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वो सबका हीरो है

सुशील झासुशील झा|रविवार, 15 नवम्बर 2009, 13:02 IST

क्रिकेट धर्म है और सचिन भगवान... ये कहावत पुरानी हो चुकी है. मैं इस कहावत में यक़ीन नहीं रखता लेकिन इतना जानता हूं कि जब मैंने पहली बार अपने होशो हवास में भगवान को याद किया था तो उसकी वजह सचिन ही थे.

मैं ना ही बहुत बड़ा क्रिकेट भक्त हूं और न ही मेरी याददाश्त तेंदुलकर जैसी है. मुझे तारीख भी याद नहीं. बस इतना याद है कि उस पूरे वनडे मैच में मैं एक ही मुद्रा में तब तक बैठा रहा जब तक सचिन ने शतक पूरा नहीं कर लिया.

ये याद है कि वनडे में सचिन इससे पहले कई बार अस्सी के आस पास आउट हो चुके थे और मुझे लग रहा था कि अगर मैं हिला डुला तो सचिन आउट हो जाएंगे.

इसके बाद तो सचिन ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. रिकार्ड पर रिकार्ड बनते चले गए. क्रिकेट में दिलचस्पी नहीं बढ़ी लेकिन सचिन की बल्लेबाज़ी से प्यार बढ़ता चला गया. अगर वो क्रीज़ पर हैं तो मैं टीवी के सामने.

सचिन के अस्सी का स्कोर पार करते ही हिलना डुलना अब भी बंद हो जाता है और भगवान का नाम अब भी लेने लगता हूं.

मैं न तो क्रिकेटर हूं न ही कमेंटेटर और न ही एक पत्रकार के रुप में मैंने कभी सचिन का इंटरव्यू किया है या उनको नज़दीक से जाना है. लेकिन फिर भी हर आम हिंदुस्तानी की तरह मुझे भी लगता है कि सचिन से मेरा एक रिश्ता है जिसे समझा पाना मुश्किल है.

जब क्रिकेट पर सट्टेबाज़ी का साया छाया तो क्रिकेट से बहुत लोगों का ( जिसमें मैं भी शामिल हूं) रिश्ता बदला. कुछ लोगों ने क्रिकेट देखना बंद कर दिया तो कुछने भारत के खेलने पर रातों की नींद हराम करने को वक्त गंवाना समझा. इसके बावजूद सचिन से लगाव जारी रहा. कई मैचों में सचिन का शतक बनते ही टीवी बंद करना याद है. कई बार भारत की हार जीत बेमानी होती थी.

सचिन ख़राब फॉर्म में हो और इस पर ऑफिस में बहस हो रही हो तो कुछ भी बोल दूं दिल से लगता था कि सचिन के चार पाँच शतक और बन जाएं तभी वो खेलना छोड़ें.

सचिन अब 36 के हैं. मैं उनसे तीन साल छोटा हूं लेकिन जब सचिन को खेलते देखता हूं तो लगता है वो अभी 17 साल के ही हैं और उन्हें बहुत खेलना है.

जब कभी सचिन शून्य पर या कम रनों पर आउट होते थे और मैं गुस्सा होता था तो मेरी अनपढ़ मां मुझे डांटती थी कि अरे, क्या वही हर मैच में अच्छा खेलेगा, बाकी क्या करेंगे. मेरे पापा अगर सचिन से नाराज़ हों तो मैं उनपर गुस्सा हो जाता था.

मुझे लगता था कि मेरे परिवार में ही ऐसा होता है लेकिन धीरे धीरे पता चला कि भारत के लगभग सभी घरों में सचिन वैसे ही लोकप्रिय हैं जैसे मेरे घर में.

एक बार मेरे एक खेल पत्रकार मित्र ने ( जो सचिन से कई बार मिल चुके हैं) कहा कि वो मुझे सचिन का ऑटोग्रॉफ ला देंगे. मैंने कहा, नहीं मुझे ऑटोग्रॉफ की ज़रुरत नहीं क्योंकि वो तो मेरे परिवार के सदस्य हैं.

सचिन असली हीरो हैं क्योंकि भारत का हर परिवार सचिन को अपने परिवार का सदस्य समझता है और भले ही वो कुछ भी कहें वो दिल से चाहते हैं कि सचिन अभी और खेलते रहें.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 15:38 IST, 15 नवम्बर 2009 Prem Verma:

    सुशील जी, सचिन के पीछे हम भारतीयों की दीवानगी को स्वर देने के लिए साधुवाद. ब्लॉग पढ़कर ऐसा लगा जैसे आप मेरे मन की, मेरे घर की बातें बयां कर रहे हैं.

