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टेनिस में कुछ भी असंभव नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानसिक और शारीरिक रूप से थका देने के बावजूद ये अत्यंत रोमांचक और आनंद देने वाला अनुभव था. टेनिस कोर्ट पर रफ़ाएल नडाल की ज़बरदस्त दौड़-भाग, जिन्हें कहानियों में भी वर्णन करना मुश्किल होता है तो दूसरी ओर उन्हें परेशान करने वाले एक और सुपरमैन, ये ऐसा अनुभव था जो जीवन में कभी-कभी ही होता है. भले ही टेनिस में कई कुशल खिलाड़ी रहे हों, कई ऐतिहासिक मुक़ाबले हुए हो और कई रोमांचक मैच हुए हों, लेकिन जिस गति, तीव्रता और ऊर्जा का प्रदर्शन नडाल और वेरडास्को के बीच मैच में हुआ, उसे कल्पना में भी फिर से तैयार करना असंभव है. मैच के अंत में यह बताना भी मुश्किल था कौन ज़्यादा थका- खिलाड़ी, दर्शक, कमेंटेटर या फिर पाँच घंटे से ज़्यादा समय तक अपने टीवी स्क्रीन से चिपके लोग. अनुभव ये ऐसा अनुभव रहा कि अब फ़ाइनल में नडाल और फ़ेडरर के बीच मुक़ाबले को लेकर कोई ऊर्जा नहीं बची. हालाँकि अब तक नडाल और फ़ेडरर का मुक़ाबला टेनिस में प्रतिद्वंद्विता को नया अर्थ देता था.
भारतीय भी इस पर ख़ुश हो सकते हैं कि उनके तीन खिलाड़ी ग्रैंड स्लैम फ़ाइनल तक पहुँचे. हालाँकि ये ज़रूर है कि ये प्रमुख मुक़ाबले नहीं हैं. भारतीय ये भी उम्मीद कर सकते हैं कि एक दिन सोमदेव देववर्मन सही मायन में चैम्पियन बनेंगे. लेकिन नडाल और वेरडास्को का मैच देखने और उनके असंभव से करतब देखने के बाद क्या वाक़ई हमारे खिलाड़ी ऐसा कर सकते हैं? 23 वर्षीय सोमदेव भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जो जवाबी झन्नाटेदार शॉट लगाते हैं. ये शब्द नडाल के लिए भी इस्तेमाल होता है, जिन्होंने सिर्फ़ 20 वर्ष की उम्र में दुनिया को ये जता दिया है कि टेनिस बॉल को छोड़िए वे चीते को भी पछाड़ सकते हैं. असंभव नहीं कल्पना कीजिए कि 25 वर्ष की उम्र में वेरडास्को भाग सकते हैं, दौड़ सकते हैं, पीछा कर सकते हैं, तेज़ी से मुड़ सकते हैं और बड़ी-बड़ी रैलियों के बावजूद उनमें ऊर्जा भी बची रहती है.
इतनी ऊर्जा कि वे धमाकेदार बैकहैंड और फ़ोरहैंड भी मार सकते हैं और अपनी चीख से ये भी बता सकते हैं कि उनमें जीत की प्यास कम नहीं हुई है. उन्होंने वो कर दिखाया जो दुनिया अभी तक असंभव समझती थी. वे एक दिन एक और नडाल या उनसे भी बेहतर बन सकते हैं. ये अपने दमख़म का प्रवाह दिखाने की अविश्वसनीय दुनिया है. ये एक चक्रवात है, जिसे दुनिया के अब तक के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी माने जाने वाले फ़ेडरर के बेहतरीन, शांत और आँखों को सुखद दिखने वाले स्ट्रोक भी चुनौती देने में कठिनाई महसूस करते हैं. रविवार को जब दोनों खिलाड़ी आमने-सामने होंगे, उस समय शक्ति और सुंदरता का मुक़ाबला होगा. नडाल इस समय सिर्फ़ 22 वर्ष के हैं. मुक़ाबला कुछ वर्ष पहले जब वे टेनिस परिदृश्य पर दिखे थे, उस समय सभी ने यही सोचा था कि इतनी ताक़त और ऊर्जा के बल पर वे ज़्यादा देर टेनिस कोर्ट पर नहीं टिक सकते.
उनका कोर्ट के एक सिरे से दूसरे सिरे तक दौड़ना, गेंद का पीछा करना और फिर असंभव से एंगिल से जीतने वाला शॉट लगाना सम्मोहित करने वाला होता है. दुनिया ने अविश्वास से इस खिलाड़ी की प्रशंसा तो की लेकिन साथ में यह भी सोचा कि ये एक अपवाद हो सकता है जिसकी शारीरिक क्षमता जल्द ही जवाब दे देगी. अभी तक ये तो हुआ नहीं. दुनिया का कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं है, जो नडाल के ख़तरनाक फ़ोरहैंड टॉपस्पिन, उनकी गति और उनके नियंत्रण के बोझ से दबा न हो. पूर्व टेनिस खिलाड़ी ब्रैड गिल्बर्ट कहते हैं कि नडाल के साथ रैली में खेलना- पीड़ा में भी एक शिक्षा है. क्या फ़ेडरर अपनी हवा की तरह हरकत और उत्कृष्ट कौशल से इस पीड़ा को सहन कर पाएँगे और विजेता बनेंगे- देखना होगा. |
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