|
अब तक जारी है आईपीएल पर बहस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछला पूरा हफ़्ता दूसरे लोगों की बकबक या भाषण सुनने में बीता. इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) पर व्यक्तिगत स्तर पर होने वाली बहस के अलावा टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में बहस लगातार चल रही हैं. आईपीएल का आयोजन भारत से बाहर कराने से देश की छवि को नुक़सान पर युवा वर्ग आश्चर्यचकित है लेकिन अभी यह तय नहीं हो पाया है कि इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है. पैसे की माया इस बहस में ऐसे लोगों की संख्या अच्छी-ख़ासी है जो यह मानते हैं कि चुनाव किसी भी तरह के मनोरंजन से अधिक महत्वपूर्ण काम है. सरकार ने चुनाव को प्राथमिकता देकर अच्छा काम किया है क्योंकि मनोरंजन के इस 'सर्कस' में हर आदमी केवल पैसा कमाने में लगा हुआ है. वहीं कुछ लोगों को इस बात से दुख भी पहुँचा है कि आईपीएल का आयोजन देश के बाहर किया जा रहा है. यह अविश्वसनीय लेकिन सत्य है कि ग्लैमर से भरे इस नाटक में विज्ञापन की महत्वपूर्ण भूमिका है. यह युवाओं से लेकर बूढ़ों तक को भा रहा है. इसने लोगों के दिलों में जगह बना ली है भले ही लोग इसे पहली बार देख रहे हों. जब आप किसी से मिलते हैं तो आपको इस सवाल का सामना करना पड़ता है कि आख़िर यह बाहर क्यों चला गया. यह खेल का एक ऐसा व्यापार है जो सिर्फ़ पैसे गिनता है और राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद की बहुत कम परवाह करता है. मगर फिर भी इसने जिस तरह सामूहिक गर्व की भावना को बढ़ाया और उसी तरह यह शर्म की बात भी बन गया उसकी थाह पाना और समझाना काफ़ी कठिन काम है. निश्चित रूप से इसे किसी अख़बार के कॉलम तक में सीमित नहीं किया जा सकता है. उमंग की लहर लेकिन जब 15 साल का एक जवान और एक 60 साल का बूढ़ा एक ही तरह की उमंग में हों तो सिर्फ़ अपनी ज़रूरतों के लिए इस खेल की लोकप्रियता का फ़ायदा उठाने वालों की तरक़ीब पर आप आश्चर्यचकित हो सकते हैं.
यह बाज़ार की कैसी शक्ति है जहाँ कुछ लोगों का स्वाभिमान राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन सकता है. इस समय पूरा देश आईपीएल के पीछे पागल होता दिख रहा है और इसका हमारे लिए क्या महत्व है. पूरी दुनिया हम पर हंस रही है कि हम अपने इस प्रमुख आयोजन की रक्षा करने में सक्षम नहीं हैं. सभी लोग पैसे गिन रहे हैं, केवल शेयर धारक ही नहीं बल्कि हम और आप भी. फ़ायदे और नुक़सान के इस प्रसंग में एक लोकप्रिय खेल और ग्लैमर का सम्मिश्रण हो गया है. इससे एक नया रियेलिटी शो बना है जिसमें क्रिकेट भी ग़लती से जुड़ गया लगता है. सुबह मेरे दिमाग में जब आईपीएल से जुड़े गर्व और शर्म जैसे भ्रमित मुद्दे पर मंथन चल रहा था तो अचानक अच्छे गेंदबाज़ों और बल्लेबाज़ों को लेकर मेरे मन कुछ सवाल पैदा हुए. यहाँ भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच के तीसरे दिन के कुछ क्षणों की बात करते हैं. फिरकी गेंदबाज़ डेनियल विटोरी की गेंद पर एक ज़ोरदार छक्का मारने के बाद वीरेंद्र सहवाग ने उनकी अगली गेंद पर भी छक्का मारना चाहा लेकिन विटोरी ने फ़्लाइटेड गेंद फेंकी, जिसकी रफ़्तार कम थी और वो विकेट से थोड़ा बाहर की ओर भी थी. यह गेंद बैट के बीचो-बीच आकर दर्शकदीर्घा में पहुँचने के बजाए बैट का किनारा छूते हुए विकेट कीपर के हाथ में चली गई. इसके कुछ मिनट बाद जीतेन पटेल ने भी इस तरह गेंद की रफ़्तार पर रखते हुए गौतम गंभीर का विकटे चटका दिया. इसके बाद मैं अचानक फिर क्रिकेट का प्रशंसक बन गया. इन दोनों की ख़ूबसूरत स्पिन ने मुझे आईपीएल से जुड़े राष्ट्रीय गौरव और शर्म की बात को भूला दिया. हे प्रभु! इस तरह की दयादृष्टि के लिए तुम्हारा शुक्रिया. |
इससे जुड़ी ख़बरें आईपीएल का पहला मैच केपटाउन में27 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया नाइट राइडर्स में कई खिलाड़ी करेंगे कप्तानी25 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया आईपीएल बाहर जाने से सचिन निराश23 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया बीसीसीआई दक्षिण अफ़्रीका के संपर्क में22 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया आईपीएल भारत से बाहर आयोजित होगा22 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया चुनाव ज़रूरी है या आईपीएल20 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया 'आईपीएल की तारीख़ों पर फ़ैसला नहीं'16 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया आईपीएल के आयोजकों को लगा झटका13 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||