  • 2. 18:10 IST, 15 नवम्बर 2009 prem shankar tiwari :

    सुशील जी, आपने आपबीती बयां की. बहुत ख़ूब लगा. कम से कम सचिन के कारण ही क्रिकेट से लगाव है. सचिन भारत के ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के रतन हैं. ऐसे जांबाज़ सितारे पर हम भारतवासियों को नाज़ है.

  • 3. 18:27 IST, 15 नवम्बर 2009 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    सुशील जी, क्रिकेट जैसे खेल को भी आप धर्म मानकर सचिन को भगवान का दर्जा देते हैं और वो भी एक पत्रकार होने के नाते. आश्चर्च हुआ. आपका ये कहना कि सचिन हर परिवार के सदस्य हैं, ये आपकी भूल है. सबसे पहले वे मेरे परिवार के सदस्य नहीं हैं. आज तक सचिन ने इमरान ख़ान की तरह क्या समाज और ग़रीबों के लिए कुछ किया है, जो आप इतना गुणगान कर रहे हैं.

  • 4. 20:04 IST, 15 नवम्बर 2009 Mustafa:

    सचिन भारत के स्टार हैं और भारतीयों को उन पर गर्व है.

  • 5. 20:45 IST, 15 नवम्बर 2009 ravi:

    बहुत अच्छे. सचिन की ईमानदारी ही उन्हें औरों से अलग करती है.

  • 6. 21:06 IST, 15 नवम्बर 2009 himmat singh bhati:

    सचिन हर भारतीय के दिल में रहते हैं. उनमें अभी भी कुछ सीखने की आदत है.सचिन जब लय में हों तो उनको रोकने वाला कोई नहीं है. हीरा आसानी से तराशा नहीं जा सकता. तराशने के बाद वो अनमोल हो जाता है. सचिन में अभी दम बाकी है और वो भारत के लिए विश्व कप जीत सकते है.

  • 7. 22:03 IST, 15 नवम्बर 2009 suresh sorathia:

    जैसे कपिल देव को धक्के दे कर निकाला था वैसे ही सचिन को निकाल देना चाहिए ताकि कोई अन्य युवा खिलाड़ी जगह पा सके.

  • 8. 07:17 IST, 16 नवम्बर 2009 BALWANT SINGH ,HOSHIARPUR ,PUNJAB :

    सुशील जी इस बार का ब्लॉग पढ़कर रह रह कर दिल के किसी कोने से टीस उठती है | मुझे सचिन और आपके लगाव के बारे में टिप्पणी करने का कोई हक नहीं | लेकिन दुःख एक बात का हमेशा से ही रहेगा कि क्रिकेट और सिर्फ क्रिकेट के खिलाड़ियों को भगवान और सुपर स्टार जैसी उपाधियों से नवाजना कहीं न कहीं मीडिया की देन है | सचिन देश के लिए बहुत अच्छा खेले हैं और उन्होने राष्ट्र का नाम ऊँचा किया है | काश यही मकाम राष्ट्रीय खेल हॉकी और इनके खिलाड़ियों को हमारा मीडिया दिला सकता | मुझे यह कहने में कोई अफ़सोस नहीं कि किसी भी व्यक्ति विशेष को भगवान का दर्जा दिलाने में मीडिया का बहुत बड़ा हाथ है | क्रिकेट को धर्म का दर्जा दिलाने में भी मीडिया और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की मिलीभगत का परिणाम है | अगर मीडिया राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कम्पनियां चाहतीं तो बेशक आज यही मकाम हमारे अन्य खेलों तथा खिलाड़ियों को मिल सकता था | शायद आपको मेरे विचार संकीर्णवादी लगें लेकिन क्रिकेट एक व्यवसाय बन चुका है और व्यवसाय राष्ट्रवाद पर भारी पड़ रहा है | आज बहस का मुद्दा चल रहा है सचिन के रिटायर होने का लेकिन यह एक कड़वी सच्चाई है कि सचिन कई तरह की राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के लिए इंडोर्स कर रहे हैं | अगर सचिन चाहे तब भी यह कम्पनियां व बोर्ड ऐसा होने न देंगें | बेशक आज हर खेल में आज हमारे देश को सचिन जैसे खिलाड़ियों की आवश्कयता है लेकिन सरकार व मीडिया का फर्ज़ बनता है कि तमाम खेल व खिलाड़ियों को एक जैसा दर्जा दें | खेलों का राजनीतिकरण व व्यवसायीकरण बंद हो |

  • 9. 10:07 IST, 16 नवम्बर 2009 dev:

    सचिन तो ग्रेट हैं ही आप भी ग्रेट हो !! बहुत अच्छा लगा.

