गुजरात में कैसे ज़हरीली शराब का शिकार बने इतने सारे लोग: ग्राउंड रिपोर्ट

रोती महिलाएं

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    • Author, रॉक्सी गागडेकर छारा
    • पदनाम, बीबीसी गुजराती, बोटाद से

गुजरात के बाटोद ज़िले के रोजिद गांव में रोती महिलाओं को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल था. इस गांव में ज़हरीली शराब पीने की वजह से 11 लोगों की मौत हुई है.

कुछ लोग गमगीन हैं तो कुछ लोग आती-जाती पुलिस की गाड़ियों, मीडिया के कैमरों और पत्रकारों की टोलियां देख रहे थे जो अब शायद कभी उनके गांव में वापस नहीं आएंगे.

ज़हरीली शराब पीकर मरने वालों के पार्थिव शरीरों को खुले ट्रैक्टर में रखकर श्मशान ले जाया गया और एक के बाद एक लाइन में रखकर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया.

रोजिद गांव में रहने वालों के लिए ये एक कभी न भूलने वाला दृश्य है. इस गांव की महिलाएं देसी शराब रोकने में विफल रहने की वजह से स्थानीय प्रशासन और पुलिस को आड़े हाथों ले रही है.

बोटाद ज़िले के अन्य गांवों में भी ज़हरीली शराब पीने की वजह से लोगों की मौत हुई है. लेकिन मरने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा रोजिदा गांव में है. अहमदाबाद ज़िले के अंतर्गत आने वाले गांवों में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गयी है.

बिना शराब गटर सफाई कैसे?

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रविवार शाम कथित रूप से ज़हरीली शराब पीकर बीमार पड़ने वाले 30 वर्षीय वाशरम वाघेला एक सफाई कर्मचारी थे. वह अपने पीछे अपनी पत्नी सोनल और तीन बच्चों को छोड़कर गए हैं. सबसे बड़े बच्चे की उम्र मात्र 11 वर्ष है.

बीबीसी से बात करते हुए उनकी पत्नी सोनल ने बताया है कि वह हर रोज़ सिर्फ़ 150-200 रुपये कमा पाती हैं और अब उनके लिए अपने तीन बच्चों को पालना असंभव होगा.

उन्होंने बताया है कि इस छोटे से गांव में हर दिन काम मिलना संभव नहीं होता है.

वाघेला की बहन कामुबेन इस त्रासदी के लिए स्थानीय पुलिस को ज़िम्मेदार मानती हैं क्योंकि पुलिस कथित रूप से गांव में ज़हरीली शराब का धंधा रोकने में विफल रही.

उन्होंने कहा कि उनके भाई गंदगी साफ़ करते थे और उनके लिए गटर साफ़ करने के लिए शराब पीना ज़रूरी होता था, अगर वो ये नहीं करते तो अपना परिवार कैसे पालते.

कामूबेन ने अपनी भाभी सोनल के लिए नौकरी की मांग की है.

वह कहती हैं, "सरकार को इस अपराध की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि पीड़ित परिवारों को मुआवज़ा मिले और उन्हें नौकरियां मिलें ताकि वे एक सम्मानित जीवन जी सकें."

मरीजों का इलाज करते स्वास्थ्य कर्मचारी

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20 रुपये की शराब में हुई मौत

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वाशरम वाघेला के घर से कुछ मीटर दूर एक दूसरे घर में भी ज़हरीली शराब पीने की वजह से दीपक वाघेला की मौत हुई है. दीपक अपने पीछे पत्नी मनीषा और दो लड़कियों को छोड़ गए हैं.

बीबीसी से बात करते हुए उनकी पत्नी मनीषा ने कहा है कि उन्हें नहीं पता कि अब उनका और उनकी लड़कियों का क्या होगा.

अपने पति के बारे में बताते हुए मनीषा कहती हैं कि 'रविवार शाम जब वह घर वापस आए तो उन्होंने शराब पी हुई थी जो उन्होंने पास के ठेके से 20 रुपये में ख़रीदी थी. रात में उन्होंने तबियत ख़राब होने की बात कही लेकिन हम उन्हें अस्पताल नहीं ले जा सके. अगले दिन हम खेत पर काम करने गए जहां उनकी हालत ख़राब हो गयी. उन्होंने उल्टियां करना शुरू कर दीं और बोले कि उन्हें देखने में दिक्कत हो रही है. हम उन्हें अस्पताल लेकर गए जिसके कुछ घंटों बाद उनकी मौत हो गयी.'

उन सभी घरों में हालात कमोवेश ऐसे ही थे जहां लोगों ने ज़हरीली शराब पी थी. एंबुलेंस अस्पतालों और गांवों के बीच चक्कर लगा रही थी और अस्पताल के कर्मचारी किसी तरह लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे थे.

