.
जंगल में शराब बनाने के उनके इलाक़े के आसपास हाथी घूमते रहते हैं. पर्यावरण के लिए काम करने वालों का आरोप है कि शराब तस्कर, जंगल में अपने अवैध कारोबार को बचाने के लिए हाथियों की हत्या तक कर देते हैं.
मेथेनॉल और इथेनॉल में क्या अंतर है?
मेथेनॉल और इथेनॉल, अल्कोहल के ही रूप हैं जिन्हें ईंधन और घोल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.
इथेनॉल एक महंगा रसायन होता है. यह बीयर, वाइन और स्प्रिट जैसे नशीले पेय पदार्थों में पाया जाता है. अल्कोहल के सेवन से सिर दर्द और उबकाई हो सकती है, लेकिन यह थोड़े समय के लिए होता है.
जबकि कुछ कुछ शराब की तरह महकने वाला मेथेनॉल सस्ता होता है. यह काफ़ी ज़हरीला है.
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