  • 10. 11:55 IST, 16 नवम्बर 2009 afsar abbas rizvi "Anjum":

    सुशील झा जी, सचिन के बारे में लिखना और उनकी तारीफ़ करना कोई ख़ास मक़सद नहीं रखता क्योंकि तारीफ़ से उसे हिम्मत मिलती है जिसमें हिम्मत की कुछ कमी हो. मेरा अपना मानना है कि सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी 100 साल में एक बार पैदा होते हैं. यह उनकी जन्मजात उपलब्धियाँ हैं जो अब धीरे-धीरे बाहर आ रही हैं. सचिन तेंदुलकर यानी इंडिया की पूरी की पूरी टीम. सचिन किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं है. 11 खिलाड़ियों को मिला कर एक इंसान में ढाल दिया है, उसको सचिन कहते हैं. रिकॉर्ड ख़ुद ही बयान करते हैं सचिन के बारे में, हम या आप उनकी तारीफ़ में कुछ नहीं लिख सकते यह तो पावर हाउज़ के दिया दिखाना होगा. मैं तो अल्लाह से यही दुआ करूँगा कि सचिन आने वाले दस साल तक और खेलें और उनका बेटा उनसे भी आगे निकले.

  • 11. 12:05 IST, 16 नवम्बर 2009 kuldeep singh :

    सचिन का हर शतक यादगार लम्हा है.

  • 12. 15:16 IST, 16 नवम्बर 2009 Rakesh Sohal - BTU Cottbus, Germany:

    सुशील जी, आपका सचिन गुणगान हज़म नहीं कर पाया क्योंकि आपको शायद याद नहीं कि सचिन ने कितनी ही बार अपना शतक रिकॉर्ड बनाने के लिए भारत को हार दिलवाई. उन्होंने कितनी बार शतक के आख़िरी दस रन बनाने के लिए अनावश्यक रूप से 40-50 गेंदें ख़राब कीं और फिर शतक पूरा होने के बाद आउट हो कर आने वाले बल्लेबाज़ों के ऊपर दबाव छोड़ जाते. यह बात तो मीडिया में भी कितनी बार सामने आई है. इसलिए मुझे नहीं समझ में आता कि आज उनका इतना गुणगान क्यों किया जा रहा है. वह एक ऐसे खिलाड़ी हैं जो केवल अपने लिए खेलते हैं, अपनी टीम के लिए नहीं. चूँकि एक अच्छा खिलाड़ी होने के लिए टीम भावना रखना बहुत ज़रूरी है, इसलिए वह एक अच्छा क्रिकेटर होने के बावजूद एक अच्छे खिलाड़ी नहीं बन सके. कम से कम अब तक तो नहीं.

  • 13. 21:13 IST, 16 नवम्बर 2009 महेंद्र सिंह लालस :

    सचिन से मुझे बात करने का मौका मिला है दो- तीन बार, बच्चों जैसे सरल, सच्चे देशप्रेमी और ईमानदार इंसान हैं वो, ठाकरे जैसे छोटे छोटे महत्वाकांक्षी नेता सचिन के पाँव की धूल के बराबर भी नहीं. इस छोटे क़द के बड़े इंसान को आपके ब्लॉग के माध्यम से प्रणाम.

  • 14. 00:15 IST, 17 नवम्बर 2009 ANIL MISHRA:

    अमिताभ बच्चन, शाहरूख़ ख़ान और अब सचिन तेंदुलकर ने जो कहा है उस पर एक भारतीय को गर्व है. पहले भी कई सच्चे मराठी ऐसा कह चुके हैं.