ज़्यादातर मरीजों को बरवाला स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भावनगर या अहमदाबाद के सिविल अस्पतालों में रेफर किया गया.

गुजरात के पुलिस महानिदेशक आशीष भाटिया

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पुलिस ने इस मामले में क्या किया?

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पुलिस सूत्रों के मुताबिक़, इस मामले में अब तक 39 लोगों की मौत हो चुकी है और 88 लोग भावनगर एवं अहमदाबाद के अस्पतालों में भर्ती हैं. इनमें से 11 लोगों की हालत नाज़ुक बताई जा रही है.

भावनगर रेंज के आईजी अशोक यादव ने बीबीसी को बताया है कि भावनगर के सर टी अस्पताल में भर्ती छह लोग वेंटिलेटर पर है. पुलिस ने इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है. इस मामले में दर्ज़ की गयीं तीन एफ़आईआर रिपोर्ट्स में 11 लोगों को नामज़द किया गया है.

गुजरात पुलिस ने अवैध शराब के धंधे पर रोक लगाने के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू कर दिया है. बता दें कि गुजरात में शराब प्रतिबंधित है.

बीबीसी ने बोटाड ज़िले के पुलिस अधीक्षक करनराज वाघेला से बात करने का प्रयास किया. लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी.

हालांकि, अहमदाबाद ज़िले के रेंज आईजी वी चंद्रशेखर ने बीबीसी को बताया है कि ग्रामीण अहमदाबाद में ज़हरीली शराब पीने से कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है.

गुजरात के पुलिस महानिदेशक आशीष भाटिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया है कि जिस मेथनॉल की वजह से लोगों की मौत हुई, उसे अहमदाबाद के नरौल औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्टरी से निकाला गया था.

गुजरात गृह मंत्रालय ने इस मामले से जुड़े तथ्यों को सामने लाने के लिए आईपीएस सुभाष त्रिवेदी और डीआईजी निरलिप्त राय (स्टेट मॉनिटरिंग सेल) समेत कुछ अन्य अधिकारियों के साथ एक टीम बनाई है.

आईपीएस त्रिवेदी ने बताया है कि उनकी टीम इस मामले की हर पहलू से जांच करेगी.

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गांववालों की प्रतिक्रिया

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बीबीसी ने रोजिद गांव के सरपंच जीगर दुंगरानी से बात की है. उन्होंने बताया है कि मार्च में बरवाला पुलिस थाने में अवैध शराब को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी.

उन्होंने कहा, "जब मैंने एक 15 साल के लड़के को ठेके से शराब ख़रीदकर पीते देखा तो मैंने पुलिस को इसकी सूचना दी. हालांकि, मुझे ये नहीं पता था कि यहां शराब बनाने में मेथनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है. अगर पुलिस ने मेरी शिकायत पर समय रहते कार्रवाई की होती तो इस त्रासदी से बचा जा सकता था."

उन्होंने दावा किया कि स्थानीय पुलिसकर्मी शराब बेचने वालों से पैसे लेकर अवैध शराब का धंधा चलने दे रहे हैं.

बोटाद विधानसभा के विधायक और कांग्रेस नेता राजेश गोहिल ने बीबीसी को बताया है कि उन्होंने तालुका स्तर की समन्वय बैठक में शराब बेचे जाने का मुद्दा उठाया था. हालांकि, इसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया.

इस मामले को विस्तार से समझने के लिए बीबीसी ने स्थानीय बीजेपी नेता और बोटाद के पूर्व विधायक लालजी मेर से भी बात की.

उन्होंने कहा, "पुलिस इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को पकड़ने के लिए लगातार मेहनत कर रही है. मेरे दौर में इस तरह के अड्डे नहीं हुआ करते थे. और ये सब कांग्रेस विधायक का कार्यकाल शुरू होने के बाद हुआ है."

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क्या कह रहे हैं राजनीतिक दल

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गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष जगदीश ठाकोर, नेता प्रतिपक्ष सुकराम राठवा, कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी, हितेंद्र पाटड़िया समेत कई अन्य कांग्रेस नेता पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे.

मीडिया से बात करते हुए जगदीश ठाकोर ने शराब माफ़िया को खुली छूट देने के लिए राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा है कि शराब माफ़िया से मिले पैसे को बीजेपी चुनाव फंड के रूप में इस्तेमाल कर रही है, और इन अवैध ठेकों को पुलिस एवं स्थानीय बीजेपी नेताओं की मिलीभगत से चलाया जा रहा है.

वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से कहा है कि सभी जानते हैं कि अवैध शराब बेचकर मिले पैसे को कहां इस्तेमाल किया रहा है.

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