ग्राउंड रिपोर्ट: कठुआ रेप के बाद हिंदू-मुसलमान की खाई, और नज़र आई

बलात्कार पीड़िता के घर पर ताला
इमेज कैप्शन, बलात्कार पीड़िता का परिवार गांव छोड़कर जा चुका है
    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कठुआ (जम्मू) से

कठुआ के इस गांव का वो घर एकदम ख़ाली है. चूल्हा लीप दिया गया है, दरवाज़े पर लगे ताले पर लाल धागे वाली हरी ताबीज़ पड़ी है. शायद घर की हिफ़ाज़त की दुआओं के साथ.

लेकिन दुआएं उसकी हिफ़ाज़त न कर पाईं या शायद बददुआओं में असर ज़्यादा था.

पुलिस के मुताबिक़, आठ साल की उस बच्ची को, देवस्थान (पूजा स्थल) में क़ैद रखा गया. हफ़्ते भर उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ. यहां तक कि गला घोटकर मारे जाने से चंद मिनट पहले तक बलात्कार होता रहा और फिर लाश जंगल में फेंक दी गई.

10 जनवरी को उसके गायब होने से लेकर 17 जनवरी को उसका गला घोटने तक यानी हफ़्ते भर उसे नशे की दवाई खिलाई जाती रही. इस दौरान अभियुक्तों में से एक ने अपने एक रिश्तेदार को उत्तर प्रदेश से ये कहकर बुलाया कि 'आ जाओ अगर मज़े लेने हों तो'. जज के सामने पेश चार्जशीट में ये जानकारियां मौजूद हैं.

क्राइम ब्रांच पर भरोसा नहीं?

लेकिन बात यहां नहीं रुकी है. एक नाबालिग़ के बलात्कार के मामले में भी 'हिंदू-मुसलमान' घुस गया है.

हिंदू महिलाओं का एक समूह पास के बाज़ार में 13 दिनों से उपवास कर रहा है. उनकी मांग है कि इस जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा जाए.

गांव में अनशन पर बैठी महिलाएं
इमेज कैप्शन, गांव की कुछ हिंदू महिलाएं पुलिस की बजाय सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग कर रही हैं

पीपल के घने पेड़ के नीचे उपवास कर रही महिलाओं के पास बैठे एक पूर्व सरपंच ने कहा कि उन लोगों को क्राइम ब्रांच की जांच पर भरोसा नहीं है.

इसकी वजह वो नवेद पीरज़ादा और इफ्तिख़ार वानी को जांच दल में शामिल किए जाने को बताते हैं.

नवेद पीरज़ादा जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच में उप-पुलिस अधीक्षक हैं. लेकिन ये पूरी जांच सीनियर पुलिस अधीक्षक रमेश जल्ला की देख-रेख में हो रही है.

जब मैंने उन्हें बताया कि जांच दल के प्रमुख तो कश्मीरी पंडित हैं तो उपवास कर रही एक महिला मधु ग़ुस्से में कहती हैं, "उनको (रमेश जल्ला) कुछ नहीं बताया जाता है. बल्कि जब सारे फ़ैसले ले लिए जाते हैं तब बात उन तक पहुंचती है."

अभियुक्त को बचाने के लिए तिरंगे का इस्तेमाल

जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रमुख एसपी वैद्य ने कहा है, "जब सूबे की पुलिस आतंकवादियों से निपट सकती है तो इस केस की जांच क्यों नहीं कर सकती है."

उधर, कश्मीर के एक युवक ने हमसे पूछा कि जब यही पुलिस कश्मीरी चरमपंथियों से निपटती है तो बाक़ी लोगों को लगता है कि सब ठीक है, लेकिन जम्मू के क्षेत्र में हुए एक बलात्कार के मामले में पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं.

मुख्य अभियुक्त सांजी राम के चाचा बिशनदास शर्मा हालांकि कहते हैं कि उनके भतीजे और दूसरे लोगों को 'बकरवालों के नेता तालिब हुसैन के कहने पर फंसाया गया.'

