क्या दूसरों की सेक्स लाइफ़ आपसे बेहतर है?

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    • Author, बॉबी डफ़ी
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

तमाम रिसर्च से पता चला है कि हम अक्सर ये सोचते हैं कि युवा ज़्यादा सेक्स करते हैं. हमारी ये सोच हक़ीक़त से परे है.

यही हाल महिलाओं की सेक्स लाइफ़ को लेकर मर्दों की सोच का है.

फ्रेंच ग्लोबल मार्केटिंग रिसर्च कंपनी इप्सो काफ़ी लंबे समय से ऐसी ही ग़लतफ़हमियों पर रिसर्च कर रही है. अब इस रिसर्च के नतीजे जल्द ही एक किताब की शक्ल में सामने आने वाले हैं.

किताब का नाम है, 'द पेरिल्स ऑफ़ परसेप्शन.' इसी रिसर्च के तहत जब ब्रिटेन और अमरीका के लोगों से एक सवाल किया गया. उनसे ये पूछा गया कि उन्हें क्या लगता है कि उनके देश में 18-29 साल की उम्र के लोगों ने पिछले चार हफ़्तों में कितनी बार सेक्स किया होगा?

इस सवाल के जवाब में लोगों के औसत अनुमान ये थे कि दोनों ही देशों में इस उम्र के लोगों ने एक महीने में 14 बार सेक्स किया होगा. लेकिन हक़ीक़त ये है कि ब्रिटेन में 18-29 साल के युवाओं ने एक महीने में केवल पांच बार और अमरीकी युवाओं ने महीने में चार बार सेक्स किया था. ये बात यौन बर्ताव पर हुए एक व्यापक सर्वे से सामने आई है.

ब्रिटेन और अमरीका के लोगों के अनुमान का मतलब ये था कि उनके देश के युवा हर दूसरे दिन यौन संबंध बना रहे थे. यानी वो साल में 180 बार सेक्स कर रहे थे जबकि सच्चाई ये है कि ब्रिटेन और अमरीका के युवा साल में औसतन 50 बार ही सेक्स करते हैं.

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इमेज कैप्शन, टिंडर जैसे डेटिंग एप्स आने के बाद शायद लोग सोचने लगे की दूसरों की सेक्स लाइफ़ ज़्यादा अच्छी है

युवतियों के सेक्स को लेकर भी ग़लतफ़हमी

हमारे अंदाज़ा लगाने की ये ग़लती बड़ी है. मगर, ये ग़लतफ़हमी की सबसे बड़ी मिसाल नहीं है.

ब्रिटेन और अमरीका के मर्द अपने देश की युवतियों की सेक्स लाइफ़ को लेकर और भी ग़लतफ़हमियां पाले हुए हैं.

ब्रिटेन के मर्द सोचते हैं कि उनके देश की युवतियों की सेक्स लाइफ़ बेहद शानदार है. वो महीने में औसतन 22 बार यौन संबंध बनाती हैं.

वहीं अमरीकी पुरुष सोचते हैं कि उनके देश की युवतियां महीने में 23 बार सेक्स करती हैं. इस अंदाज़े का मतलब ये हुआ कि औसत अमरीकी या ब्रिटिश युवती हफ़्ते में हर कामकाजी दिन सेक्स करती है.

इसके अलावा वो महीने में दो या तीन बार किसी ख़ास मौक़े पर भी सेक्स करती है. सच तो ये है कि औसत अमरीकी या ब्रिटिश युवतियां महीने में पांच बार ही सेक्स करती हैं.

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इमेज कैप्शन, अमरीकी पुरुष सोचते हैं कि उनके देश की युवतियां महीने में 23 बार सेक्स करती हैं

तो, ग़लतफ़हमियों की इतनी भरमार की वजह क्या है? इसकी वजह हमारे ख़यालात भी हैं और जो हमें बताया जाता है, वो भी है.

इंसान की नस्ल की बुनियाद सेक्स है. हमारा अस्तित्व सेक्स पर ही टिका हुआ है. लेकिन सेक्स को लेकर दुनियाभर के लोग तमाम ग़लतफ़हमियां पाले हुए हैं. हम इंसान के दूसरे सामाजिक बर्ताव को देखकर उसका ठीक-ठाक अंदाज़ा लगा सकते हैं पर सेक्स के साथ दिक़्क़त ये है कि आमतौर पर लोग ये काम पर्दे में करते हैं.

तो जब हमारे पास सेक्स से जुड़ा हुई असल जानकारी नहीं होती तो हम 'आधिकारिक सूत्रों' के सहारे हो जाते हैं और सेक्स को लेकर ये 'आधिकारिक सूत्र होते हैं, खेल के मैदान या लॉकर रूम में होने वाली गप-शप, तमाम अधकचरे सर्वे, मीडिया में रस लेकर छापी जाने वाली ख़बरें और पोर्न.'

