अपने साथ हुए बलात्कार को छुपाना चाहते हैं रेप पीड़ित?

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- Author, क्रिस्टीन रो
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
वो 16 बरस की थी और उसका साथी 40 साल का. लड़की ने ख़ुद को समझाया कि ये रोमांटिक अफ़ेयर है.
लेकिन, जब दोनों साथ होते, तो लड़की का शरीर और दिमाग़ अजीबो-ग़रीब बर्ताव करता.
कई बार लड़की ये सोचती कि वो अपने शरीर से जुदा है.
उसका शरीर जब भी अपने साथी को देखता तो कांपने लगता था. ये कंपकंपी क़रीब आने वाली नहीं, ज़लज़ला आने जैसी थी.
लड़की को ऐसे तजुर्बे पहले नहीं हुए थे.
लेकिन, वो इससे पहले कभी अपने से इतनी ज़्यादा उम्र वाले शख़्स के साथ संबंध में नहीं रही थी.
लड़की ने सोचा शायद वयस्क लोगों के साथ ऐसा ही होता होगा. उसने ख़ुद को समझा लिया और अपने दर्द को परे धकेल दिया.


वो प्यार नहीं बलात्कार था
ये कहानी है अमरीका की रहने वाली मरीसा कोर्बेल की.
मरीसा को ये समझने में दस साल लग गए कि असल में उसका साथी उसके साथ यौन संबंध नहीं बना रहा था, बल्कि उसका बलात्कार कर रहा था.
अब मां बन चुकी कोर्बेल को उस तजुर्बे से पीछा छुड़ाने में कई साल लग गए. मानसिक इलाज कराना पड़ा.
अब वो यौन हिंसा की शिकार लड़कियों की मदद करने वाली वक़ील बन गई है.

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आज भी मरीसा कोर्बेल उस तजुर्बे को याद कर के उन लड़कियों का दर्द समझने की कोशिश करती हैं, जिनकी वो मदद करना चाहती हैं.
मरीसा कोर्बेल के लिए वो अनुभव बहुत तकलीफ़देह था.
वैसे, अपने साथ हो रहे बलात्कार से इनकार करने वाली मरीसा कोर्बेल इकलौती महिला नहीं हैं. कई रिसर्च के निचोड़ पर नज़र डालें, तो पता चलता है कि 14 बरस या इससे ज़्यादा उम्र की जो लड़कियां ज़बरदस्ती की शिकार हुईं, उनमें से 60 प्रतिशत ने इसे बलात्कार मानने से इनकार कर दिया.
अक्सर बलात्कार के पीड़ितों को इस बात को ख़ुद को समझाने में काफ़ी वक़्त लग जाता है कि उनके साथ रेप हुआ.
ऐसी घटनाओं के शिकार लोगों को ज़बरदस्त मानसिक आघात लगता है. उन्हें इससे उबरने में ही वक़्त लग जाता है.
इंग्लैंड में बलात्कार पीड़ितों की मदद के लिए चलाई जाने वाली संस्था रेप क्राइसिस इंग्लैंड में मदद मांगने के लिए पहुंचने वालों का एनालिसिस बताता है कि 75 फ़ीसद पीड़ित घटना के एक साल या इससे भी ज़्यादा वक़्त के बाद मदद मांगने के लिए पहुंचे.
इस बात की कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वजहें हैं कि ये लोग इतनी देर से ये एहसास कर पाए कि उनके साथ ज़बरदस्ती हुई है.


बलात्कार को लेकर ग़लत धारणा
बहुत से लोगों को रेप को लेकर ग़लतफ़हमी है. बलात्कार क्या होता है, इसकी हर देश में परिभाषा अलग है.
अमरीका में तो कई राज्यों में ही इस तरह का फ़र्क़ है. अमरीका के मिसौरी राज्य में सहमति से सेक्स की उम्र 14 साल है, तो पड़ोस के इलिनॉय राज्य में ये 17 बरस है.
क़ानूनी ग़लतफ़हमियों के साथ बलात्कार को लेकर अलग-अलग समाज में अलग तरह की धारणाएं भी पीड़ितों को आगे आने का साहस जुटाने से रोकती हैं.

