बिहार में ज़हरीली शराब से 21 की मौत, तेजस्वी ने नीतीश सरकार को घेरा

मौक़े पर जांच करते पुलिस अधिकारी

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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

बिहार के दो ज़िलों में बीते तीन दिनों में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ ज़हरीली शराब पीने से कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई है.

हालांकि स्थानीय पत्रकारों और लोगों के मुताबिक़ मरने वालों की संख्या 33 तक पहुँच चुकी है. ये मौतें राज्य के गोपालगंज और पश्चिम चंपारण ज़िलों में हुई है.

इस मामले में राज्य के मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार ने कहा है, "पश्चिमी चंपारण में ज़हरीली शराब पीने से 10 जबकि गोपालगंज में 11 लोगों की मौत हुई है. पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही हम स्पष्ट रूप से कह पाएगें कि मौतों की सही वजह ज़हरीली शराब थी या नहीं. घटना को लेकर छापेमारी की जा रही है और संबंधित थाने के थानेदार को भी निलंबित किया गया है."

गोपालगंज के मोहम्मदपुर और सिधवालिया थाना क्षेत्र में आने वाले हसनपुर बालरा, हकाम, मोहम्मदपुर, मंगोलपुर, बुचेया, लोहिजरा में दो नवंबर से मौतों का सिलसिला शुरू हुआ. जबकि पश्चिम चंपारण के नौतन थाना क्षेत्र के दक्षिणी तेल्हुआ में तीन नवंबर को मौतों का सिलसिला शुरू हुआ जिसमें ज़्यादातर दलित बस्ती वार्ड नंबर तीन के रहने वाले थे.

लेकिन प्रशासनिक दावे से इतर स्थानीय पत्रकारों का दावा है कि ज़हरीली शराब से गोपालगंज में 17 लोगों और पश्चिमी चंपारण मे 16 लोगों की मौत हुई है. कई लोगों की आंख की रोशनी चले जाने की भी ख़बर है.

बिहार में ज़हरीली शराब पीने से लोगों की मौत

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रात में झाग निकला और मौत हो गई....

गोपालगंज के इस शराब कांड के एक मृतक छोटे लाल सोनी भी है. छोटे लाल सोनी मूल रूप से सारण के पानापुर के रहने वाले थे. छोटे लाल अपने भाई की ससुराल मोहम्मदपुर आए हुए थे.

उनकी बहु चंदा देवी बताती है, "दो नवंबर को वो शाम को घूम कर आए तो उनका मुंह महक रहा था. उन्होंने शराब पी रखी थी. उन्होंने चादर मांगी और उसे ओढ़कर सो गए. उसके बाद उनसे खाने के लिए पूछा तो खाने से मना कर दिया. इसके बाद तीन से चार उल्टी हुई और रात बारह बजे के बाद वो छटपटाने लगे. उनके गले से आवाज़ नहीं निकल रही थी, मेरे देवर ने मुझे बुलाया गया. मैंने उन्हें पानी पिलाया लेकिन उनके मुंह से झाग आने लगा और वो आधे घंटे के अंदर ख़त्म हो गए."

मोहम्मदपुर और सिधवालिया थाना क्षेत्र में तक़रीबन 60 गांव आते हैं.

स्थानीय निवासी मनिन्द्र कुमार वर्मा कहते हैं, "इन 60 में से तीन 'बेचिरागी' गांव हैं. नदी के कटाव के चलते वहां कोई रहता नहीं है. गंडक नदी के किनारे होने के चलते ये भौगोलिक तौर पर मुश्किल इलाक़ा है लेकिन शराब का कारोबार करने वालों के लिए ये अच्छा है. यही वजह है कि यहां शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है."

पश्चिमी चंपारण के दक्षिणी तेल्हुआ में अब मातमी सन्नाटा है. लेकिन यहां दीपावली के दिन पूरे माहौल में उदासी पसरी थी. ज़िलाधिकारी कुंदन कुमार के मुताबिक़ यहां के नौतन थाने में आठ संदिग्ध मौतें हुई है. लेकिन स्थानीय पत्रकारों और लोगों का दावा है कि अब तक यहां 16 मौतें हुई हैं.

