गंदगी पर साफ़गोई
गंदगी पर साफ़ शब्दों में बात करना ठीक नहीं. 'गंदगी' नहीं कहना चाहिए, कहना चाहिए 'सफ़ाई का अभाव है', और जब सफ़ाई हो जाए तो कहना चाहिए कि 'गंदगी का अभाव है'.
कहेंगे कि राजनीति में 'सच का अभाव' है तो कोई बुरा नहीं मानेगा, कहेंगे कि 'झूठों की भरमार है' तो नेताओं की भावनाएँ आहत होंगी.
अब मंत्रियों को इतना तो समझना ही चाहिए, ज्यादातर मंत्री समझते भी हैं, लेकिन साफ़-सुथरे पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश भूल गए कि गंदगी पर उनके बयान से 'गंदे लोगों' की भावनाएँ आहत हो सकती हैं.
उन्हें यह कहने की क्या ज़रूरत पड़ी थी कि गंदगी के मामले में भारत के शहरों का कोई मुक़ाबला नहीं है, भारत के किस शहरी को यह बात मालूम नहीं है.
दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले 'गंदे आदमी' ने मंत्री जी के बयान पर एतराज़ नहीं किया जिसे नहाने के लिए पानी नहीं मिलता, बुरा मान गए नई दिल्ली के सफ़ेद बंगलों में रहने वाले कई लोग.
जाकी रही भावना जैसी...जयराम रमेश ने गंदगी की बात की तो मानो सबको अपनी-अपनी गंदगियों का खयाल आ गया और दिल दुखने लगा.
एक पूर्व मंत्री बोले कि इस तरह कचरे की बात करने से देश की साख गिर जाएगी. उन्हें शायद लगता है कि विदेशी पर्यटक आएँगे तो वे कचरे के ढेर को भी 'इक्रेडिबल इंडिया' का टूरिस्ट एट्रैक्शन समझ लेंगे और इंडिया की साख बची रहेगी.
पर्यावरण मंत्री की ही पार्टी के लोग कह रहे हैं कि 'उन्हें सही शब्दों का चुनाव करना चाहिए था', शायद कचरे के बारे में बात करने से पहले थिसॉरस पलटना चाहिए था.
अगर तैमूरलंग के राज में कोई मुहावरे के तौर पर कहता कि 'आपका प्रशासन लंगड़ा है,' तो उसकी क्या दशा होती? गंदगी के राज में ऐसी बात कहना साफ़ दिखाता है कि जयराम रमेश में 'राजनीतिक परिपक्वता का अभाव' है.
राजनीतिक परिपक्वता होती तो किसी ज्वाइंट सेक्रेटरी का लिखा एक साफ़-सुथरा भाषण पढ़ते जिसमें 'सफ़ाई सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की ओर से उठाए गए महत्वपूर्ण क़दमों' पर प्रकाश डाला गया होता.
एक विपक्षी नेता ने सवाल पूछा कि 'उनकी ही सरकार है, बयान क्यों दे रहे हैं, सफ़ाई क्यों नहीं कराते'?
मेरे ख्याल में यह एक वाजिब टिप्पणी है लेकिन समस्या को स्वीकार किए बिना समाधान की दिशा में कैसे बढ़ा जा सकता है?
वैसे यह हैरत की बात है कि भारत सरकार के एक मंत्री को गंदगी दिख रही है क्योंकि वह जहाँ भी जाता है, कुछ ही घंटे पहले उस जगह को चमका दिया जाता है.
मंत्री जी बयान देने के बाद अब शायद झाड़ू उठाने वाले हों, देखते हैं कहाँ-कहाँ से, कैसी-कैसी और कितनी गंदगी साफ़ करते हैं?










