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आईपीएल और आईसीएल के बीच सुलह? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
क्रिकेट जगत में जैसे समुद्र मंथन हो रहा है. कुछ हफ़्ते पहले जो बात नामुमकिन लग रही थी अब वह यथार्थ होती नज़र आ रही है. इंडियन प्रिमियर लीग और इंडियन क्रिकेट लीग अब अपना झगड़ा सुलझाकर साथ-साथ चलने के लिए राज़ी होते दिख रहे हैं. इसका कारण विश्व में आई आर्थिक मंदी है या फिर कुछ और... ये तो कहना मुश्किल है लेकिन आईसीएल ने अपने खिलाड़ियों को अनुबंध से मुक्त करना शुरू कर दिया है. इसके साथ ही वे न्यूज़ीलैंड और पाकिस्तान जैसे देशों के आईसीएल से जुड़े खिलाड़ियों पर लगे प्रतिबंध को हटाए जाने की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं. ये कोशिश इतनी तेज़ है कि शेन बॉंड जैसे खिलाड़ी जून महीने में होने वाले ट्वेंटी-20 विश्व कप में भाग ले सकते हैं. पाकिस्तान को भी आईसीएल से जुड़े खिलाड़ियों की ज़रूरत महसूस हो रही है. आईसीस की बैठक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघ की अगली बैठक अप्रैल महीने के अंत में होने वाली है और यहीं पर भारत को अपना रवैया बदलने के लिए मजबूर किया जाएगा. अगर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अपनी बात पर अड़े रहने की ग़लती करता है तो बात मतदान तक पहुंच जाएगी और बीसीसीआई अपने आप को अकेला खड़ा पाएगी. बीसीसीआई के अधिकारी इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं. आईपीएल उनके लिए प्रतिष्ठा का सवाल था और जब चुनाव के कारण इसका आयोजन दक्षिण अफ़्रीका में करना पड़ रहा है तो क्रिकेट में उसकी रही सही साख भी जाती रहेगी.
अभी तक बीसीसीआई के पैसों का दबदबा था लेकिन ये भी ख़त्म हो रहा है. अब उसके पास आईसीएल से समझौता करने के अलावा कोई चारा नहीं है. टेलीविज़न कंपनी से हुए नए क़रार में आईपीएल टीमों की संख्या तीसरे साल नौ और पांचवें साल दस करने की बात से साफ़ है कि समझौता हो चुका है. आख़िर दुनिया भर के क्रिकेट खेलने वाले देश और खिलाड़ियों की संख्या सीमित है, फिर नए खिलाड़ी कहाँ से आएंगे? पाकिस्तान तो आईपीएल से अपने खिलाड़ियों के बाहर किए जाने से पहले ही नाराज़ है, अब आईसीएल का अनुबंध समाप्त होने से उसे बीसीसीआई को नीचा दिखाने का शानदार मौक़ा हाथ लग गया है. साथ ही अन्य देश भी भारत की इस कमज़ोरी का भरपूर फ़ायदा उठाते हुए अपनी बात मनवाना चाहते हैं. आईसीएल का फंदा बीसीसीआई के गले में फंस गया है और उसे इससे उबरने का कोई और रास्ता नज़र नहीं आ रहा है. बस, नतीजा ये है कि आईसीएल से जुड़े खिलाड़ियों पर लगा प्रतिबंध हटाए जाने का विरोध नहीं कर के भारत उसे चुपचाप मान्यता देने पर मजबूर हो चुका है. औपचारिकता मात्र अब सिर्फ़ आईसीसी की औपचारिक मुहर लगना बाक़ी है. वैसे भी आईसीसी ने कभी यह प्रतिबंध लगाया ही नहीं था. बाक़ी देश के क्रिकेट अधिकारियों ने बीसीसीआई की मांग पर ही आईसीएल से जुड़े खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों से बाहर कह दिया. बीसीसीआई के साथ सुलह के ज़रिए आईसीएल के आयोजकों को भी भारी नुक़सान से बचाया जा रहा है. आख़िर कोई कंपनी कब तक अरबों रूपए का घाटा सह सकती है. आईसीएल का आयोजन करके आईसीएल ग्रुप ने बीसीसीआई को नीचा दिखा दिया. अब हाथ मिला कर आईपीएल में भागीदारी बन जाएंगे. इससे सिर्फ़ टीमों की संख्या ही नहीं बढ़ेगी आईपीएल में नए खिलाड़ियों के साथ साथ और आय का भी ज़रिया बन जाएगा. आख़िर नई टीम मुफ़्त में तो खड़ी नहीं की जा सकती है. अभी तो सभी का ध्यान आईपीएल पर लगा है. लेकिन अप्रैल के अंत में जब आईसीसी की बैठक होगी तो यह सब बातें पूरी तरह से सामने आ जाएंगी कि कौन कितने पानी में है. फ़िलहाल संकेत यही हैं कि बीसीसीआई अपनी साख बचाने के लिए आईसीएल को नज़रअंदाज़ करने को तैयार है. बस सभी चुपचाप अपना काम करते रहेंगे जैसे आईसीएल कभी हुआ ही नहीं था. | इससे जुड़ी ख़बरें अब तक जारी है आईपीएल पर बहस28 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया आईपीएल के आयोजकों को लगा झटका13 मार्च, 2009 | खेल की दुनिया आईपीएल के दौरान डोपिंग की पुष्टि13 जुलाई, 2008 | खेल की दुनिया 'आईपीएल का फ़ाइनल कांटेदार रहा'01 जून, 2008 | खेल की दुनिया क्या आईपीएल का बुलबुला फट जाएगा?23 मई, 2008 | खेल की दुनिया सेमीफ़ाइनल में जगह बनाने का संघर्ष18 मई, 2008 | खेल की दुनिया खेलों की चटपटी गपशप फ़न ऐंड गेम्स 12 मई, 2008 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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