मृतकों के परिजन सरनी देवी और पाइनपती देवी का आरोप है, "थाना सब मिला हुआ है. सब पैसा खाकर अपने घर सो जाता है. हमारे घर के लोग दारू पीकर आए थे. शाम को उनकी तबीयत बिगड़ी और सुबह होते-होते उनकी मौत हो गई."

पश्चिम चंपारण किसान संघ के ज़िलाध्यक्ष नंद किशोर नवल कहते हैं, "ये पूरा इलाक़ा दियारा का है. लोग नाव और साइकल से शराब सप्लाई करते हैं. 29 नवंबर को यहां पंचायत चुनाव होने हैं इसलिए शराब बांटी जा रही है."

बिहार में ज़हरीली शराब पीने से लोगों की मौत

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शराब और चुनाव

बिहार में अभी पंचायत चुनाव चल रहे हैं. इन दोनों इलाक़ों में भी आगामी 29 नवंबर को चुनाव होना है.

बिहार इलेक्शन वॉच के राजीव कुमार कहते हैं, "चुनाव को प्रभावित करने का सबसे आसान ज़रिया शराब है. साल 2016 में जो पंचायत चुनाव हुआ था वो शराबबंदी के तुरंत बाद हुआ था, उस दौरान भी बड़े स्तर पर शराब बांटी गई थी. ऐसे में आप अभी का अनुमान लगाइए जब प्रशासनिक मशीनरी बहुत ज़्यादा असफल साबित हो रही है. अबकी बार भी होली के बाद से ही शराब बंटने लगी थी क्योंकि तभी से चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी."

20 हज़ार करोड़ की समानांनतर ब्लैक इकोनॉमी

वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने माँग की है कि "राज्य में 20 हज़ार करोड़ की अवैध शराब तस्करी और समानांनतर ब्लैक इकोनॉमी के सरगना सामने आकर जवाब दे."

उन्होंने कहा है कि मुज़फ़्फ़रपुर में पांच दिन पहले ज़हरीली शराब से 10 लोग, गोपालगंज में 20 लोग और बेतिया में 13 लोग मरे हैं.

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तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि उपचुनाव (तारापुर और कुशेश्वर स्थान) में मतदाताओं के बीच शराब बांटी गई है.

तेजस्वी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें वो ये कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि "गड़बड़ पियोगे तो इसी तरह जाओगे." ये वीडियो एक नवंबर का बताया जा रहा है.

वीडियो में वो कहते हैं, "पिजिएगा तो गड़बड़ तो होगा ही. हर जगह न होता है. जहां भी शराब चल रहा है वहां भी ये सब गड़बड़ चीज़ सब होती रहती है. ये करिएगा तो इसी तरह से देखिए, कोई गड़बड़ तरह से आपको पिला देगा और चले जाइएगा."

तेजस्वी ने नीतीश पर तंज कसते हुए लिखा है, "शराबबंदी पर बड़बड़ करने वालों के राज में विगत 3 दिनों में ही ज़हरीली शराब से 50 से अधिक मौतें हो चुकी हैं."

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वहीं बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने ट्वीट करते हुए लिखा है, "गोपालगंज और बेतिया में शराब सेवन से हुई मौतों से मर्माहत और स्तब्ध हूं."

बिहार सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा है कि ये एक दुखद घटना है जिसकी गंभीरता से जांच होगी. उन्होंने कहा कि ज़हरीली शराब बेचने वालों को बख़्शा नहीं जाएगा.

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वीडियो कैप्शन, आख़िर देसी शराब ज़हरीली कैसे बनती है?

पूर्ण शराबबंदी 2016 से ही लागू....

बिहार में जीविका दीदीयों की माँग पर नीतीश कुमार ने साल 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी. हालांकि पूर्ण शराबबंदी के बावजूद शराब बहुत आसानी से बिहार में उपलब्ध है.

गोपालगंज के ही नगर थाना क्षेत्र के खजूरबन्नी मोहल्ले में अगस्त 2016 में ज़हरीली शराबकांड में 19 लोगों की मौत हो गई थी और छह लोगों की आंख की रोशनी चली गई थी.

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