|
इस बार वो बात नहीं रही | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चेतावनी.. यह आलेख उन लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है जो विश्वास करते हैं कि आईपीएल भारत का महानतम खेल आयोजन है. मैं कोई चीयरलीडर नहीं हूं और न होना चाहता हूं. साथ ही, मैं खेल का आनंद बिगाड़ने वाला भी नहीं हूं. ना ही मुझे उन लोगों से आपत्ति है जो अपनी शाम मनोरंजन के उन क्षणों में बिताते हैं जिसमें फ़िल्म स्टारों का वास्तविक भाव दिखाई देता है और जो उनके क़द को और बढ़ा देता है. ये देख कर किसी किसी भी प्रशंसक की उत्कंठा चरम पर पहुंच जाती होगी. मुझे उन लोगों से भी कोई आपत्ति नहीं जो क्रिकेट के इस संस्करण में छक्कों और चौकों की बरसात को ज़्यादा आनंददायक मानते हैं बज़ाए इसके कि एक रन के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़े. ये कोई भोगवादियों और रुढिवादियों के बीच लड़ाई नहीं है, न ही कॉरपोरेट लालच और उस प्रचारकर्ता की काल्पनिक क्षमता की आलोचना जो ज़हर को भी उम्र बढ़ाने वाला बताकर बेच सकता है. वो बात नहीं रहीं मैं भी इस आस में हूं कि शाम अच्छी बीते, ख़ास कर पिछले साल के आयोजन ने जिस तरह पाचक का काम किया और मुझे भूखा जानवर बना गया.
आह, मैं अभी भी भूखा हूं क्योंकि अब तक जो परोसा गया है वो मज़ेदार नहीं है और लगता है कि मेरे विचार से कई और सहमत होंगे. इसके कई कारण हो सकते हैं. सबसे पहला, इस बार आईपीएल से वो जुड़ाव नज़र नहीं आता. इंडियन प्रीमियर लीग विदेशी ज़मीन पर देखना कुछ हजम नहीं हो रहा. स्टेडियम आधे खाली हैं, या लगभग खाली हैं, दर्शकों को मैदान पर जो हो रहा है, उससे ख़ास मतलब नहीं. चीयरलीडर वो धमाका नहीं कर पा रहे हैं, जैसा भारत में किया था. शाहरुख़ ख़ान के संकेतों का जवाब देने के लिए हज़ारों लोगं में होड़ नहीं मच रही. शिल्पा शेट्टी महज एक दर्शक से टीम मालकिन होने का संदेश नहीं पा रही हैं, उन्हें प्रीति ज़िंटा से सीखना चाहिए. और बारिश... इसने न केवल मजा किरकिरा किया बल्कि छक्कों से ज़्यादा लगातार विकेट गिरना देखने को मज़बूर किया. अधिकतर मुक़ाबले एकतरफ़ा साबित हो रहे हैं. भारतीय स्टेडियम से उठने वाली गूंज जिसकी आवाज़ से पसंदीदा टीम के लिए हम भी अपने ड्रॉइंग रुम में चिल्ला उठते थे नदारद है. अगर शुक्रवार को राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच साँसे थाम देने वाला रोमांचक मुक़ाबला नहीं होता तो शायद चुनाव बुलेटिन से मैच दिखाने वाले चैनल पर जाना मुश्किल हो जाता. घूमती गेंदों के बादशाह और कल्पनाओं के बाज़ीगर शेन वॉर्न ने अपने नेतृत्व क्षमता का परिचय नहीं दिया होता तो शायद पहले हफ़्ते में ही आईपीएल का रोमांच ख़त्म हो जाता. (लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं) |
इससे जुड़ी ख़बरें पूरे भारत ने टीम का समर्थन किया: सचिन09 अप्रैल, 2009 | खेल की दुनिया विज़डन टेस्ट इलेवन के कप्तान बने धोनी 08 अप्रैल, 2009 | खेल की दुनिया भारत ने न्यूज़ीलैंड से सिरीज़ जीती 07 अप्रैल, 2009 | खेल की दुनिया 'बेहतरीन टीम भावना ने जीत दिलवाई'07 अप्रैल, 2009 | खेल की दुनिया द्रविड़ ने बनाया नया विश्व रिकॉर्ड06 अप्रैल, 2009 | खेल की दुनिया गावस्कर पर बरसे शाहरुख़ ख़ान05 अप्रैल, 2009 | खेल की दुनिया आईपीएल और आईसीएल के बीच सुलह?03 अप्रैल, 2009 | खेल की दुनिया अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम की जद्दोजहद02 अप्रैल, 2009 | खेल की दुनिया इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||