ज़हरीली शराब ने इन परिवारों के अपनों को छीन लिया
6 साल के अनूप को जिस उम्र में पिता के गोद में होना था, वह पिता की अर्थी को मुखाग्नि देकर लौटा है.
घर में तीन और बहने हैं एक मां है. पिता हरेंद्र राम मजदूरी करते थे फिर जाकर सभी बच्चों और परिवार का पेट भरता था. लेकिन अब परिवार का सहारा ख़त्म हो गया और दुनिया उजड़ गयी. आज घर में कुछ लोग आए हैं जो सांत्वना दे रहे हैं कल से उनको रोटी कौन देगा किसी को पता नहीं.
पत्नी शीला देवी के सामने एक वीरान दुनिया है और अंधेरे में डूबा भविष्य. वह बहुत मुश्किल से बता पा रही हैं की मंगलवार को क्या हुआ.
शराब पीकर घर आने के बाद हरेंद्र राम की तबीयत बिगड़ी और उन्हें पहले पास के ही सामुदायिक चिकित्सा केंद्र ले जाया गया जहां से छपरा के सदर हॉस्पिटल रेफर किया गया लेकिन यह छोटी सी दूरी उनके लिए बहुत लंबी साबित हुई और हरेंद्र राम ने 40 साल की उम्र में इन सब की दुनिया वीरान कर दी है.
जहरीली शराब पीकर मौत का यह तांडव छपरा ने पहली बार देखा है. जिस राज्य में शराब पर सख़्त पाबंदी हो वहां शराब कैसे पहुँच रही है. इसपर स्थानीय लोग प्रशासन को जिम्मेदार मानते हैं.
जिलाधिकारी के पास अभी भी मरने वालों का आंकड़ा 26 तक पहुंचा है, हालांकि स्थानीय लोग आशंका जता रहे हैं कि मरने वालों की तादाद इससे कहीं ज्यादा हो सकती है.
रिपोर्ट: चंदन कुमार जजवाड़े, बीबीसी संवाददाता
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