  • 15. 00:19 IST, 17 नवम्बर 2009 ANIL MISHRA:

    अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ ख़ान और अब सचिन तेंदुल्कर ने जो बातें कहीं हैं उस पर हर सामान्य नागरिक गौरव कर सकता है. यहां तक कि बहुत से वफ़ादार मराठियों ने भी इसकी व्याख्या की है. मुझे मालूम नहीं कि आख़िर बाला साहेब और राज ठाकरे क्यों लकीर पीट रहे हैं. वे अपने आपको नफ़्रत के गलियारे में ले जा रहे हैं. भगवान उन्हें सदबुद्धि दे. हमें सरकार पर भी आश्चर्य होता है कि आख़िर वह ऐसे तत्वों को क्यों बर्दाश्त कर रही है. क्या उनके पास किसी ठोस क़दम का प्रावधान नहीं है?

  • 16. 14:09 IST, 17 नवम्बर 2009 Rakesh Sinha:

    सचिन, सहवाग, युवराज और धोनी की तरह मैच जीताने वाले खिलाड़ी नहीं है.

  • 17. 14:49 IST, 17 नवम्बर 2009 Rakesh Sohal - BTU Cottbus, Germany:

    क्या पता सचिन की महारष्ट्र और भारतीय वाली टिप्पणी का उद्देश्य भी ठाकरे की प्रतिक्रिया के उद्देश्य जैसा ही हो. ठाकरे मराठी नागरिक को गुमराह करके उन पर राज करना चाहते हैं और सचिन पूरे देश को ऐसी बातें करके अपनी ओर करना चाहते हैं जिससे कि बोर्ड को उनपर गाज गिराने से पहले कई बार सोचना पड़े. लेकिन सचिन को ये कभी नहीं बोलना चाहिए था कि आख़िर में उनका खेल ही उनको सहारा देगा न कि ऐसी टिप्पणियां.

  • 18. 14:10 IST, 18 नवम्बर 2009 prakash kumar singh:

    सचिन बहुत ही अच्छे क्रिकेटर हैं. बाल ठाकरे जैसे नेताओं पर देश के साथ ग़द्दारी का मुक़दमा चलाना चाहिए. क्योंकि वो राज्य को देश से बड़ा मानते हैं.

  • 19. 19:49 IST, 26 नवम्बर 2009 avadhesh kumar jha:

    सुशील जी, आपने मन की बात लिखी है. सचिन तो हीरो हैं ही साथ ही वे सभी हीरो हैं जो अपने को देश के लिए समर्पित कर देते हैं.

  • 20. 02:57 IST, 29 नवम्बर 2009 Praful Kumar:

    मैं समझता हूँ कि सचिन एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं लेकिन वे भारत को फिर से विश्व कप नहीं दिला पाए. ऑस्ट्रेलिया ने लगातार तीन विश्व कप जीता है. ऐसे में कौन बड़ा है?

  • 21. 22:12 IST, 23 अप्रैल 2010 आलोक मिश्र:

    एकदम दुरुस्त फ़रमाया है सुशीलजी आपने। सचिन पर किसी का एकाधिकार नहीं रहा है और न कभी रहेगा. यह जनाब ऐसी सख्शियत बन चुके हैं जो किसी परिचय के मुहताज़ नहीं हैं अलबत्ता हम सब के दिलों पर और विपक्षी गेंदबाजों के दिमागों पर फितूर की तरह छाए रहते हैं. पहले आप ही की तरह मैं भी सोचता था, अकेला मैं ही उनका प्रशंसक हूं, केवल मैं इस हीरे को पहचानता हूं यह बातें मेरे ज़ेहन में आती थीं. लेकिन मेरे गांव में ही उनके कई सारे प्रशंसक भरे पड़े थे. जबसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मैंने अपना डेरा जमाया तब जाके पता चला कि हिंदुस्तान की आबादी जो किताबों में दर्ज है वाकई उसमें सच्चाई है. इस आबादी का एक बहुत बड़ा भाग इस सचिन रूपी हाड़-मांस के पुतले को भगवान से भी अधिक इज्ज़त देता है और उनके आगे माथा टेकता है. इसकी तस्दीक आप मैच के दौरान जब सचिन बल्लेबाजी कर रहे हों दुकानों पर लगी भीड़ से कर सकते हैं. ऐसी भीड़ मंदिरों में भी क्या लगती होगी. मैच के दौरान टीवी सेट मंदिर और सचिन भगवान सदृश हो जाते हैं. हम सब भक्तों का एक ही हाल है - सचिन दादा तुस्सी ग्रेट हो और ये दिल मांगे मोर.

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