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बलात्कार को लेकर आम धारणा है कि एक मर्द किसी अंधेरी गली से गुज़रती लड़की से ज़बरदस्ती करता है.
जब भी कोई यौन हिंसा की घटना इससे इतर होती है, तो लोग उसे बलात्कार कहने से कतराते हैं.
हक़ीक़त ये है कि बलात्कार के आरोपी अक्सर अनजान लोग नहीं, बल्कि जान-पहचान वाले होते हैं.
बलात्कार के वक़्त अक्सर पीड़ित होश खो बैठते हैं, तो वो प्रतिरोध नहीं कर पाते हैं. ये लकवे वाली हालत होती है. इसमें पीड़ितों की सहमति नहीं होती. मगर, उनका विरोध न करना, सहमति मान लिया जाता है.
'अलगाव' भी बलात्कार के दौरान होने वाला तजुर्बा होता है. जब पीड़ितों को ये लगता है कि वो शारीरिक रूप से बलात्कार से बच नहीं सकते, तो वो ज़हनी तौर पर ख़ुद के शरीर से दूरी बनाने की कोशिश करते हैं. ये मनोवैज्ञानिक रूप से बच निकलना होता है.
इससे वो तकलीफ़ फ़ौरी तौर पर तो कम हो जाती है. मगर फिर पीड़ित उस सदमे से उबर नहीं पाता, या उबरने में वक़्त लेता है. मरीसा कोर्बेल के साथ यही हुआ था. फिर समाज में बलात्कार पीड़ितों को लेकर जो सोच है, उसकी वजह से भी लोग ख़ुद को बलात्कार का पीड़ित बताने से कतराते हैं.


मर्द नहीं होते बलात्कार के शिकार?
एक और सोच जो बलात्कार को लेकर है, उसके मुताबिक़ केवल लड़कियां और महिलाएं ही बलात्कार की शिकार होती है.
परेशान करने वाली बात है कि जो मर्द अपने बचपन में यौन हिंसा और उत्पीड़न के शिकार हुए, वो इस दु:खद अनुभव को रेप मानने से इनकार करते रहते हैं.

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एक ऑनलाइन सर्वे में बलात्कार पीड़ित मर्दों में से केवल 24 फ़ीसद ने माना कि उनके साथ रेप हुआ था.
कैलिफ़ोर्निया के रहने वाले मैथ्यू हेस इसकी मिसाल हैं. कई साल तक वो अपनी गर्लफ्रैंड की ज़बरदस्ती को बलात्कार मानने से इनकार करते रहे. जबकि मैथ्यू की गर्लफ्रैंड अक्सर धमकी देकर उनके साथ सेक्स किया करती थी.
ज़्यादातर मौक़ों पर मैथ्यू की गर्लफ्रैंड ख़ुद को नुक़सान पहुंचाने की धमकी देकर यौन संबंध बनाती थी.
मगर एक बार तो उसने मैथ्यू के साथ बंदूक की नोंक पर बलात्कार किया.
मैथ्यू ने जब ये बात अपने दोस्त को बताई, तो उस दोस्त ने मैथ्यू को समझाया कि उसकी गर्लफ्रैंड जो कर रही है, वो प्यार नहीं, ज़बरदस्ती है.
मैथ्यू के बलात्कार पीड़ित होने से इनकार करते रहने की बड़ी वजह, सामाजिक सोच रही. वो सोच जो ये मानने से ही इनकार करती है कि मर्द भी बलात्कार के शिकार हो सकते हैं.


बलात्कार छिपाने की वजहें
महिलाओं के बलात्कार से इनकार करने की कई वजहें हो सकती हैं.
एक सर्वे के मुताबिक़-
-हमलावर, बलात्कारी की परिभाषा में फिट नहीं बैठता था.
-पीड़ितों को ख़ुद का बर्ताव भी बलात्कार पीड़ित जैसा नहीं लगा.
-ज़बरदस्ती के दौरान हिंसा न होने की वजह से भी रेप नहीं माना गया.
कई बार तो हालात को ही ज़िम्मेदार मान लिया जाता है. जैसे किसी इलाक़े में हिंसक संघर्ष होने पर, क़ुदरती आपदा होने पर, विस्थापित होने पर बलात्कार की शिकार होना सहज रूप से स्वीकार कर लिया जाता है.