इन सभी 'आधिकारिक सूत्रों' से सेक्स के बारे में मिली अधकचरी जानकारी को हम हक़ीक़त मान बैठते हैं.

54 साल की उम्र तक 17 सेक्स पार्टनर

इसी सर्वे के तहत हमने तीन देशों के लोगों से ये अंदाज़ा लगाने को कहा कि उनके देश के लोग 45-54 साल की उम्र के दौरान कितने सेक्स पार्टनर बनाते होंगे. इस मामले में लोगों के अंदाज़े काफ़ी सटीक निकले.

ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन में 45-54 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते पुरुष 17 सेक्स पार्टनर बना लेते हैं. अमरीका में ये आंकड़ा 19 है. इस बारे में जो अंदाज़े लगाए गए, वो सटीक थे.

बात मज़ेदार तब हो जाती है, जब लोग पुरुषों और महिलाओं में तुलना करते हैं. महिलाओं ने सर्वे में यौन साथी का जो आंकड़ा बताया वो मर्दों के मुक़ाबले बहुत कम था. महिलाओं के दावे के मुताबिक़, वो मर्दों के मुक़ाबले आधे ही सेक्स पार्टनर बनाती हैं. ऊंचे दर्जे के सेक्स सर्वे में भी ये दुविधा सामने आती रही है लेकिन ये बात सच होना नामुमकिन है.

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इमेज कैप्शन, औसत अमरीकी मर्द के 12 सेक्स पार्टनर बनते हैं

अब चूंकि औरत और मर्द, दोनों ही सेक्स पार्टनर बनाते हैं और दोनों की आबादी कमोबेश एक बराबर है, तो ये कैसे हो सकता है कि मर्द ज़्यादा सेक्स पार्टनर बनाते हैं और महिलाएं कम. ये संख्या तो बराबर के आस-पास होनी चाहिए. आख़िर मर्द, औरतों को ही तो सेक्स पार्टनर बनाते हैं.

इस फ़र्क़ की कई वजहें बताई जाती हैं. एक तो पुरुषों का सेक्स के लिए कॉलगर्ल के पास जाना है. वहीं, कई ऐसे यौन बर्ताव भी होते हैं, जिन्हें औरतें सेक्स नहीं मानतीं, मगर पुरुष मानते हैं.

इसकी एक वजह ये भी मानी जाती है कि पुरुष अपने आप को मैचो बताने के लिए सेक्स पार्टनर की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर भी बताते हैं.

अमरीका में तो सेक्स को लेकर औरतों और मर्दों के अनुमान में एक और ट्विस्ट है. औसत अमरीकी मर्द ये मानते हैं कि अमरीकी युवतियों के औसतन 27 सेक्स पार्टनर होते हैं. वहीं अमरीकी औरतें, अपने देश के मर्दों के बारे में ये सोचती हैं कि उनके 13 सेक्स पार्टनर हो जाते हैं. महिलाओं के अंदाज़े सच के क़रीब हैं.

औसत अमरीकी मर्द के 12 सेक्स पार्टनर बनते हैं. औसत अमरीकी मर्द की इस बेतुकी सोच की वजह उनके बीच के कुछ ऐसे पुरुष हैं, जो ये सोचते हैं कि अमरीकी महिलाओं के बहुत सारे यौन साथी होते हैं. 1000 लोगों के हमारे सैंपल में 20 अमरीकी पुरुष ऐसे थे, जो ये सोचते थे कि उनके देश की महिलाओं के औसतन 50 सेक्स पार्टनर होते हैं.

हमारी ये ग़लतफ़हमियां बताती हैं कि हम दुनिया को किस नज़र से देखते हैं. ये हमारे पूर्वाग्रहों की पोल खोलते हैं. तमाम सर्वे बताते हैं कि युवाओं और महिलाओं की सेक्स लाइफ़ को लेकर लोगों ने कितनी ख़ामख़याली पाली हुई है. हालांकि, ये सोच रखने वाले मर्दों का तबका बहुत छोटा-सा है, मगर ये बाक़ियों की सोच पर भी असर डालता है.

ग़लतफ़हमियां दूर करने का एक ही तरीक़ा है. लोगों को ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी दी जाए, ताकि वो अपने ख़यालात सुधार सकें. ताकि, वो ग़लत सोच की वजह समझ सकें.

ख़ुशफ़हमी या ग़लतफ़हमी पालने वाले लोगों को ये पता चल सके कि उन्हें जो बताया जाता है. फिर उसके आधार पर वो जो सोचते हैं, वो कितना ग़लत हो सकता है.

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