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मुकुट में हीरा जड़ना बाक़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अब समय आ गया है जब हम ये मानना और विश्वास करना शुरू कर रहे हैं कि भारतीय टीम न सिर्फ़ दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है बल्कि नंबर वन टीम बनने की मज़बूत दावेदार भी है. इस टीम के पास ऐसा प्रभामंडल है, जिसकी चमक वही टीम बिखेर सकती है जो मैदान पर अजेय रहने का दम दिखाना चाहती है. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी में एक शांत किंतु आक्रामक कप्तान छिपा है लेकिन कई मामले में वे काफ़ी निष्ठुर भी हैं. जीतने की ख़्वाहिश में वे हारने के डर को छिपा नहीं पाते. और यही नज़ारा न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वेलिंगटन के आख़िरी टेस्ट में देखने को मिला, जो आख़िरकार ड्रॉ समाप्त हुआ. धोनी का दम आप और हम इस मामले पर कुछ भी कहें, लेकिन धोनी को इसका ग़म नहीं. यह एक ऐसा गुण है जो उन लोगों में देखा जाता है, जो अपने किए पर भरोसा करते हैं और उसकी ज़िम्मेदारी भी लेते हैं.
धोनी ऐसी टीम की ज़िम्मेदारी संभालते हैं, जिसकी बैटिंग लाइन-अप किसी भी विपक्षी टीम को डरा सकती है. भारत के पास ऐसी सलामी जोड़ी है, जो न सिर्फ़ दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है, बल्कि क्रिकेट के इतिहास की भी बेहतरीन सलामी जोड़ी है. मध्य क्रम के बल्लेबाज़ भले ही उम्रदराज़ हैं लेकिन रन बनाने की उनकी योग्यता अभी भी क़ायम है. और अब यह पूरे भरोसे से कहा जा सकता है कि सचिन तेंदुलकर एक संपूर्ण बल्लेबाज़ हैं और ऐसा संपूर्ण बल्लेबाज़ शायद दुनिया ने पहले नहीं देखा है. ज़हीर ख़ान ने अपने को हमारे समय के सबसे चतुर गेंदबाज़ के रूप में बदल लिया है. भारत के पास अब ऐसा गेंदबाज़ी आक्रमण है जो किसी भी विपरीत परिस्थितियों का भी फ़ायदा उठा सकता है. संतुलित टीम संक्षेप में कहें तो क्रिकेट के इतिहास में भारत की ये सबसे संतुलित टीम है. नतीजा ये साबित करता है और टीम का रुख़ भी इसकी कहानी कहता है. लेकिन इन सबके बावजूद टेस्ट रैंकिंग की पहली टीम और अन्य टीमों का अंतर काफ़ी है. और इसी में भारतीय टीम की परीक्षा होनी है. न्यूज़ीलैंड एक मोर्चा था, जिसे हमने इससे पहले एक बार ही फ़तह किया था. लेकिन ऐसा सिर्फ़ क्रिकेट से संबंधित कारणों से नहीं हुआ था. इसका संबंध वहाँ के मौसम से भी था और ये भी वजह थी कि हमने वहाँ काफ़ी कम क्रिकेट खेली थी. न्यूज़ीलैंड की टीम हमेशा से एक साहसी टीम रही है. लेकिन जब भारत ने वर्ष 1967 में उसे मात दी थी, उस समय भारतीय टीम वहाँ का दौरा करने वाली सबसे ख़राब टीमों में से थी. तलाश इसलिए भारत की विदेशी ज़मीन पर पहली जीत हमेशा से ही विशेष और ऐतिहासिक थी. भारत की न्यूज़ीलैंड में ताज़ा सिरीज़ जीत, उम्मीद के अनुरूप थी.
अगर आईसीसी रैंकिंग के मुताबिक़ चलें तो ये जीत एक ख़राब टीम के ख़िलाफ़ थी. आईसीसी रैंकिंग में तीसरे नंबर की टीम भारत ने आठवें नंबर की टीम न्यूज़ीलैंड को मात दी. आईसीसी रैंकिंग के मुताबिक़ सिर्फ़ बांग्लादेश और ज़िम्बाब्वे की टीमें न्यूज़ीलैंड से पीछे हैं. इसलिए न्यूज़ीलैंड पर भारत की जीत पर बहुत आश्चर्य नहीं हुआ और इसलिए हमें अपनी प्रतिक्रिया में थोड़ा संयम बरतना चाहिए. जो लोग असुरक्षित होते हैं, वही बार-बार आश्वासन और महानता का प्रमाणपत्र पाने की कोशिश करते हैं. ये भारतीय टीम इससे अलग है और उसे अब दक्षिण अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया में सिरीज़ जीतने की कोशिश करनी चाहिए. जब तक वे ऐसा नहीं करते, मुकुट से असली ज़ेवर ग़ायब ही रहेगा जिसकी भारत को तलाश है. (लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं) |
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