कैसे होती है 'स्पॉट फ़िक्सिंग'?

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आईपीएल क्रिकेट में सट्टेबाज़ी की जांच करने वाली सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति ने चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स पर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया है.
इसके साथ ही चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के मालिक राज कुंद्रा पर भी आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है.
इस फ़ैसले को इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. इससे कई बड़े खिलाड़ियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है.
इस मामले में मई 2013 में तीन खिलाड़ियों और 11 सटोरियों को गिरफ़्तार किया गया था.
जिस स्पॉट फ़िक्सिंग को लेकर इतना तूफ़ान उठा, वो आख़िर है क्या और कैसे होती है, आइए जानते हैं-
क्या होती है 'स्पॉट फ़िक्सिंग'?

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किसी ख़ास मैच का परिणाम (हार-जीत-ड्रा) पहले से तय कर लिया जाए तो इसे 'मैच फ़िक्सिंग' कहते हैं.
इसी तरह मैच के दौरान किसी एक या एक से अधिक खिलाड़ियों का प्रदर्शन को पहले से तय कर लिया जाए तो इसे 'स्पॉट फ़िक्सिंग' कहते हैं.
स्पॉट फ़िक्सिंग में पूरे मैच का परिणाम तय करने के बजाय सट्टेबाज़ खेल के किसी एक ख़ास हिस्से के नतीजे को पहले से तय करते हैं.
यह एक बॉल भी हो सकती है जैसे कि कोई ख़ास गेंद 'नो बॉल' फेंकी जाएगी या 'वाइड'.
इसी तरह बाउंसर या यॉर्कर की भी स्पॉट फ़िक्सिंग की जा सकती है.
टॉस और बल्लेबाज़ी क्रम

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यह भी तय किया जा सकता है कि किसी ख़ास गेंद पर या ओवर में बल्लेबाज़ कितने रन बनाएगा या गेंदबाज़ कितने रन देगा.
स्पॉट फ़िक्सिंग इस पर भी केंद्रित हो सकती है कि कोई ख़ास बल्लेबाज़ एक गेंदबाज़ द्वारा उसे फेंकी गई गेंदों पर कितने रन बनाता है.
बल्लेबाज़ के निश्चित रन बनाने, बोल्ड, कैच या रन आउट होने को भी पहले से तय किया जा सकता है.
सिर्फ़ इतना ही नहीं स्पॉट फ़िक्सिंग मैच के टॉस, टॉस के बाद बल्लेबाज़ी या गेंदबाज़ी के चयन, बल्लेबाज़ी-गेंदबाज़ी के लिए खिलाड़ियों के क्रम और पिच की जानकारी जैसी चीज़ों पर भी की जाती है.
स्पॉट फ़िक्सिंग का तरीक़ा

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हर ओवर में कितने रन देने हैं, सटोरियों और खिलाड़ियों के बीच इस पर सहमति बनाई जाती थी. ये तय होता था कि उन्हें एक ओवर में कम से कम इतने रन देने हैं.
गेंदबाजों को संकेत देना होता था कि वो रन देने को तैयार हैं. ये संकेत थे: पैंट में तौलिया घुसाना, लॉकेट शर्ट से बाहर निकालना, शर्ट उतारना वग़ैरह.

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मामले की जांच करने वाली दिल्ली पुलिस का दावा है कि एक मैच में अजित चंडिला संकेत नहीं दे पाए जिसकी वजह से सटोरियों की योजना गड़बड़ाई और बाद में गेंदबाज़ से उनकी बहस हुई.
नौ मई 2013 को हुए मैच में श्रीसंत ने अपने स्पेल के दूसरे ओवर में 13 रन देना स्वीकार किया था.
सिग्नल था कि वो दूसरे ओवर के दौरान ट्राउज़र में छोटा तौलिया रखेंगे.
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