बिशनदास शर्मा
इमेज कैप्शन, मुख्य अभियुक्त सांजी राम के चाचा बिशनदास शर्मा

तालिब हुसैन से दुश्मनी की वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि वो उसकी मूल वजह नहीं बता सकते 'क्योंकि तब वो फ़ौज की नौकरी में बाहर थे.'

हिंदू बहुल इस क्षेत्र में इस मामले के बाद हिंदू एकता मंच नाम का पुराना संगठन फिर से सक्रिय हो उठा है और उसके बैनर तले कई विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं जिनमें से एक में कुछ लोगों के हाथों में तिरंगा भी था.

इसे लेकर मीडिया के एक हिस्से में सवाल भी उठे कि बलात्कार के अभियुक्तों के बचाव में हो रहे इस कार्यक्रम में भारत का झंडा कैसे इस्तेमाल किया गया.

सोशल मीडिया में कुछ जगहों पर कठुआ रेप और दादरी के अख़लाक़ बीफ़ मामले को एक जैसा बताया जा रहा था. क्योंकि अख़लाक की हत्या के अभियुक्त की मौत के बाद उसे नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्री के सामने तिरंगे में लपेटा गया था.

क्या ये मामला ज़मीन से भी जुड़ा है?

इधर, पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक़ मुख्य अभियुक्त सांजी राम, बकरवाल समुदाय के इस इलाक़े में बसने के विरोध में थे और पीड़िता के परिवार को ज़मीन बेचे जाने के खिलाफ़ एक मामला हाईकोर्ट तक गया था.

रसाना गांव में हाल में तीन बकरवाल परिवारों ने आकर घर बना लिया है. पास के दूसरे गांवों और ज़िलों में भी बकरवाल और गुज्जर बसने लगे हैं - मवेशियों को चराकर गुज़र-बसर करनेवाले ये लोग मुसलमान हैं जबकि ऐसा ही एक और समुदाय गद्दी हिंदू धर्म से ताल्लुक रखता है.

बच्ची के शव को यहां से बरामद किया गया
इमेज कैप्शन, बलात्कार और हत्या के बाद बच्ची का शव इसी जगह बरामद हुआ था

बिशनदास शर्मा कहते हैं, हम लोग बकरवालों और गुज्जरों को कभी चराई के लिए ज़मीन नहीं देते थे. हां गद्दियों को दे देते थे.

पीड़िता के गांव और कठुआ में हमें ये बताया गया कि जिस दिन पीड़िता का चौथा हुआ, उस दिन गांव में सैकड़ों मुसलमान पहुंच गए और पाकिस्तान ज़िंदाबाद और भारत मुर्दाबाद के नारे लगाए.

अभी तक बकरवालों और गुज्जरों का, जिन्हें सूबे में अनुसूचित जनजाति में माना जाता है, कश्मीर मामले में अलगाववादियों का साथ देने का मामला सामने नहीं आया है.

वीडियो कैप्शन, कठुआ गैंगरेप केस: आख़िर क्या कहते हैं गांव के लोग?

'जहां दुश्मन नहीं वहां पैदा कर रहे हैं'

वामपंथी विचारधारा से जुड़े एक सज्जन कहते हैं कि ये वैसा मामला है जहां कोई दुश्मन न हो तो वहां पैदा करो.

जम्मू में कानून की पढ़ाई कर रहे कठुआ निवासी धीरज बिस्मिल कहते हैं कि जम्मू और कश्मीर घाटी के बीच की खाई जो हमेशा से मौजूद रही है वो इस केस के बाद और भी बड़ी हो गई है.

धीरज बिस्मिल पहले की राजनीतिक खाई को अब सामाजिक मुद्दों में भी देखते हैं.

लेकिन उनके मुताबिक़ ये खाई और हिंदू-मुस्लिम के बीच का भेद 2008 अमरनाथ हंगामे के समय से शुरू हुआ है.

उनका कहना है आने वाले दिनों में ये दूरियां और बढ़नेवाली हैं. 'लेकिन साथ ही बढ़ी है इस क्षेत्र में बीजेपी की सीटें जो अब जम्मू-कश्मीर की सत्ता में हिस्सेदार है.'

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)