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क्योंकि जब भी क़ानून-व्यवस्था नाकाम होती है, तो यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ जाती हैं.
अफ्रीका के कांगो गणराज्य में काम करने वाली रनित मिशोरी कहती हैं कि कांगो की महिलाओं ने बलात्कार को ही अपनी नियति मान लिया. उन्हें लगता था कि जब तक हिंसक हालात बने रहेंगे, वो रेप की शिकार होंगी ही.
कांगो में एक तजुर्बे में शामिल एक तिहाई मर्दों ने कहा कि महिलाएं ख़ुद के साथ बलात्कार होने देना चाहती हैं. वो इसका मज़ा लेती हैं.
बलात्कार को स्वीकार करने की भारी क़ीमत
जब भी कोई पीड़ित मानता है कि वो बलात्कार का शिकार हुआ है, तो उसे इसकी भारी क़ीमत चुकानी होती है.
समाज उसे अजीब नज़रों से देखता है.
अल्जीरिया, फिलीपींस, ताजिकिस्तान समेत कई देशों में तो बलात्कारी को सज़ा के तौर पर पीड़ित से शादी करने का क़ानून है.
भारत जैसे देश में जहां ऐसा क़ानून नहीं है, वहां पर भी बलात्कारी के पीड़ित से शादी करने को राज़ी होने पर बख़्श दिया जाता है.
यौन हिंसा से कई बार भरोसा भी टूटता है. अपने किसी साथी पर, पति पर या जानने वाले शख़्स पर.


किसी 'अपने' को बलात्कारी कहना
बहुत से पीड़ित इस भरोसे को बचाने के लिए भी बलात्कार से इनकार करते हैं. क्योंकि भरोसा टूटने का मतलब कई रिश्तों की बुनियाद हिल जाना होता है.
बहुत से लोगों के लिए अपने मौजूदा या पुराने साथी को बलात्कारी कहना तकलीफ़देह तजुर्बा होता है. वो अपने बच्चों के पिता या अभिभावक पर बलात्कारी होने का ठप्पा नहीं लगाना चाहते हैं.

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रेप क्राइसिस इंग्लैंड की केटी रसेल बलात्कार से इनकार करने की कई वजहें गिनाती हैं-
-वो अपने साथी को बलात्कारी नहीं करना चाहतीं क्योंकि वो उससे लगाव रखती हैं.
-वो ऐसे ही दूसरे मर्दों को बलात्कारी की नज़र से नहीं देखना चाहती थीं.
-बलात्कार एक डरावना शब्द है.
बलात्कार पीड़ित अक्सर बलात्कारी की तरफ़ से भी माफ़ी मांग लेते हैं.
ख़ास तौर से लड़कियां और महिलाएं इस बात के लिए बहुत कोशिश करती हैं. वो बलात्कार को कम कर के बताती हैं.
उसे सेक्स का ख़राब तजुर्बा कह कर टालने की कोशिश करती हैं.
वो ख़ुद को आरोपी ठहराकर बलात्कार कहने से बचती हैं. क्योंकि उन्हें डर होता है कि इससे उनके बारे में तमाम बातें होने लगेंगी.
आर्थिक मौक़े हाथ से निकल जाएंगे, परिवार का समर्थन नहीं मिलेगा. समाज उनसे किनारा कर लेगा, वग़ैरह, वग़ैरह...


बदनामी का डर
अमरीका की ईस्ट कैरोलिना यूनिवर्सिटी की हीदर लिटिलटन लंबे समय से यौन हिंसा की ऐसी घटनाओं पर रिसर्च कर रही हैं, जिसे लोगों ने बलात्कार नहीं कहा. हीदर के मुताबिक़ ज़्यादातर पीड़ितों ने बदनामी के डर से चुप्पी साधे रखी.

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उन्हें लगा कि अगर घटना की शिकायत करेंगी तो उन्हें और परेशानी झेलनी पड़ेगी.
अक्सर पीड़ितों के साथ देखा गया है कि वो शर्मिंदगी को छुपाकर बलात्कार से सदमें से उबरते रहे.
नशे में हुए बलात्कार के लिए भी पीड़ित ख़ुद को ज़िम्मेदार ठहराने लगते हैं.
लेकिन, बलात्कार पीड़ितों को हमारी सलाह ये है कि वो ये समझें कि ये उनकी ग़लती नहीं थी. दर्द और शर्मिंदगी में लोग कई बार ख़ुद पर आरोप मढ़ने लगते हैं.
मगर, याद रखें कि ये आप की ग़लती नहीं थी. ख़ुद को नीचा दिखाकर बलात्कार की शर्मिंदगी से छुटकारा पाने की कोशिश बेमानी है.
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